📖 अध्याय-5 : संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ
यह व्यापक, सारगर्भित और परीक्षा-उपयोगी डिजिटल नोट्स BSEB (कक्षा-9), CBSE, BPSC (Pre/Mains), SSC (CGL/CHSL), CUET, RRB NTPC और SCERT/SBTE परीक्षाओं के नवीनतम पैटर्न के अनुसार तैयार किए गए हैं।
🏛️ ① लोकतंत्र की तीन मुख्य संस्थाएँ (Three Pillars of Democracy)
आधुनिक लोकतांत्रिक देशों में शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और जनहित में निर्णय लेने के लिए तीन प्रमुख संस्थाएँ कार्य करती हैं:
- विधायिका (Legislature): इसका मुख्य कार्य देश के लिए नए कानून बनाना, पुराने कानूनों में संशोधन करना या उन्हें समाप्त करना है. केंद्र स्तर पर इसे संसद और राज्य स्तर पर विधानमंडल कहते हैं.
- कार्यपालिका (Executive): यह व्यक्तियों का ऐसा निकाय है जो विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों को व्यावहारिक रूप से लागू करने और फैसले लेने के लिए जिम्मेदार है.
- न्यायपालिका (Judiciary): यह कानूनी विवादों के निपटारे, नागरिकों और सरकार के बीच के मतभेदों को सुलझाने तथा संविधान की रक्षा करने वाली स्वतंत्र संस्था है.
📜 ② नीतिगत निर्णय की प्रक्रिया: मंडल आयोग केस स्टडी
देश में बड़े नीतिगत फैसले अचानक या किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिए जाते, बल्कि इसके पीछे एक लंबी संस्थागत प्रक्रिया होती है, जिसे कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के माध्यम से जारी किया जाता है।
🔍 मंडल आयोग (Mandal Commission) का घटनाक्रम
- 1979: भारत सरकार द्वारा बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में 'द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया गया।
- 1980: आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC/OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सिफारिश की गई।
- 1989: लोकसभा चुनाव में जनता दल ने इसे अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल किया।
- अगस्त 1990: प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इसे औपचारिक मंजूरी दी और 13 अगस्त 1990 को कार्मिक मंत्रालय के संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर से आदेश (O.M. No. 36012/31/90) जारी हुआ।
- ⚖️ इंदिरा साहनी केस (1992): इस फैसले के खिलाफ देशव्यापी विरोध हुआ और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं। सर्वोच्च न्यायालय के 11 वरिष्ठ न्यायाधीशों की पीठ ने 'इंदिरा साहनी एवं अन्य बनाम भारत सरकार' मामले में बहुमत से फैसला देते हुए आरक्षण को वैध ठहराया, लेकिन पिछड़े वर्ग के 'क्रीमी लेयर' (सम्पन्न लोगों) को इससे बाहर रखने का आदेश दिया।
🗂️ ③ कार्यपालिका के दो स्वरूप (Types of Executive)
संसदीय लोकतंत्र में कार्यपालिका दो भागों में विभाजित होती है:
Ⓐ राजनैतिक कार्यपालिका (Political Executive)
- स्वरूप: इसमें जनता द्वारा एक निश्चित अवधि (जैसे 5 वर्ष) के लिए चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं (जैसे—प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री)।
- शक्ति: शासन की वास्तविक नीतिगत शक्ति इन्हीं के पास होती है, क्योंकि ये सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
Ⓑ स्थायी कार्यपालिका / नौकरशाह (Permanent Executive / Bureaucrats)
- स्वरूप: इसमें सिविल सेवक (IAS, IPS आदि) और उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं。
- कार्यकाल: ये योग्यता के आधार पर दीर्घकालिक रूप से नियुक्त होते हैं और सेवानिवृत्ति (अवकाश ग्रहण) की आयु तक पद पर बने रहते हैं।
- कार्य: ये राजनैतिक कार्यपालिका को नीति-निर्धारण में विशेषज्ञ परामर्श देते हैं तथा मंत्रियों द्वारा लिए गए निर्णयों को अमली जामा पहनाते हैं।
🏛️ ④ संघ स्तर पर: संसद और उसकी कार्यप्रणाली
भारतीय संसद के तीन अंग हैं—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा। इसके दो सदन होते हैं:
📊 लोकसभा (प्रथम / निम्न सदन) बनाम राज्यसभा (द्वितीय / उच्च सदन)
| विशेषता | लोकसभा (Lok Sabha) | राज्यसभा (Rajya Sabha) |
|---|---|---|
| प्रतिनिधित्व | प्रत्यक्ष रूप से जनता का प्रतिनिधित्व | राज्यों और संघीय इकाइयों के हितों की निगरानी |
| चुनाव पद्धति | वयस्क मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष मतदान | प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा खुले मतदान से |
| कार्यकाल | सामान्यतः 5 वर्ष (समय से पहले भंग संभव) | स्थायी सदन (कभी भंग नहीं होता; प्रत्येक 2 वर्ष पर 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त, कार्यकाल 6 वर्ष) |
| अधिकतम सीटें | 550 निश्चित की गई हैं | अधिकतम 250 सदस्य |
| वित्तीय शक्तियां | अत्यधिक शक्तिशाली; धन विधेयक केवल यहीं पेश होता है | कमजोर; धन विधेयक को अधिकतम केवल 14 दिनों तक रोक सकती है |
🛠️ साधारण विधेयक के कानून बनने के 5 चरण
- प्रथम वाचन: किसी भी सदन में विधेयक का नाम, शीर्षक और मुख्य बातों को उपस्थापित करना।
- द्वितीय वाचन: विधेयक के प्रत्येक खंड पर विस्तार से चर्चा, प्रवर समिति (Select Committee) को भेजना और वाद-विवाद।
- तृतीय वाचन: भाषा शुद्धि के उपरांत विधेयक पर मतदान होना और सदन द्वारा पारित किया जाना।
- दूसरे सदन में प्रक्रिया: विधेयक दूसरे सदन में जाता है। गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त अधिवेशन (Joint Session) बुलाते हैं, जहाँ संख्या बल अधिक होने के कारण सामान्यतः लोकसभा की इच्छा प्रभावी होती है।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद विधेयक देश के कानून (Act) का रूप धारण कर लेता है और गजट में प्रकाशित होता है।
👑 ⑤ देश के प्रमुख पदाधिकारी: शक्तियां और भूमिका
Ⓐ भारत के राष्ट्रपति (President of India)
- निर्वाचन: अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा, जिसमें संसद के दोनों सदनों (LS + RS) और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं (मनोनित सदस्य भाग नहीं लेते)। विधि: अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मतपद्धति।
- कार्यकाल: 5 वर्ष। इन्हें संविधान के उल्लंघन पर संसद द्वारा महाभियोग (Impeachment) प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
- शक्तियां: ये कार्यपालिका के प्रधान और सेना के कमांडर-इन-चीफ होते हैं। प्रधानमंत्री, राज्यपालों, चुनाव आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं। संसद का सत्र न चलने पर अध्यादेश (Ordinance) जारी कर सकते हैं।
- 🚨 नोट (44वां संशोधन): राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं, परंतु दोबारा सलाह भेजे जाने पर वे उसे मानने के लिए बाध्य हैं।
Ⓑ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद (Prime Minister & Council of Ministers)
- नियुक्ति: राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।
- वास्तविक प्रधान: शासन की वास्तविक कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री ही करते हैं। मंत्रिपरिषद में अमूमन 60 से 80 मंत्री होते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री (प्रमुख मंत्रालयों के प्रभारी) होते हैं।
- गठबंधन सरकार की सीमा: गठबंधन का प्रधानमंत्री अपनी मर्जी से सारे फैसले नहीं ले सकता, उसे सहयोगी दलों की राय माननी पड़ती है (जैसे मनमोहन सरकार से परमाणु करार पर वामदलों का समर्थन वापस लेना)।
🏢 ⑥ राज्य स्तर पर: कार्यपालिका और विधानमंडल
भारत के संघीय ढांचे में राज्यों में भी केंद्र के अनुरूप ही व्यवस्था होती है:
- राज्यपाल (Governor): राज्य कार्यपालिका के नाममात्र के प्रधान, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल के परामर्श पर 5 वर्ष के लिए करते हैं। ये राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं। ये मृत्युदंड को पूर्णतः माफ नहीं कर सकते।
- मुख्यमंत्री (Chief Minister): विधानसभा के बहुमत दल का नेता और राज्य कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान।
- विधानमंडल (State Legislature): भारत के केवल 6 राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर [ऐतिहासिक संदर्भ] और महाराष्ट्र) में द्विसदनीय (विधानसभा + विधानपरिषद) व्यवस्था है, शेष राज्यों में एकसदनीय (केवल विधानसभा) है।
- बिहार विशेष: बिहार विधानसभा में 243 सदस्य और विधान परिषद में 75 सदस्य हैं। विधान परिषद एक स्थायी सदन है जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
⚖️ ⑦ एकीकृत भारतीय न्यायपालिका (Integrated Judiciary)
भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका की दोहरी न्याय व्यवस्था के विपरीत एकीकृत (Single/Integrated) न्यायपालिका है, जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय स्थित है।
🏛️ न्यायपालिका का पिरामिड ढांचा
- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court): नई दिल्ली (स्थापना: 26 जनवरी 1950)। इसके निर्णय देश की सभी अदालतों और सरकारों पर बाध्यकारी होते हैं।
- उच्च न्यायालय (High Court): राज्यों का शीर्ष न्यायालय। उदाहरण: पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 1 मार्च 1916 को हुई थी।
- अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts): जिला स्तर पर फौजदारी (Criminal), दीवानी (Civil) और राजस्व (Revenue) अदालतें। सबसे निचले स्तर पर ग्राम कचहरी होती है।
🔍 न्यायाधीशों की योग्यता, नियुक्ति एवं सुरक्षा
- योग्यता: भारत का नागरिक हो, किसी हाई कोर्ट में 5 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो या 10 वर्ष तक वकालत की हो, या राष्ट्रपति की नज़र में कानून का विशेषज्ञ हो।
- कार्यकाल: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक तथा हाई कोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।
- पद से हटाना: इन्हें हटाना अत्यंत कठिन है। संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है।
💡 Exam Points & Shortcuts (प्रतियोगी परीक्षा विशेष सूत्र)
- सीटों का फ्रीज (Freeze of Seats): अगस्त 2001 में संसद ने संशोधन पारित कर लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या को वर्ष 2026 तक के लिए स्थिर (Freeze) कर दिया है।
- उपप्रधानमंत्री पद: भारतीय संविधान में उपप्रधानमंत्री पद की कोई मूल व्यवस्था नहीं है। ऐतिहासिक रूप से मोरारजी देसाई ने जगजीवन राम और चौधरी चरण सिंह को, चंद्रशेखर ने चौधरी देवीलाल को तथा अटल बिहारी वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी को उपप्रधानमंत्री नियुक्त किया था।
- कोरम / गणपूर्ति (Quorum): राज्यसभा या लोकसभा की कार्यवाही चलाने के लिए कुल सदस्यों का न्यूनतम 1/10 भाग (10%) उपस्थित होना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
- कास्टिंग वोट (Casting Vote): लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को सामान्य दिनों में वोट देने का अधिकार नहीं होता, परंतु किसी मुद्दे पर मत बराबर (Tie) होने की स्थिति में वे अपना निर्णायक मत दे सकते हैं।
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
संसदीय लोकतंत्र की ये संस्थाएँ (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) आपस में एक जटिल संतुलन (Checks and Balances) के तहत काम करती हैं। मंडल आयोग और इंदिरा साहनी केस का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि कार्यपालिका नीतियां बनाती है, विधायिका उन पर बहस करती है और यदि कोई विवाद उत्पन्न हो, तो स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान के दायरे में उसका अंतिम और संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करती है।
Join the Discussion