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BSEB Class 9 Science Chapter 7 Notes Hindi

📘 NCERT कक्षा 9 विज्ञान | अध्याय 7: जीवों में विविधता (Diversity in Living Organisms) - Full Notes & Summary

⚠️ महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम सूचना (Syllabus Alert): नवीनतम NCERT/SCERT (बिहार बोर्ड सहित) पाठ्यपुस्तकों के युक्तिकरण (Rationalization) के अनुसार, इस पूरे अध्याय को स्कूल स्तर के नियमित थ्योरी परीक्षाओं से आंशिक रूप से हटाया गया है। लेकिन BSEB (बिहार बोर्ड ऑब्जेक्टिव), CUET, NEET Foundation, पैरामेडिकल (BCECEB), NTSE, और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, BPSC, Railway) के लिए यह जैव विज्ञान का अत्यधिक महत्वपूर्ण और आधारभूत अध्याय बना हुआ है। यह नोट्स पूर्णतः प्रामाणिक NCERT और BSTBPC (बिहार स्टेट टेक्स्टबुक) के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित हैं।


⚡ अध्याय का विहंगम दृश्य (Chapter Overview)

हमारी पृथ्वी पर सूक्ष्म बैक्टीरिया से लेकर 30 मीटर लंबी नीली ह्वेल और 100 मीटर ऊंचे रेडवुड (सिकोया) के पेड़ तक करोड़ों प्रकार के जीव पाए जाते हैं। जीवों के इसी विशाल रूप को 'जैव विविधता' (Biodiversity) कहते हैं। इतने सारे जीवों का अलग-अलग अध्ययन करना असंभव था, इसलिए वैज्ञानिकों ने उनके बीच की समानताओं और विभिन्नताओं के आधार पर उन्हें समूहों में वर्गीकृत किया। इस अध्याय में हम वर्गीकरण के इतिहास, द्विपद नामकरण पद्धति और जीव जगत के 'पाँच जगत वर्गीकरण' (Five Kingdom Classification) को बहुत आसान और फ्लोचार्ट की मदद से समझेंगे।

🧠 माइंड मैप (Quick Mind Map)

  • वर्गीकरण का आधार ➡️ प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक, एककोशिकीय/बहुकोशिकीय, स्वपोषी/विषमपोषी।
  • वर्गीकरण का पदानुक्रम ➡️ जगत (Kingdom) ➔ संघ (Phylum) ➔ वर्ग (Class) ➔ गण (Order) ➔ कुल (Family) ➔ वंश (Genus) ➔ जाति (Species)।
  • विटेकर का 5 जगत सिद्धांत ➡️ मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंगस (कवक), प्लांटी (पादप), एनिमेलिया (जंतु)।
  • पादप वर्गीकरण ➡️ थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म।
  • जंतु वर्गीकरण ➡️ पोरिफेरा से लेकर कशेरुकी (मत्स्य, जल-स्थल चर, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी) तक।
  • द्विपद नामकरण ➡️ कैरोलस लीनियस द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक नाम (वंश + जाति)।

🔬 1. वर्गीकरण और उसका आधार (Classification & Evolution)

  • वर्गीकरण (Classification): जीवों को उनकी समानताओं और असमानताओं के आधार पर विभिन्न समूहों में व्यवस्थित करने की क्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।
  • वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy): जीव विज्ञान की वह शाखा जो वर्गीकरण के सिद्धांतों और नियमों का अध्ययन करती है। कैरोलस लीनियस को 'वर्गीकरण विज्ञान का जनक' (Father of Taxonomy) कहा जाता है।

🧬 वर्गीकरण और जैव विकास का संबंध

महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने 1859 में अपनी पुस्तक 'द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' में जैव विकास की धारणा दी थी। इसके अनुसार, आज के जटिल जीव समय के साथ सरल जीवों में हुए क्रमिक परिवर्तनों (विकास) के परिणामस्वरूप बने हैं।

  • आदिम या निम्न जीव (Primitive): जिनकी शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है (जैसे बैक्टीरिया)।
  • उन्नत या जटिल जीव (Advanced): जिनकी शारीरिक संरचना में विकास के कारण जटिलता आ गई है (जैसे स्तनधारी)।

🪜 2. वर्गीकरण समूह का पदानुक्रम (Hierarchy of Groups)

अर्नस्ट हेकेल (1894), रॉबर्ट विटेकर (1969) और कार्ल वोस (1977) जैसे वैज्ञानिकों ने सारे सजीवों को बड़े 'जगत' (Kingdoms) में विभाजित किया। विटेकर द्वारा दिया गया 'पाँच जगत वर्गीकरण' सबसे प्रामाणिक माना जाता है।

📋 वर्गीकरण के स्तर (पदानुक्रम)

जीवों को वर्गीकृत करते समय नीचे दिए गए उप-समूहों के क्रम का पालन किया जाता है:

📌 जाति (Species) - वर्गीकरण की सबसे छोटी और आधारभूत इकाई है। इसमें वे जीव आते हैं जो आपस में बाह्य रूप से समान होते हैं और जनन करके उपजाऊ संतान उत्पन्न कर सकते हैं।


👑 3. विटेकर का पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Scheme)

रॉबर्ट विटेकर ने सजीवों को उनकी कोशिकीय संरचना, पोषण के स्रोत और शारीरिक संगठन के आधार पर पाँच मुख्य जगतों में बाँटा:

text
                                सजीव (Living Organisms)
             ______________________________│______________________________
            │                                                             │
     प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic)                                    यूकैरियोटिक (Eukaryotic)
    (केंद्रक झिल्ली रहित)                                           (सुविकसित केंद्रक युक्त)
            👇                                                    ________│________
    👑 1. मोनेरा (Monera)                                        │                 │
    (उदा: बैक्टीरिया)                                      एककोशिकीय            बहुकोशिकीय
                                                         (Unicellular)       (Multicellular)
                                                               👇                  👇
                                                      👑 2. प्रोटिस्टा     _______│_______
                                                      (उदा: अमीबा)        │               │
                                                                    कोशिका भित्ति युक्त कोशिका भित्ति रहित
                                                                          👇              👇
                                                                    ______│______   👑 5. एनिमेलिया
                                                                   │             │  (जंतु - विषमपोषी)
                                                            प्रकाश संश्लेषण  प्रकाश संश्लेषण
                                                            नहीं करने वाले   करने वाले (स्वपोषी)
                                                                   👇            👇
                                                            👑 3. फंगस/कवक   👑 4. प्लांटी
                                                            (उदा: मशरूम)    (सभी पेड़-पौधे)

📊 पाँचों जगतों की मुख्य विशेषताएँ

  1. मोनेरा (Monera): ये प्रोकैरियोटिक, एककोशिकीय जीव हैं। इनमें सुविकसित केंद्रक और झिल्ली युक्त अंगक नहीं होते। कुछ में कोशिका भित्ति होती है (बैक्टीरिया) और कुछ में नहीं (माइकोप्लाज्मा)। उदाहरण: जीवाणु (Bacteria), नील-हरित शैवाल, एनैबीना।
  2. प्रोटिस्टा (Protista): ये यूकैरियोटिक और एककोशिकीय जीव हैं। गमन (चलने) के लिए इनमें बाल जैसी संरचनाएँ (सीलिया) या कूटपाद पाए जाते हैं। ये स्वपोषी या विषमपोषी दोनों हो सकते हैं। उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना।
  3. फंगस / कवक (Fungi): ये यूकैरियोटिक और अधिकांशतः बहुकोशिकीय विषमपोषी जीव हैं। ये मृत कार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन सोखते हैं, इसलिए इन्हें मृतजीवी (Saprophytes) कहते हैं। इनकी कोशिका भित्ति 'काइटिन' (Chitin) नामक जटिल शर्करा की बनी होती है (VVI Point)। उदाहरण: यीस्ट, मशरूम, पेनिसिलियम।
    • 🤝 लाइकेन (Lichens): कवक और नीले-हरे शैवाल (सिम्बायोटिक) के बीच के सहजीवी संबंध को लाइकेन कहते हैं। ये पेड़ों की छालों पर उगते हैं और वायु प्रदूषण (विशेषकर ) के अच्छे सूचक होते हैं।

🌿 4. पादप जगत का वर्गीकरण (Kingdom - Plantae)

पौधों को उनके शारीरिक घटकों, संवहन ऊतकों (जाइलम/फ्लोएम) की उपस्थिति और बीज धारण करने की क्षमता के आधार पर 5 मुख्य भागों में बाँटा गया है:

① थैलोफाइटा (Thallophyta)

  • विशेषता: इन पौधों की शारीरिक संरचना में जड़, तना और पत्ती अलग-अलग नहीं होते। इनका शरीर एक थैलस (Thallus) की तरह होता है। इन्हें सामान्यतः शैवाल (Algae) कहते हैं। ये मुख्य रूप से जल में पाए जाते हैं।
  • उदाहरण: स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स, कारा (Chara), अल्वा।

② ब्रायोफाइटा (Bryophyta)

  • विशेषता: इन्हें 'पादप जगत का जल-स्थल चर' (Amphibians of Plant Kingdom) कहा जाता है, क्योंकि ये भूमि पर रहते हैं लेकिन जनन के लिए जल पर निर्भर करते हैं। इनमें संवहन ऊतक (जाइलम/फ्लोएम) नहीं होते।
  • उदाहरण: मॉस (फ्यूनारिया), रिक्सिया, मर्केंशिया।

③ टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)

  • विशेषता: इन पौधों का शरीर जड़, तने और पत्तियों में विभाजित होता है। इनमें जल और भोजन के संवहन के लिए सुविकसित संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं (प्रथम संवहनी पौधे)। इनमें बीज नहीं बनते, ये बीजाणु (Spores) द्वारा जनन करते हैं।
  • उदाहरण: मार्सिलिया, फर्न, हॉर्स-टेल।

🔒 क्रिप्टोगैम (Cryptogams): थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में जननांग अप्रत्यक्ष (छिपे हुए) होते हैं और इनमें बीज उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती, इसलिए इन्हें क्रिप्टोगैम कहते हैं।

④ जिम्नोस्पर्म (Gymnocarp / Gymnosperms - नग्नबीजी)

  • विशेषता: 'Gymno' का अर्थ है नग्न और 'Sperma' का अर्थ है बीज। अर्थात इन पौधों के बीज पूरी तरह नग्न (बिना फल के आवरण के) होते हैं। ये बारहमासी, सदाबहार और काष्ठीय पौधे होते हैं।
  • उदाहरण: पाइनस (Pine), साइकस (Cycas)।

⑤ एंजियोस्पर्म (Angiosperms - आवृतबीजी)

  • विशेषता: 'Angio' का अर्थ है ढका हुआ। इन पौधों के बीज फल के अंदर ढके होते हैं। इन्हें 'पुष्पी पादप' (Flowering plants) भी कहते हैं। भोजन का संचय बीजपत्रों (Cotyledons) में होता है।
  • बीजों के आधार पर ये दो प्रकार के होते हैं:
    • एकबीजपत्री (Monocots): जिनके बीजों के दो टुकड़े नहीं किए जा सकते (जैसे- मक्का, गेहूँ, चावल, घास)।
    • द्विबीजपत्री (Dicots): जिनके बीजों में दो समान बीजपत्र होते हैं (जैसे- चना, मटर, आम, सरसों)।

🦁 5. जंतु जगत का वर्गीकरण (Kingdom - Animalia)

जंतु यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय और विषमपोषी जीव हैं जिनमें कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती। इन्हें शारीरिक संगठन, सममिति (Symmetry) और कोलोम (गुहा) के आधार पर 10 मुख्य संघों (Phylums) में बाँटा गया है:

🅰️ अकशेरुकी जंतु (Invertebrates - रीढ़ की हड्डी रहित)

  1. पोरिफेरा (Porifera): इनके पूरे शरीर पर छोटे-छोटे छिद्र (ऑस्टिया) पाए जाते हैं। ये अचल जीव हैं जो समुद्र की तली से चिपके रहते हैं। इनके शरीर में एक 'नाल तंत्र' (Canal system) होता है जिससे पानी और भोजन का परिवहन होता है। उदाहरण: साइकॉन, स्पंजिला।
  2. सिलेंट्रेटा / नाइडेरिया (Coelenterata): ये जलीय जीव हैं जिनकी शारीरिक गुहा खाली होती है। इनके पास डंक मारने वाली कोशिकाएँ (दंश कोशिकाएँ) होती हैं। उदाहरण: हाइड्रा, जेलीफ़िश, कोरल (मूंगा)।
  3. प्लेटिहेल्मिंथिस (Platyhelminthes - चपटे कृमि): इनका शरीर चपटा और द्विपार्श्व सममित (Bilaterally symmetrical) होता है। इनमें वास्तविक देहगुहा नहीं होती। ये अधिकांशतः परजीवी होते हैं। उदाहरण: प्लेनेरिया, फीताकृमि (Tapeworm)।
  4. नेमैटोडा / एशहेल्मिंथिस (Nematoda - गोल कृमि): इनका शरीर बेलनाकार और दोनों सिरों पर नुकीला होता है। इनमें कूट-देहगुहा (Pseudocoelom) पाई जाती है। उदाहरण: एस्कैरिस (पेट के कीड़े), वुचेरेरिया (जिससे हाथीपाँव रोग होता है)।
  5. एनेलिडा (Annelida - खंडित कृमि): इनका शरीर सिर से पूंछ तक छल्लों जैसे खंडों में विभाजित होता है। इसमें वास्तविक देहगुहा और संवहन तंत्र होता है। उदाहरण: केंचुआ (Earthworm), जोंक (Leech)।
  6. आर्थ्रोपोडा (Arthropoda): यह जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ है (Super VVI Point)। इनके पैर जुड़े हुए (Jointed legs) होते हैं। इनका शरीर सिर, वक्ष और उदर में बंटा होता है और बाहर काइटिन का कंकाल होता है। उदाहरण: तितली, मक्खी, झींगा, केकड़ा, बिच्छू, मकड़ी।
  7. मोलस्का (Mollusca): इनका शरीर बहुत कोमल होता है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए ऊपर कैल्शियम कार्बोनेट का कड़ा कवच होता है। इसमें खुला संवहन तंत्र होता है। उदाहरण: घोंघा (Snail), सीप, ऑक्टोपस।
  8. इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata): 'Echinos' का अर्थ है काँटा। इन जलीय जीवों की त्वचा पर कैलिसयमयुक्त काँटे पाए जाते हैं। इसमें गमन के लिए एक विशिष्ट 'जल संवहन नाल तंत्र' (Water vascular system) होता है। उदाहरण: तारा मछली (Starfish), समुद्री अर्चिन।

🅱️ कशेरुकी जंतु (Vertebrates / Chordata - रीढ़ की हड्डी युक्त)

इन जीवों में नोटोकॉर्ड (पृष्ठरज्जु), ग्रसनी क्लोम छिद्र और एक सुविकसित रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) पाई जाती है। इन्हें 5 प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है:

कशेरुकी जंतु (Vertebrates)

├───────────────────────────────────────────────────────────┐
│ मत्स्य (Pisces) │ उभयचर (Amphibia) │ सरीसृप (Reptilia) │ पक्षी (Aves) │ स्तनधारी (Mammalia)
│───────────────┼───────────────────┼─────────────────┼─────────────┼──────────────────
│ • मछलियाँ।    │ • मेंढक, सालामैंडर। │ • साँप, कछुआ, │ • सभी पक्षी। │ • मानव, ह्वेल, │
│               │                   │   मगरमच्छ।     │              │   चमगादड़।       │
│               │                   │                │              │                   │
│ • शल्क व गलफड़े।│ • त्वचा व फेफड़े। │ • पर, पंख और    │ • त्वचा/पंख?   │ • त्वचा में स्तन   │
│               │                   │   मगरमच्छ के लिए│  (सामान्य)   │   ग्रंथियां, बाल। │
│               │                   │   (पर/पंख)    │              │                   │
│ • असमतापी।    │ • असमतापी।       │ • असमतापी।     │ • समतापी।    │ • समतापी।       │
│               │                   │                │              │                   │
│ • हृदय: 2-कोष्ठी।│ • हृदय: 3-कोष्ठी।│ • हृदय: 3-कोष्ठी।│ • हृदय: 4-कोष्ठी।│ • हृदय: 4-कोष्ठी।│
│               │                   │ (मगरमच्छ: 4)   │              │ (सामान्य: 4)     │
└───────────────────────────────────────────────────────────┘
  1. मत्स्य (Pisces): ये पानी में रहने वाले असमतापी (Cold-blooded) जीव हैं। इनकी त्वचा शल्क (Scales) से ढकी होती है और ये गलफड़ों (Gills) से सांस लेते हैं। इनका हृदय 2-कोष्ठीय (Two-chambered) होता है। ये अंडे देते हैं। उदाहरण: रोहू, कतला, शार्क, समुद्री घोड़ा।
  2. जल-स्थल चर (Amphibia): ये पानी और जमीन दोनों पर रह सकते हैं। इनकी त्वचा पर ग्रंथियाँ होती हैं (शल्क नहीं होते)। ये फेफड़ों और त्वचा दोनों से सांस ले सकते हैं। इनका हृदय 3-कोष्ठीय होता है। ये असमतापी होते हैं। उदाहरण: मेंढक, टोड, सालामैंडर।
  3. सरीसृप (Reptilia): ये रेंगकर चलने वाले असमतापी जीव हैं। इनका शरीर कठोर शल्कों से ढका होता है और ये फेफड़ों से सांस लेते हैं। इनका हृदय 3-कोष्ठीय होता है।
  • ⚠️ अपवाद: मगरमच्छ (Crocodile) का हृदय 4-कोष्ठीय होता है (BSEB/NEET का हॉट प्रश्न)। उदाहरण: साँप, छिपकली, कछुआ, मगरमच्छ।

  1. पक्षी (Aves): ये समतापी (Warm-blooded) जीव हैं, अर्थात इनके शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के साथ नहीं बदलता। इनके अग्रपाद पंखों में बदल जाते हैं। ये फेफड़ों से सांस लेते हैं। इनका हृदय 4-कोष्ठीय होता है। ये अंडे देते हैं। उदाहरण: कबूतर, गौरैया, शुतुरमुर्ग।
  2. स्तनधारी (Mammalia): ये सबसे विकसित समतापी जीव हैं। नवजात शिशु के पोषण के लिए इनमें स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands) पाई जाती हैं। इनकी त्वचा पर बाल और तेल/पसीने की ग्रंथियाँ होती हैं। इनका हृदय 4-कोष्ठीय होता है। ये सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
  • ⚠️ अपवाद: एकैडिना और प्लैटिपस ऐसे स्तनधारी हैं जो बच्चे नहीं बल्कि अंडे देते हैं (Super VVI MCQ). ह्वेल मछली और चमगादड़ भी स्तनधारी वर्ग में आते हैं, मछली या पक्षी में नहीं।

📛 6. द्विपद नामकरण पद्धति (Binomial Nomenclature)

विश्व में एक ही जीव को अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है (जैसे गौरैया को हिंदी में गौरैया, अंग्रेजी में Sparrow कहते हैं), जिससे भ्रम पैदा होता था। इस समस्या को दूर करने के लिए कैरोलस लीनियस ने वैज्ञानिक नामकरण की पद्धति दी।

  • नियम: किसी भी जीव के वैज्ञानिक नाम के दो भाग होते हैं:
    • पहला भाग— वंश का नाम (Genus): इसका पहला अक्षर हमेशा अंग्रेजी के बड़े अक्षर (Capital letter) से शुरू होता है।
    • दूसरा भाग— जाति का नाम (Species): इसे छोटे अक्षरों (Small letters) में लिखा जाता है।
  • वैज्ञानिक नाम हमेशा इटैलिक्स (तिरछे) लिखे जाते हैं और हाथ से लिखते समय उनके नीचे अलग-अलग अंडरलाइन की जाती है।
  • उदाहरण:
    • मानव का वैज्ञानिक नाम ➡️ Homo sapiens (होमो सैपियन्स)
    • मेंढक का वैज्ञानिक नाम ➡️ Rana tigrina (राना टिग्रिना)
    • आम का वैज्ञानिक नाम ➡️ Mangifera indica (मेंगीफेरा इंडिका)

🎯 परीक्षा बूस्टर डोज (Exam-Points & Super Tricks)

⚡ King Size Shortcuts:

  • जंतु जगत का किंगडम लीडर ➡️ आर्थ्रोपोडा (कीड़े-मकोड़े, जुड़े पैर)।
  • पादप जगत का उभयचर ➡️ ब्रायोफाइटा (जमीन पर घर, पानी में जनन)।
  • रीढ़ की हड्डी के बिना शेल वाला बॉस ➡️ मोलस्का (घोंघा, ऑक्टोपस)।
  • हृदय कोष्ठक ट्रिक: मछली = 2 | मेंढक/साँप = 3 (मगरमच्छ = 4) | पक्षी/मानव = 4 कोष्ठक।
  • अंडे देने वाले अनोखे स्तनधारी ➡️ प्लैटिपस और एकैडिना।
  1. काइटिन (Chitin): फंगस की दीवार इसी से बनती है, यह एक बेहद मजबूत प्राकृतिक बहुलक (Polymer) है।
  2. समानता सूचक लाइकेन: प्रदूषण बढ़ने पर (विशेष रूप से कारखानों के सल्फर डाइऑक्साइड के धुएँ से) लाइकेन सूखकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण वैज्ञानिक प्रदूषण का सटीक अंदाजा लगा लेते हैं।

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

'जीवों में विविधता' का अध्याय हमें पृथ्वी के विस्तृत और खूबसूरत सजीव कैनवास को समझने का वैज्ञानिक चश्मा प्रदान करता है। प्रकृति ने लाखों प्रकार के डिजाइनों में जीवन को उकेरा है— बैक्टीरिया के सरल प्रोकैरियोटिक धागों से लेकर मानव के सुविकसित 4-कोष्ठीय तंत्रिका तंत्र तक। विटेकर का पाँच जगत वर्गीकरण और लीनियस की द्विपद नामकरण पद्धति हमें इस विशाल जैव-संसार को व्यवस्थित और अनुशासित रूप में पढ़ना सिखाती है। पादप जगत के संवहनी विकास (थैलोफाइटा से एंजियोस्पर्म) और जंतु जगत के कशेरुकी विकास क्रम की यह समझ उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, CUET, BPSC/BSEB Foundation) के जीव विज्ञान खंड को फतेह करने का सबसे अचूक और मजबूत हथियार है।

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By Guddu Kumar

हिंदी व्याकरण Ch 1 Important Questions & PYQ नोट्स

भाषा ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 12 वर्ण-विचार Books Based Questions ⚡ Competitive exam 📋 Bihar Board - Class 10 📋 Bihar Board - Class 10 PYQ 📋 Bihar Board - Class 12 📋 Bihar Board - Class 12 PYQ वर्तनी ⚡ Competitive exam विराम-चिह्ना ⚡ Competitive exam 🏁 निष्कर्ष (Conclusion) भाषा ​ ### 📙 Book Based Questions प्रश्‍न 1 : हिन्दी भाषा का प्रादुर्भाव किस भाषा से हुआ? पालि संस्कृत अपभ्रंश प्राकृत उत्तर : सही विकल्प () है। प्रश्‍न 2 : भारतीय आर्य भाषाओं को कितनी भाषाओं में विभाजित किया गया है? तीन चार पाँच दो उत्तर : सही विकल्प () है। प्रश्‍न 3 : प्राचीन भारतीय आर्य भाषा के अन्तर्गत कौन-सी भाषा आती है? वैदिक संस्कृत लौकिक संस्कृत अवहट्ठ 'a' तथा 'b' दोनों उत्तर : सही विकल्प () है। प्रश्‍न 4 : बौद्ध साहित्य की रचना किस भाषा से हुई? संस्कृत प्राकृत पालि अपभ्रंश उत्तर : सही विकल्प () है। प्रश्‍न : मध्यकालीन आर्य भाषा की तीसरी अवस्था कौन-सी है? प्राकृत पालि संस्कृत अपभ्रंश उत्तर : सही विकल्प () है। प्रश्‍न : भोजपुरी बोली का क्षेत्र है पटना दरभंगा बनार...
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