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संक्षेपण लेखन: नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण टिप्स

संक्षेपण-लेखन (Precis Writing)

संक्षेपण-लेखन एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा पठित/अपठित गंद्यांश की मूल बातों/भावों को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। और, यह संक्षेपित रूप उस मूल उद्धरण की आत्मा होती है।

संक्षेपण-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश :

Notes 1

दिए गए उद्धरण या गद्यांश को दो-तीन बार ठीक ढंग से पढ़ना चाहिए, जिससे मूल बातें समझ में आ जाएँ

Notes 2

पढ़ते समय गद्यांश के महत्त्वपूर्ण वाक्य या शब्दों के नीचे लकीर देकर चिह्नित कर लेना चाहिए ।

Notes 3

गद्यांश में निहित शब्दों की संख्या की गिनती कर लेनी चाहिए और एक ऐसा खाका तैयार करना चाहिए जिसमें शब्दों की संख्या मूल गद्यांश की एक तिहाई हो। अगर संक्षेपित गद्यांश में शब्दों की संख्या मूल गद्यांश से दो-चार शब्द कम या ज्यादा हों, तो कोई बात नहीं । जैसे– मान लीजिए दिए गए गद्यांश में 180 शब्द हैं, तो इसका संक्षेपण 60 शब्दों में होना चाहिए, परंतु 60 शब्द से दो-चार शब्द कम या ज्यादा हैं, तो भी काम चलेगा, इससे ज्यादा अंतर रखने का प्रयास न करें ।

Notes 4

संक्षेपण में अलंकारिक भाषा या मुहावरे/लोकोक्तियों से परहेज करना चाहिए । दूसरे शब्दों में, इसे सरल भाषा में मूल तथ्यों को रखना चाहिए ।

Notes 5

संक्षेपण में, मैं (प्रथम पुरुष) की जगह वह (अन्य पुरुष) का प्रयोग करना चाहिए ।

Notes 6

संक्षेपित गद्यांश का कोई सटीक या अर्थपूर्ण शीर्षक दें, जो मूल गद्यांश को पूर्णत: सूचित या इंगित करता हो।

Notes 7

अंत में मूल गद्यांश एवं संक्षेपित गद्यांश की शब्द-संख्या को भी दर्शाएँ।

उदाहरण (Example) के लिए कुठ गद्यांश और उनके संक्षेपण नीेचे दिए जा रहे हैं -

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 1

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

देशभक्त अपनी मातृभूमि को सच्चे हृदय से प्रेम करता है। यदि एक ओर उसे अपने स्वर्ण अतीत पर गर्व है, तो दूसरी ओर वह अपने भविष्य को भी उज्ज्वल बनाना चाहता है। वह सदैव समाज में क्रांति चाहता है, किंतु क्रांति न विशृंखल कही जा सकती है, न नागरिकता के प्रतिकूल। समाज में प्रचलित रूढ़ियों और अंधविश्‍वासों तथा परंपराओं और परिपाटियों के विरुद्ध वह क्रांति करता है, जो देश की उन्नति के पथ की बाधाएँ हैं। लोगों में एकता, प्रेम और सहानुभूति उत्पन्न करना, उनकी राष्ट्रीय, सामाजिक एंव नैतिक चेतना जाग्रत करना, उन्हें कर्तव्यपरायण और अध्यावसायी बने रहने के लिए प्रोत्साहन देना ही देशभक्ति है।

उत्तर :

शीर्षक : देशभक्त

देशभक्त मातृभूमि से सच्चा प्रेम करता है। देश की उन्नति में बाधक रूदियों, अंधविश्वासों, परंपराओं के विरुद्ध क्रांतिकर लोगों में एकता, प्रेम, सहानुभूति उत्पन्न कर उऊनमें राष्ट्रीय एवं सामाजिक चेतना जगाकर, उन्हें कर्तव्यपरायण बनाना ही देशभक्ति है।

[मूल शाब्द-संख्या : 105; संक्षेपित शाब्द-संख्या : 37]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 2

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

वर्तमान युग में जिस भीषणता के साथ जीवन-संघर्ष चल रहा है, उसमें वह व्यक्ति कभी भी विजयी नहीं हो सकता, जो चुपचाप बैठ कर अति दीर्घकाल तक सोचता-विचारता रहेगा। यहाँ तो वही टिक सकता है, जिसमें काफी स्फूर्ति है, जो दूसरों को ढकेलकर आगे बढ़ सकता है, नहीं तो जो उससे ताकतवर है उसे किनारे ढकेल देगा और स्वयं आगे बढ़ जाएगा । अगर तुम इस जीवन में कुछ करना चाहते हो, अगर तुम्हें अपना जीवन सफल बनाना है तो तुम्हें प्रत्युत्पन्नमति होना चाहिए, अपने निर्णय पर दृढ़ रहना चाहिए और उस पर जमकर काम करना चाहिए । जिस व्यक्ति में ये गुण पाए जाते हैं, उसमें अन्य गुणों का समावेश भी रहता है।

उत्तर :

शीर्षक : सफलता का रहस्य

आधुनिक संघर्षमय जीवन में वही टिक सकता है, जो दीर्घकाल तक सोच-विचार नहीं करता । जीवन में सफलता के लिए व्यक्ति में काफी स्फूर्ति, दूसरों को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की क्षमता, प्रत्युत्पन्नमतित्व और निर्णय की दृढ़ता होनी चाहिए ।

[मूल शब्द-संख्या : 112; संक्षेपित शब्द-संख्या : 38]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 3

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

स्वतंत्रता अपने-आप में निरपेक्ष नहींहै। एक सीमा पार कर जाने के बाद स्वतंत्रता स्वेच्छाचारिता और उच्छृंखलता में बदल जाती है। एक व्यक्ति को धन कमाने की स्वतंत्रता है, पर काले बाजार की अथवा लूटने की स्वतंत्रता नहीं है। हम एक पागल को मोटर चलाने की स्वतंत्रता नहीं दे सकते, जबकि एक सामान्य नागरिक को जो मोटर चलाना जानता है, मोटर चलाने का आज्ञापत्र प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं होती । हमको लाउडस्पीकर पर गाने की स्वतंत्रता है, किन्तु हमारे गाने से हमारे पड़ोसी के सोने की स्वतंत्रता नष्ट नहीं होनी चाहिए । जो स्वतंत्रता हमें प्राप्त है, वह दूसरे की स्वतंत्रता में बाधक नहीं होनी चाहिए । हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि हर स्वतंत्रता भी जुड़ा हुआ है।

उत्तर :

शीर्षक : स्वतंत्रता की सीमा

स्वतंत्रता एक सीमा तक ही ठीक है। सीमोल्लंघन से यह स्वेच्छाचारिता और उदंडता में बदल जाती हैं। हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता दूसरों की स्वतंत्रता में बाधक न बने, क्योंकि हर स्वतंत्रता एक-दूसरे के दायित्व से जुड़ा हुआ है।

[मूल शब्द-संख्या : 124; संक्षेपित शब्द-संख्या : 41]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 4

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

मेरे नौजवान दोस्तो, बलवान बनो। तुम्हारे लिए मेरी यही सलाह है। तुम भगवद्गीता के स्वाध्याय की अपेक्षा फुटबॉल खेलकर कहीं अधिक सुगमता से मुक्ति प्राप्त कर सकते हो। जब तुम्हारी रगें और पुट्ठे अधिक दृढ़ होंगे तो तुम भगवद्गीता के उपदेशों पर अधिक अच्छी तरह चल सकते हो। गीता का उपदेश कायरों को नहीं दिया गया था बल्कि अर्जुन को दिया गया था, जो बड़ा शूरवीर, पराक्रमी और क्षत्रिय शिरोमणि था। कृष्ण भगवान् के उपदेश और अलौकिक शक्ति को तुम तभी समझ सकोगे जब तुम्हारी रगों में खून कुछ और तेजी से दौड़ेगा।

उत्तर :

शीर्घक : नौजवान और भगवद्गीता

नौजवानों को बलवान बनना चाहिए। वे भगवद्गीता के स्वाध्याय की अपेक्षा फुटबॉल खेलें। वे भगवद्गीता के उपदेशों पर तभी अच्छी तरह चल सकते हैं जब उनकी रगें और पुट्ठे सुदृढ़ होंगे।

[मूल शब्द-संख्या : 93; संक्षेपित शब्द-संख्या : 31]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 5

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

किसी राष्ट्र या जाति में संजीवनी शक्ति भरने वाला साहित्य ही है। इसलिए यह सर्वतोभावेन संरक्षणीय है। सब कुछ खोकर यदि हम इसे बचाए रखेंगे तो फिर इसी के द्वारा हम सब कुछ पा भी सकेंगे। इसे खोकर यदि हम बहुत कुछ पा भी लेंगे तो फिर इसे कभी पा न सकेंगे। कारण यह हमारे पूर्वजों का चिर संचित ज्ञान वैभव ही साहित्य है। अन्यान्य लौकिक वैभव नश्वर है, यह अविनाशी है। इसलिए इसका जो पल्ला पकड़े रहेगा, वह अमर होगा।

उत्तर – शीर्षक : साहित्य का महत्त्व

किसी राष्ट्र या जाति में संजीवनी शक्ति भरनेवाला साहित्य सर्वतोभावेन संरक्षणीय है। यह हमारे पूर्वजों का चिर-संचित ज्ञान-भंडार है। अन्य लौकिक वैभव नाशवान् है, किन्तु यह अविनाशी है।

[मूल शब्द-संख्या : 80; संक्षेपित शब्द-संख्या : 28]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 6

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

प्रकृति के दो रूप हैं – एक सुन्दर, दूसरा बेडौड। सच्चे कवि का हृदय दोनों में रमता है। किन्तु, जो प्रकृति के बाहरी सौन्दर्य का चयन अथवा उसकी रहस्यमयता का उद्‍घाटन करता रह गया, वह कवि नहीं है। प्रकृति के सच्चे रूपों का चित्रण संस्कृत के प्राचीन कवियों में मिलता है। प्रबन्धकाव्यों में उसका संश्लिष्ट वर्णन हुआ है।

उत्तर – शीर्षक : सच्चा कवि

सच्चे कवि प्रकृति के सौन्दर्य और बेडौल, दोनों रूपों का वर्णन करते हैं। केवल प्रकृति के बाह्य रूप का वर्णन उचित नहीं।

[मूल शब्द-संख्या : 57; संक्षेपित शब्द-संख्या : 22]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 7

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

कविता में जहाँ तक सामाजिक यथार्थ और व्यापक जीवन के चित्रण का प्रश्‍न है, सामान्यतः दृष्टि प्रबंधकाव्यों और लंबी कविताओं की ओर ही जाती है। प्रगीतधर्मी कविताएँ न तो सामाजिक यथार्थ की अभिव्यक्ति के लिए पर्याप्त समझी जाती हैं, न उनसे इसकी अपेक्षा की जाती है; क्योंकि सामान्य समझ के अनुसार वे अंतत: नितांत वैयक्तिक और आत्मपरक अनुभूतियों की अभिव्यक्ति मात्र हैं ।

उत्तर :

शीर्षक : सामाजिक जीवन और कविता

सामाजिक यथार्थ एवं व्यापक जीवन के चित्रण के लिए प्रबंधकाव्य या लंबी कविताएँ ही सही हैं। प्रगीतधर्मी कविताएँ नितांत वैयक्तिक एवं आत्मपरक अनुभूतियों की अभिव्यक्ति मात्र हैं ।

[मूल शब्द-संख्या : 62; संक्षेपित शब्द-संख्या : 27]

संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 8

निम्नलिखित अवतरण को संक्षेपण कीजिए:

किसी प्रजातंत्र का भविष्य उसके नागरिकों पर निर्भर करता है। जब एक समाज का प्रत्येक सदस्य अपने देश के प्रति अपना व्यक्तिगत तथा सामूहिक उत्तरदायित्व पूरी तरह नहीं समझता तब तक कोई प्रजातंत्रात्मक शासन-प्रणाली कैसे सफल हो सकती है? उत्तरदायित्व की भावना शिक्षा से होती है। अशिक्षित आदमी तो अपनी मरजी के मुताबिक काम करना ही अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है। प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक प्लेटो के अनुसार, किसी आदर्शा गणतंत्र में कवियों के लिए कोई स्थान नहीं । व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति कवियों केअसाधारण प्रेम को ध्यान में रखकर ही प्लेटो इस नतीजे पर पहुँचे होंगे । यह तो स्पष्ट है कि हर आदमी अपनी मनमानी करने लग जाए तो समाज एक दिन भी नहीं टिक सकता। हम चाय पीएँगे या कहवा, अपने खेत में गेहूँ उपजाएँगे या धान, इन बातों के लिए किसी के हुक्म पर हरगिज नहीं चलना है। फिर भी एक-दूसरे के मौलिक अधिकारों का आदर तो करना ही है।

उत्तर :

शीर्षक : प्रजातंत्र का आधार

नागरिक प्रजातंत्र का आधार होता है। प्रजातंत्र शासन-प्रणाली की सफलता समाज के प्रत्येक सदस्य के व्यक्तिगत तथा सामूहिक उत्तरदायित्व पर निर्भर करती है । हर आदमी की मनमानी समाज हेतु हानिकारक है । अपनी इच्छा-पूर्ति हेतु किसी के दबाव पर चलना नहीं है, पर परस्पर के मौलिक अधिकारों का आदर अवश्य करना है ।

[मूल शब्द-संख्या : 152; संक्षेपित शब्द-संख्या : 51]

Conclusion

अतः संक्षेपण लेखन (Sankshepan Lekhan) न केवल आपकी लेखन कला को निखारता है, बल्कि कम शब्दों में अपनी बात को स्पष्टता से कहने का कौशल भी विकसित करता है। आशा है कि यह लेख आपके लिए सहायक सिद्ध होगा। यदि आपके पास इस विषय से संबंधित कोई भी प्रश्न है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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