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BSEB Class 9 History Chapter 3 Summary & Notes

🇫🇷 इकाई-3: फ्रांस की क्रांति (French Revolution - 1789)

सन् 1789 की फ्रांस की क्रांति विश्व इतिहास की एक युगांतकारी घटना थी। इसने पुरातन सामंतवादी व्यवस्था को समाप्त कर दुनिया को 'स्वतंत्रता', 'समानता' और 'बंधुत्व' (Liberty, Equality, Fraternity) का अमर संदेश दिया।


📌 फ्रांस की क्रांति के प्रमुख कारण (Causes)

फ्रांस की पुरातन व्यवस्था (Ancient Regime) के भीतर कई ऐसे दोष थे जिन्होंने जनता को क्रांति के कगार पर खड़ा कर दिया:

👑 ① राजनीतिक कारण (Political Causes)

  • निरंकुश और अयोग्य शासक: बूर्बो राजवंश का राजा लुई XVI (Louis XVI) 1774 ई० में गद्दी पर बैठा। वह अत्यधिक क्रूर, फिजूलखर्च और अयोग्य था।
  • रानी मेरी अंतोयनेत का प्रभाव: लुई XVI की ऑस्ट्रियाई पत्नी शासन के कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप करती थी और उत्सवों में पानी की तरह पैसा बहाती थी। राजा के वर्साय महल में 15,000 ऐसे अधिकारी थे जो कोई काम नहीं करते थे पर भारी वेतन लेते थे।
  • स्टेट्स जेनरल की उपेक्षा: यह फ्रांस की संसदीय संस्था थी, लेकिन राजा की निरंकुशता के कारण 175 वर्षों (1614 ई० के बाद) से इसकी कोई बैठक नहीं बुलाई गई थी

👥 ② सामाजिक कारण (Social Causes) - तीन एस्टेट्स

तत्कालीन फ्रांसीसी समाज तीन श्रेणियों (Estates) में विभाजित था:

  1. प्रथम एस्टेट (पादरी वर्ग - Clergy): इनकी संख्या लगभग 1.3 लाख थी। ये देश के सबसे अमीर लोग थे और इन्हें कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था।
  2. द्वितीय एस्टेट (कुलीन/अभिजात वर्ग - Nobility): इसमें लगभग 80,000 परिवार शामिल थे। प्रथम और द्वितीय एस्टेट के पास फ्रांस की 40% ज़मीन थी और दोनों टैक्स से पूरी तरह मुक्त थे।
  3. तृतीय एस्टेट (जनसाधारण/मध्यम वर्ग - Bourgeois): इसमें समाज का 90% हिस्सा आता था, जिसमें डॉक्टर, वकील, शिक्षक, किसान और मजदूर शामिल थे। राज्य का सारा टैक्स अकेले इसी वर्ग को चुकाना पड़ता था। इनमें कुलीनों जैसा सम्मान न मिलने के कारण गहरा असंतोष था।

🗣️ प्रसिद्ध कथन: "कुलीन लड़ते हैं, पादरी पूजा करते हैं और जनता (तीसरा एस्टेट) सारा खर्च उठाती है।"

💰 ③ आर्थिक कारण (Economic Causes)

  • भारी कर्ज़ और फिजूलखर्ची: अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में इंग्लैंड के खिलाफ भाग लेने के कारण फ्रांस पर 10 अरब लिब्रे (तत्कालीन मुद्रा) से अधिक का कर्ज चढ़ गया था।
  • अन्यायपूर्ण कर प्रणाली: किसानों को भूमि कर 'टैले' (Taille) और चर्च को धार्मिक कर 'टीथे' (Tithe) देना पड़ता था। नमक और तंबाकू जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों पर भी भारी अप्रत्यक्ष कर लागू था।
  • टैक्स-फार्मर: टैक्स वसूलने का ठेका पूंजीपतियों को दिया जाता था, जो किसानों का बेरहमी से शोषण करते थे। औद्योगिक क्रांति के कारण हाथ के कारीगर बेरोजगार हो गए थे।

⚔️ ④ सैनिक, व्यक्तिगत और धार्मिक कारण

  • सैनिक असंतोष: सैनिकों को कम वेतन, खराब भोजन और कठोर अनुशासन में रखा जाता था। उच्च पद केवल कुलीनों के लिए आरक्षित थे।
  • स्वतंत्रता का अभाव: नागरिकों को भाषण या विचार प्रकट करने की आजादी नहीं थी। राजा बिना किसी कारण के किसी को भी एक विशेष वारंट 'लेटर्स-द-कैचेट' (Letters-de-cachet) के ज़रिए गिरफ्तार कर सकता था।

🧠 ⑤ बौद्धिक कारण (Role of Philosophers)

फ्रांसीसी दार्शनिकों ने अपनी किताबों से जनता के भीतर चेतना और आक्रोश की आग जलाई:

  • मोंटेस्क्यू (Montesquieu): अपनी पुस्तक 'विधि की आत्मा' (The Spirit of Laws) में 'शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत' (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को अलग रखने) दिया।
  • वाल्टेयर (Voltaire): इन्होंने चर्च और राजतंत्र के दोषों और भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार किया।
  • रूसो (Rousseau): अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'सामाजिक संविदा' (Social Contract) में जनतंत्र का समर्थन किया और कहा कि 'संप्रभुता जनता की सामान्य इच्छा में है'.
  • दिदरो (Diderot): इन्होंने अपने 'वृहद ज्ञानकोष' (Encyclopaedia) के माध्यम से क्रांतिकारी विचारों का प्रचार किया।

📅 क्रांति का घटनाक्रम (Timeline of Revolution)

  • 5 मई 1789 ई०: नए टैक्स लगाने के लिए लुई XVI ने स्टेट्स जेनरल की बैठक बुलाई। तीसरे एस्टेट ने 'एक व्यक्ति, एक वोट' की मांग की, जिसे राजा ने ठुकरा दिया।
  • 20 जून 1789 ई० (टेनिस कोर्ट की शपथ): तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधि विरोध जताते हुए बाहर आ गए और वर्साय के एक 'टेनिस कोर्ट' में जमा होकर खुद को 'नेशनल एसेम्बली' घोषित कर दिया। उन्होंने शपथ ली कि जब तक देश का संविधान नहीं बन जाता, वे हटेंगे नहीं।
  • 💥 14 जुलाई 1789 (बैस्टिल का पतन): राजा द्वारा नेशनल एसेम्बली को भंग करने की अफवाह फैली। उग्र जनता ने पेरिस स्थित शाही जेल 'बैस्टिल के किले' (Bastille) पर हमला कर फाटक तोड़ दिया और बंदियों को आज़ाद करा लिया। बैस्टिल का पतन राजा की निरंकुशता के अंत का प्रतीक था, इसीलिए 14 जुलाई को फ्रांस का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
  • 27 अगस्त 1789 ई०: नेशनल एसेम्बली ने 'मानव और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा' को स्वीकार किया, जिसने विचार, प्रेस और धार्मिक स्वतंत्रता को मान्यता दी।
  • 1791 ई०: फ्रांस में नया संविधान बना और संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई।

🩸 ⑥ आतंक का राज्य (Reign of Terror - 1793-1794)

  • नेतृत्व: नेशनल एसेम्बली के बाद चुनी गई नई एसेम्बली को 'कन्वेंशन' कहा गया। इस दौरान वामपंथी विचारधारा के जैकोबिन क्लब का प्रभाव बढ़ा, जिसका नेता मैक्समिलियन रॉब्सपियर था।
  • क्रूरता: रॉब्सपियर ने फ्रांस में 'आतंक का राज्य' स्थापित किया। मात्र 14 महीनों में लगभग 17,000 विरोधियों पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी (गिलोटीन) दे दी गई।
  • राजा को फांसी: देशद्रोह के आरोप में राजा लुई XVI को 21 जनवरी 1793 को फांसी दे दी गई और बाद में रानी मेरी अंतोयनेत को भी मौत के घाट उतार दिया गया।
  • अंत: जुलाई 1794 में रॉब्सपियर की अत्यधिक हिंसक कार्रवाइयों से तंग आकर विशेष न्यायालय ने उसे ही मृत्युदंड दे दिया। इसके बाद 1795 में नया संविधान बना और आगे चलकर नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का प्रधान बना।

📈 फ्रांस की क्रांति के दूरगामी परिणाम (Results)

  • ⚖️ पुरातन व्यवस्था का अंत: सामंतवाद का हमेशा के लिए अंत हो गया और समाज में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की नींव पड़ी।
  • 🕊️ धर्मनिरपेक्ष राज्य: चर्च को राज्य से अलग कर पहली बार धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular State) की स्थापना हुई।
  • ⛓️ दास प्रथा का उन्मूलन: 1794 में कन्वेंशन ने दास मुक्ति कानून पास किया और अंततः 1848 ई० तक फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास प्रथा का पूरी तरह उन्मूलन हो गया।
  • 👩‍🦱 महिला आंदोलन की शुरुआत: महिलाओं ने 'द सोसायटी ऑफ रिवॉल्यूशनरी एंड रिपब्लिकन वीमेन' नामक संस्था बनाई और पुरुषों के समान अधिकारों की मांग की, जिसके लंबे संघर्ष के बाद 1946 ई० में फ्रांस की महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला.
  • 🌍 अन्य देशों पर प्रभाव (यूरोप का जागरण):
    • इटली और जर्मनी: नेपोलियन के अभियानों से इटली और जर्मनी के छोटे राज्यों में राष्ट्रीयता की भावना जागी और उनके भावी एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
    • इंग्लैंड: सामंतवाद के खिलाफ आवाज उठी और 1832 में 'संसदीय सुधार अधिनियम' पारित हुआ।

🏁 क्रांति का स्वरूप (Nature of the Revolution)

इतिहासकारों के अनुसार फ्रांस की क्रांति मुख्य रूप से एक बुर्जुआई (मध्यम वर्गीय) क्रांति थी. यद्यपि इसे सफल बनाने में किसानों और मजदूरों ने अपना खून बहाया, लेकिन क्रांति का नेतृत्व, विचार और सबसे अधिक लाभ शिक्षित मध्यम वर्ग ( Bourgeois class) को ही प्राप्त हुआ।

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्षतः, कक्षा 9 इतिहास की इकाई-3 "फ्रांस की क्रांति (1789)" ने वैश्विक स्तर पर पुरातनपंथी सामंती व्यवस्था का अंत कर स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आधुनिक विचारों की नींव रखी। इस ऐतिहासिक क्रांति के कारण, घटनाक्रम और दूरगामी परिणाम आज भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के प्रेरणास्रोत हैं। आशा है कि ये सटीक नोट्स आपकी BSEB बोर्ड परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने में मददगार साबित होंगे।

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