
विराम और गति (Rest and Motion)
- यदि किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ कोई परि वर्तन नहीं होता है, तो वस्तु विराम (Rest) अवस्था में कहलाती है। जैसे – सड़क पर पड़ा पत्थर, मेज पर रखी किताब आदि।
- यदि किसी वस्तु की स्थि ति में समय के साथ परि वर्तन होता है, तो वस्तु गति (Motion) की अवस्था में कहलाती है। वैज्ञानिक अरस्तु का मत है – कि यह ब्रह्मांड तथा इसमें स्थित प्रत्येक वस्तु गतिशील है न कि विरामावस्था।
गति के प्रकार (Types of Motion)
समान्यतः वस्तु की गति तीन प्रकार की होती हैं।
1. एक रैखिय गति
किसी वस्तु की एक सरल रेखा के अनुद्विश गति को एक रैखिय गति या सरल रैखिय गति को एक रैखिय गति कहते हें। जैसे : एक साईकल सवार का एक सीधी सड़क पड़ गति (गति के अध्ययन करतें समय वस्तु लो गति की अवस्था में हैं के आकार को एक सुक्ष्मबिन्दु मान लिया जाता हैं ताकि गति के अध्ययन और गणना मे आसानी हो।) उदाहरण - प्रकाश के कणों की गति
2. स्थानान्तरीय गति
जब एक वस्तु (कण नहीं) एक सीधी रेखा में गति मान होता है, तो उसकी गति स्थानान्तरीय गति (Translatory Motion) कहलाती है। उदाहरण - कार की सीधी सड़क पर गति
3. वृत्तीय गति
जव कोई कण कि सी वृत्ताकार मार्ग पर गति करता है, तो उसकी गति वृत्तीय गति (circular Motion) कहलाती है उदाहरण – पत्थर को तार पर बाँधकर घुमाना
4. घूर्णन गति
जब कोई वस्तु (कण नहीं) एक नि श्चि त अक्ष के परि त : (यह अक्ष वस्तु से भी गुजर सकता है) एक वृत्तीय पथ पर गति करती है, तो उसकी गति घूर्णन गति (ह०।७०1४ M०४००) कहलाती है। उदाहरण- घरों में पंखें की गति
5. आवर्ती या दोलनी
जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिन्दु के इघर-उघर गति करती है, तो उसकी गति आवर्ती या दोलनी गति (Periodic ०r 0scillatory Motion) कहलाती है। उदाहरण- सरल लोलक की गति
6. कम्पनिक गति
यदि दोलनी गति में आयाम बहुत कम होते है, तो उसको गति कम्पनि क गति (vibratory Motion) कहलाती है। उदाहरण-वायंलिन या गिटार
7. यादृच्छिक गति
जब कोई वस्तु बिना किसी निश्चित पथ दिशा के अनुदिश अनियमित रूप से चलती है तो वह यादृच्छिक गति कहलाती है। उदाहरण - मक्खी की गति, फुटबॉल मैदान में खिलाडी की गति
गति सम्बन्धी कुछ मूलभूत पद
किसी भी वस्तु की गति का अध्ययन करने के लिए चार प्रकार के कारकों का होना आवश्यक हैं। यह हैं वस्तु की स्थिति, पथ की लम्बाई/दुरी, वस्तु का विस्थापन और समय इन चार करको के अलावा एक संदर्भ बिन्दु की भी आवश्यकता होती हें जिसकी सापेक्ष वस्तु की गति का अध्ययन किया जाता हैं।
वस्तु की स्थिति
गति मान वस्तु की स्थिति का आकलन करने के लिए एक सन्दर्भ बिन्दु और अक्षों के एक सेट आवश्यकता होती हैं। तद्नुसार, गति मान वस्तु की स्थिति का आकलन करने और उसकी स्थिति का निर्धारण करनें के लिए एक समकोणिय निर्देशांक का चुनाव किया जाता हैं। ड्समें परस्पर लम्बवत तीन अक्ष होते हैं। जिन्हें x-अक्ष, y-अक्ष और z-अक्ष कहा जाता हें।
- ये तीन अक्ष नो परस्पर लम्बवत होते हैं की प्रतिच्छेद बिन्दु को मूल बिन्दु (ओरिजिन) कहा जाता हैं और इसे प्रायः "0" से संयुचित किया जाता हे। इस मूल बिन्दु (0) को सन्दर्भ बिन्दु कहा जाता हैं।
- परस्पर लम्बवत इन अक्षो से बनें हुए निर्देशांक निकाय के साथ समय को मापने के लिए एक घड़ी रखा जाता हैं। घड़ी के साथ इन निर्देशांक निकाय को निर्देश तंत्र (फ्रेम ऑफ रेफरेंश) कहा जाता हैं।
एक वीमा (डाड्मेंशन) में गति के नि स्पण के लि ए केवल एक अक्ष की आबश्यकता होती हें। नॅँसे सरल रेखीय गति के आकलन मे केवल एक ही अक्ष की आबश्यकता होती हैं। प्रायः सरल रेखि य गति के लि ए ५- अक्ष को नि देश में लिया जाता हैं।
- किसी दिये गये समयान्तराल में वस्तु द्वारा तय किये गये मार्ग की लम्बाई को दूरी (Distance)/पथ लम्बाई कहते हैं। यह एक
अदिश राशिहै। यह सदैवधनात्मक (+ve)होती है ।
विस्थापन (Displacement)
एक निश्चित दिशा में दो बिन्दुओं के बीच की लम्बवत् (न्यूनतम) दूरी को विस्थापन (Displacement) कहते हैं। यह सदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक मीटर है। विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कुछ भी हो सकता है ।
मान लिया की t1 समय में वस्तु की स्थिति x1 हैं और t2 समय में वस्तु की स्थिति x2 हो जाती हें।
- अतः समय में परिवर्तन Δt = t2 − t1
Δ
परिवर्तन को ग्रीक के अक्ष Δ से निरूपत किया जाता है।
अतः वस्तु का विस्थापन उसके प्रारम्भिक ओर अंतिम स्थितियों में अन्तर = x2 − x1 द्वारा व्यक्त किया जाता हेँ।
चूँकि स्थिति में परिवर्तन को Δx द्वारा व्यक्त किया जाता हैं। अतः Δx = x2 − x1
अतः समय मे परिवर्तन (Δx) में विस्थापन (Δx) = x2 − x1
धनात्मक और ऋणात्मक विस्थापन :
- यदि x1 छोटी हैं और x2 बडा हो तो विस्थापन धनात्मक होगा।
- वही यदि x1 का परि माण बड्डा हैं और x2 का परि णाम छोटी तो विस्थापन ऋणात्मक होता हें।
स्थिति-समय ग्राफ
एक गति अवस्था वाले वस्तु की गति को स्थिति-समय ग्राफ सें दृशय ना सकता हैं। ऐसा स्थिति-समय ग्राफ किसी वस्तु की गति के बिभिन्न पहलुओं का आकलन के लिए काफी प्रभावशाली साधन हें।
सरल रेखा में कि सी की गति केवल x-अक्ष पर समय के साथ बढ़लता हैं। ऐसे ग्राफ को x − t ग्राफ़ भरी कहा जाता हैं।
एकसमान गति
यदि कोई वस्तु समान समय अंतराल मे समान गति दूरी तथ करती हैं। तो उस वस्तु की गति एक समान गति कहलाती हें।
चाल (Speed)
किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकेण्ड तय की गई दूरी को चाल कहते हैं । अर्थात् चाल = दूरी/समय यह एक अदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक m/sec है।
चाल के प्रकार
- जब कोई वस्तु समान समयान्तरालों में समान दूरी तय करती है, तो इसकी चाल एकसमान चाल (Uniform Speed) या स्थिर चाल कहलाती है।
- जब कोई वस्तु समान समयान्तरालों में असमान दूरी तय करती है, तो इसकी चाल असान (परिवर्ती) चाल(Non-Uniform Speed)/अस्थिर चाल कहलाती है।
- किसी गति मान वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी तथा दूरी तय करने में लगे कुल समय के अनुपात को वस्तु की औसत चाल (Average Speed) कहते हैं।
- किसी विशेष क्षण पर वस्तु की चाल को उस वस्तु की तात्क्षणिक चाल (Instantaneous Speed) कहते हैं।
वेग (Velocity)
किसी वस्तु के विस्थापन की दर को या एक निश्चित दिशा में प्रति सेकेण्ड वस्तु द्वारा तय की गई दूरी को वेग कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक m/s है ।
वेग के प्रकार
- यदि कोई वस्तु समान समयान्तरालों में समान विस्थापन तय करती है, तो वस्तु का वेग एकसमान वेग (Uniform Velocity) कहलाता है।
- जब कोई वस्तु समान समयान्तरालों में असमान विस्थापन तय करती है, तो वस्तु का वेग असमान वेग (Non-Uniform Velocity) कहलाता है।
- किसी वस्तु द्वारा तय किए गए कुल विस्थापन तथा वस्तु द्वारा लिए गए कुल समय के अनुपात को वस्तु को औसत वेग (Average Velocity) कहते हैं।
- किसी विशेष क्षण पर वस्तु का वेग, उसका तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity) कहलाता है।
त्वरण (Acceleration)
- किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण (Acceleration) कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक मी०/से० है। यदि समय के साथ वस्तु का वेग घटता है तो त्वरण ऋणात्मक होता है, जिसे मंदन (retardation) कहते हैं।
त्वरण के प्रकार
- यदि किसी वस्तु के वेग में समान संमयान्तरालों में समान परिवर्तन होता है, तो वस्तु का त्वरण एकसमान त्वरण (Uniform acceleration) कहलाता है।
- यदि किसी वस्तु के वेग में समान समयान्तरालों में भिन्न-भिन्न परिवर्तन होता है, तो वस्तु का त्वरण असमान त्वरण (Non-Uniform acceleration) कहलाता है। उदाहरण – स्प्रिंग बॉक्स में उत्पन्न त्वरण
- जब एक वस्तु परिवर्ती त्वरण (Variable acceleration) से गति मान है, तब गति शील वस्तु के वेग में कुल परिवर्तन तथा उसमें लगे कुल समय का अनुपात वस्तु का औसत त्वरण (Average Acceleration) कहलाता है। यह घनात्समक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
- किसी विशेष क्षण पर वस्तु की गति में त्वरण, तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous acceleration) कहलाता है।
धनात्मक त्वरण, ऋणात्मक त्वरण और शून्य त्वरण
वेग की तरह ही त्वरण धनात्मक, ऋणात्मक आर शून्य होता हैं।
स्थिति-समय ग्राफ
कुछ सामान्य स्थितियों में
- (a) जब वस्तु के गति की दिशा और त्वरण दोनों धनात्मक होने की स्थिति में।
- (b) वस्तु के गति की दिशा धनात्मक और त्वरण ऋणात्मक हैं।
वेग-समय ग्राफ
- (c) स्थिति-समय ग्राफ जब वस्तु के गति की दिशा और त्वरण दोनों ऋणात्मक है।
- (d) ऋणात्मक त्वरण के साथ वस्तु की गति नो समय t1 पर दिशा बदलती हैं। 0 से t1 समयावधि में यह धनात्मक x की दिशा में गति करती है जबकि t1 एवं t2 के मध्य वह विपरित दिशा में गतिमान हैं।
वेग-समय ग्राफ से गति मान वस्तु के विस्थापन की गणना
वेग-समय ग्राफ के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल वस्तु के विस्थापन को व्यक्त करता हैँ।
मान लिया कि एक वस्तु एकमान गति u सें चल रही हैं जिसका गति-समय ग्राफ चित्र में दिया गया हैं।
पुन: मान लिया कि यह वस्तु समय t = 0 से समय t = T तक चलती हैं। इस गति मान वस्तु का गति -समय ग्राफ निम्नांकित हैं।
अतः इस गति मान वस्तु द्वारा दिये गये समय मे तय की गयी दूरी = ग्राफ मे बने हुए आयत जिसकी ऊँचाई u और आधार T हैं का क्षेत्रफल = लम्बाई × ऊँचाई = u×T= uT
अतः ग्राफ द्वारा बने हुए आयत का क्षेत्रफल = uT
अर्थात,
ग्राफ द्वारा बने हुए आयत का क्षेत्रफल = वस्तु द्वारा दिये गये समय में तय की गयी दूरी = uT
यह क्षेत्रफल uT दिये गये गति मान वस्तु के समान्तराल 0 से T समय मे तय की की दूरी के बराबर हैं।
अतः गति - समय ग्राफ द्वारा गति मान वस्तु के विस्थापन की गणना की जा सकती हें।
ड्सका अभिप्राय यह हैं कि वेग तथा त्वरण किसी क्षण सहसा नही बदल सकते बल्कि परिवर्तन हमेशा सतत होता हैं।
एकसमान त्वरण से गति मान वस्तु का शुद्वगतिकि सम्बधि समीकरण :
मान लिया कि एक सूक्ष्म आकार की वस्तु एकसमान त्वरण a से गति कर रहा हैं।
पुनः मान लिया कि इस वस्तु का समय 0 में प्रारंक्षिक वेग u हैं तथा समय t मे अंतिम वेग = v हैं।
अतः त्वरण
समीकरण के दोनोंं ओर सामाकलित करने पर हम पाते हैं कि
चूँकि यहाँ पर लब समय 0 से t होता हैं तब वेग u सें v हो जाता हैं।
TIP
प्रथम गति का समीकरण : v = u + at
अब ऊपर के समीकरण को निम्नांकित तरिका से लिखा जा सकता हैं।
पुनः दोनों ओर समाकलित करने पर
TIP
द्वितिय गति का समीकरण : x = ut +
( t = 0 पर वस्तु x = 0 हैं लेकिन जब समय 0 से t होता हैं तब वस्तु की स्थिति 0 से बढ़ल कर x हो जाती हैं। )
अब प्रथम गति का समीकरण से
दोनों ओर वर्ग करने पर हम पाते हैं कि
(x = ut +
TIP
तृतीय गति का समीकरण : v2 = u2 + 2ax
इस प्रकार हमे किसी वस्तु के सरल रेखा के अनुदिश एकसमान त्वरण के साथ गति की स्थिति मे हमें तीन समीकरण प्राप्त होते हैं।
- प्रथम गति का समीकरण : v = u + at
- द्वितिय गति का समीकरण : x = ut +
at2 - तृतीय गति का समीकरण : v2 = u2 + 2ax
इन समीकरणों में प्रारंभिक वेग u अंतिक वेग v और त्वरण a का धनात्मक या ऋणात्मक होना वस्तु की दिशा के धनात्मक होना वस्तु की गति की दिशा के धनात्मक या ऋणात्मक होने पर निर्भर होता हैं।
सापेक्ष वेग या सापेक्ष गति या आपेक्षित गति
किसी गतिमान वस्तु का वेग दूसरे गतिमान वस्तु के सापेक्ष वेग या सापेक्ष गति या आपेक्षिक गति कहा जाता हैं।
मान लिया कि दो वस्तु A और B क्रमशः औसत वेग VA और VB से एक ही विमीय क्षेत्र में यथा x-अक्ष के अनूदिश एक ही दिशा में चल रही हें तथा यदि वस्तु A की स्थिति XA(0) और वस्तु B की स्थिति XB(0) समय t = 0 पर हैं, पर है, तो उन दोनों की स्थितियाँ किसी क्षण समय t में निम्नांकित होगी।
XA(t) = XA(0) + VAt XB(t) = XB(0) + VBt
अब वस्तु A और वस्तु B के बीच विस्थापन
XBA(t) = XB(t) − XA(t)
= [XB(0) - XA(0)] + (VB − VA)t
उपरोक्त इन समीकरणो कोण देखने से पता चलता हैं कि जब वस्तु A से देखने हैं तो वस्तु B का वेग VB − VA की दर सें अनवरत बढ़लता हैं।
अतः हम यह कहते हैं कि वस्तु B का वेग वस्तु A कें सापेक्ष VB − VA हैं।
अर्थात,
VBA = VB − VA
उसी प्रकार वस्तु A को वेग वस्तु B के सापेक्ष VAB = VA − VB
इससे यह निषर्कस निकलता हैं कि VBA = − VAB
आपेक्ष वेग के तीन केस (तीन स्थिति यों में आपेक्ष वेग)
मान लिया कि कोई दो वस्तुएँ A और B सरल रेखा के अनुदिश एक ही दिशा मे चल रही हैं तथा उनके वेग क्रमशः VA और VB हैं।
Case I:
जब दो वस्तुओं का वेग समान हों
अब यटि वस्तु A का वेग VA = VB (वस्तु B का वेग)
तो समय t में (XBA) = XB(t) − XA(t) = XB(0) - XA(0)
इसका अर्थ यह हैं कि दोनों वस्तुएँ एक दुसरे से हमेशा स्थिर दूरी (XB − XA) (0) पर है।
इस स्थिति मे दोनों वस्तुओं का वेग या गति समान हैं। इन दोनों समान गति से चल रहे वस्तुओं का स्थिति-समय ग्राफ की रेखाएँ समान्तर है। और इनका आपेक्षिक वेग VBA या VAB शून्य के बराबर है।
Case 2
जब वस्तु B की गति वस्तु A की गति से अधिक हैं।
इस स्थिति में वस्तु B की गति वस्तु A की गति से अधिक है।
अर्थात; VB > VA
ड्सका अर्थ हैं कि VB − VA का मान ऋणात्मक हें।
इस स्थिति में एक वस्तु का स्थिति-समय ग्राफ दूसरें वस्तु के ग्राफ के ढाल की अपेक्षा अधिक हैं।
Case 2
जब दोनों वस्तुएँ एक दूसरे के विपरित दिशा में गति मान हो अर्थात दोनों वस्तुओं के वेगों के चिन्ह विपरित हैं।
TIP
यदि दोनों वस्तुओं के वेग विपरित चिन्हों के हैं। इसका अर्थ यह हैं कि दोनों वस्तुओं एक-दूसरे के विपरित दिशाओं में चल रहे है। अर्थात एक के वेग का चिन्ह धनात्मक हैं। तो दुसरी वस्तु के वेग का चिन्ह ऋणात्मक ।
अर्थात वस्तु B का वेग = −VB तथा वस्तु A का वेग = VA
इस केस में दोनों वस्तुओं के वेग के चिन्ह विपरित हैं। इस स्थिति में दोनो वस्तुओं के स्थिति समय का ग्राफ एक उभयनिष्ठ बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं।
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