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Class 11 Chemistry Chapter 5 Important Questions Hindi

ऊष्मागति की :- श्रॉति क स्यायन की वह शाखा नि समें कि सी श्रॉति क एवं रासायनि क परि बर्तन के फलस्वरूप ऊर्ना की मात्रा का अध्ययन कि या नाता हैं, ऊष्मागति की कहलाती हें। (1) नि काय अथवा तन्त्र (ऽ५ste) ~ ब्रह्माण्ड का वह बि शेष , वास्तवि क य़ा काल्पनि क भाग नि से ऊष्मागति की अध्ययन के लि ए चुना नाता हैं System कहलाता हॅ। (2) परि वेश (Surrounding) — नि काय को छोड़कर, उसके चारों ओर का वह क्षेत्र लो नि काय को ऊर्ना तथा दृव्यमान ढ्रोनो का आदढ्वान प्रदान कर सकता है, परि वेश कहलाता हैं। [SYSTEM]I—-> परि वेश नि काय के प्रकार (Types of System) — नि काय उपकार के होते हें। (¦) खुला अथवा वि वृत नि काय (0pe१ $५ste) ¬ वह नि काय नो अपले परि वेश से ऊर्ना तथा दृव्यमान ढ्रोनों का आद्वान- प्रदान कर सकता हें, खुला नि काय कहलाता हैं। ६x: खुले बीकर में रखा गर्म पानी (11) बन्द अथवा संवृत नि काय (८।०se $४ste) ¬ वह नि काय नो अपने परि वेश से आदान-प्रदान ऊर्ना का कर सकता हें परन्तु

द्रव्यमान का नही; बन्द नि काय कहलाता हैं] &x: एक बन्द पात्र में भ्रा गर्म नल। (1¡) बि लगि त नि काय (।s०।ated System) ¬ वह नि काय नो अपने परि वेश से ऊर्ना तथा दृव्यमान ढ्वोनों में से कि सी का आदान-प्रदान नही करता हैं, बि लगि त नि काय कहलाता हैं] ६x: थरमस में भ्रा गर्म नल। वि स्तीर्ण तथा अवबि स्तीर्ण गुण ¬ (मात्रात्मक एवं मात्रा स्वतंत्र गुण) वे गुण नो नि काय में उपस्थि त पढ़ार्थ की मात्रा पर नि र्भर करते हैं, वि स्तीर्ण गुण कहलाते हैँ] ६x: आयतन, दृव्यमान, ऊष्मा धारि ता, एन्थेल्पी; एन्द्रॉपी आदि वे गुण नो नि काय में उपस्थि त पढ़ार्थ की मात्रा पर नि र्भर नहीं करते हैं आअवि स्तीर्ण गुण कहलाते हैं] ६x४ ताप, दाब, द्नत्व; द्भि ध्रृव आधूर्ण क्वथनांक,हि मांक आद़्ि । ऊष्मा गति क प्रक्रम ¬ नब कोई ऊष्मा गति क तन्त्र एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परि बरति ति हो नाता हैं तो उस परि बर्तन को ऊष्मागति क प्रक्रम कहते हैँ। य्ह नि क्ष प्रकार का होता हें। (1) समतापीय प्रक्रम ~ समतापीय प्रक्रम में नि काय का ताप स्थि र रहता हैं अर्था त d7=0. (1) रुद्कोष्म प्रक्रम ~ सुद्कोष्म प्रक्रम में ऊष्मा का आदान-प्रदान नही होता हे अथाति 44=0.

(1) समदाबीय प्रक्रम ~ समदाबीय प्रक्रम में नि काय का दाब स्थि हैँ अर्था त %=0. र रहता (1) सम आयतनि क प्रक्रम ¬ सम आयतनि क प्रक्रम में आयतन नहीं बढ़लता हैं अर्था त 4v=0. अबस्था फलन ¬ नि काय का वह गुण नि सका मान केवल नि काय की वर्तमान अवस्था पर नि र्भर करता हैं ना कि उस बि धि पर नि सके द्वारा बह अवस्था प्राप्त हुई है। अबस्था फलन कहलाती हैं। ६x: आंतरि क ऊर्ना ; एन्थँल्पी; एन्द्रॉपी, ताप इत्यादि अवस्था फलन हें। ऊष्मा गति की का प्रथम नि यम-> ऊष्मागति की के प्रथम नि यम को करड प्रकार से परि क्राषि त कि या गया हैं। इये ऊर्ना संरक्षण का नि यम भी कहते हैं। नि के अनुसार- "ऊर्ना न तो उत्पन्न की ना सकती हँ ऑर न ही नष्ट की नाती हैं। यद्यपि ड्से एक सुप से ढ्ूसरे स्प में परि वर्ति त कि या ना सकता तथा कि सी बि लगि त नि काय की सम्पूर्ण ऊर्ना स्थि र रहती हैं यद्धपि यह एकरूप से ठरसरे रुप में परि वर्ति त की नाती है।" यदि कि सी नि काय को 4 ऊर्ना की नाती हैं तो यह ऊष्मा नि काय की आंतरि क ऊर्ना &। से £2 तथा परि वेश पर ॥0 कार्य करने के बराबर होती हें। g = (E2-E)) + W q= AE +W AE = 4g -W ग्रह ऊष्मा गति की के प्रथम नि यम का गणि तीय सूत्र हैं।

॥here- AE = आंतरि क ऊर्ना में परि बर्तन 4 = नि काय द्कारा उत्सर्नि त या अबशोषि त ऊष्मा () (+) Note (1) यदि कार्य नि काय से पर कि या नाता हैं तो ७ = -ve (॥) यदि कार्य नि काय द्वारा कि या नाता हैं तो ७ = +४९ होगा

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