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BSEB Class 9 Economics Chapter 5 Summary & Notes

📚 इकाई-5: कृषि, खाद्यान्न सुरक्षा एवं गुणवत्ता — संपूर्ण डिजिटल नोट्स

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Notes

🌟 1. परिचय: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ — कृषि

किसी भी देश की आर्थिक समृद्धि और विकास उसके कृषि एवं उद्योगों की मजबूती पर निर्भर करता है। भारत और बिहार के संदर्भ में कृषि केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार है।

  • 🌾 रीढ़ की हड्डी: भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ लगभग 64 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या आज भी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह कृषि पर निर्भर है।
  • 💡 प्रो० एम० एस० स्वामीनाथन के विचार: प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष प्रो० स्वामीनाथन के अनुसार: "कृषि एक मशीनी वस्तु नहीं, बल्कि गाँवों में रह रहे 80 प्रतिशत लोगों की जीविका की गारंटी देने की रीढ़ है। कृषि भारत एवं बिहार के आर्थिक विकास का इंजन है।"
  • 💰 राष्ट्रीय आय में हिस्सेदारी: कृषि भारतीय कृषक परिवारों के माध्यम से देश की लगभग दो-तिहाई (2/3) जनसंख्या से सीधे संबंधित है और राष्ट्रीय आय का औसतन लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करती है।

🗺️ 2. बिहार में कृषि का स्वरूप एवं महत्व (Agriculture in Bihar)

🌾 बिहार की स्थिति

आर्थिक दृष्टिकोण से भारत के पिछड़े राज्यों में बिहार सबसे बड़ा राज्य है, जहाँ कृषि ही प्रधान व्यवसाय है।

  • 🏭 विभाजन का प्रभाव: 15 नवंबर 2000 को बिहार के विभाजन के बाद अधिकांश संगठित भारी उद्योग झारखंड राज्य में चले गए, जिसके बाद बिहार की अर्थव्यवस्था अब मुख्य रूप से कृषि आधारित होकर रह गई है।
  • 👥 ग्रामीण आबादी: बिहार की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गाँवों में निवास करती है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से अपनी आय और रोजगार प्राप्त करती है।

📊 बिहार में कृषि का महत्व (Importance):

  1. 💰 राज्य की आय में योगदान: बिहार की कुल आय और घरेलू उत्पाद (GDP) का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी कृषि क्षेत्र से उत्पादित होता है।
  2. 🛍️ उद्योगों के लिए बाजार: ग्रामीण जनसंख्या की आय बढ़ने से वे निर्मित औद्योगिक वस्तुओं की माँग करते हैं, जिससे उद्योग और व्यापार को विस्तार का अवसर मिलता है।
  3. 💱 विदेशी मुद्रा का अर्जन: बिहार से आम, लीची, मक्का और गन्ने जैसी नकदी फसलों का निर्यात करके बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है।

🚨 3. बिहार में कृषि के पिछड़ेपन के कारण एवं निवारण

🚨 पिछड़ेपन के 10 मुख्य कारण:

प्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ डॉ० क्लाउस्टन के अनुसार— "भारत में पिछड़ी जातियाँ तो हैं ही, यहाँ पिछड़े हुए उद्योग भी हैं और दुर्भाग्यवश कृषि उनमें सबसे अधिक पिछड़ी है।" यह कथन बिहार पर शत-प्रतिशत सच बैठता है।

  1. 👥 कृषि पर जनसंख्या का अत्यधिक भार: उद्योगों की कमी के कारण कार्यशील जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा खेती पर ही निर्भर है।
  2. 📉 भूमि का असमान वितरण: कुछ बड़े भू-स्वामियों के पास अत्यधिक ज़मीन है, जबकि बहुसंख्यक आबादी भूमिहीन या सीमांत किसान है।
  3. 🌧️ मानसून पर पूर्ण निर्भरता: राज्य की कृषि पूरी तरह वर्षा के मिजाज पर टिकी है।
  4. 🌊 बाढ़, अकाल तथा सूखे की विभीषिका: उत्तरी बिहार हमेशा भीषण बाढ़ (जैसे कोसी, बागमती का तांडव) से त्रस्त रहता है और दक्षिणी बिहार अक्सर सूखे की चपेट में रहता है।
  5. Traditional तरीके: पुराने, परंपरागत और अवैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बहुत निम्न है।
  6. ❌ उन्नत इनपुट का अभाव: गरीब किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत खाद और प्रामाणिक बीजों की उपलब्धता नहीं हो पाती।
  7. 💧 सिंचाई सुविधाओं की कमी: आधुनिक कृत्रिम साधनों (जैसे नलकूप, नहर) का तकनीकी विकास नहीं हो पाया है, जिससे अधिकांश क्षेत्र असिंचित हैं।
  8. 💰 वित्तीय पूँजी की कमी: छोटे किसानों की आय कम होने से वे नई तकनीक में निवेश करने के लिए पूँजी की व्यवस्था नहीं कर पाते।
  9. 🧱 भूमि का अपखण्डन: बढ़ती जनसंख्या और पारिवारिक बँटवारे के कारण खेतों का आकार लगातार छोटा (टुकड़ों में) होता जा रहा है, जिस पर आधुनिक खेती संभव नहीं है।
  10. 📚 किसानों में अशिक्षा: तकनीकी ज्ञान और कृषि के आधुनिक रोड-मैप के प्रति जागरूकता की भारी कमी है।

🛠️ पिछड़ेपन को दूर करने के 5 अचूक उपाय:

  1. 🛑 जनसंख्या नियंत्रण: कृषि भूमि पर बढ़ते मानवीय बोझ को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाना।
  2. 💧 सुनिश्चित सिंचाई व्यवस्था: हर खेत तक पानी पहुँचाने के लिए नलकूपों और आधुनिक कृत्रिम सिंचाई प्रणालियों का विस्तार करना।
  3. 🌊 जल प्रबंधन: बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने और सूखे क्षेत्रों तक उसे मोड़ने के लिए बेहतर जल-प्रबंधन नीतियां बनाना।
  4. ⚙️ उन्नत तकनीकों का प्रयोग: किसानों को उच्च उपज देने वाले बीजों, उर्वरकों और कृषि यंत्रों को सुविधापूर्वक मुहैया कराना।
  5. 🏦 संस्थागत वित्त का प्रवाह: बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सस्ते ब्याज दरों पर ऋण और फसल बीमा की कारगर सुविधा देना।

🌾 4. फसलों के प्रकार एवं बिहार का शस्य प्रतिरूप (Crop Types)

जलवायु की परिवर्तनशीलता के आधार पर भारत और बिहार में फसलों को मुख्य रूप से दो आर्थिक वर्गों में विभाजित किया जाता है: (क) खाद्य फसलें (धान, गेहूँ, मक्का आदि) तथा (ख) नकदी/व्यापारिक फसलें (ईंख/गन्ना, जूट, आलू, प्याज आदि)।

ऋतुओं और पारस्परिक संबंधों के आधार पर बिहार की कृषि को चार मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:

┌──────────────────────────────┐│      बिहार की चार मुख्य ऋतुएँ     │└──────────────┬───────────────┘┌─────────────────────┬───────┴─────────────┬─────────────────────┐▼                     ▼                     ▼                     ▼1. भदई फसल             2. अगहनी/खरीफ           3. रबी फसल            4. गरमा फसल(शरदकालीन)              (शीतकालीन)            (वसंतकालीन)            (ग्रीष्मकालीन)
  1. 🍂 1. भदई फसल (शरदकालीन): ये फसलें मई-जून में बोयी जाती हैं और अगस्त-सितंबर (हिन्दी मास भादो) में काट ली जाती हैं। इसके मुख्य उदाहरण मक्का, ज्वार, जूट और धान की कुछ विशिष्ट किस्में हैं। यह बिहार के मैदानी भागों में अधिक होती है।
  2. ❄️ 2. खरीफ या अगहनी फसल (शीतकालीन): बिहार की कृषि में इसका स्थान सर्वोच्च है। इसमें धान (शीतकालीन चावल) सबसे प्रधान फसल है। इसकी बुआई जून में मानसूनी वर्षा के साथ होती है और कटाई दिसंबर (हिन्दी मास अगहन) में की जाती है।
  3. 🌸 3. रबी फसल (वसंतकालीन): इसकी बुआई अक्टूबर-नवंबर (जाड़े की शुरुआत) में होती है और मार्च (वसंत ऋतु) तक फसल तैयार हो जाती है। इसके अंतर्गत गेहूँ, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों आदि दलहन और तिलहन की फसलें आती हैं। राज्य की कुल कृषि भूमि के एक-तिहाई (1/3) भाग पर रबी की खेती होती है।
  4. 🔥 4. गरमा फसल (ग्रीष्मकालीन): यह फसल केवल उन्हीं क्षेत्रों में उगाई जाती है जहाँ सिंचाई की उत्तम सुविधा हो या भूमि नम हो। इसमें हरी सब्जियों का विशेष स्थान है। बिहार के नालंदा, वैशाली और सारण जिलों में गंगा तट पर इस ऋतु में हरी सब्जियों, विशेष धान और मक्के की सघन खेती की जाती है।

🍲 5. खाद्यान्न सुरक्षा, गुणवत्ता एवं अकाल का संकट

🗂️ खाद्यान्न के प्रमुख स्रोत:

भोजन मनुष्य की प्राथमिक और आधारभूत आवश्यकता है। खाद्यान्न की उपलब्धता के चार मुख्य स्तंभ हैं: (1) गहन खेती, (2) उदारवादी सरकारी कृषि नीति, (3) बफर स्टॉक व भंडारण नीति तथा (4) आयात नीति। जब प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं, तो खाद्यान्न की तात्कालिक कमी को दूर करने के लिए बफर स्टॉक का अनाज काम आता है या दूसरे देशों से अनाज का आयात किया जाता है।

🩺 खाद्यान्न की गुणवत्ता (Quality) एवं कैलोरी मापदंड:

खाद्य पदार्थों के केवल उत्पादन (मात्रा) पर ही नहीं, बल्कि उसके गुणात्मक और पौष्टिक मूल्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ भोजन ही मानव में स्वस्थ विचार उत्पन्न करता है। भिन्न-भिन्न शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन आवश्यक कैलोरी की मात्रा अलग-अलग निर्धारित की गई है:

  • 👩‍🦱 घर पर कार्य करने वाली स्त्रियाँ: न्यूनतम 3100 कैलोरी पौष्टिक भोजन/दिन।
  • 👷 औद्योगिक श्रमिक (भारी श्रम): न्यूनतम 3600 कैलोरी प्रति व्यक्ति/दिन।
  • 🧑‍🏫 शिक्षक या ऑफिस कर्मी: न्यूनतम 2600 कैलोरी प्रति व्यक्ति/दिन।
  • 🩺 डॉक्टर, इंजीनियर या दर्जी (सामान्य सक्रिय): न्यूनतम 3000 कैलोरी प्रति व्यक्ति/दिन।

📜 अकाल की विभीषिका: 1943 का बंगाल का भयानक अकाल (Great Famine of Bengal)

जब किसी प्राकृतिक आपदा के कारण खाद्यान्न उत्पादन गिरता है, तो कीमतें आसमान छूने लगती हैं और कम आय वाले गरीब अनाज नहीं खरीद पाते, जिससे भुखमरी फैलती है।

  • 🚨 इतिहास का सबसे काला पन्ना: भारत में सबसे भयानक अकाल आजादी से पूर्व वर्ष 1943 में बंगाल में पड़ा था, जिसमें करीब 30 लाख लोग भूख से तड़प-तड़प कर मर गए थे।
  • 👥 सबसे अधिक प्रभावित वर्ग: विख्यात अर्थशास्त्री एवं नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के विश्लेषण के अनुसार, चावल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण खेतों में काम करने वाले भूमिहीन खेतिहर मजदूर, मछुआरे, परिवहनकर्मी और अनियमित दैनिक श्रमिक इस अकाल में सबसे पहले मारे गए थे।
  • 📍 वर्तमान स्थिति: भारत में आज भी उड़ीसा के कालाहांडी तथा काशीपुर जैसे क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति बनी रहती है। हाल के वर्षों में बिहार के नवादा, गया, मुंगेर तथा झारखंड के पलामू जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से भी भूख के कारण मौतों की चिंताजनक सूचनाएं मिली हैं।

🇮🇳 6. खाद्य सुरक्षा के लिए सरकारी प्रयास (Government Initiatives)

वर्ष 1970 के दशक में हरित क्रांति के आने के बाद से भारत खाद्यान्नों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन गया है और मौसम खराब होने पर भी देश में अकाल की स्थिति नहीं आने दी जाती। सरकार ने इसके लिए एक मजबूत खाद्य सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है, जिसके दो मुख्य घटक हैं:

📦 (क) बफर स्टॉक (Buffer Stock)

  • 📌 अर्थ: भारतीय खाद्य निगम (FCI - Food Corporation of India) के माध्यम से सरकार द्वारा अधिप्राप्त किए गए अनाज (गेहूँ और चावल) के सुरक्षित सरकारी भंडार को बफर स्टॉक कहते हैं।
  • 💰 न्यूनतम समर्थित कीमत (MSP - Minimum Support Price): भारतीय खाद्य निगम अधिशेष (जरूरत से अधिक) उत्पादन वाले राज्यों के किसानों से पहले से घोषित कीमतों पर अनाज खरीदता है। किसानों को फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार बुवाई के मौसम से पहले इस न्यूनतम समर्थित कीमत (MSP) की घोषणा करती है।

🏪 (ख) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS - Public Distribution System)

  • 📌 अर्थ: भारतीय खाद्य निगम द्वारा खरीदे गए अनाज को सरकार विनियमित राशन दुकानों (उचित दर वाली दुकानों) के माध्यम से समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों में बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर वितरित करती है।
  • 🏪 राशन की दुकानें: वर्तमान में देश भर में लगभग 4.6 लाख राशन की दुकानें कार्यरत हैं, जहाँ चीनी, खाद्यान्न (गेहूँ-चावल) और खाना पकाने के लिए मिट्टी का तेल बाजार से कम कीमत (निर्गत कीमत) पर बेचा जाता है। राशन कार्ड धारक प्रत्येक परिवार प्रतिमाह एक निश्चित मात्रा (जैसे 35 किलोग्राम अनाज, 5 किलो चीनी, 5 लीटर मिट्टी का तेल) अपने नजदीकी राशन दुकान से खरीद सकता है।

📋 राशन कार्ड के तीन मुख्य प्रकार (Types of Ration Cards):

  • 🔴 (क) अंत्योदय कार्ड: निर्धनों में भी सबसे निर्धन (Extremely Poor) लोगों के लिए।
  • 🔵 (ख) बी०पी०एल० कार्ड (BPL Card): निर्धनता रेखा से नीचे (Below Poverty Line) जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए।
  • 🟢 (ग) ए०पी०एल० कार्ड (APL Card): सामान्य व निर्धनता रेखा से ऊपर (Above Poverty Line) रहने वाले अन्य लोगों के लिए।

🎯 7. प्रमुख राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम एवं योजनाएँ

  • 🌾 1. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम: यह ऐतिहासिक स्वरोजगार कार्यक्रम 14 नवंबर, 2004 को देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में पूरक श्रम रोजगार के सृजन को तीव्र करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। यह उन समस्त ग्रामीण गरीबों के लिए है जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। यह शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम है जिसके तहत राज्यों को निःशुल्क अनाज और वित्तीय सहायता दी जाती है। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर (DM) इसके मुख्य शीर्ष अधिकारी होते हैं।
  • 🍲 2. अंत्योदय अन्न योजना (AAY): यह कल्याणकारी योजना दिसंबर, 2000 में शुरू की गई थी। इसके तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आने वाले गरीब परिवारों में से सबसे निर्धन परिवारों की पहचान की गई। पात्र परिवारों को ₹2 प्रति किलोग्राम गेहूँ और ₹3 प्रति किलोग्राम चावल की अत्यधिक आर्थिक सहायता प्राप्त (सब्सिडी वाली) दरों पर अनाज दिया जाता है। अप्रैल 2002 में अनाज की इस मात्रा को 25 किलो से बढ़ाकर 35 किलोग्राम प्रति परिवार कर दिया गया और वर्तमान में इस योजना से देश के लगभग 2 करोड़ परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
  • 📈 3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM): इसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से चावल (10 मिलियन टन), गेहूँ (8 मिलियन टन) और दालों (2 मिलियन टन) का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाना है ताकि देश में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत देश के 16 राज्यों के 305 जिलों के लगभग 250 लाख किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, आधुनिक फार्म मशीनरी, समेकित कीट प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

💡 महत्वपूर्ण परिभाषा — सहायिकी या सब्सिडी (Subsidy): सहायिकी वह वित्तीय भुगतान है जो सरकार द्वारा किसी उत्पादक को बाजार कीमत की प्रतिपूर्ति के लिए किया जाता है। इससे घरेलू उत्पादकों (किसानों) को उनके माल की ऊँची कीमत देते हुए भी आम गरीब उपभोक्ताओं के लिए बाजार में कीमतों को कम (सस्ता) बनाए रखा जाता है।


🏢 8. खाद्य सुरक्षा में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) एवं सहकारी समितियों की भूमिका

देश के विभिन्न भागों में सहकारी समितियाँ और गैर-सरकारी संगठन निर्धन लोगों को कम कीमत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने में ऐतिहासिक भूमिका निभा रहे हैं:

  • 🥛 अमूल (Amul): गुजरात में दूध तथा दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में श्वेत क्रांति लाने वाली भारत की सबसे सफल सहकारी समिति है।
  • 🥛 सुधा (Sudha) — पटना डेयरी: बिहार में दूध, दही और दुग्ध उत्पादों के सहकारी विपणन का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण पटना डेयरी है, जिसे आम लोग 'सुधा' के नाम से जानते हैं।
  • 🥬 मदर डेयरी (Mother Dairy): दिल्ली में उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित नियंत्रित और रियायती दरों पर शुद्ध दूध और ताजी सब्जियाँ उपलब्ध कराने में अग्रणी है।
  • 🌾 अनाज बैंक (Grain Banks): विभिन्न पिछड़े क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से 'अनाज बैंकों' की स्थापना की जा रही है। इसमें एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस (ADS) द्वारा महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में संचालित अनाज बैंक कार्यक्रम को देश का सबसे सफल और नए प्रकार का खाद्य सुरक्षा मॉडल माना गया है, जो संकट के समय ग्रामीण गरीबों की भूख मिटाता है।

📝 स्व-मूल्यांकन: महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न (Quiz Time!)

प्यारे छात्रों, इस संपूर्ण अध्याय के डिजिटल नोट्स को ध्यान से पढ़ने के बाद नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर खोजने का प्रयास करें:

प्रश्न 1. प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री प्रो० एम० एस० स्वामीनाथन के अनुसार, भारतीय कृषि ग्रामीण भारत की लगभग कितने प्रतिशत श्रम शक्ति को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करती है? (क) 20 प्रतिशत
(ख) 40 प्रतिशत
(ग) 64 प्रतिशत
(घ) 80 प्रतिशत

प्रश्न 2. बिहार के फसल चक्र (शस्य प्रतिरूप) के अनुसार, राज्य की कृषि व्यवस्था में किस शीतकालीन मुख्य फसल का स्थान सर्वोच्च माना जाता है, जिसकी कटाई हिन्दी मास अगहन (दिसंबर) में होती है? (क) भदई मक्का
(ख) खरीफ या अगहनी धान (चावल)
(ग) रबी गेहूँ
(घ) गरमा हरी सब्जियाँ

प्रश्न 3. गुणात्मक दृष्टिकोण से खाद्यान्न की गुणवत्ता मापने के मापदंडों के अनुसार, भारी शारीरिक श्रम करने वाले एक औद्योगिक श्रमिक (Industrial Labour) के लिए प्रतिदिन कितनी न्यूनतम कैलोरी का भोजन आवश्यक माना गया है? (क) 2600 कैलोरी
(ख) 3000 कैलोरी
(ग) 3100 कैलोरी
(घ) 3600 कैलोरी

प्रश्न 4. स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व वर्ष 1943 में भारत के किस प्रांत में इतिहास का सबसे भयानक अकाल (Great Famine) पड़ा था, जिसमें करीब 30 लाख लोग भुखमरी के कारण मारे गए थे? (क) बिहार प्रांत में
(ख) उड़ीसा के कालाहांडी में
(ग) बंगाल प्रांत में
(घ) झारखंड के पलामू में

प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा दिसंबर, 2000 में शुरू की गई 'अंत्योदय अन्न योजना' (AAY) के तहत चिन्हित निर्धन परिवारों को अत्यधिक रियायती दरों पर गेहूँ और चावल प्रति किलोग्राम क्रमशः किस मूल्य पर दिया जाता है? (क) ₹2 प्रति किलो गेहूँ तथा ₹3 प्रति किलो चावल (ख) ₹5 प्रति किलो गेहूँ तथा ₹10 प्रति किलो चावल (ग) पूर्णतः निःशुल्क (घ) बाजार मूल्य के बराबर

💡 उत्तर कुंजी (Answer Key):

1-(घ), 2-(ख), 3-(घ), 4-(ग), 5-(क)

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