📚 इकाई-3: गरीबी (Poverty) — संपूर्ण डिजिटल नोट्स

🌟 1. परिचय: गरीबी क्या है? (What is Poverty?)
- 📌 परिभाषा: भारत में गरीबी से अभिप्राय उस स्थिति का होना है, जिसमें एक व्यक्ति अपने लिए जीवन जीने के लिए न्यूनतम आवश्यक साधन (रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य एवं शिक्षा) खरीदने के लिए भी पर्याप्त आय अर्जित नहीं कर पाता है.
- 🚨 राष्ट्रीय वैश्विक संकेद्रण: भारत में मोटे तौर पर लगभग 26 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं, जिसका सीधा अर्थ है कि देश का हर चौथा व्यक्ति गरीब है. संपूर्ण विश्व में सबसे अधिक गरीबों का संकेद्रण भारत में ही है.
- 🤝 महात्मा गाँधी का मूल विचार: राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी हमेशा इस बात पर विशेष बल देते थे कि भारत सही अर्थों में तभी स्वतंत्र होगा, जब यहाँ के सबसे गरीब व्यक्ति की हालत में वास्तविक सुधार होगा.
👥 2. गरीबी के दो विशिष्ट व्यावहारिक मामले (Two Cases of Poverty)
🏢 (अ) शहरी गरीबी: रामपुकार की कहानी
- परिचय: 35 वर्षीय रामपुकार पटना के निकट एक गेहूँ के आटे की मिल में दैनिक मजदूर है. वह मुश्किल से महीने में ₹1500 कमा पाता है.
- आश्रित परिवार: उसके परिवार में कुल 6 सदस्य हैं (पत्नी और चार छोटे बच्चे), साथ ही जहानाबाद के गाँव में रह रहे उसके बूढ़े भूमिहीन माता-पिता भी आर्थिक रूप से उसी पर निर्भर हैं.
- रहन-सहन और विवशता: वह शहर के बाहरी इलाके में मिट्टी और खपड़ों की एक किराए की कामचलाऊ झोपड़ी में रहता है. उसकी पत्नी घरों में चौका-बर्तन करके ₹800 अतिरिक्त कमाती है. परिवार को दो वक्त केवल दाल-चावल का अल्प-भोजन ही नसीब होता है. आय बढ़ाने के लिए उसका बड़ा बेटा पढ़ाई छोड़कर एक चाय की दुकान पर ₹300 मासिक पर सहायक का काम करता है. बच्चे कभी स्कूल नहीं गए, फटे-पुराने कपड़े पहनते हैं, बीमार होने पर कोई चिकित्सा नहीं मिलती और जूते पहनना इनके लिए विलास की वस्तु है.
🌾 (ब) ग्रामीण गरीबी: राजेन्द्र सिंह की कहानी
- परिचय: राजेन्द्र सिंह बिहार में नालंदा के पास इसलामपुर गाँव का रहने वाला है. उसके परिवार के पास अपनी कोई भूमि नहीं है. वह बड़े जमींदारों के खेतों में अनियमित मजदूरी करता है.
- शोषण और भुखमरी: दिन भर की कड़ी मेहनत के बदले उसे कभी मात्र ₹60 नकद मिलते हैं, तो कभी वस्तु के रूप में कुछ किलो गेहूँ, दाल या सब्जी ही हाथ लगती है. 8 सदस्यों का यह विशाल परिवार हमेशा दो वक्त का भरपेट भोजन भी नहीं जुटा पाता.
- त्रासदी का चरम: राजेन्द्र स्वयं कभी स्कूल नहीं गया और 10 वर्ष की अल्पायु से ही काम कर रहा है. उसके पिता की मृत्यु दो वर्ष पूर्व तपेदिक (TB) की बीमारी के कारण इलाज के अभाव में हो गई थी, और अब उसकी माँ भी उसी जानलेवा बीमारी से ग्रसित होकर धीरे-धीरे दम तोड़ रही है. परिवार के लिए नहाने का साबुन और तेल खरीदना भी एक बड़ी विलासिता है.
🧬 3. गरीबी के सामाजिक सूचकांक एवं आयाम (Indicators of Poverty)
वर्तमान समय में सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा केवल आय और उपभोग के अलावा निम्नलिखित सामाजिक सूचकांकों के आधार पर गरीबी का आकलन किया जाता है:
- 🛑 सामाजिक अपवर्जन (Social Exclusion): इस अवधारणा के अनुसार गरीबों को बेहतर माहौल और संपन्न लोगों की सामाजिक समता से दूर (अपवर्जित) रखकर केवल निकृष्ट एवं गंदे वातावरण में दूसरे गरीबों के साथ रहने को विवश होना पड़ता है. भारत की जाति-व्यवस्था इसका एक विशिष्ट उदाहरण है, जहाँ कुछ जातियों को समान अवसरों से ऐतिहासिक रूप से वंचित रखा गया है.
- 🛡️ असुरक्षा (Insecurity): यह एक ऐसा मापदंड है जो किसी विशेष समुदाय (जैसे पिछड़ी जाति या अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य) या व्यक्ति (जैसे कोई असहाय विधवा या विकलांग व्यक्ति) के भविष्य में गरीब होने या हमेशा गरीब बने रहने की अत्यधिक संभावना को दर्शाता है. इसका आकलन प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप) या आतंकवाद के समय उनके आर्थिक जोखिम और मानसिक असहायता से होता है.
- 👩👵 गरीबों में भी गरीब: गरीब परिवारों में वैसे तो सभी को अत्यधिक कष्ट झेलने पड़ते हैं, लेकिन संसाधनों तक पहुँच की कमी के कारण महिलाएँ, वृद्ध लोग और छोटी बच्चियाँ सबसे अधिक प्रताड़ित होती हैं; इसलिए इन्हें 'गरीबों में भी गरीब' कहा जाता है.
📈 4. गरीबी रेखा का कैलोरी व मौद्रिक मापदंड (The Poverty Line)
भारत तथा बिहार में गरीबी रेखा के निर्धारण के लिए आय एवं उपभोग स्तर की सर्वसमावेशी विधि के तहत कैलोरी मापदंड को आधार बनाया गया है:
┌──────────────────────────────┐│ गरीबी रेखा का मापदंड │└──────────────┬───────────────┘┌─────────────────────────┴─────────────────────────┐▼ ▼🌾 ग्रामीण क्षेत्र 🏢 शहरी क्षेत्र• न्यूनतम 2400 कैलोरी/दिन • न्यूनतम 2100 calories/दिन• अधिक शारीरिक श्रम के कारण आवश्यक • कम शारीरिक श्रम की आवश्यकता• मौद्रिक व्यय: ₹328/माह (वर्ष 2000) • मौद्रिक व्यय: ₹454/माह (वर्ष 2000)- 💡 महत्वपूर्ण बिंदु: ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शारीरिक कार्य अधिक करते हैं, इसलिए उनके लिए कैलोरी का स्तर अधिक (2400) रखा गया है. इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में वस्तुओं की कीमतें अधिक होने के कारण कम कैलोरी (2100) के बावजूद मासिक उपभोग व्यय (MPCE) की मौद्रिक राशि ₹454 (अधिक) निर्धारित की गई थी.
- 👪 5 सदस्यों का परिवार (वर्ष 2000 के अनुसार):
- गाँव में: यदि परिवार की कुल आय ₹1,640 प्रति माह से कम है, तो वह गरीबी रेखा के नीचे होगा.
- शहर में: मूल आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए परिवार की कम से कम मासिक आय ₹2,270 होनी अनिवार्य है.
- 🔍 सर्वे एजेंसी: भारत में प्रत्येक 5 वर्ष पर प्रतिदर्श सर्वेक्षण का यह कार्य NSSO (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन) द्वारा कराया जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना के लिए विश्व बैंक 1 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की उपलब्धता का मापदंड अपनाता है.
🔄 5. अर्थशास्त्री 'नर्क्स' का गरीबी का दुष्चक्र (Vicious Circle of Poverty)
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री नर्क्स (Nurkse) के अनुसार, गरीबी का दुष्चक्र एक ऐसी स्वचालित शक्ति की स्थिति को दर्शाता है जिसमें विभिन्न आर्थिक तत्व चक्रीय रूप में एक-दूसरे के साथ इस प्रकार क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं कि एक निर्धन देश हमेशा गरीबी और अल्पविकास की अवस्था में ही फंसा रहता है.
🔄 नर्क्स के दुष्चक्र के दो मुख्य मार्ग:
- 📉 पूर्ति का पक्ष (चित्र 'क'): अल्पविकास → नीची वास्तविक आय → कम बचत क्षमता → कम निवेश → पूँजी की भारी कमी → निरंतर अल्पविकास.
- 📉 माँग का पक्ष (चित्र 'ख'): नीची उत्पादकता → कम वास्तविक आय → वस्तुओं की कम माँग → बाजार का छोटा आकार → निवेश का गिरना → पूँजी निर्माण ठप → निरंतर निर्धनता.
📊 6. बिहार में गरीबी की स्थिति: अन्य राज्यों से तुलना
भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण (2001-02) के आंकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में निर्धनता का अनुपात एक समान नहीं है:
- 🥇 प्रथम स्थान पर (सर्वाधिक गरीब): उड़ीसा राज्य है, जहाँ निर्धनता का अनुपात 47.2 प्रतिशत है.
- 🥈 द्वितीय स्थान पर: हमारा बिहार राज्य आता है, जहाँ गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत 42.6% है.
- 📉 न्यूनतम गरीबी वाला राज्य: जम्मू और कश्मीर में यह प्रतिशत मात्र 3.5% तथा पंजाब में केवल 6.2% है.
- 🛡️ असुरक्षित समूह (आरेख 3.1): भारत के विभिन्न सामाजिक समूहों में अनुसूचित जनजातियाँ (51%) सर्वाधिक असुरक्षित हैं, इसके बाद नगरीय अनियत मजदूर (50%), ग्रामीण खेतिहर मजदूर (50%) और अनुसूचित जातियाँ (47%) आती हैं.
🚨 7. भारत व बिहार में गरीबी के मुख्य कारण एवं निवारण के उपाय
🚨 गरीबी के 10 मुख्य कारण:
- 💥 जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि: विकसित देशों की तुलना में भारत की अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि जीवन-स्तर को गिरा रही है.
- 🌾 कृषि का पिछड़ापन: देश की 64% आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन उत्तम खाद, उन्नत बीजों और सिंचाई के अभाव में खेती आज भी पिछड़ी है.
- 💰 पूँजी का घोर अभाव: कम आय के कारण बचत नहीं होती, जिससे नया पूँजी निवेश और आर्थिक क्रियाओं का विस्तार नहीं हो पाता.
- 🪵 प्राकृतिक साधनों के समुचित उपयोग का अभाव: देश के लगभग 50% प्राकृतिक और मानवीय साधनों का आर्थिक विकास के लिए आज तक उपयोग ही नहीं हो सका है.
- 🏭 औद्योगीकरण का अभाव: भारी उद्योगों का विकास धीमा होने से कृषि पर से जनसंख्या का बोझ कम नहीं हो रहा है.
- ⚖️ धन और आय की भारी विषमता: देश की संपत्ति का अधिकांश भाग कुछ ही धनी व्यक्तियों के हाथों में केंद्रित है.
- 💼 बेरोजगारी एवं अदृश्य (छिपी हुई) बेरोजगारी: ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मौसमी या छिपी हुई बेरोजगारी व्याप्त है.
- 🇬🇧 विदेशी (ब्रिटिश) शासन: ब्रिटिश शासकों की शोषणकारी नीतियों के कारण भारत के पारंपरिक कुटीर उद्योगों का पतन हुआ.
- 🎭 प्रतिकूल सामाजिक वातावरण: शिक्षा का अभाव, रूढ़िवादिता और भाग्यवादिता के कारण लोग बदलाव नहीं चाहते.
- 🚚 यातायात के साधनों की भारी कमी: परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ न होने से आर्थिक विकास की गति बहुत मंद है.
🛠️ गरीबी उन्मूलन के 10 मुख्य उपाय:
- देश के प्रचुर प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों का वैज्ञानिक व समुचित उपयोग करना.
- परिवार नियोजन के प्रचार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण को एक 'जन आंदोलन' का रूप देना.
- कृषि को आधुनिक बनाकर, उत्तम खाद-बीज और सिंचाई सुविधाओं द्वारा कृषि उत्पादन बढ़ाना.
- देश का तीव्र औद्योगीकरण करना ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें.
- बाहरी पूँजी को आकृष्ट करना और देश के भीतर वित्तीय पूँजी की समुचित व्यवस्था करना.
- सुदूर देहातों तक यातायात और परिवहन के साधनों का तीव्र विकास करना.
- धनी वर्ग पर प्रगतिशील कर (Progressive Tax) लगाकर आय तथा धन का समान वितरण करना.
- ग्रामीण स्तर पर लघु एवं कुटीर उद्योगों का सघन विकास करना.
- सार्वजनिक निर्माण कार्यों को बढ़ाकर रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना.
- बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रदेश जैसे अत्यधिक पिछड़े राज्यों में विशेष रूप से निवेश में भारी वृद्धि करना.
🏛️ 8. गरीबी उन्मूलन के लिए किए गए प्रमुख प्रयास (Programs)
🟢 (A) महत्वपूर्ण सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ:
- 🌾 राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम (2004): देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषित योजना के रूप में लागू किया गया, जहाँ अकुशल शारीरिक श्रम के इच्छुक गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न और रोजगार दिया जाता है.
- 📋 राज्य रोजगार गारंटी कोष: इस विधिक कार्यक्रम के अंतर्गत यदि किसी आवेदक को आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिला, तो वह अनिवार्य रूप से सरकारी बेरोजगारी भत्ते का हकदार होता है.
- 🍲 मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme): प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित बच्चों को दोपहर का मुफ्त और पौष्टिक भोजन दिया जाता है, जिसका पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन करती है.
- 🏠 न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) में प्रारंभ किया गया, जिसका मुख्य लक्ष्य गरीब जनता को न्यूनतम जरूरतें जैसे पेयजल, प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था.
- 🚜 समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP - 1980): देश के सभी प्रखंडों में लागू किया गया एक स्वरोजगार कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य गरीबों को उत्पादक परिसंपत्तियाँ देकर उनकी आय बढ़ाना था. अप्रैल 1999 में इसका नाम बदलकर स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) कर दिया गया.
- 🛠️ जवाहर रोजगार योजना (अप्रैल, 1989): यह एक मजदूरी आधारित कार्यक्रम था जिसमें NREP और RLEGP योजनाओं को मिला दिया गया था, ताकि भूमिहीन परिवारों को वर्ष में कम से कम 100 दिन का पूरक रोजगार मुहैया कराया जा सके.
- 💼 प्रधानमंत्री रोजगार योजना (1993-94): प्रारंभ में शहरी और बाद में ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वयं का लघु व्यवसाय शुरू करने के लिए स्वरोजगार ऋण देने हेतु शुरू की गई.
- 🛣️ प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY - 2000-01): ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षित पेयजल, आवास और ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए समर्पित योजना.
- 🌆 स्वर्णजयंती शहरी रोजगार योजना (SJSRY - दिसंबर, 1997): शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले शिक्षित बेरोजगार और अल्प-रोजगार प्राप्त लोगों को स्वरोजगार व मजदूरी रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई.
🔵 (B) प्रभावी गैर-सरकारी प्रयास (Non-Governmental Efforts):
- 💼 स्वरोजगार: व्यक्ति स्वयं सरकारी केंद्रों से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर बैंकों की वित्तीय सहायता से अपनी इच्छानुसार रोजगार चुनता है। आय बढ़ने पर वह स्वावलम्बी हो जाता है और धीरे-धीरे बैंक का कर्ज चुकता कर देता है.
- 🚜 सामूहिक खेती (Collective Farming): भारतीय कृषि की बड़ी विसंगतियों— जैसे खेतों का छोटा होना (विखंडन), मेड़ों पर भूमि की बर्बादी और सिंचाई के अभाव को दूर करने के लिए सामूहिक खेती का उद्गम हुआ. इसमें कई महिलाएँ और पुरुष कृषक मिलकर एक साथ धान की रोपनी या अन्य कार्य करते हैं, जिससे कृषि पूँजी सुरक्षित रहती है और किसी एक व्यक्ति पर वित्तीय हानि का बोझ नहीं पड़ता. (जैसे— स्वयं सहायता समूह - SHGs और सामुदायिक विकास कार्यक्रम).
📝 स्व-मूल्यांकन: महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न (Quiz Time!)
प्यारे छात्रों, इस अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय के डिजिटल नोट्स को पढ़ने के बाद नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर खोजने का प्रयास करें:
प्रश्न 1. योजना आयोग के द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार, भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रति व्यक्ति के लिए प्रतिदिन कितनी न्यूनतम कैलोरी का उपभोग तय किया गया है? (क) 2100 कैलोरी
(ख) 2200 कैलोरी
(ग) 2400 कैलोरी
(घ) 3000 कैलोरी
प्रश्न 2. वर्ष 2000 में मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसी व्यक्ति के लिए गरीबी रेखा की मौद्रिक राशि कितनी निर्धारित की गई थी? (क) 328 रुपये प्रतिमाह
(ख) 454 रुपये प्रतिमाह
(ग) 1,640 रुपये प्रतिमाह
(घ) 2,270 रुपये प्रतिमाह
प्रश्न 3. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री 'नर्क्स' (
(ख) विदेशी सहायता का मिलना
(ग) गरीबी का दुष्चक्र (
(घ) साक्षरता दर का बढ़ना
प्रश्न 4. वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2001-02 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का कौन-सा राज्य निर्धनता अनुपात (47.2%) के साथ देश में पहले स्थान पर था? (क) बिहार
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) उड़ीसा
(घ) जम्मू और कश्मीर
प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा वर्ष 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता के साथ कौन-सा विशेष रोजगार कार्यक्रम शुरू किया गया था? (क) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना
(ख) राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम
(ग) स्वर्णजयंती शहरी रोजगार योजना
(घ) मध्याह्न भोजन योजना
💡 उत्तर कुंजी (Answer Key):1-(ग), 2-(क), 3-(ग), 4-(ग), 5-(ख)
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