Skip to content

Class 11 Biology Chapter 18 Notes Hindi NCERT

अध्याय 18: शरीर द्रव तथा परिसंचरण (Body Fluids and Circulation) ​

Image of biology notes for professional
NCERT, Bihar Board, CBSE, State Board,SCERT, VVI Point, Extra

यह अध्याय मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक खंड है। हमारे शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका तक पोषक तत्व, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक पदार्थों को पहुँचाने तथा वहाँ से अपशिष्ट पदार्थों (, यूरिया आदि) को बाहर निकालने के लिए एक कुशल परिवहन तंत्र की आवश्यकता होती है। मानव में यह कार्य रक्त (Blood) और लसीका (Lymph) जैसे तरल माध्यमों द्वारा संपन्न होता है। NEET, CUET और सभी State Boards (BSEB, CBSE) के परीक्षाओं के लिए यह अध्याय अत्यधिक वैचारिक (Conceptual) और हाई-वेटेज वाला है।


🩸 1. रक्त और इसके घटक (Blood and Its Components) ​

रक्त एक विशेष तरल संयोजी ऊतक (Fluid Connective Tissue) है। इसके मुख्य रूप से दो भाग होते हैं: प्लाज्मा (Plasma) और संगठित पदार्थ (Formed Elements)।

【भाग A】 प्लाज्मा (Plasma) ​

यह रक्त का हल्के पीले रंग का, गाढ़ा (Viscous) तरल भाग है, जो कुल रक्त का लगभग बनाता है।

  • संगठन: प्लाज्मा में जल होता है और प्रोटीन होते हैं।
  • प्रमुख प्लाज्मा प्रोटीन (NCERT Specific Functions) — ⭐ Very Important:
    1. फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen): यह यकृत द्वारा बनता है और रक्त का थक्का जमने (Clotting) में अनिवार्य भूमिका निभाता है।
    2. ग्लोबुलिन (Globulins): यह मुख्य रूप से शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र / रक्षा तंत्र (Defense Mechanism) में एंटीबॉडी के रूप में कार्य करता है।
    3. एल्बूमिन (Albumin): यह रक्त का परासरणी संतुलन (Osmotic Balance) और जल का नियमन बनाए रखता है।
  • 🚨 सीरम (Serum): यदि प्लाज्मा में से थक्का जमाने वाले कारकों (Clotting Factors) को बाहर निकाल दिया जाए, तो बचे हुए शेष तरल को सीरम कहते हैं। ()।

【भाग B】 संगठित पदार्थ (Formed Elements) ​

यह कुल रक्त का लगभग भाग बनाते हैं। इसमें तीन प्रकार की कोशिकाएँ शामिल हैं:

रक्त कोशिकाएँ (Formed Elements)
│
├── 1. एरिथ्रोसाइट (RBC)
│      └── ऑक्सीजन का परिवहन
│
├── 2. ल्यूकोसाइट (WBC)
│      └── प्रतिरक्षा / सैनिक
│
└── 3. थ्रोम्बोसाइट (Platelets)
       └── रक्त स्कंदन / थक्का

① एरिथ्रोसाइट / लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs): ​

  • संख्या: ये रक्त में सबसे प्रचुर (5 से 5.5 मिलियन प्रति घन मिमी) होती हैं। इनका निर्माण वयस्कों में लाल अस्थि मज्जा (Red Bone Marrow) में होता है।
  • विशेषता: परिपक्व होने पर मानव की RBC में केंद्रक (Nucleus) अनुपस्थित होता है (ताकि अधिक हीमोग्लोबिन समा सके) और इनका आकार उभयावतल (Biconcave) होता है।
  • हीमोग्लोबिन: प्रत्येक रक्त में लगभग 12 - 16 ग्राम लोहे-युक्त श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन पाया जाता है। इनका जीवन काल 120 दिन होता है, जिसके बाद ये प्लीहा (Spleen — जिसे 'RBC का कब्रिस्तान / Graveyard' कहते हैं) में नष्ट हो जाती हैं।

② ल्यूकोसाइट / श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs): ​

ये केंद्रक-युक्त होती हैं और इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम (6000-8000 प्रति घन मिमी) होती है। ये शरीर के सैनिक हैं जो रोगों से लड़ते हैं। इन्हें दो मुख्य समूहों में बाँटा गया है:

licensedMedia:fetch_images(query: "white blood cells types granulocytes agranulocytes neutrophils lymphocytes monocytes eosinophils basophils biology")
  • A. कणिकामय (Granulocytes):
    • न्यूट्रोफिल (Neutrophils — 60-65%): ये रक्त में सबसे अधिक पाई जाने वाली WBC हैं। ये भक्षक कोशिकाएँ (Phagocytic cells) हैं जो बाहरी जीवाणुओं को खाकर नष्ट करती हैं।
    • इओसिनोफिल (Eosinophils — 2-3%): ये एलर्जी (Allergy) और परजीवी संक्रमणों के समय रक्षा करती हैं।
    • बेसोफिल (Basophils — 0.5-1%): ये सबसे कम पाई जाती हैं। ये हिस्टामीन, सेरोटोनिन और हिपैरिन (रक्त रोधक) स्रावित करती हैं और शोथकारी (Inflammatory) अनुक्रियाओं में भाग लेती हैं।
  • B. अकणिकामय (Agranulocytes):
    • मोनोसाइट (Monocytes — 6-8%): ये आकार में सबसे बड़ी WBC हैं। ये भी न्यूट्रोफिल की तरह भक्षक (Phagocytic) प्रकृति की होती हैं।
    • लसीकाणु (Lymphocytes — 20-25%): ये दो प्रकार की होती हैं—B-कोशिकाएँ और T-कोशिकाएँ। ये दोनों मिलकर शरीर की विशिष्ट प्रतिरक्षा (एंटीबॉडी निर्माण व कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा) के लिए जिम्मेदार हैं।

③ थ्रोम्बोसाइट / प्लेटलेट्स (Platelets): ​

ये अस्थि मज्जा की विशेष कोशिकाओं (मेगाकेरियोसाइट / Megakaryocytes) के टुकड़ों से बनती हैं। इनकी संख्या 1.5 से 3.5 lakh प्रति घन मिमी होती है। ये रक्त का थक्का (Clot) जमाने वाले रसायनों को मुक्त करती हैं। इनकी कमी होने पर (जैसे डेंगू बुखार में) शरीर से आंतरिक रक्तस्राव होने लगता है।


🩸 2. रक्त समूह (Blood Groups) — ABO और Rh सिस्टम ​

मानव रक्त की सतह पर उपस्थित प्रतिजनों (Antigens) के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रकार के रक्त समूहों का वर्गीकरण सबसे महत्वपूर्ण है:

① ABO रक्त समूह (ABO Grouping) — कार्ल लैंडस्टीनर ​

RBC की सतह पर उपस्थित एंटीजन (A और B) तथा प्लाज्मा में उपस्थित एंटीबॉडी (anti-A और anti-B) के आधार पर चार रक्त समूह होते हैं:

रक्त समूह (Blood Group)RBC पर एंटीजनप्लाज्मा में एंटीबॉडीकिसे रक्त दे सकता हैकिससे रक्त ले सकता है
AAanti-BA, ABA, O
BBanti-AB, ABB, O
ABA और B दोनोंअनुपस्थितABसारे समूह (A, B, AB, O)
Oअनुपस्थितanti-A और anti-Bसारे समूहकेवल O
  • 🚨 सर्वदाता (Universal Donor): रक्त समूह O (वास्तव में O ऋणात्मक / O-ve) को सर्वदाता कहा जाता है क्योंकि इसकी RBC पर कोई एंटीजन नहीं होता, जिससे यह किसी भी व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है।
  • 🚨 सर्वग्राही (Universal Recipient): रक्त समूह AB (वास्तव में AB धनात्मक / AB+ve) को सर्वग्राही कहा जाता है क्योंकि इसके प्लाज्मा में कोई एंटीबॉडी नहीं होती, अतः यह किसी भी समूह का रक्त ले सकता है।

② Rh समूह और गर्भ रक्ताणुकोरकता (Erythroblastosis Fetalis) — ⭐ Very Important ​

लगभग मनुष्यों की RBC पर रीसस (Rhesus) बंदर के समान एक और एंटीजन पाया जाता है, जिसे Rh एंटीजन कहते हैं। जिनके पास यह है वे Rh+ve और जिनके पास नहीं है वे Rh-ve कहलाते हैं।

  • गर्भ रक्ताणुकोरकता (Erythroblastosis Fetalis): यह एक जानलेवा स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ve माता के गर्भ में Rh+ve भ्रूण (शिशु) पल रहा हो।
    • प्रथम प्रसव के समय: प्रसव के दौरान शिशु का कुछ Rh+ve रक्त माँ के रक्त से मिल जाता है, जिससे माँ का शरीर Rh-एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है। पहली संतान सुरक्षित पैदा हो जाती है।
    • द्वितीय सगर्भता के समय: यदि अगली संतान भी Rh+ve हो, तो माँ के रक्त से ये Rh-एंटीबॉडीज अपरा (Placenta) को पार करके भ्रूण के भीतर पहुँच जाती हैं और शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को नष्ट करने लगती हैं।
    • परिणाम: भ्रूण में तीव्र अरक्तता (Anemia) और पीलिया (Jaundice) हो जाता है, जिससे शिशु की मौत भी हो सकती है।
    • 🚨 बचाव का उपाय: प्रथम प्रसव के तुरंत बाद माँ को एंटी-Rh एंटीबॉडी (रोघम इंजेक्शन / Rhogam Injection) दिया जाता है, जो माँ के भीतर बनी एंटीबॉडीज को नष्ट कर देता है और अगली संतान सुरक्षित रहती है।

🧫 3. रक्त स्कंदन: थक्का जमने की क्रियाविधि (Coagulation of Blood) ​

जब शरीर पर कोई चोट लगती है, तो रक्त बहना कुछ समय बाद स्वतः रुक जाता है, इसे रक्त स्कंदन कहते हैं। यह एक जटिल कैस्केड प्रक्रम (Cascade Process) है जिसमें कई एंजाइम भाग लेते हैं:

  1. चोट वाले स्थान पर प्लेटलेट्स टूटकर थ्रोम्बोप्लास्टिन (Thromboplastin) मुक्त करते हैं।
  2. यह रक्त के अन्य कारकों के साथ मिलकर एक एंजाइम सम्मिश्र थ्रोम्बोकाइनेज (Thrombokinase) का निर्माण करता है।
  3. थ्रोम्बोकाइनेज प्लाज्मा में उपस्थित निष्क्रिय प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रोम्बोइन (Thrombin) में बदल देता है।
  4. थ्रोम्बोइन घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील धागे जैसी संरचना फाइब्रिन (Fibrin) में बदल देता है। इन धागों के जाल में मृत रक्त कोशिकाएं आकर फंस जाती हैं और गाढ़ा लाल 'थक्का' (Clot) बन जाता है।
  • 🚨 अनिवार्य तत्व: रक्त का थक्का जमने की इस पूरी प्रक्रिया के लिए कैल्शियम आयन () और विटामिन K अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं।

🌊 4. लसीका या ऊतक द्रव (Lymph / Tissue Fluid) ​

जब रक्त अंगों की केशिकाओं (Capillaries) से गुजरता है, तो पानी और कुछ छोटे घुलनशील पदार्थ छनकर कोशिकाओं के बीच के खाली स्थान (Intercellular Spaces) में आ जाते हैं, जिसे ऊतक द्रव (Tissue Fluid) कहते हैं।

  • एक विशेष नलिका तंत्र (लसीका तंत्र) इस द्रव को इकट्ठा करके वापस बड़ी शिराओं (Veins) में छोड़ देता है। इस तंत्र में बहने वाले तरल को लसीका (Lymph) कहते हैं।
  • विशेषता: यह एक रंगहीन (Colorless) तरल है जिसमें RBC और बड़ी प्रोटीन अनुपस्थित होती हैं, पर इसमें प्रचुर मात्रा में विशिष्ट लसीकाणु (Lymphocytes) होते हैं।
  • कार्य: यह गैसों और पोषक तत्वों के आदान-प्रदान के लिए बिचौलिए (Middleman) का कार्य करता है। छोटी आँत के विलाई में वसा (Fat) का अवशोषण इसी लसीका वाहिनी (लैक्टीयल / Lacteal) द्वारा होता है।

🫀 5. मानव परिसंचरण तंत्र और हृदय का शारीर (Human Heart Anatomy) ​

मानव में बंद परिसंचरण तंत्र (Closed Circulatory System) पाया जाता है, जिसकी खोज विलियम हार्वे ने की थी। हमारा मुख्य पंपिंग अंग हृदय (Heart) है।

📊 हृदय की बाह्य संरचना: ​

  • यह दोनों फेफड़ों के बीच, वक्ष गुहा (Thoracic Cavity) में थोड़ा बाईं ओर झुका होता है। इसका आकार बंद मुट्ठी के बराबर होता है। इसकी उत्पत्ति भ्रूणीय मीसोडर्म (Mesoderm) से होती है।
  • यह एक दोहरी झिल्ली के आवरण से घिरा होता, जिसे हृदयावरण (पेरीकार्डियम / Pericardium) कहते हैं। इसके बीच भरा पेरीकार्डियल द्रव बाहरी झटकों से हृदय की रक्षा करता है।
  • मानव हृदय चार कोष्ठकीय (4-Chambered) होता है—जिसमें दो ऊपरी छोटे अलिंद (Atria) और दो निचले बड़े, मांसल निलय (Ventricles) होते हैं। निलय की दीवारें अलिंद की तुलना में बहुत मोटी होती हैं (विशेषकर बाएं निलय की, क्योंकि उसे पूरे शरीर में रक्त पंप करना होता है)।
licensedMedia:fetch_images(query: "human heart internal anatomy chambers valves node system biology diagram")

🚪 हृदय के कपाट (Valves) — एक-दिशीय प्रवाह के लिए: ​

  1. त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve): दाहिने अलिंद और दाहिने निलय के बीच स्थित तीन पल्लों वाला कपाट।
  2. द्विवलनी कपाट / मिट्रल कपाट (Bicuspid / Mitral Valve) — ⭐: बाएं अलिंद और बाएं निलय के बीच स्थित कपाट।
  3. अर्धचन्द्राकार कपाट (Semilunar Valves): दाहिने निलय से निकलने वाली फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery) और बाएं निलय से निकलने वाली महाधमनी (Aorta) के मुँह पर पाए जाने वाले कपाट।
  • कॉर्डा टेंडिनी (Chordae Tendineae): निलय की दीवारों से जुड़े मजबूत धागे जो कपाटों को अलिंद की तरफ उलटने से रोकते हैं।

⚡ 6. हृदय का चालन तंत्र (Conducting System / Nodal Tissue) ​

हमारा हृदय पेशीजनित (मायोजेनिक / Myogenic) होता है, अर्थात् धड़कन पैदा करने के लिए इसे मस्तिष्क के बाहरी सिग्नलों की जरूरत नहीं होती, इसका नियंत्रण हृदय की अपनी विशिष्ट पेशियों (नोडल ऊतक) द्वारा होता है।

  1. S-A नोड (Sino-Atrial Node) — 🚨 पेसमेकर (Pacemaker): यह दाहिने अलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है। यह बिना किसी बाहरी उद्दीपन के स्वतः ही प्रति मिनट 70 - 75 बार क्रिया विभव (Action Potential) पैदा करता है, जो हृदय की धड़कन की लय को शुरू करता है। इसीलिए इसे हृदय का पेसमेकर कहते हैं।
  2. A-V नोड (Atrio-Ventricular Node): यह दाहिने अलिंद के निचले बाएं कोने पर होता है। यह S-A नोड के सिग्नल को ग्रहण करता है।
  3. एवी बंडल और पुरकिंजे तंतु (Purkinje Fibres): A-V नोड से सिग्नल एवी बंडल (His का बंडल) के रास्ते निलय की दीवारों में फैले बारीक पुरकिंजे तंतुओं तक पहुँचता है, जिससे दोनों निलय एक साथ तेजी से सुकड़ते हैं।

🔄 7. कार्डियक चक्र या हृद चक्र (Cardiac Cycle) ​

हृदय की एक संपूर्ण धड़कन (सुकड़ने और फैलने) के दौरान होने वाली घटनाओं के क्रम को हृद चक्र कहते हैं। इसकी कुल अवधि मात्र होती है।

📊 हृद चक्र के तीन मुख्य चरण: ​

  1. संयुक्त अनुशिथिलन (Joint Diastole - 0.4 सेकंड): चारों कोष्ठक शिथिल (Relax) अवस्था में होते हैं। त्रिवलनी और द्विवलनी कपाट खुले होते हैं, जिससे शिराओं से रक्त अलिंदों से होता हुआ निलय में भरता रहता है। अर्धचन्द्राकार कपाट बंद होते हैं।
  2. अलिंद प्रकुंचन (Atrial Systole - 0.1 सेकंड): S-A नोड तरंग पैदा करता है जिससे दोनों अलिंद एक साथ सुकड़ते हैं। इससे निलय में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है।
  3. निलय प्रकुंचन (Ventricular Systole - 0.3 सेकंड): दोनों निलय तेजी से सुकड़ते हैं। उच्च दाब के कारण त्रिवलनी और द्विवलनी कपाट तुरंत बंद हो जाते हैं और अर्धचन्द्राकार कपाट खुल जाते हैं, जिससे रक्त महाधमनी और फुफ्फुस धमनी में तेजी से दौड़ जाता है।

📐 हृद निकास (Stroke Volume & Cardiac Output): ​

  • प्रवाह आयतन (Stroke Volume): प्रत्येक हृद चक्र (एक धड़कन) में प्रत्येक निलय द्वारा पंप किए गए रक्त का आयतन, जो लगभग होता है।
  • हृद निकास (Cardiac Output): प्रति मिनट हृदय द्वारा पंप किया गया कुल रक्त।
  • 🫀 हृदय की ध्वनियाँ (Heart Sounds): डॉक्टर जब स्टेथोस्कोप कान में लगाता है, तो उसे दो स्पष्ट ध्वनियाँ सुनाई देती हैं:
    • प्रथम ध्वनि ('लव' / LUBB): निलय प्रकुंचन की शुरुआत में त्रिवलनी और द्विवलनी कपाटों के बंद होने के कारण उत्पन्न तीव्र ध्वनि।
    • द्वितीय ध्वनि ('डब' / DUPP): निलय अनुशिथिलन की शुरुआत में अर्धचन्द्राकार कपाटों के बंद होने के कारण उत्पन्न ध्वनि। (कपाटों के खुलने से कोई आवाज नहीं होती, केवल बंद होने से होती है)। [3, 4]

📈 8. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG - Electrocardiogram) ​

यह हृदय चक्र के दौरान होने वाली विद्युत गतिविधियों को आरेख के रूप में दर्शाने वाला ग्राफ है, जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ मशीन द्वारा निकाला जाता है। मरीज के शरीर पर तीन विद्युत लीड (दोनों कलाइयों और बाईं टखने पर) लगाई जाती हैं। [5]

📊 ECG की तरंगों का विश्लेषण — ⭐ NEET का पसंदीदा मैचिंग टॉपिक: ​

  1. P-तरंग (P-Wave): यह अलिंदों के विध्रुवण (Atrial Depolarization) अर्थात् दोनों अलिंदों के संकुचन (Systole) को दर्शाती है। [6, 7]
  2. QRS सम्मिश्र (QRS Complex) — 🚨: यह निलयों के विध्रुवण (Ventricular Depolarization) अर्थात् निलय के तीव्र संकुचन को दर्शाती है। एक निश्चित समय में QRS की संख्या को गिनकर हम मरीज की हृदय दर (Heart rate) का पता लगा सकते हैं। [8, 9, 10]
  3. T-तरंग (T-Wave): यह निलयों के पुनर्ध्रुवण (Ventricular Repolarization) अर्थात् निलय के वापस अपनी सामान्य शिथिल अवस्था (Diastole) में लौटने को दर्शाती है।

🔄 9. दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) ​

मानव में रक्त एक चक्र पूरा करने के लिए हृदय से दो बार गुजरता है, इसलिए इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। इसमें दो मुख्य परिपथ शामिल हैं: [11, 12, 13]

  1. फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation): दाहिने निलय से अशुद्ध (वि-ऑक्सीजनित) रक्त फुफ्फुस धमनी द्वारा फेफड़ों में जाता है, और वहाँ से साफ होकर ऑक्सीजनित रक्त फुफ्फुस शिराओं द्वारा बाएं अलिंद में लौट आता है।
  • 🚨 यकृत वाहिका तंत्र (Hepatic Portal System): पाचन तंत्र (आँत) और यकृत (Liver) के बीच पाया जाने वाला एक अनूठा परिसंचरण। आँत से निकलने वाली शिरा सीधे सामान्य परिसंचरण में जाने के बजाय पहले यकृत में जाती है, ताकि भोजन के पोषक तत्वों का नियमन किया जा सके।

💔 10. परिसंचरण तंत्र के विकार (Disorders) ​

  • उच्च रक्तदाब (Hyper-tension): सामान्य रक्तदाब होता है (120 प्रकुंचन दाब, 80 अनुशिथिलन दाब)। यदि यह बार-बार मापने पर या उससे अधिक आए, तो इसे उच्च रक्तचाप कहते हैं। यह मस्तिष्क और वृक्क को भारी नुकसान पहुँचाता है। [23, 24, 25, 26, 27]
  • हृद धमनी रोग (CAD / एथेरोस्क्लेरोसिस): हृदय की पेशियों को रक्त ले जाने वाली धमनियों के भीतर कैल्शियम, वसा (कोलेस्ट्रॉल) और ऊतकों के जमा हो जाने से धमनियों की गुहा संकरी हो जाती है, जिससे रक्त का प्रवाह रुकने लगता है। [28, 29]
  • एंजाइना (Angina Pectoris): जब हृदय की पेशी तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, तो सीने में अचानक तीव्र दर्द (Chest pain) होता है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में किसी भी उम्र में हो सकते हैं। [30, 31, 32]
  • हृदय पात (Heart Failure): यह वह स्थिति है जब हृदय पूरे शरीर की आवश्यकता के अनुसार प्रभावी रूप से रक्त पंप नहीं कर पाता। इसे कभी-कभी फेफड़ों का संकुलन (Congestion of lungs) भी कहते हैं। [33, 34]
  • 🚨 कार्डियक अरेस्ट बनाम हार्ट अटैक (Confusing Trap):
    • कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest): जब हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है (विद्युत खराबी के कारण)।
    • हार्ट अटैक (Heart Attack / मायोकार्डियल इंफार्क्शन): जब पर्याप्त रक्त आपूर्ति न होने के कारण हृदय की कोई पेशी अचानक क्षतिग्रस्त हो जाती है। [35]

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards) ​

  • 🚨 Erythroblastosis Fetalis Condition Code: यह जानलेवा स्थिति केवल तब बनती है जब मादा Rh-ve हो और उसका गर्भस्थ शिशु Rh+ve हो। पिता हमेशा Rh+ve होता है। प्रसव के तुरंत बाद माँ को एंटी-Rh एंटीबॉडी (रोघम इंजेक्शन) देना इसका अचूक इलाज है। [36]
  • Serum Equation: परीक्षा के सतही कथनों में भ्रमित करने के लिए दिया जाता है, याद रखें: सीरम् = प्लाज्मा क्लॉटिंग फैक्टर। सीरम कभी थक्का नहीं जमा सकता।
  • Heart Sounds Reason: स्टेथोस्कोप की पहली आवाज 'लव' त्रिवलनी-द्विवलनी कपाटों के बंद होने से आती है, और दूसरी आवाज 'डब' अर्धचन्द्राकार कपाटों के बंद होने से आती है। कपाटों के खुलने की कोई आवाज नहीं होती। [37, 38]
  • ECG Wave Identification: P = अलिंद संकुचन, QRS = निलय संकुचन (हृदय दर की माप), T = निलय का वापस शांत होना (Diastole). यह नीट का सबसे प्रिय मिलान प्रश्न है। [39]
  • RBC Graveyard: हमारे शरीर में पुरानी मृत आरबीसी को दफनाने का कब्रिस्तान प्लीहा (Spleen) है।

📝 अध्याय का सारांश (Conclusion) ​

शरीर द्रव तथा परिसंचरण अध्याय हमें हमारे शरीर के भीतर धड़कने वाले उस चमत्कारी और अथक पावर ग्रिड (हृदय) और लाल दरिया (रक्त) के जटिल विज्ञान से परिचित कराता है। प्लाज्मा के एल्बूमिन व ग्लोबुलिन प्रोटीनों का परासरणी और रक्षा संतुलन हो, या आरबीसी के हीमोग्लोबिन द्वारा किया जाने वाला ऑक्सीजन का नीरव सफर, रक्त का हर कतरा जीवन का संवाहक है। न्यूट्रोफिल और मोनोसाइट की भक्षक सेना जहाँ रोगों को निगलती है, वहीं प्लेटलेट्स का थ्रोम्बोकाइनेज एंजाइम कैल्शियम () की मदद से चोट लगते ही फाइब्रिन के धागों का जादुई सुरक्षा कवच (थक्का) तान देता है। Rh-ve माँ और Rh+ve शिशु के बीच छिपी 'गर्भ रक्ताणुकोरकता' की आनुवंशिक तबाही प्रकृति के बारीक नियमों को दर्शाती है।

हृदय के भीतर S-A नोड (पेसमेकर) द्वारा बिना किसी बाहरी सहारे के स्वतः जनमाई जाने वाली 72 धड़कनों की विद्युत तरंगें पुरकिंजे तंतुओं के रास्ते पूरे दिल में जीवन की रिदम (Rhythm) पैदा करती हैं। के संक्षिप्त हृद चक्र में 'लव' और 'डब' के कपाट बंद होने की संगीत ध्वनियाँ प्रति मिनट 5 लीटर रक्त (हृद निकास) को दोहरे परिसंचरण के राजमार्गो पर दौड़ाती हैं। अंत में, ईसीजी (ECG) की P-QRS-T तरंगों का ग्राफिकल उतार-चढ़ाव चिकित्सा विज्ञान को दिल की धड़कनों का लाइव आरेख देता है, जो एंजाइना के दर्द और एथेरोस्क्लेरोसिस के संकरे रास्तों को पहचानकर आधुनिक मानव को लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने का वैज्ञानिक संबल प्रदान करता है।

Join the Discussion

Show Comments

No comments

No comments yet.

Post a Comment

Popular Post

हिंदी व्याकरण Ch 1 Important Questions & PYQ नोट्स

1. भाषा 📙 Book Based Questions ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 12 2. वर्ण-विचार 📚 Books Based Questions ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 10 📋 Bihar Board - Class 10 PYQ 📋 Bihar Board - Class 12 📋 Bihar Board - Class 12 PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 3. वर्तनी ⚡ Competitive exam 4. विराम-चिह्ना 📙 Book Based Questions ⚡ Competitive exam Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 🏁 निष्कर्ष (Conclusion) 1. भाषा ​ 📙 Book Based Questions ​ प्रश्‍न 1 : हिन्दी भाषा का प्रादुर्भाव किस भाषा से हुआ? पालि संस्कृत अपभ्रंश प्राकृत उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 2 : भारतीय आर्य भाषाओं को कितनी भाषाओं में विभाजित किया गया है? तीन चार पाँच दो उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 3 : प्राचीन भारतीय आर्य भाषा के अन्तर्गत कौन-सी भाषा आती है? वैदिक संस्कृत लौकिक संस्कृत अवहट्ठ 'a' तथा 'b' दोनों उत्तर : सही विकल्प (d) है। प्रश्‍न 4 : बौद्ध साहित्य की रचना किस भाषा से हुई? संस्कृत प्राकृत पालि अपभ्रंश उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 5 : मध्यकालीन आर्य भाषा की ती...
By Guddu Kumar
Class 11 Chemistry Chapter 1 Important Questions Hindi

Class 11 Chemistry Chapter 1 Important Questions Hindi

JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन (Properties of Matter and their Measurement) मापन में अनिश्चितता (Uncertainty in Measurement) परमाणु द्रव्यमान और आण्विक द्रव्यमान (Atomic and Molecular Masses) मोल-संकल्पना और मोलर द्रव्यमान (Mole Concept and Molar Masses) प्रतिशत संघटन (Percentage Composition) स्टॉइकियोंमीट्री और स्टॉइकियोंमीट्रिक परिकलन (Stoichiometry and Stoichiometric Calculations) 📝 निष्कर्ष (Conclusion) द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन (Properties of Matter and their Measurement) ​ 1995 प्रश्‍न 1 : दाब के विमा समान है- बल प्रति इकाई आयतन ऊर्जा प्रति इकाई आयतन बल ऊर्जा उत्तर : सही विकल्प () है। मापन में अनिश्चितता (Uncertainty in Measurement) ​ 1998 प्रश्‍न 2 : 161 cm, 0.161 cm तथा 0.0161 cm के लिए सार्थक संख्याएँ हैं- क्रमशः 3, 4 और 5 क्रमशः 3, 4 और 4 क्रमशः 3, 3 और 4 क्रमशः 3, 3 और 3 उत्तर : सही विकल्प () है। 2014 प्रश्‍न 3 : समान द्रव्यमान में H₂, O₂ और मिथेन को एक आयतन V के पात्र में 27°C पर समान परिस्थि...
By Guddu Kumar
निबंध-लेखन: Hindi Grammar Essay Format for BSEB & CBSE

निबंध-लेखन: Hindi Grammar Essay Format for BSEB & CBSE

✍️ 25. निबंध-लेखन (Essay Writing) ​ यह अध्याय BSEB (कक्षा 9, 10, 11, 12), CBSE, State Boards और अन्य सभी अकादमिक परीक्षाओं के लेखन खंड (Writing Section) का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा अंक दिलाने वाला विषय है। बोर्ड परीक्षाओं में यह प्रश्न प्रायः 8 से 10 अंकों के लिए पूछा जाता है। इस डिजिटल नोट्स में दी गई संरचना और ब्रह्मास्त्र ट्रिक्स की मदद से आप निबंध में अधिकतम अंक सुनिश्चित कर सकते हैं। CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question ✍️ 25. निबंध-लेखन (Essay Writing) 🗺️ निबंध-लेखन का मास्टर माइंड मैप 🏗️ ① निबंध के तीन मुख्य स्तम्भ (The Ideal 3-Step Structure) 🧲 Ⓐ प्रस्तावना / भूमिका (Introduction) 📈 Ⓑ विषय-विस्तार (Body of the Essay) 🏁 Ⓒ उपसंहार (Conclusion) ⚙️ ② परीक्षा में पूरे अंक पाने के 5 सुनहरे नियम (Golden Rules) 📝 ③ लाइव मॉडल उदाहरण (Live Model Essay Segment) Bihar Board Class 12 Science PYQ 1. कोई अविस्मरणीय घटना 2. मेरा भारत महान् 3. पर्यटन का महत्व 4. मेरे प्रिय कवि 5. शहरी जीवन 6. यदि मैं प्रधानमंत्री हो जाऊँ 7. मेरे सपनों का भारत 8. भ्रष्टाचार का दान...
By Guddu Kumar

हिंदी व्याकरण Ch 2 Important Questions & PYQ नोट्स

1. शब्द Bihar Board - Class 10 Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science - शब्द/वाक्य Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 2. संज्ञा Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 3. लिंग Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 4. वचन Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 5. कारक Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 6. सर्वनाम Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 7. विशेषण Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 8. क्रिया Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Board - Class 12 Science PYQ Bihar Board - Class 12 Arts PYQ 9. वाच्य Bihar Board - Class 10 PYQ 10. काल Bihar Board - Class 10 PYQ Bihar Boar...
By Guddu Kumar

AvN Learn English

AvN Learn English

No blogs found in this list.

Share