
संज्ञा (Noun)
संज्ञा (Noun) – संज्ञा का सामान्य अर्थ होता है – नाम।
दूसरे शब्दों में, किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे –
- राम,
- रहीम,
- कलम,
- पेंसिल,
- पटना,
- दिल्ली,
- लड़कपन,
- बुढ़ापा आदि
नोट 1
यदि संज्ञा-शब्दों की एक सूची बनाई जाए, तो इसमें असंख्य
शब्द आ जाएँगे, अत: इसे महानाम भी कहा गया है।
नोट 2
लेकिन, रंगों के नाम–लाल, काला, पीला, हरा आदि संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण कहलाते हैं, क्योंकि इनसे किसी व्यक्ति या वस्तु की विशेषता झलकती है । जैसे –
- श्याम काला है। (काला – विशेषण)
- साड़ी लाल है। (लाल – विशेषण)
संज्ञा के कार्य
संज्ञा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं -
- ऐसे नामों का बोध कराना, जो दुनिया में सि र्फ एक हो। जैसे-राम, सीता, पृथ्वी, चंद्रमा, पटना, दि ल्ली, सोमवार, जनवरी, भारत, एशिया, रामायण, गंगा, हि न्द महासागर आदि
- ऐसे नामों को बतलाना जि नसे उनकी जाति का बोध हो । जैसे – गाय, बैल, पशु, पक्षी, आम, इमली, कुरसी, टेबुल, भाई, बहन, राजा, रानी, लड़का, लड़की आदि।
- ऐसे नामों को बतलाना जि नसे उनके समूह का बोध हो। जैसे-वर्ग, सेना, गुच्छ (गुच्छा), परि वार, खानदान, झुंड, सभा, घौद आदि।
- ऐसे धातु या द्रव्य के नामों को बतलाना जि न्हें मापा या तौला जाता हो । जैसे – सोना, चाँदी, हीरा, मोती, तेल, घी, चावल, दाल, लकड़ी, कोयला आदि ।
- ऐसे नामों को बतलाना जि नसे व्यक्ति अवस्था, गति , क्रिया आदियों या वस्तुओं के भाव, गुण, दोष, का बोध हो । जैसे – मित्रता, शत्रुता, जवानी, बुढ़ापा, सुस्ती, फुरती, करुणा, दया, खटास, मिठास, लम्बाई, चौड़ाई, पढ़ाई, लि खाई, इति हास, भूगोल आदि।
संज्ञा के भेद
परंपरागत रूप से संज्ञा के पाँच भेद हैं
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
- जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
- समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)
- द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)
- भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
जिस संज्ञा से किसी खास व्यक्ति, वस्तु, जगह आदि का बोध हो उसे व्यक्तिवाचक कहते हैं। जैसे – राम, रहीम, चाँद, सूरज, रामायण, महाभारत, पटना, दिल्ली आदि
'राम' से कि सी खास व्यक्ति का और 'पटना' से कि सी खास जगह या शहर का बोध होता है, अत: ये व्यक्ति वाचक संज्ञाएँ हैं। पाँचों संज्ञाओं में व्यक्ति वाचक संज्ञाओं की संख्या सबसे अधि क है । इनमें कुछ प्रमुख संज्ञाएँ निम्नलिखित हैं —
- व्यक्तियों के नाम – राम, श्याम, सीता, गीता, गाँधी, नेहरू आदि।
- पुस्तकों के नाम – रामायण, महाभारत, गीता, कुरान, बाइबिल आदि।
- पत्र-पत्रिकाओं के नाम – इण्डिया टुडे, चंदामामा, दि नमान, आज आदि।
- गाँव-मुहल्लों के नाम – रामपुर, हरि पुर, आलमगंज, सुलतानगंज आदि।
- शहरों के नाम – राँची, जमशेदपुर, दिल्ली, लखनऊ आदि।
- प्रदेशों के नाम – झारखंड, बि हार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि।
- देशों के नाम – भारत, पाकि स्तान, श्रीलंका, भूटान आदि।
- महादेशों के नाम – अफ्रीका, एशिया, यूरोप, आस्ट्रेलिया आदि।
- म्रह-उपग्रह एवं नक्षत्रों के नाम – सूर्य, पृथ्वी, स्पूतनिक, रोहिणी आदि।
- दिन-महीना एवं साल के नाम – सोमवार, जनवरी, 1947 ई० आदि।
- जानवरों के खास नाम – चेतक (महाराणा प्रताप का), ऐरावत (इन्द्र का) आदि।
- नदी-तालाबों के नाम – गंगा, यमुना, सरस्वती, मंगल तालाब आदि।
- झीलों के नाम – मानसरोवर, डल, बैकाल, चि ल्का आदि।
- पहाड़-पठारों के नाम-हि मालय, आल्पस, ति ब्बत का पठार आदि।
- सड़कों एवं गलियों के नाम – म्रैंड ट्रंक रोड, अशोक राजपथ आदि
- प्रकाशनों एवं दुकानों के नाम – गुडमैन (पी० एण्ड डी), दुर्गा पुस्तक आदि
- पर्व-त्योहारों के नाम – ईद, दुर्गा पूजा, पन्द्रह अगस्त आदि
- ऐतिहासि क घटनाओं के नाम – प्रथम वि श्वयुद्ध, पानीपत की पहली लड़ाई आदि
- भवनों एवं स्मारकों के नाम – लालकिला, ताजमहल, शक्ति-स्थल आदि
2. जातिवाचक संज्ञा
जिस संज्ञा से प्राणी या वस्तु की संपूर्ण जाति का बोध हो उसे जातिवाचक कहते हैं। जैसे – लड़का, लड़की, औरत, मर्द, पशु, पक्षी, फल, फूल, पत्र, पत्रि का, गाँव, देश, दि न, महीना, नदी, झील, पहाड़, पठार आदि ।
लड़का या पशु कहने से दुनिया में जितने लड़के या पशु हैं, उन सभी का बोध होता है। अत: ये जाति वाचक संज्ञाएँ हैं। इनमें कुछ प्रमुख संज्ञाएँ निम्नलिखित हैं –
- फल-फूल एवं सब्जियों के नाम – आम, केला, जूही, चमेली, आलू आदि।
- पशु-पक्षी एवं कीट-पतंगों के नाम–गाय, बैल, तोता, मैना, चींटी आदि।
- संबंधि यों के नाम – भाई, बहन, चाचा, चाची आदि।
- खाद्य-पदार्थों के नाम–चावल, दाल, मि ठाई, हींग, दालचीनी आदि।
- घरेलू सामानों के नाम – टेबुल, कुरसी, पलंग, पंखा, आलमीरा, परदा आदि
- पहनने, ओढ़ने, बिछानेवाले आदि सामानों के नाम – कुरता, पाजामा, रजाई, चादर, तकिया आदि।
- सवारि यों के नाम – गाड़ी, नाव, हवाईजहाज, रेल, साइकि ल आदि।
- प्राकृति क वस्तुओं के नाम – नदी, तालाब, झील, तारा, ग्रह आदि।
3. समूहवाचक संज्ञा
इससे व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह का बोध होता है। जैसे –
सेना, वर्ग, सभा, गुच्छा, समि ति , संघ, झुंड, घौद, परि वार, खानदान, गि रोह, दल आदि
।
“सेना” कहने से सि पाहि यों के समूह का बोध होता है, कि सी एक सि पाही का नहीं । इस्री प्रकार उपर्युक्त सारे शब्दों से कि सी-न-कि सी समूह का पता चलता है।
4. द्रव्यवाचक संज्ञा
जिस संज्ञा से मापने या तौलनेवाली वस्तु का बोध हो
उसे द्रव्यवाचक कहते हैं। जैसे-सोना, चाँदी, हीरा, मोती, दूध, दही, तेल, घी, कोयला, पानी, लकड़ी, कपड़ा, लोहा, चूना, पत्थर, सीमेंट आदि
।
'उपर्युक्त सभी वस्तुओं को हम कि सी-न-कि सी रूप में मापते या तौलते हैं । अतः ये द्रव्यवाचक संज्ञाएँ हैं ।
5. भाववाचक संज्ञा
जिस संज्ञा से व्यक्ति या वस्तु के गुण या धर्म का बोध हो उसे भाववाचक कहते हैं। जैसे–
गुण-संबंधी–सौन्दर्य, माधुर्य, अच्छाई, चतुराई आदि। दोष-संबंधी–बुराई, लड़ाई, ठगाई आदि । स्वाद-संबंधी-खटास, मि ठास आदि क्रिया-संबंधी–घबराहट, सजावट, लिखावट आदि गति -संबंधी–सुस्ती, फुरती, बढ़ती आदि माप-संबंधी–लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई, गहराई आदि अवस्था-संबंधी–बुढ़ापा, लड़कपन, बचपन आदि भाव-संबंधी-मि त्रता, शत्रुता, मूर्खता आदि भावना-संबंधी प्रेम, घृणा, दया, करुणा आदि । विषय-संबंधी–इति हास, भूगोल, रसायनशास्त्र, अंकगणित आदि सिद्धांत या वाद-संबंधी–गुरुत्वाकर्षण, जड़ता, साम्यवाद, पूँजीवाद आदि
।
भाववाचक संज्ञा का निर्माण
भाववाचक संज्ञा का नि र्मा ण प्राय: सभी प्रकार के शब्दों से होता है । शब्दों के अंत में प्रत्यय जोड़ना पड़ता है। जैसे–
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा–
- अकबर–अकबरी
- राम–रामत्व
- नादिरशाह–नादिरशाही
- शि व–शिवत्व
- रावण–रावणत्व
- हिटलर-हि टलरशाही
2. जाति वाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा -
- अँगरेज – अँगरेजियत
- नारी – नारीत्व
- आदमी – आदमीयत
- पण्डित – पंडिताई, पाण्डित्व
आम–अमावट पशु-पशुता, पशुत्व इनसान–इनसानियत पि ता-पि तृत्व ऋषि –ऋषि ता, ऋषि पुरुष–पुरुषत्व, पौरुष कलाकार–कलाकारी पुष्प–पौष्प खेत–खेती प्रति नि धि -प्रति नि धि त्व गुरु – गुरुता, गुरुत्व बच्चा–बचपन दास–दासता, दासत्व बहन–बहनापा दूत –दौत्य बाप–बपौती नर—नरता, नरत्व बालक-बालपन बूऴा–बुऴापा युवक–यौवन भाई–भाईचारा राष्ट्र–राष्ट्रीयता भ्राता–भात्तृत्व लड़का–लडङड़कपन मजदूर–मजदूरी वकील–वकालत मनुष्य –मनुष्यता, मनुष्यत्व वीर–वीरता माता–मातृत्व शात्रु–शत्रुता मानव–मानवता शिशु-शैशव मि त्र–मैत्री, मि त्रता श्शिष्य–श्ष्यत्व, शि ष्यता मुनि –मौन साधु–साधुता
(3) सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा-अपना–अपनापन
आप-—-औआपा अहं अहंकार मम–ममत्व, ममता
(4) अव्यय से भाववाचक संज्ञा-दूर–दूरी, दूरत्व
वाह वाह-वाहवाही धघिक्–धि क्कार शाबाश–शाबाशी निकट–नि कटता, नैकट्य समीप–सामीप्य, समीपता
(5) विशेषण से भाववाचक संज्ञा -
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
'वि शेषण
अंध
अंधता, अंधत्व
अनासक्त
अकलंक
अकलंकता
अनि त्य
अनि त्यत्व, अनि त्यता
अकृतकार्य
अकृतकार्यता
अनि र्वृत्त
अनि र्वृत्त
अचंचल
अचंचलता
अनुगत
अनुगति
अच्छा
अच्छाई, अच्छापन
अनुपम
अतृप्त
अतृप्ति
अनुपयोगी
अद्भुत
अद्धुतता, अद्भुतत्व
अनेक
अनेकता
अधम
अधमाई, अधमता
अनोखा
अनोखापन
अधि क
अधि कता, अधि काई
अन्यून
अन्यूनता
अधीन
अधीनता
अपकृष्ट
अपकृष्टता
अधीर
अधीरता
अपक्व
अपक्वता
अनभि ज्ञ
अनभि ज्ञता
अपगत
अपगति
अनावश्यक
अनावश्यकता
अबतर
अबतरी
संज्ञा (भा०)
अनफा
शेषण संज्ञा (भा०)
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
वि
अबध्य
अबध्यता
उद्रि
अबाध्य
अबाध्यता
उद्देलि त/उद्देल उद्देलन
अभि
अभि
उन्मत्त उन्मत्तता
न्न
न्नता
. अशौच, अशुचि ता
अशुचि अशुद्ध
अशुद्धता
असमाप्त
असमाप्ति
असहनशील असहनशीलता
क्त उद्रि क्त
उपनि
वि
ष्ट उपनि वेश
एकसूत्र एकसूत्रता
एकाम एकाग्रता
एहसानफरामोश एहसानफरामोशी
असहि ष्णु
असहि ष्णुता
ऐयाश ऐर्याशी
असार
असारता
कंजूस कंजूसी
असावधान
असावधानी
आकुल
आकुलता
कर्कश कर्कशता, कर्कशात्व करुणार्द्र करुणार्द्रता
आतुर
आतुरता
करुणामय करुणामयता कातर कातरता
आत्मरत
आत्मरति
काबि
आयत
आयति
आरामतलब
आरामतलबी
कारगुजार कारगुजारी कारसाज कारसाजी
|
आर्त
आर्ति
कारुणि
|
आर्द्र
आर्द्रता
कुंठ
कुंठा
आवारा
आवारगी, आवारागर्दी
कुर्क
कुर्की
आसक्त्त
आसक्ति
आसान
आसानी
ज
आजि
|
क
आस्ति
|
आहत उचि
त
उज्ज्वल
उत्तम
उत्कट
उत्फुल्ल उदार
उदासीन उद्धत
उद्भट
आजि जी
आस्ति
कता
आहति
औचि त्य
ल काबि लीयत
क कारुणि कता
कुलीन कुलीनता कृतघ्न कृतघ्नता कृतज्ञ कृतज्ञता कृपण कृपणता कोमल कोमलता
उत्तमता
खबरदार खबरदारी खुदगरज खुदगरजी
उत्कटता
खूब
उज्ज्वलता
ख्ूबी
उत्फुल्लता
खैरखाह खैरख्वाही
उदारता, औदार्य
ख्वार ख्वारी
उदासीनता औद्धत्य उद्भटता
गमखोर गमखोरी गमगीन गमगीनी गरजमंद गरजमंदी
संज्ञा
61
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
गरम
गरमी
दस्तबरदार
दस्तबरदारी
गरीब
गरीबी
दानशील
दानशीलता
गलत
गलती
दि लगीर
दि लगीरी
गलतकार
गलतकारी
दि लचस्प
दि लचस्पी
गाफि
गफलत
दि लदार
दि लदारी
गुरु
गुरुत्व, गुरुता
दि लशि कन
दि लशि कनी
गैरजि म्मेदार
गैरजि म्मेदारी
दि लावर
दि लावरी
चंड
चंडता
दि लेर
दि लेरी
चरि तार्थ
चरि तार्थता
दुनि यासाज
दुनि यासाजी
चि ंतक
चि ंतन
दुरूह
दुरूहता
छपरबंद
छपरबंदी
दुर्गम
दुर्गमता
छरहरा
छरहरापन
दुर्लभ
दुर्लभता
जबरदस्त `
जबरदस्ती
दुर्वृत्त
दुर्वृत्ति
जर्रा र
जर्रा री
जल्दबाज
जल्दबाजी
जवाँमर्द
जवाँमर्दी
जवाबदेह
जवाबदेही
जानकार
जानकारी
जि ंदादि ल
जि
तंगदस्त
तंगदस्ती
तत्पर
तत्परता
तबदील
तबदीली
तबाह
तबाही
तरफदार
तरफदारी
तलफ
तलफी
तल्ख
तल्खी
तल्लीन
तल्लीनता
तारीक
ल
दुशवार
दुशावारी
दुश्चर
दुश्चरता
धोखेबाज
धोखेबाजी
धर्मच्युत
धर्मच्युति
धर्मशील
धर्मशीलता
धुरंधर
धुरंधरता
नखरेबाज
नखरेबाजी
नगण्य
नगण्यता
नजदीक
नजदीकी
नम
नमी
नव
नवता
नव्य
नव्यता
नाकाम
नाकामी
नाकामयाब
नाकामयाबी
नाखुश
नाखुशी
तारीकी
तैनात
नाचार
तैनाती
नाचारी
नातेदारी
दरि यादि ल
नातेदार
दरि यादि ली
नादान
नादानी
दर्दमंद
दर्दमंदी
नादार
नादारी
दस्तगीर
दस्तगीरी
नापाक
नापाकी
दस्तदराज
दस्तदराजी
नामंजूर
नामंजूरी
ंदादि ली
62
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
नामर्द
नामर्दी
पेचीदा
पेचीदगी
नामवर
नामवरी
प्रकृत
प्रकृति
नाराज
नाराजगी, नाराजी
प्रखर
प्रखरता
नालायक
नालायकी
प्रचंड
प्रचंडता
नासमझ
नासमझी
प्रति कूल
प्रति कूलता
नि बल
नि बलाई
प्रत्यक्ष
प्रत्यक्षता, प्रत्यक्षत्व
नि यमि त
नि यमि तता
प्रपूर्ण
प्रपूर्णता
नि रपेक्ष
नि रपेक्षता, नि रपेक्षी
प्रभवि ष्णु
प्रभवि ष्णुता
नि रुद्यम
नि रुद्यमता
प्रमत्त
प्रमत्तता
नि र्गुण
नि र्गुणता
प्रयोजनीय
प्रयोजनीयता
नि ष्काम
नि ष्कामता
नि ष्कृत
नि ष्कृति
प्रवीण
प्रवीणता, प्रावीण्य
नि ष्पक्ष
नि ष्पक्षता
प्राति कूलि क
प्राति कूल्य
नीचाशय
जनीचाशयता
फुजूलखर्च
फुजूलखर्ची
नेकनाम
नेकनामी
बट्टेबाज
बड़ेबाजी
नेकनीयत
नेकनीयती
बदगुमान
बदगुमानी
नैति क
नैति कता
बदजबान
बदजबानी
पदच्युत
पदच्युति
बदपरहेज
बदपरहेजी
परेशान
परेशानी
बदमजा
बदमजगी
परहेजगार
परहेजगारी
बदमस्त
बदमस्ती
परार्थ
परार्थता
बदसूरत
बदसूरती
परावृत्त
परावृत्ति
बदहवास
बदहवासी
परि णत
परि णति
बद्ध
बद्धता
परि तुष्ट
परि तुष्टि
बलंद
बलंदी
परि तृप्त
परि तृप्ति
बहादुर
बहादुरी
परि पक्व
परि पक्वता
बारीक
बारीकी
पाकदामन
पाकदामनी
बीमार
बीमारी
पाकीजा
पाकीजगी
बुजदि ल
बुजदि ली
पाबंद
पाबंदी
पीर
पीरी .
बुजुर्ग
बुजुर्गी
पुख्ता
प्रयोज्यता
बुलंद
बुलंदी
पुख्तगी
बेईमान
बेईमानी
पूत
पूतता
बेकदर
पृथक्
पृथक्ता
बेकद्र
बेकदरी बेकद्वी
पृथुल
पृथुला
बेकरार
बेकरारी
संज्ञा
63
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
बेकायदा
बेकायदगी
मुक्तहस्त
मुक्तहस्तता
बेकार
बेकारी
मुखालि फ
मुखालफत
बेखबर
बेखबरी
मुख्य
मुख्यता
बेगुनाह
बेगुनाही
मुग्धता
बेगैरत
बेगैरती
मुग्ध म्लान
म्लानता
बेचैन
बेचैनी
रंगीन
रंगीनी
बेढंगा
बेढंगापन
राजभक्त
राजभक्मति
बेताब
बेताबी
रि क्त
रि क्तता
बैदर्द
बेदर्दी
रि हा
रि हाई
बेपरद
बेपर्दगी, बेपरदगी
रुचि र
रुचि रता
बेफि क्र
बेफि क्री
रोचक
रोचकता
बेमुरव्वत
बेमुरव्वती
लतखोरा
लतखोरी
बेरहम
बेरहमी
लावल्द
लावल्दी
बेरुख
बेरुखी
वफादार
वफादारी
बेलज्जत
बेलज्जती
वाचाल
वाचालता
बेलुत्फ
बेलुत्फी
वासंति क
वासंति कता
बेवकूफ
बेवकूफी
वासंती
वासंति क
बेवफा
बेवफाई
वि नष्ट
वि नष्टि
बेसमझ
बेसमझी
वि पन्न
वि पन्नता
बेहया
बेहयाई
वि फल
वि फलता
भक्तवत्सल
भक्तवत्सलता
वि मल
वि मलता
भयातुर
भयातुरता
वि लक्षण
वि लक्षणता
भोक्ता
भोक्तृत्व
वि वश
वि वशता
मक्कार
मक्कारी
वि वि ध
वि वि धता
मजबूत
मजबूती
वि वृत्त
वि वृत्ति
मनसूख
मनसूखी
वि शाल
वि शालता
मनोहर
मनोहरता
वि शि
मांसल
मांसलता
वि श्वंखल
मातहत
मातहती
वि स्तृत
वि शवृंखलता वि स्तार, वि स्तृति
मायूस
मायूसी
वि हीन
वि हीनता
मासूम
मासूमि यत
वि ह्वल
वि ह्वलता
मुअत्तल
मुअत्तली
व्यवहृत
व्यवहृति
मुआफि
मुआफि
व्यापक
व्यापकता
व्युत्पन्न
व्युत्पत्ति
मुकर्रर
क
मुकर्ररी
कत
ष्ट
वि शि
ष्टता
.
64
शेषण संज्ञा (भा०)
वि शेषण
संज्ञा (भा०)
शरीर (नटखट) शरारत
सरूप
सरूपता, ससरूपत्व
शोख शोखी
सापेक्ष
सापेक्षता
सामयि क
सामयि कता
सुभग
सुभगता
सुसाध्य
सुसाधन
सूदखोर
सूदखोरी
स्थापक
स्थापक/पना, स्थापन
स्वाभावि क
स्वाभावि कता
स्वस्थ
स्वास्थ्य
स्वार्थपरायण
स्वार्थपरायणता
हाजि रजवाब
हाजि रजवाबी
हुस्नपरस्त
हुस्नपरस्ती
हृष्ट/हषि त
हृष्टि /हछषि
वि
संकुल संकुलता
संगदि ल संगदि ली संजीदा संजीदगी संपन्न संपन्नता संप्राप्त संप्राप्त संभूत संभूति संवादी संवाद सत्यनि ष्ठ सत्यनि ष्ठा सरकश सरकशी सरगर्म सरगर्मी सरफराज सरफराजी
या से भाववाचक संज्ञा -
,
संज्ञा (भा०)
क्रि
या
संज्ञा (भा०)
अगुआ-ना
अगुआनी, अगुआई
कढु-ना
कढ़त, कळी
अटका-ना
अटकाव
कनकना-ना
कनकनाहट
अड़-ना
अड़ान
कतर-ना
कतराई
आँक-ना
अँकाई, अँकाव
कमा-ना
कमाई
आर-ना
आहट
कस-ना
कसाव, कसावट
इठला-ना
इठलाहट
कह-ना
कहावत
इतरा-ना
इतराहट
काछ-ना
कछनी, कछान
उकस-ना
उकसाहट
काट-ना
कटाई, कटौती
उकसा-ना
उकसाहट
काढ़-ना
कळाव, कढ़ाई
उचक-ना
उचकन
कात-ना
कताई, कतौना
उठ-ना
उठौवा, उठौनी
कुँदेर-ना
कुँदेरा
उड़-ना
उड़ान
कूट-ना
कुटाई, कुटास
उतार-ना
उतराई
कुन-ना
कुनाई
उलझ-ना
उलझन
खड़खड़ा-ना
खड़खड़ाहट
उलट-ना
उलटाव, उलटी
खप-ना
खपत
औओसा-ना
ओसाई
खुजला-ना
खुजलाहट, खुजली
कट-ना
कटनी
खे-ना
खेवाई
(6) क्रि क्रि
या
65
क्रि
या
खोद-ना
संज्ञा (भा०)
क्रि
खुदाई
छा-ना
छवाई
या
संज्ञा (भा०)
गठ-ना
गठौत, गठौती
छि ड़क-ना
छि
गढळ्-ना
गढाई, गटि या
चछि प-ना
छि पाव
गल-ना
गलन
छोल-ना
छोला
गि न-ना
गि नती
जगमगा-ना
जगमगाहट
गि र-ना
गि रावट
जड़-ना
जड़ाव, जड़ाई
गुह-ना
गुहाई
जन-ना
जनाई
गूँथ-ना
गुत्थी
जम-ना
जमाव, जमावट,
गूँध-ना
गुँधाई, गुँधावट
गोड़-ना
गोड़ाई
जल-ना
जलन
घट-ना
घटती, घटाव
जला-ना
जलापा
घबरा-ना
घबराहट
जुगाल-ना
जुगाली
घि र-ना
घि राई
जुट-ना
जुटाव
घि स-ना
घि साई
जोड़-ना
घुट-ना
घुटाई
झुक-ना
जोड़ झुकाव
घुल-ना
घुलावट
झूम-ना
झूम
घूम-ना
घूम, घुमाव
टकरा-ना
टकराव, टकराहट
घोट-ना
घोटाई
टाँक-ना
टॅकाई
चढु-ना
चढ़न, चढ़ाई
टि क-ना
टि काव
चपेट-ना
चपेट
ठहर-ना
ठहराई, ठहराव,
चर-ना
चरवाई, चराई
चल-ना
चलती, चलाऊ,
ड़काई, छि ड़काव
जमाई
ठहरौनी डभक-ना
डभकौरी
डूब-ना
डुबाव, डुब्बी,
चलान .
डुबकी
चि रवा-ना
चि राई, चि रवाई
ढल-ना
चीर-ना
ढलक, ढलाई
चीर
तान-ना
चुकाई
तनाई
चुक-ना
तुलवा-ना
तुलवाई
चुग-ना
चुगाई
तैर-ना
चुन-ना
चुनाई, चुनाव
तैराई
थक-ना
थकान, थकावट
चेत-ना
चेतावनी
दबा-ना
दाब, दबाव
छक-ना
छाक
देख-ना
देख, दि खाव,
छाँट-ना
छटाई
छाप-ना
छ्प्पा
थौंक-ना
धौंक
छप-ना
छपाई
धौंस-ना
धौंस
दि खावट
66
या
या
संज्ञा (भा०)
संज्ञा (भा०)
क्रि
नव-ना
नवाई
मचल-ना
मचलाई
नि खर-ना
नि खार
मथ-ना
मथनी
नि बट-ना
नि खदेरा, नि बटाव
माँग-ना
माँग
नि षहटुर-ना
नि ष्टुराई
मान-ना
मनौती
पडङ़-ना
पड़ाव
मि ल-ना
मि लाई, मि लाप,
पढ्-ना
पढ्त, पढ़ाई
परोस-ना
परसन
मींड़-ना
पहन-ना
पहनाई, पहनावा
मूँड़-ना
मीड़ मुँड़ाई
पाट-ना
पटाव
रख-ना
रखवाई
पाथ-ना
पथाई
रट-ना
रटन
पाल-ना
पालन
रस-ना
रसाव
पीटऱ-ना
पि टाई
रहर-ना
रहाई
पीस-ना
पि साई
रीझ-ना
रीझ
पूज-ना
पूजा
रुक-ना
रुकावट
पैर-ना
चैराई
लग-ना
लगाव
पोत-ना
पुताई
लड़-ना
लड़ाई
फूट-ना
फूट, फुटेहरा
लाद-ना
लदाई
क्रि
मि लावट, मि ल्लत
फेंक-ना
फि कैती
लि ख-ना
लि खाई, लि खावट
बच-ना
बचाव, बचत
लीप-ना
लि पाई
बट-ना
'बटाई
लुन-ना
लुनाई
बन-ना
बनाव, बनावट
लूट-ना
लूट
बरत-ना
बरताव
ले-ना
लेन
बह-ना
बहाव
लेप-ना
लेप, लि प्ति
बहल-ना
बहलाव
सज-ना
सजावट
बाँट-ना
बँटवारा
सट-ना
सटान
बि खर-ना
बि खराव
सड़-ना
सडङ्ा ँध
बुन-ना
बुनावट
सह-ना
सहार, सहन
बुला-ना
बुलावा, बुलाहट
सि हर-ना
सि हरी
भँभर-ना
भँभेरि
सुधर-ना
सुधराई, सुधार
भनभना-ना
भनभनाहट
सुन-ना
सुनवाई
भर-ना
भरती, भराई, भराव
सूझ-ना
सुझाव
भि ड़-ना
भि ड़ंत
हँस-ना
हॅसाई, हँसी
संज्ञा का आधुनिक वर्गीकरण
कुछ विद्वानों ने संज्ञा का वर्गीकरण दूसरे ढंग से भी किया है। जैसे
- (क) प्राणि वाचक संज्ञा और अप्राणि वाचक संज्ञा ।
- (ख) गणनीय संज्ञा और अगणनीय संज्ञा ।
(क) प्राणिवाचक और अप्राणिवाचक संज्ञा
जो संज्ञाएँ जीवंत हैं, अर्थात् चल-फिर और उठ-बैठ सकती हैं, वे प्राणिवाचक हैं। जैसे – मनुष्य, पशु-पक्षी, कीट-पतंगे आदि।
इसके विपरीत जिनमें ये गुण नहीं हैं, वे अप्राणिवाचक संज्ञाएँ हैं । जैसे – पेड़-पौथे, ईंट-पत्थर, कलम-पेंसिल, दूध-दही, लड़कपन-बुढापा आदि ।
(ख) गणनीय और अणणनीय संज्ञा
जिन संज्ञाओं को गिना जाता है, वे गणनीय संज्ञाएँ हैं। जैसे–मनुष्य, पशु-पक्षी, कुरसी-टेबुल, ग्रह-नक्षत्र आदि ।
ठीक इसके विपरीत जिन संज्ञाओं की गि नती नहीं की जाती, वे अगणनीय संज्ञाएँ हैं। जैसे-दूध-दही, चावल-दाल, लड़कपन-बुढापा, खटास-मिठास आदि।
संज्ञाओं का पारस्परि क प्रयोग
कभी-कभी एक संज्ञा का प्रयोग दूसरी संज्ञा के रूप में किया जाता है।
(1) जाति वाचक संज्ञा : व्यक्तिवाचक के रूप में —
आप जानते हैं कि जाति वाचक संज्ञा का प्रयोग संपूर्ण जाति के लिए ही किया वस्तु के लिया जाता है, लेकिन कभी-कभी इसका प्रयोग एक व्यक्ति या वस्तु के लिए भी होता है। जैसे –
- (क) राजा अपनी पुरी में वि श्राम कर रहे हैं। (पुरी – जाति वाचक संज्ञा)
- (ख) मैं पुरी जा रहा हूँ। (जगन्नाथपुरी – व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- (ग) पति देव अपनी देवी (पत्नी) से बातें कर रहे हैं। (देवी – जाति वाचक संज्ञा)
- (घ) देवी के दर्शन कर लो । (दुर्गा जी–व्यक्तिवाचक संज्ञा)
(2) व्यक्तिवाचक संज्ञाः जाति वाचक के रूप में –
कभी-कभी व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग जाति वाचक के रूप में भी होता है। जैसे –
- (क) भारत के गाँवों में आज भी कुछ लोग गाँधी को पूजते हैं। (गाँधी – व्यक्तिवाचक)
- (ख) भारत के गाँवों में आज भी आपको कई गाँधी मि ल जाएँगे । (गाँधी –जाति वाचक)
- (ग) लंका का वि नाशा रावण के कारण हुआ था । (रावण – व्यक्तिवाचक)
- (घ) कलियुग में रावणों की कमी नहीं है। (रावण–जाति वाचक)
(3) भाववाचक संज्ञा : जाति वाचक के रूप में –
कभी-कभी भाववाचक संज्ञाएँ जाति वाचक के रूप में प्रयुक्त होती हैं। जैसे–
- (क) इस काम में पग-पग पर रुकावट आई । (रुकावट – भाववाचक)
- (ख) जीवन में कि तनी रुकावटें आती हैं । (रुकावटें – जातिवाचक)
- (ग) इस दूकान की सभी वस्तुओं में मिलावट है । (मिलावट – भाववाचक)
- (घ) इस खाद्य-पदार्थ में दो प्रकार की मि लावरें हैं । (मिलावटे – जाति वाचक)
Join the Discussion