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BSEB Class 9 Science Chapter 1 Notes Hindi

📘 NCERT कक्षा 9 विज्ञान | अध्याय 1: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings) - Full Notes & Summary

यह डिजिटल नोट्स BSEB (बिहार बोर्ड), CBSE, NTSE, NEET/JEE Foundation, ओलिंपियाड, पैरामेडिकल और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, NTPC) के नवीनतम पैटर्न तथा NCERT व BSTBPC (बिहार स्टेट टेक्स्टबुक) के पाठ्यक्रम पर आधारित हैं।


⚡ अध्याय का विहंगम दृश्य (Chapter Overview)

अपने चारों ओर देखने पर हमें विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ दिखाई देती हैं, जिनका आकार, आकृति और बनावट अलग-अलग होती है। वैज्ञानिक भाषा में इन सभी वस्तुओं को 'पदार्थ' (Matter) कहा जाता है। इस अध्याय में हम पदार्थ के भौतिक स्वरूप, उसकी अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) और तापमान या दाब बदलने पर उनकी अवस्थाओं में होने वाले परिवर्तनों को प्रयोगात्मक और सरल तरीके से समझेंगे।

🧠 माइंड मैप (Quick Mind Map)

  • पदार्थ ➡️ जिसका द्रव्यमान हो और जो स्थान घेरे (आयतन हो)।
  • कणों के गुण ➡️ अत्यंत सूक्ष्म, बीच में रिक्त स्थान, निरंतर गतिशील, एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
  • पदार्थ की अवस्थाएँ ➡️ ठोस (S), द्रव (L), गैस (G) [और दो विशेष: प्लाज्मा व BEC]।
  • अवस्था परिवर्तन ➡️ गलन, क्वथन, ऊर्ध्वपातन, निक्षेपण, वाष्पीकरण।
  • गुप्त ऊष्मा ➡️ गलन की गुप्त ऊष्मा और वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा।

🔬 1. पदार्थ का भौतिक स्वरूप और अभिलाक्षणिक गुण

🧱 पदार्थ क्या है? (What is Matter?)

विश्व की प्रत्येक वस्तु जिस सामग्री से बनी है उसे पदार्थ कहते हैं। सरल शब्दों में— वह सब कुछ जो स्थान घेरता है (आयतन होता है) और जिसमें द्रव्यमान (Mass) होता है, पदार्थ कहलाता है।

  • उदाहरण: हवा, भोजन, पत्थर, बादल, पौधे, पानी की एक बूँद, रेत का कण आदि।
  • ध्यान दें: प्रेम, घृणा, विचार, शीत, दर्द आदि पदार्थ नहीं हैं, क्योंकि इनका कोई द्रव्यमान या आयतन नहीं होता।

🧪 पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण (Characteristics of Particles)

पदार्थ कणों से मिलकर बना होता है। इन कणों के चार मुख्य गुण होते हैं जो परीक्षाओं में सीधे पूछे जाते हैं:

  1. पदार्थ के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं: ये इतने छोटे होते हैं कि हम इनकी कल्पना भी नहीं कर सकते (जैसे- पोटैशियम परमैंगनेट के कुछ क्रिस्टल से पानी के कई लीटर रंगीन हो जाते हैं)।
  2. पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है: जब हम चाय, कॉफी या नींबू-पानी बनाते हैं, तो एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों के रिक्त स्थानों में समावेशित हो जाते हैं।
  3. पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं: कणों में गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) होती है। तापमान बढ़ाने पर कणों की गति और तेज़ हो जाती है।
    • 📌 विसरण (Diffusion): दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः आपस में मिलना विसरण कहलाता है। तापमान बढ़ने पर विसरण की दर तेज़ हो जाती है (जैसे- गर्म खाने की गंध दूर तक जाती है, ठंडे खाने की नहीं)।
  4. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं: कणों के बीच एक बल कार्य करता है जो उन्हें एक साथ रखता है। इसे अंतराणुक आकर्षण बल (Intermolecular Force) कहते हैं। यह बल ठोस में सबसे अधिक और गैस में सबसे कम होता है।

🧊 2. पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter)

भौतिक गुणों के आधार पर पदार्थ की मुख्य रूप से तीन अवस्थाएँ होती हैं:

📊 ठोस, द्रव और गैस की तुलनात्मक तालिका

गुणधर्मठोस (Solid)द्रव (Liquid)गैस (Gas)
1. आकार (Shape)निश्चित होता है।अनिश्चित (बर्तन का आकार लेता है)।अनिश्चित होता है।
2. आयतन (Volume)निश्चित होता है।निश्चित होता है।अनिश्चित होता है।
3. संपीड़्यता (Compressibility)नगण्य (न के बराबर)।बहुत कम।अत्यधिक (सबसे ज़्यादा)
4. कणों के बीच आकर्षणसबसे अधिकमध्यम।सबसे कम (नगण्य)।
5. विसरण (Diffusion)अत्यंत धीमा या नहीं।ठोस से अधिक।तीव्रतम (सबसे तेज़)
6. तरलता / बहावनहीं बहते (दृढ़ होते हैं)।बहते हैं (तरल होते हैं)।सभी दिशाओं में बहते हैं।

🧪 दैनिक जीवन के उदाहरण:

  • LPG और CNG: गैसों की उच्च संपीड़्यता (Compressibility) के कारण ही रसोई गैस (LPG) या वाहनों के ईंधन (CNG) को छोटे सिलेंडरों में संपीड़ित करके आसानी से भरा जाता है।
  • जलीय जीव: पानी में घुली ऑक्सीजन (O₂) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के विसरण के कारण ही जलीय पौधे और जीव पानी के अंदर सांस ले पाते हैं।

🌟 पदार्थ की दो अन्य अवस्थाएँ (Advanced Points for NTSE/NEET Foundation)

  1. प्लाज्मा (Plasma): इस अवस्था में कण अत्यधिक ऊर्जा वाले और सुपर उत्तेजित अवस्था में होते हैं। ये आयनीकृत गैस के रूप में होते हैं। इसके कारण ही सूर्य और तारों में चमक होती है। फ्लोरोसेंट ट्यूब और नियॉन बल्ब में भी प्लाज्मा बनता है।
  2. बोस-आइंस्टाइन कंडेनसेट (BEC): सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें भाग जितने कम घनत्व वाली गैस को बहुत ही कम तापमान (परम शून्य) पर ठंडा करने से यह अवस्था प्राप्त होती है।

🌡️ 3. क्या पदार्थ अपनी अवस्था बदल सकता है? (Change of State)

हाँ, तापमान और दाब में परिवर्तन करके पदार्थ की अवस्था को बदला जा सकता है।

🅰️ तापमान परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Temperature)

text
       (गलन)                (क्वथन)
ठोस ───────────👉 द्रव ───────────👉 गैस
ठोस 👈─────────── द्रव 👈─────────── गैस
      (जमना)               (संघनन)
  1. गलनांक (Melting Point): जिस न्यूनतम तापमान पर कोई ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, वह उसका गलनांक कहलाता है। बर्फ का गलनांक या होता है।
  2. क्वथनांक (Boiling Point): वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है, उसका क्वथनांक कहलाता है। जल का क्वथनांक या होता है।
  3. 🧠 गुप्त ऊष्मा (Latent Heat - Exam Hotspot): अवस्था परिवर्तन के समय दिए जाने वाले तापमान में कोई वृद्धि नहीं दिखती, क्योंकि वह ऊष्मा कणों के बीच के आकर्षण बल को तोड़ने में खर्च होती है। इसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
    • गलन की प्रसुप्त (गुप्त) ऊष्मा: ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। (इसलिए पर बर्फ के कणों की तुलना में पर पानी के कणों में अधिक ऊर्जा होती है)।
    • वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा: द्रव को उसके क्वथनांक पर गैस में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा। (इसलिए के उबलते पानी की तुलना में की भाप से हाथ अधिक जलता है, क्योंकि भाप में गुप्त ऊष्मा छिपी होती है)।

⚡ ऊर्ध्वपातन और निक्षेपण (Sublimation & Deposition) - VVI Topic

  • ऊर्ध्वपातन (Sublimation): कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो ठोस अवस्था से सीधे गैस अवस्था में बदल जाते हैं (बिना द्रव में बदले)। उदाहरण: कपूर (Camphor), अमोनियम क्लोराइड (), नेफ्थलीन की गोलियाँ
  • निक्षेपण (Deposition): गैस से सीधे ठोस बनने की प्रक्रिया को निक्षेपण कहते हैं।

🅱️ दाब परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Pressure)

  • यदि हम किसी गैस पर दाब बढ़ाएँ और तापमान घटाएँ, तो गैस के कण पास-पास आ जाते हैं और गैस द्रव में बदल सकती है
  • शुष्क बर्फ (Dry Ice): ठोस कार्बन डाइऑक्साइड () को 'शुष्क बर्फ' कहा जाता है। इसे उच्च दाब पर संग्रहित किया जाता है। जब वायुमंडलीय दाब 1 एटमॉस्फियर (atm) होता है, तो यह बिना द्रव में बदले सीधे गैस में बदल जाती है।

💨 4. वाष्पीकरण (Evaporization)

क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव के वाष्प (गैस) में बदलने की इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। (जैसे— गीले कपड़ों का सूखना, फर्श पर गिरे पानी का गायब होना)।

🛠️ वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक (BSEB का सबसे पसंदीदा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

  1. सतही क्षेत्रफल बढ़ने पर: सतह का क्षेत्र बढ़ने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है (जैसे— कपड़े फैलाने पर जल्दी सूखते हैं, चाय को प्याली के बजाय तश्तरी में पीने पर वह जल्दी ठंडी होती है)।
  2. तापमान में वृद्धि: तापमान बढ़ने पर कणों को अधिक गतिज ऊर्जा मिलती है, जिससे वाष्पीकरण तेज़ होता है।
  3. आर्द्रता (Humidity) में कमी: हवा में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। हवा में पहले से जलवाष्प अधिक होगी, तो वाष्पीकरण धीमा हो जाएगा (जैसे— बरसात में कपड़े देर से सूखते हैं)।
  4. वायु की गति में वृद्धि: हवा तेज़ चलने पर जलवाष्प के कण हवा के साथ उड़ जाते हैं, जिससे वाष्पीकरण तेज़ हो जाता है।

❄️ वाष्पीकरण के कारण शीतलता (Evaporation Causes Cooling)

वाष्पीकरण के दौरान द्रव के कण अपने आस-पास के वातावरण से ऊर्जा अवशोषित करते हैं, जिससे आस-पास का वातावरण ठंडा हो जाता है।

  • व्यावहारिक उदाहरण:
    • घड़े (मटके) का पानी ठंडा क्यों होता है? घड़े के छोटे छिद्रों से पानी बाहर आता है और उसका वाष्पीकरण होता है, जिससे घड़े के अंदर का पानी ठंडा हो जाता है।
    • हथेली पर एसीटोन/पेट्रोल या इत्र गिरने पर ठंडक क्यों लगती है? क्योंकि ये हमारी हथेली से ऊर्जा लेकर वाष्पीकृत हो जाते हैं।
    • गर्मी में सूती कपड़े क्यों पहनने चाहिए? सूती कपड़े पसीने को आसानी से सोख लेते हैं, और जब पसीने का वाष्पीकरण होता है, तो हमारे शरीर को शीतलता मिलती है।

🎯 परीक्षा बूस्टर डोज (Exam-Points & Super Tricks)

Temperature Conversion Trick (तापमान बदलना):

  • Celsius से Kelvin में जाने के लिए: करें। (जैसे: )
  • Kelvin से Celsius में आने के लिए: करें। (जैसे: )
  1. ठोस = शुष्क बर्फ: इसे पानी की तरह गीला न करने के गुण के कारण शुष्क बर्फ कहा जाता है।
  2. विसरण का क्रम: गैसों में विसरण सबसे तेज़ () होता है क्योंकि गैस के कणों के बीच बहुत जगह होती है और वे तेज़ भागते हैं।
  3. परम शून्य ताप: या को परम शून्य ताप कहते हैं, जहाँ कणों की गति पूरी तरह रुक जाती है।

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

'हमारे आस-पास के पदार्थ' रसायन विज्ञान की वह बुनियादी वर्णमाला है जो हमें द्रव्य के भौतिक स्वरूप से परिचित कराती है। पदार्थ के सूक्ष्म कणों की निरंतर गतिशीलता और उनके बीच का अंतराणुक बल ही यह तय करता है कि कोई वस्तु ठोस लोहे की तरह दृढ़ होगी, पानी की तरह बहेगी या हवा की तरह पूरे कमरे में फैल जाएगी। वाष्पीकरण के सिद्धांतों और गुप्त ऊष्मा के लॉजिक को समझना न केवल कक्षा 9 की बोर्ड परीक्षाओं (BSEB/CBSE) में पूरे अंक दिलाता है, बल्कि आगे चलकर NEET, JEE Foundation और विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार को भी बेहद मजबूत बनाता है।

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