📍 अध्याय 3: निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry)
जब हमें किसी समतल (जैसे- कागज या दीवार) पर किसी बिंदु या वस्तु की सटीक स्थिति का पता लगाना होता है, तो हमें दो स्वतंत्र संदर्भ रेखाओं की आवश्यकता होती है। गणित की वह शाखा जिसमें समतल पर बिंदुओं की स्थिति को संख्याओं के जोड़े द्वारा दर्शाया जाता है, निर्देशांक ज्यामिति कहलाती है। इसकी खोज फ्रांसीसी दार्शनिक और गणितज्ञ रेने देकार्ते (René Descartes) ने की थी, इसलिए इस पद्धति को 'कार्तीय पद्धति' भी कहते हैं।
1. कार्तीय पद्धति की मुख्य परिभाषाएँ (Cartesian System) 📊📐⭐⭐⭐⭐⭐
कार्तीय पद्धति में एक समतल पर दो लंबवत (Perpendicular) रेखाएं खींची जाती हैं:
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Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर)││────────────────────────────────┼──────────────────────────────── X-अक्ष (क्षैतिज)│ मूल बिंदु O(0,0)│Y'
- X-अक्ष (X-axis): संख्या रेखा पर खींची गई क्षैतिज रेखा (Horizontal Line) को X-अक्ष कहते हैं। इसे
से दर्शाते हैं। - Y-अक्ष (Y-axis): संख्या रेखा पर खींची गई ऊर्ध्वाधर रेखा (Vertical Line) को Y-अक्ष कहते हैं। इसे
से दर्शाते हैं। - मूल बिंदु (Origin - O) ⭐⭐⭐⭐⭐: "X-अक्ष और Y-अक्ष जहाँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं (काटते हैं), उस कटान बिंदु को मूल बिंदु कहते हैं।" इसे O से दर्शाते हैं।
- मूल बिंदु के निर्देशांक हमेशा
होते हैं। (यह परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला वस्तुनिष्ठ प्रश्न है)।
- मूल बिंदु के निर्देशांक हमेशा
2. चतुर्थांश (Quadrants) 🍕🔄⭐⭐⭐⭐⭐
जब X-अक्ष और Y-अक्ष एक समतल पर मिलते हैं, तो वे उस तल को चार बराबर भागों में बाँट देते हैं। इन चार भागों को चतुर्थांश (Quadrants) कहा जाता है। इन्हें घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में (Anti-clockwise) गिना जाता है:
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द्वितीय चतुर्थांश (II) │ प्रथम चतुर्थांश (I)(-, +) │ (+, +)────────────────────────┼────────────────────────तृतीय चतुर्थांश (III) │ चतुर्थ चतुर्थांश (IV)(-, -) │ (+, -)│
🎯 चतुर्थांशों के चिह्न नियम (Sign Convention) - कंठस्थ करें ⭐⭐⭐⭐⭐:
- प्रथम चतुर्थांश (I): इसमें
और दोनों धनात्मक होते हैं । उदाहरण: - द्वितीय चतुर्थांश (II): इसमें
ऋणात्मक और धनात्मक होता है । उदाहरण: - तृतीय चतुर्थांश (III): इसमें
और दोनों ऋणात्मक होते हैं । उदाहरण: - चतुर्थ चतुर्थांश (IV): इसमें
धनात्मक और ऋणात्मक होता है । उदाहरण:
3. बिंदु के निर्देशांक: भुज और कोटि (Coordinates: Abscissa & Ordinate) 🧮🎯⭐⭐⭐⭐⭐
समतल पर किसी भी बिंदु की स्थिति को एक क्रमित युग्म
- भुज (Abscissa) ⭐⭐⭐: किसी बिंदु की Y-अक्ष से लंबवत दूरी को उसका
-निर्देशांक या भुज कहते हैं। (यह कोष्ठक में पहली संख्या होती है)। - कोटि (Ordinate) ⭐⭐⭐: किसी बिंदु की X-अक्ष से लंबवत दूरी को उसका
-निर्देशาंक या कोटि कहते हैं। (यह कोष्ठक में दूसरी संख्या होती है)।
💡 उदाहरण द्वारा समझें: यदि एक बिंदु के निर्देशांक
हैं, तो:
- बिंदु का भुज (
-मान) = है। - बिंदु की कोटि (
-मान) = है। - चूँकि चिह्न
है, अतः यह बिंदु द्वितीय चतुर्थांश (II) में स्थित होगा।
4. अक्षों पर स्थित बिंदुओं के निर्देशांक (Points on Axes) ⚠️🛑⭐⭐⭐⭐⭐
यह खंड परीक्षाओं में वैचारिक (Conceptual) वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है:
- X-अक्ष पर स्थित बिंदु ⭐⭐⭐⭐⭐: X-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु की Y-अक्ष से दूरी (कोटि) हमेशा शून्य (0) होती है।
- अतः, X-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक का रूप हमेशा
होता है। - उदाहरण:
।
- अतः, X-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक का रूप हमेशा
- Y-अक्ष पर स्थित बिंदु ⭐⭐⭐⭐⭐: Y-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु की X-अक्ष से दूरी (भुज) हमेशा शून्य (0) होती है।
- अतः, Y-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक का रूप हमेशा
होता है। - उदाहरण:
।
- अतः, Y-अक्ष पर किसी बिंदु के निर्देशांक का रूप हमेशा
[Image]
- बिंदु (4, 0) ──> X-अक्ष पर स्थित है।* बिंदु (0, -5) ──> Y-अक्ष पर स्थित है।
5. समतल (ग्राफ) पर बिंदु का आलेखन / निरूपण (Plotting a Point) ✍️📈
कागज या ग्राफ पेपर पर किसी बिंदु
- मूल बिंदु
से शुरू करें। - यदि
धनात्मक है, तो -अक्ष पर दाईं ओर चलें; यदि ऋणात्मक है, तो बाईं ओर चलें। - उस बिंदु पर पहुँचने के बाद, यदि
धनात्मक है, तो ऊपर की ओर चलें; यदि ऋणात्मक है, तो नीचे की ओर चलें। - अंतिम स्थान पर एक बिंदु बनाकर उसे नामांकित (जैसे-
) कर दें।
🚀 परीक्षा और प्रतियोगिता विशेष शार्टकट हाइलाइट्स (BSEB / CBSE Key Notes)
- दूरी हमेशा धनात्मक होती है ⚠️: यदि आपसे पूछा जाए कि बिंदु
की X-अक्ष से दूरी कितनी है? तो उत्तर इकाई होगा (चिह्न केवल दिशा दर्शाता है, दूरी कभी ऋणात्मक नहीं होती)। - शॉर्टकट ट्रिक: X-अक्ष से दूरी = |कोटि| (यानी
का धनात्मक मान) और Y-अक्ष से दूरी = |भुज| (यानी का धनात्मक मान)।
- शॉर्टकट ट्रिक: X-अक्ष से दूरी = |कोटि| (यानी
- क्रम का महत्व:
और समान बिंदु नहीं होते जब तक कि न हो। (जैसे- बिंदु प्रथम चतुर्थांश में अलग स्थान पर होगा और अलग स्थान पर)। - अक्ष चतुर्थांश का भाग नहीं होते: X-अक्ष या Y-अक्ष पर स्थित बिंदु (जैसे
या ) किसी भी चतुर्थांश के अंदर नहीं माने जाते, वे सीधे अक्षों पर स्थित होते हैं।
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