Skip to content

अपठित गद्यांश: Intermediate Hindi Unseen Passage Guide

अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर-लेखन

परीक्षा में कभी-कभी ऐसे गद्यांश दिए जाते हैं जिनका पाठ्यपुस्तकों से कोई संबंध नहीं रहता। फिर भी उस अंश से संबद्ध कई प्रकार के प्रश्‍न रहते हैं। छात्रों को उनका उत्तर देना पड़ता है। इस अभ्यास से बौद्धिक क्षमता और भाषा पर उनकी कैसी पकड़ है, इसका ज्ञान होता है । उदाहरणार्थ कुछ गद्यांश और उनसे संबंधित प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं।

अपठित गद्यांश 1

विश्वविद्यालय कोई ऐसी वस्तु नहीं हैजो समाज से काटकर अलग की जा सके । समाज दरिद्र है तो विश्वविद्यालय भी दरिद्र होंगे, समाज कदाचारी है, तो विश्वविद्यालय भी कदाचारी होंगे और समाज में अगर लोग आगे बढ़ने के लिए गलत रास्ते अपनाते हैं तो विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी सही रास्तों को छोड़कर गलत रास्तों पर अवश्य चलेंगे । विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी अशांति फैली है, जो भ्रष्टाचार फैला है, वह सब का सब समाज में फैलकर यहाँ तक पहुँचा है । समाज में जब सही रास्तों काआदर था, ऊँचे मूल्यों की कद्र थी, तब कॉलेजों में भी शिक्षक और छात्र गलत रास्तों पर कदम रखने से घबराते थे । लेकिन अब समाज ने विशेषत: राजनीति ने, ऊँचे मूल्यों की अवहेलना कर दी और अधिकतर लोगों के लिए गलत रास्ते ही सही बन गए तो फिर उसका प्रभाव कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर भी पड़ना अनिवार्य हो गया। छात्रों की अनुशासनहीनता की जाँच करनेवाले लोग परिश्रम तो खूब करते हैं, किंतु असली बात बोलने से घबराते हैं। सोचने की बात यह है कि पहले के छात्र सुसंयत क्यों थे? अब ये उच्छृंखल क्यों हो रहे हैं? किसने किसको खराब किया है? चाँद ने सितारों को बिगाड़ा है या सितारों नेमिलकर चाँद को खराब कर दिया?


प्रश्‍न :

  1. समाज से काटकर किसको अलग नहीं किया जा सकता ?
  2. विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र कब गलत रास्तों पर चलेंगे?
  3. कौन असली बात बोलने से घबराते हैं ?

उत्तर :

  1. विश्वविद्यालय को समाज से काटकर अलग नहीं किया जा सकता ।
  2. जब समाज के लोग गलत रास्ते अपनाएँगे तब विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी गलत रास्ते पर चलेंगे ।
  3. छात्रों की अनुशासनहीनता की जाँच करनेवाले असली बात बोलने से घबराते हैं ।

अपठित गद्यांश 2

मनुष्य उत्सवप्रिय होते हैं। उत्सवों काएकमात्र उद्देश्य आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की पूर्ति होने पर सभी को सुख होता है। पर, उस सुख और उत्सव के आनंद में बड़ा फर्क है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हममें किस बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एक के बाद दुसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत क्षणिक होता है, क्योंकि तुरत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते । यही नहीं, उस दिन हम अपने काम- काज छोड़कर विशुद्ध आनंद की प्राप्ति करते हैं। यह आनंद जीवन का आनंद है, काम का नहीं।

प्रश्‍न :

  1. मनुष्य किसलिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है ?
  2. उत्सवों का एकमात्र उद्देश्य क्या है ?
  3. मनुष्य को एक के बाद दूसरी चिंता क्यों सताती रहती है ?
  4. आवश्यकता-पूर्ति का सुख क्षणिक क्यों होता है ?

उत्तर :

  1. मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है।
  2. उत्सवों का एकमात्र उद्देश्य आनंद की प्राप्ति है।
  3. मनुष्य की सारी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती। अतः उसे एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता सताती रहती है।
  4. आवश्यकता-पूर्ति का सुख क्षणिक इसलिए होता है क्योंकि एक के बाद तुरत दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है।

अपठित गद्यांश 3

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की उत्कट अभिलाषा थी कि सिन्हा लाइब्रेरी के प्रबंध की उपयुक्त व्यवस्था हो जाए । ट्रस्ट पहले से मौजूद था लेकिन आवश्यकता यह थी कि सरकारी उत्तरदायित्व भी स्थिर हो जाए। ऐसा मसविदा तैयार करना कि जिसमें ट्रस्ट का अस्तित्व भी न टूटे और सरकार द्वारा संस्था की देखभाल और पोषण की भी गारंटी मिल जाए, जरा टेढ़ी खीर थी। एक दिन एक चाय-पार्टी के दौरान सिन्हा साहब मेरे (जगदीशचंद्र माथुर) पास चुपके से आकर बैठ गए । सन्‌ 1949 की बात है। मैं नया-नया शिक्षा सचिव हुआ था, लेकिन सिन्हा साहब की मौजूदगी में मेरी क्या हस्ती? इसलिए जब मेरे पास बैठे और जरा विनीत स्वर में उन्होंने सिन्हा लाइबेरी की दास्तान कहनी शुरू की तो मैं सकपका गया । मन में सोचने लगा कि जो सिन्हा साहब मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और गवर्नर तक से आदेश के स्वर में सिन्हा लाइबेरी-जैसी उपयोगी संस्था के बारे में बातचीत कर सकते हैं, वे मुझ-जैसे कल के छोकरे को क्यों सर चढ़ा रहे हैं। उस वक्त तो नहीं, किंतु बाद में गौर करने पर दो बातें स्पष्ट हुई । एक तो यह कि में भले ही समझता रहा हूँ कि मेरी लल्लो-चप्पो हो रही है, किंतु वस्तुत: उनका विनीत स्वर उनके व्यक्तित्व के उस साधारणतया अलक्षित और आर्द्र पहलू की आवाज थी, जो पुस्तकों तथा सिन्हा लाइब्रेरी के प्रति उनकी भावुकता के उमड़ने पर ही मुखरित होती थी।


प्रश्‍न :

  1. सिन्हा साहब लाइब्रेरी केलिए कैसा मसविदा तैयार करना चाहते थे?
  2. माथुर साहब क्यों सकपका गए ?
  3. सिन्हा साहब किनके साथ और किसलिए आदेशात्मक स्वर में बात कर सकते थे ?
  4. माथुर साहब जिसे लल्लो-चप्पो समझते थे वह वास्तव में क्या था?
  5. कब और कौन नए-नए शिक्षा सचिव हुए थे ?

उत्तर :

  1. सिन्हा साहब लाइब्रेरी के लिए ऐसा मसविदा तैयार करना चाहते थे जिसमें ट्रस्ट का अस्तित्व भी न टूटे और सरकार द्वारा संस्था की देखभाल और पोषण की भी गारंटी मिल जाए ।
  2. माथुर साहब इसलिए सकपका गए क्योंकि सिन्हा साहब-जैसा दबंग व्यक्ति उनके पास बैठकर विनीत स्वर में सिन्हा लाइब्रेरी की दास्तान सुनाने लगे।
  3. सिन्हा साहब का व्यक्तित्व ही ऐसा प्रभावशाली था कि वे मुख्यमंत्री, श्शिक्षा मंत्री तथा गवर्नर तक से सिन्हा लाइब्नेरी-जैसी उपयोगी संस्था के बारे में आदेशात्मक स्वर में बात कर सकते थे ।
  4. माथुर साहब जिसे लल्लो-चप्पो समझते थे, वह वास्तव में सिन्हा साहब का विनीत स्वर उनके व्यक्तित्व के साधारणतया अलक्षित और आर्द्र पहलू की आवाज थी।
  5. सन्‌ 1949 में जगदीशचन्द्र माथुर नए-नए शिक्षा सचिव हुए थे।

अपठित गद्यांश 4

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

अनब्दुर्ररहीम खानखाना का जन्म 1553 ई. में हुआ था । इनकी मृत्यु सन्‌ 1625 ई. में हुई । येअरबी, फारसी और संस्कृत के विद्वान्‌ थे ही, हिंदी के विख्यात कवि भी थे। ये सम्राट्‌ अकबर के दरबार के नवरत्नों में एक थे । उनमें हिंदी केएक अन्य प्रसिद्ध कवि गंग भी थे। रहीम कवि अकबर के प्रधान सेनापति और मंत्री थे । इन्होंने अनेक युद्धों में भाग लिया था । युद्ध में सफलता-प्राप्त केकारण अकबर ने इन्हें जागीर में बड़े-बड़े सूबे दिए थे। रहीम बड़े परोपकारी और दानी भी थे । इनके हृदय में दूसरे कवि के लिए बड़े सम्मान का भाव रहता था । गंग कवि के एक छप्पय पर रहीम ने उन्हें छत्तीस लाख रुपए दे दिए थे। जब तक रहीम के पास संपत्ति थी, तब तक वह दिल खोलकर दान देते रहे। रहीम की काव्य उक्तियाँ बड़ी मार्मिक हैं क्योंकि वे हृदय से स्वाभाविक रूप से निःसृत हुई हैं।


प्रश्‍न :

  1. प्रहीम का जन्म और मृत्यु कब हुआ था ?
  2. रहीम किन विषयों के विद्वान्‌ तथा किसके प्रसिद्ध कवि थे ?
  3. रहीम बड़े परोपकारी और दानी थे। कैसे ?
  4. किनकी काव्य उक्तियाँ मार्मिक हैं और क्यों ?

उत्तर :

  1. रहीम का जन्म 1553 ई में हुआ तथा मृत्यु 1625 ई० में हुई ।
  2. रहीम अरबी, फारसी और संस्कृत के विद्वान्‌ तथा हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे।
  3. रहीम बड़े परोपकारी और दानी थे । एक छप्पय पर उन्होंने गंग कवि को छत्तीस लाख रुपए दे दिए थे। जब तक उनके पास संपत्ति थी, तब तक वह दिल खोलकर दान देते रहे ।
  4. रहीम की काव्य उक्तियाँ इसलिए मार्मिक हैं क्योंकि वे उक्तियाँ स्वाभाविक रूप से निकली हैं ।

अपठित गद्यांश 5

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

साहित्य के विकास में प्रतिभाशाली मनुष्यों की तरह जन-समुदायों और जातियों की विशेष भूमिका होती है। इसे कौन नहीं जानता कि यूरोप के सांस्कृतिक विकास में जो भूमिका प्राचीन यूनानियों की है, वह अन्य किसी जाति की नहीं । जन-समुदाय जब एक व्यवस्था से दूसरी व्यवस्था में प्रवेश करता है, तब उसकी अस्मिता नष्ट नहीं हो जाती। प्राचीन यूनान अनेक गण-समाजों में बँटा हुआ था। आधुनिक यूनान एक राष्ट्र है। यह आधुनिक यूनान अपनी प्राचीन संस्कृति से अपनी एकात्मकता स्वीकार करता है या नहीं ? 19वीं सदी में शैले और बायरन ने अपनी स्वाधीनता के लिए लड़नेवाले यूनानियों को ऐसी एकात्मकता पहचनवाने में बड़ा परिश्रम किया । भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान इस देश ने इसी तरह अपनी एकात्मकता पहचानी । इतिहास का प्रवाह ही ऐसा है कि विच्छिन्न हैऔर अविच्छिन्न थी। मानव समाज बदलता है और अपनी पुरानी अस्मिता कायम रखता है। जो तत्त्व मानव समुदाय को एक जाति के रूप में संगठित करते हैं, उनमें इतिहास और सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर निर्मित यह अस्मिता का ज्ञान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । बंगाल विभाजित हुआ और है, किंतु जब तक पूर्वी और पश्चिमी बंगाल के लोगों को अपनी साहित्यिक परंपरा का ज्ञान रहेगा तब तक बंगाली जाति सांस्कृतिक रूप से अविभाजित रहेगी। विभाजित बंगाल से विभाजित पंजाब की तुलना कीजिए, जो ज्ञात हो जाएगा कि साहित्य की परंपरा का ज्ञान कहाँ ज्यादा है और कहाँ कम और इस न्यूनतम ज्ञान के सामाजिक परिणाम क्या होते हैं ।


प्रश्‍न :

  1. यूरोप के सांस्कृतिक विकास में किसकी भूमिका प्रधान रही है ?
  2. प्राचीन यूनान कितने गण-समाजों में बँटा हुआ था ?
  3. यूनान ने अपनी एकात्मकता कब और किस तरह पहचानी ?
  4. कौन-सा तत्त्व मानव समुदाय को एक जाति के रूप में संगठित करता है ?

उत्तर :

  1. यूरोप के सांस्कृतिक विकास में प्राचीन यूनानियों की विशेष भूमिका रही है ।
  2. प्राचीन यूनान अनेक गण-समाजों में बँटा हुआ था।
  3. जब यूनान अनेक गण समाजों में बँटा हुआ था तब उसकी अस्मिता नष्ट होने लगी । अपनी अस्मिता को नष्ट होते देखकर यूनानियों नेअपनी एकात्मकता के स्वरूप को पहचाना ।
  4. इतिहास और सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर निर्मित अस्मिता मानव समुदाय को एक जाति के रूप में संगठित करती है ।

अपठित गद्यांश 6

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

अनंत रूपों में प्रकृति हमारे सामने आती है–कहीं मधुर, सुसज्जित या सुंदर रूप में, कहीं रूखे, बैडौल या कर्कश रूप में, कहीं भव्य, विशाल या विचित्र रूप में और कहीं उग्र, कराल या भयंकर रूप में । सच्चे कवि का हृदय उसके उन सब रूपों में लीन होते हैं, क्योंकि उसके अनुराग का कारण अपना खास सुख भोग नहीं, बल्कि चिर साहचर्य द्वारा प्रतिष्ठित वासना है, जो केवल प्रफुल्ल प्रसून प्रसाद के सौरभ संचार, मकरंद लोलुप मधुकर के गुंजार, कोकिल-कूजित निकुंज और शीतल सुख-स्पर्श समीर की ही चर्चा किया करते हैं, वे विषयी या भोगी हैं। इसी प्रकार जो केवल अत्यंत विशाल गिरि-शिखर से गिरते जलप्रपात की गंभीर गति से उठी हुई सीकर निहारिका के बीच विविध वर्ण स्कुरण की विशालता, भव्यता और विचित्रता में ही अपने ह्रदय के लिए कुछ पाते हैं, वे तमाशबीन हैं, सच्चे भावुक या सह्रदय नहीं। प्रकृति के साधारण, असाधारण सब प्रकार के रूपों को रखनेवाले वर्णन हमें कालिदास, भवभूति आदि संस्कृत के प्राचीन कवियों में मिलते हैं।

प्रश्‍न :

  1. सच्चे कवि का ह्रदय प्रकृति के किन-किन रूपों में लीन होता है?
  2. विषयी या भोगी कौन हैं ?
  3. तमाशबीन कौन हैं ?
  4. भवभूति किस भाषा के कवि हैं ?

उत्तर :

  1. सच्चे कवि का हृदय प्रकृति के अनंत रूपों में लीन रहता है, क्योंकि उसके अनुराग का कारण अपना खास सुख भोग नहीं बल्कि चिर साहचर्य द्वारा प्रतिष्ठित वासना होती है।
  2. वैसे कवि जो प्रफुल्ल प्रसून प्रसाद के सौरभ-संचार, मकरंद, लोलुप मधुकर के गुंजार आदि की चर्चा करते हैं वे विषयी या भोगी होते हैं।
  3. वैसे कवि जो जलप्रपात की गंभीर गति से उठी हुई निहारिका के बीच विविध वर्ण स्फुरण की विशालता, भव्यता और विचित्रता का समागत करते हैं वे तमाशाबीन हैं।
  4. भवभूति संस्कृत भाषा के कवि हैं।

अपठित गद्यांश 7

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत के गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिए कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरंतर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय और नृपालय, इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त विद्वज्जनों केअपने निजी पुस्तकालय भी होते थे । मुद्रणकला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी संपत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया करती थी । भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपना सानी नहीं रखते थे । प्राचीन काल से मुगल-सम्राटों केसमय तक यही स्थिति रही । चीन, फ्रांस, प्रभृति सुदूर स्थित देशों से झुंड के झुंड विद्यानुरागी लंबी यात्रा करके भारत आया करते थे।


प्रश्‍न :

  1. प्रश्न: प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है ?
  2. पुराने समय में अधिक व्यय क्यों होता था ?
  3. पुस्तकालय का प्रारंभ कब से हुआ ?
  4. साहित्य की उन्नति का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण साधन क्या है?
  5. पहले पुस्तकालय किन-किन स्थानों पर हुआ करते थे ?
  6. पुस्तकालयों के कारण भारत को क्या गौरव प्राप्त था ?

उत्तर :

  1. शीर्षक–पुस्तकालय का महत्त्व ।
  2. पुराने समय में पुस्तकों पर अधिक व्यय इसलिए होता था, क्योंकि उस समय एक-एक पुस्तक की तैयारी में बहत संपत्ति लग जाती थी।
  3. पुस्तकालय का आरंभ सभ्यता के विकास के साथ-साथ हुआ ।
  4. साहित्य की उन्नति के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है – निरंतर पुस्तकों का संग्रह करते रहना ।
  5. पहले पुस्तकालय देवालय, विद्यालय और नृपालयों में हुआ करते थे।
  6. पुस्तकालय के द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा और वृद्धि होती है । यह सभ्यता के इतिहास का जीता जागता गवाह है। इसलिए भारत को इसका गौरव प्राप्त था।

अपठित गद्यांश 8

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

हमारी हिंदी सजीव भाषा है। इसी कारण, इसने अरबी, फारसी आदि के संपर्क में आकर इनके तो शब्द संग्रह किए ही हैं, अब अँगरेजी के भी शब्द ग्रहण करती जा रही है। इसे दोष नहीं, गुण ही समझना चाहिए, क्योंकि अपनी इस ग्रहणशक्मति से हिंदी अपनी वृद्धि कर रही है हास नहीं । ज्यों-ज्यों इसका प्रचार बढेगा, त्यों-त्यों इसमें नए शब्दों का आगमन होता जाएगा । क्या भाषा की विशुद्धता के किसी भी पक्षपाती में यह शक्मति है कि वह विभिन्न जातियों के पारंपरिक संबंध को न होने दे या भाषाओं की सम्मिश्रण-क्रिया में रुकावट पैदा कर दे ? यह कभी संभव नहीं । हमें तो केवल इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस सम्मिश्रण के कारण हमारी भाषा अपने स्वरूप को तो नहीं नष्ट कर रही – कहीं अन्य भाषाओं के बेमेल शब्दों के मिश्रण से अपना रूप तो विकृत नहीं कर रही । अभिप्राय यह कि दूसरी भाषाओं के शब्द, मुहावरे आदि ग्रहण करने पर भी हिंदी, हिंदी ही बनी रही है या नहीं, बिगड़कर कहीं वह कुछ और तो नहीं होती जा रही है ?


प्रश्‍न :

  1. प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक दे ।
  2. सजीव भाषा से क्या तात्पर्य है ?
  3. हिंदी में नए शब्दों काआगमन क्यों उचित है ?
  4. हिंदी में नए शब्दों को अपनाते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए ?
  5. भाषा की विशुद्धता क्या है ?
  6. हिंदी भाषा की किस विशेषता को दोष नहीं गुण माना गया है ?

उत्तर :

  1. शीर्षक–हिंदी भाषा का महत्त्व ।
  2. सजीव भाषा से तात्पर्य है कि जिस भाषा ने अनेक भाषाओं के शब्दों को अपने में पचा लिया हो, जिस भाषा की शाब्द-ग्रहण करने की शक्ति (प्रयोग-शक्ति) जितनी ही सहज होगी, वह भाषा उतनी ही सजीव होगी, विकसित होगी ।
  3. हिंदी में नए शब्दों केआगमन से शब्द-भंडार समृद्ध होगा। अभिव्यक्ति में, समझदारी में, विकास में मदद मिलेगी। नए शब्दों के प्रयोग से हिंदी सुगम, सहज और सर्वम्राह्य बनेगी।
  4. हिंदी में नए शब्दों को अपनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हिंदी कीअपनी मौलिकता नष्ट नहीं हो । प्रयोग के समय हिंदी का मूल स्वरूप विकृत नहीं हो इसका ध्यान रखना चाहिए ।
  5. 'भाषा की विशुद्धता' से तात्पर्य है – हिंदी की मौलिकता विनष्ट नहीं हो । उसकी अभिव्यक्ति की सार्थकता बनी रहे तथा व्यवहार में जटिलता और असहजता नहीं आए ।
  6. हिंदी अंतरराष्ट्रीय भाषा का स्थान ग्रहण कर रही है। अत: वह विश्व की अनेक भाषाओं के संपर्क में आ रही है जिस कारण अनेक नए-नए शब्द प्रयुक्त हो रहे हैं। इससे हिंदी का विकास और विश्व स्तर पर प्रयोग भी होगा |अत: अरबी, फारसी, अँगरेजी आदि विदेशी भाषाओं के शब्द ग्रहण करने की विशेषता को हिंदी भाषा का दोष नहीं गुण समझना चाहिए ।

अपठित गद्यांश 9

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

"यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता:" अर्थात्‌ जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का निवास होता है, यानी वहाँ सुख-समृद्धि शांति होती है । यह बात प्राचीनकाल में मनुस्मृति में कही गई थी । लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उस वक्त नारी का सम्मान नहीं होता था और यह बात नारी के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कही गई थी। बल्कि यह बात अनुभब से कही गई थी। प्राचीनकाल में हमारे देश में नारी, समाज की बहुत सम्माननीय सदस्या थी । गार्गी, मैत्रेयी, गौतमी, अपाला आदि प्राचीनकाल की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित नारियाँ हैं। प्राचीनकाल से ही नारियाँ हमारे देश में पुरुषों के बराबर बैठती रही हैं और समाज के निर्माण कार्यों मे पुरुषों के बराबर बैठती रही हैं और समाज के निर्माण कार्यों मेंअपना योगदान देती रही हैं ।

किंतु मध्यकाल तक आते-आते देश पर जल्दी-जल्दी और कई आक्रमण हुए जिससे पूरी समाज व्यवस्था बिगड़ गई । ऐसे में नारी के प्रति लोगों की दृष्टि भी बदली तब नारी की सीमाएँ धीरे-धीरे घर की चारदीवारी तक ही सिमटकर रह गई । आज हम जिस पुरुष-प्रधान समाज की बात करते हैं, वह एक प्रकार के मध्यकाल की ही देन है। शायद यही कारण है कि मध्यकाल में मीरा के अलावा बहुत कम प्रतिष्ठित नारियों के नाम हमारे सामने आते हैं। प्राचीनकाल में यह स्थिति इतनी जटिल नहीं थी। बल्कि उसकाल में तो मातृ सत्तात्मक समाज के भी प्रमाण मिलते हैं, यानी समाज में नारी को निर्णय लेने का पूरा अधिकार प्राप्त था।


प्रश्‍न :

  1. उपर्युक्त गद्यांश का एक समुचित शीर्षक दें।
  2. मनु-स्मृति में क्या कहा गया है?
  3. प्राचीनकाल में नारियों को सम्माननीय स्थान प्राप्त था । कैसे ?
  4. मध्यकाल में नारियों को चारदीवारी में क्यों सिमटना पड़ा ?
  5. आज का पुरुष-प्रधान समाज कब की देन है ?
  6. मातृसत्तात्मक समाज कब था ? उसमें नारियों को क्या अधिकार प्राप्त था ?

उत्तर :

  1. "प्राचीनकाल का नारी-समाज" अथवा "प्राचीनकाल की नारी"
  2. मनुस्मृति में कहा गया है - "यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता:" अर्थात् जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का निवास होता है। यानी वहाँ सुख-समृद्धि और शांति होती है।
  3. प्राचीनकाल में नारियों को सम्माननीय स्थान प्राप्त था। नारी समाज की बहुत ही सम्माननीय सदस्या थी । गार्गी, मैत्रेयी, गौतमी, अपाला आदि प्राचीनकाल की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित नारियाँ हैं। प्राचीनकाल से ही नारियाँ हमारे देश में पुरुषों के बराबर बैठती रही हैं और समाज के निर्माण-कार्यों में उनका विशिष्ट योगदान रहा है।
  4. मध्यकाल में नारियों को चारदीवारी में इसलिए सिमटना पड़ा क्योंकि उस समय हमारे देश पर कई आक्रमण हुए । फलस्वरूप समाज की पूरी व्यवस्था बिगड़ गई । इस कारण नारी के प्रति लोगों का दृष्टिकोण भी बदल गया । अतः: नारी की सीमाएँ धीरे-धीरे घर की चारदीवारी तक ही सिमटकर रह गई ।
  5. आज का पुरुष-प्रधान समाज एक प्रकार से मध्यकाल की ही देन है। मध्यकाल में मीरा के अलावा बहुत कम प्रतिष्ठित नारियों के नाम हमारे सामने आते हैं।
  6. प्राचीनकाल में मातृसत्तात्मक समाज था इसके भी अनेक प्रमाण मिलते है। इस संबंध में प्राप्त कुछ प्रमाण इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। समाज में नारियों को निर्णय लेने का पूरा अधिकार प्राप्त था।

अपठित गद्यांश 10

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

बिहार राज्य में सौभाग्यशाली है छपरा जिला की जीरादेई की वह धरती जिसकी धूल में लोट-पोटकर बड़े हुए थे हमारी आँखों के तारे देशरत्न डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद । इनकी प्रारंभिक पढ़ाई उर्दू-फारसी के माध्यम से हई । 1902 ई. में ये इंट्रेंस परीक्षा में बैठे, तो कलकत्ता विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम आए। इसके बाद इन्होंने एफ॰ ए॰, बी॰ ए॰, एम॰ ए॰ तथा एम॰ एल॰ की उपाधियाँ प्राप्त कीं । स्कूली शिक्षा पटना के टी.के. घोष अकादमी में हुई । यदि किसी भारतीय नेता के विद्यार्थी जीवन में उसकी उत्तर-पुस्तिकाओं का परीक्षण कर यह अभिशंसा की गई हो, "परीक्षार्थी परीक्षक से अधिक योग्य है", तो वे हैं विद्यार्थी राजेन्द्र प्रसाद ।

जब भारत में गणतंत्र का सूर्य चमका, तो सम्पूर्ण राष्ट्र ने इनकी त्याग तपस्या से वशीभूत होकर 1950 ई में इन्हें स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति पद पर आसीन किया। तब से 14 मई 1962 तक ये भारत के गौरवगढ़ के सर्वमान्य अधिपति बने रहे । उन दिनों राष्ट्रपति का मासिक वेतन दस हजार रुपए थे, किंतु इन्होंने इसे घटाकर स्वेच्छा से ढाई हजार कर दिया था । एक निर्धन देश का राष्ट्रपति इतनी मोटी रकम ले–यह इन्हें स्वीकार नहीं था। त्याग से भी अहंकार उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है, किन्तु राजेन्द्र बाबू में ऐसा कभी नहीं हुआ । राष्ट्रपति होने के पश्चात्‌ राजेन्द्र बाबू जनता के उतने ही निकट रहे जितने पहले थे । इन्होंने राष्ट्रपति भवन का द्वार सबके लिए उन्मुक्त कर दिया था। राष्ट्र के महानतम व्यक्ति से देश का लघुतम व्यक्ति समभाव से मिल सकता था तो यह इनके हृदय की विशालता थी ।


प्रश्‍न :

  1. इस गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दें ।
  2. जीरादेई की धरती सौभाग्यशाली क्यों है ?
  3. राजेन्द्र बाबू की स्कूली श्क्षा कहाँ हुई ?
  4. परीक्षार्थी राजेन्द्र की उत्तर-पुस्तिका पर क्या अभिशंसा की गई ?
  5. राजेन्द्र बाबू को 1950 में राष्ट्रपति पद पर क्यों बिठाया गया ?
  6. सिद्ध करें कि राजेन्द्र बाबू को त्याग से भी अहंकार उत्पन्न नहीं हुआ ।

उत्तर :

  1. "त्याग और तपस्या के महान्‌ साधक" डॉ राजेन्द्र प्रसाद । अथवा, "महान्‌ तपस्वी" राष्ट्रनायक डॉ, राजेन्द्र प्रसाद ।
  2. जीरादेई की धरती अत्यंत सौभाग्यशाली है, क्योंकि इस पावन भूमि पर युगद्रष्टा तथा हमारे परमप्रिय पथप्रदर्शक देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी बाल्यावस्था यहाँ की धूलि में लोट-पोटकर व्यतीत किया ।
  3. राजेन्द्र बाबू की स्कूली शिक्षा पटना के टी. के. घोष अकादमी में हुई ।
  4. परीक्षा में परीक्षार्थी राजेन्द्र प्रसाद की उत्तर-पुस्तिकाओं में अभिशंसा की गई थी, "परीक्षार्थी परीक्षक से अधिक योग्य है ।"
  5. राजेन्द्र बाबू के अपूर्व त्याग तथा राष्ट्र की महान्‌ सेवा से प्रभावित होकर 1950 में उन्हें स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति पद पर आसीन किया गया ।
  6. राष्ट्रपति होने के बाद भी राजेन्द्र बाबू को कभी अहंकार उत्पन्न नहीं हुआ। वे राष्ट्रपति होने के पश्चात्‌ भी जनता के उतने ही निकट रहे जितना उसके पूर्व थे । उन्होंने राष्ट्रपति भवन का द्वार जनता-जनार्दन के लिए खोल दिया था। साधारण स्ते साधारण व्यक्ति भी उनसे बेरोकटोक किसी भी समय मिल सकता था ।

अपठित गद्यांश 11

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

हमारी धरती ने बापू को जन्म दिया, किंतु इस धरती को यह सौभाग्य न हुआ कि जो महापुरुष देश की पराधीनता की बेड्याँ काटे और देश की प्रतिष्ठा को संसार में ऊँचा ले जाए, उसका हम स्वागत कर सकें । अपने द्वारा प्रतिष्ठापित स्वतंत्र राष्ट्र में जीवित रहकर विश्वशांति और विश्वबंधुत्व का अपना सपना उन्होंने पूरा किया । महात्मा जी को इससे अच्छी मृत्यु क्या मिल सकती थी कि मानवता की रक्षा करते हए उन्होंने प्राण दिए ?


प्रश्‍न :

  1. महात्मा जी ने हमारे लिए क्या किया ?
  2. रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए ।
  3. क्या महात्मा जी विश्वशांति और विश्वबंधुत्व का अपना सपना पूरा कर सके ?
  4. उचित शीर्षक दे ।

उत्तर :

  1. महात्मा गाँधी ने हमारे लिए पराधीनता की बेडडियाँ काटकर संसार में देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाया ।
  2. प्रतिष्ठा–सम्मान, इज्जत; विश्वबंधुत्व–भाईचारा ।
  3. महात्मा जी ने विश्वशांति और विश्वबंधुत्व के लिए अपने द्वारा प्रतिष्ठापित स्वतंत्र राष्ट्र में जीवित रहकर मानवता की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्यागकर अपना सपना पूरा किया ।
  4. शीर्षक–महात्मा का सार्थक बलिदान ।

अपठित गद्यांश 12

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

आज से सौ वर्ष पूर्व मोहनदास करमचंद गाँधी ने शिक्षा के परिवर्तन पर मंथन किया था । उन्होंने शिक्षा का विश्लेषण केवल विद्यालय पुस्तक तथा परीक्षा तक ही सीमित रखकर नहीं किया था अपितु उन्होंने भारत की स्थिति पर विचार करने, प्रगति, सभ्यता तथा स्वतंत्रता को परखने का माध्यम बनाया था। ऐसा नहीं है कि उनके प्रत्येक विचार से सभी सहमत हों, पर सभी इस बात पर सहमत हैं कि उनके विचारों में समग्रता, ईमानदारी, प्रखरता तथा भविष्य निर्माण की दृष्टि थी । प्रसिद्ध टिप्पणीकार जगमोहन सिंह राजपूत ने लिखा है कि "भारत ने. अनेक शिक्षाविद्‌ तथा नीति निर्धारक जब गाँधी के 'हिंद स्वराज' में दिए गए विचारों तथा बाद में बुनियादी शिक्षा और नई तालीम पर उनके विचारों से मुँह चुराते हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि वे गाँधीजी के विचारों की गतिशीलता को या तो समझ नहीं पा रहे हैं यासमझना नहीं चाहते ।" हिंद स्वराज पुस्तक 1903 ई० में लिखी गई । महात्मा गाँधी पहली बार 1888 ई में विदेश के लिए रवाना हुए थे। वे 1888 से 1914 ई. के बीच भारत में केवल चार वर्ष ही रहे । गोपालकृष्ण गोखले ने गाँधीजी को सलाह दी थी कि उन्हें भारत भ्रमण कर देश की परिस्थितियों से परिचित होना चाहिए । इस सलाह के पूर्व ही गाँधीजी ने “हिंद स्वराज” नामक पुस्तक लिखी थी । नवंबर, 1905 में गाँधीजी ने शिक्षा पर एक लेख लिखा था। उस लेख में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों उन्हें भारत में घटित हो रहे परिवर्तनों को सलाह दी थी कि से सबक लेना चाहिए । उस समय गाँधीजी अँगरेजी एवं गुजराती में इंडियन ओपिनियन” नामक अखबार निकाल रहे थे । वे भारत की सारी घटनाओं से परिचित थे । शिक्षा संबंधी विचार उस समय उनके मानस में अंकुरित हो चुके थे। उस लेख में उन्होंने कहा था कि "भारतीयों का यह कर्तव्य बनता है कि वे शिक्षा प्रसार के लाभों से परिचित हों और यदि दक्षिण अफ्रीका की सरकार आगे नहीं आती है तो वे स्वयं आगे आकर भारतीय बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करें।"


प्रश्‍न :

  1. "हिँद स्वराज" की रचना कब हुई एवं इस लेख में महात्मा गाँधी ने भारतीयों से क्या कहा था ?
  2. महात्मा गाँधी को गोपालकृष्ण गोखले ने कैसी सलाह दी थी?
  3. भारत में अनेक शिक्षाविद्‌ महात्मा गाँधी के शिक्षा संबंधी विचारों से क्यों सहमत नहीं हैं ?
  4. महात्मा गाँधी ने नवंबर, 1905 में अपने लेख में दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों से क्या कहा था ?
  5. शिक्षा के संबंध में महात्मा गाँधी की घारणा क्या थी?
  6. महात्मा गाँधी पहली बार विदेश के लिए कब रवाना हुए थे?

उत्तर :

  1. 'हिंद स्वराज’ पुस्तक की रचना 1903 ई. में हुई थी । इस लेख में महात्मा गाँधी ने भारतीयों से कहा था कि उनका (भारतीयों) यह कर्तव्य बनता है कि वे श्क्षा प्रसार के लाभों से परिचित हों।
  2. गोपालकृष्ण गोखले ने गाँधीजी को भारत भ्रमण कर देश की परिस्थितियों को समझने को कहा था ।
  3. भारत के अनेक शिक्षाविद्‌ गाँधीजी के शिक्षा संबंधी विचारों से इसलिए सहमत नहीं हैं क्योंकि या तो वेअब तक इन्हें समझ नहीं पाए हैं या समझना नहीं चाहते ।
  4. महात्मा गाँधी ने नवंबर, 1905 में अपने लेख में दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों को भारत की बदलती परिस्थितियों से सबक लेने को कहा था।
  5. शिक्षा पढ्ने या पढ़ाने का नाम नहीं है। शिक्षा का मतलब है देश की स्थिति, परिस्थिति, प्रगति, सभ्यता एवं स्वतंत्रता को परखने की समझ । शिक्षा के संबंध में महात्मा गाँधी की यही धारणा थी ।
  6. महात्मा गाँधी ने पहली बार 1888 ई. में विदेश गमन किया था ।

अपठित गद्यांश 13

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

लोभी मनुष्य की मानसिक स्थिति विचित्र-सी होती है। धन के प्रति उसकी ललक की तीव्रता और उत्कटता को देखकर ऐसा लगता है मानो वह सामान्य इनसान नहीं हो । सामान्य इनसान ललक की तीव्रता का शिकार होकर, तज्जन्य अशांति एवं अस्थिरता को स्वीकार कर ही नहीं सकता । धन इकट्ठा करना सभी चाहते हैं, लेकिन लोभी का धन इकट्ठा करना कुछ और ही है। वह बहुधा धन इसलिए इकट्ठा करता है जिसमें उसे किसी समय उसकी कमी न हो, परंतु उसे उसकी. कमी हमेशा बनी ही रहती है। पहले उसकी कमी कल्पित होती है, परंतु पीछे वह यथार्थ, असली हो जाती है, क्योंकि घर में धन रहने पर भी वह उसे काम में नहीं ला सकता । लोभ से असंतोष की वृद्धि होती है और संतोष का सुख खाक में मिल जाता है। लोभ से भूख बढ़ती है और तृप्ति घटती है। लोभ से मूलधन व्यर्थ बढ़ता है और उसका उपयोग कम होता है। लोभी का धन देखने के लिए, वृथा रक्षा करने .'के लिए और दूसरों को छोड़ जाने के लिए होता है। ऐसे धन से क्या लाभ? ऐसे धन को इकङ्ठा करने में अनेक कष्ट उठाने की अपेक्षा संसार भर में जितना धन है उसे अपना ही समझना अच्छा है ।


प्रश्‍न :

  1. लोभी का धन किसके काम आता है ?
  2. लोभ बुरा है, क्यों ?
  3. लोभी हमेशा धन के अभाव का अनुभव क्यों करता है ?
  4. लोभी मनुष्य सामान्य इनसान नहीं होता, क्यों ?

उत्तर :

  1. लोभी का धन दूसरे के काम आता है।
  2. लोभ से मूलधन व्यर्थ बढ़ता हैऔर उसका उपयोग कम होता है।
  3. असंतोष के कारण लोभी हमेशा अपने को धनहीन समझता है।
  4. विचित्र मानसिक स्थिति के कारण लोभी सामान्य इनसान नहीं होता है क्योंकि सामान्य इनसान थन की ललक का शिकार होकर अशांति और अस्थिरता को स्वीकार कर ही नहीं सकता ।

अपठित गद्यांश 14

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

कहानी अपनी कथा-वृत्ति के कारण संसार की प्राचीनतम विधा है । गल्प, कथा, आख्यायिका, कहानी, इन अनेक नामों सेआख्यात-विख्यात कहानी का इतिहास विविध कोणीय है। युगांतर के साथ कहानी में परिवर्तन हुए हैं और इसकी परिभाषाएँ भी बदली हैं। कहानी का रंगमंचीय संस्करण है एकांकी । इसी तरह उपन्यास का रंगमंचीय संस्करण है नाटक । लेकिन उपन्यास और कहानी अलग-अलग हैं। कहानी में एकान्वित प्रभाव होता है, उपन्यास में समेकित प्रभावन्विति होती है। कहानी को बुलबुला और उपन्यास को प्रवाह माना गया है । कहानी टार्चलाइट है, किसी एक बिंदु या वस्तु को प्रकाशित करती है, उपन्यास दिन के प्रकाश की तरह शाब्दों को समान रूप से प्रकाशित करता है। कहानी में एक ओर एक घटना ही होती है । उपन्यास में प्रमुख और गौण कथाएँ होती है । कहानी ध्रुपद की तान की तरह है, आरंभ होते ही समाप्ति का सम-विषम उपस्थित हो जाता है । उपन्यास शास्त्रीय संगीत का आलाप है । आलाप में आधी रात गुजर जाती है। कुछ लोग दर्शाक-दीर्घा में सो जाते हैं, कुछ घर लौट जाते हैं। पर कहानी शुरू हो गई तो पढ्नेवाले को खत्म तक पहुँचने को लाचार कर देती है चाहे परोसा गया खाना ठंडा हो या डाकिया दरवाजे पर खड़ा है। कहानी प्रमुख हो जाती है। उपन्यास पुस्तक से निकलकर पाठक के साथ शौचालय, शयनगृह, चौराहा-सड़क सर्वत्र चलने लगता है ।


प्रश्‍न :

  1. उपर्युक्त गद्यांश का एक समुचित शीर्षक दें ।
  2. 'कहानी' अन्य किन नामों से आख्यात-विख्यात है?
  3. कहानी और उपन्यास में मुख्य अंतर क्या है ?
  4. उपन्यास पुस्तक से निकल कर पाठक के साथ कहा-कहाँ चलने लगता है ?
  5. संसार की प्राचीनतम विधा कहानी क्यों है ?

उत्तर :

  1. कहानी व उपन्यास ।
  2. कहानी गल्प, कथा, आख्यायिका, इन अनेक नामों विख्यात है ।
  3. कहानी में एक ओर एक घटना ही होती है लेकिन उपन्यास में प्रमुख और गौण कथाएँ होती हैं।
  4. उपन्यास पुस्तक से निकल कर पाठक के साथ शौचालय, शयनगृह, चौराहा, सडङड़क-सर्वत्र चलने लगता है।
  5. कहानी अपनी कथा-वृत्ति केकारण संसार की प्राचीनतम विधा है ।

अपठित गद्यांश 15

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

प्रकृति और मनुष्य का संबंध ऐतिहासिक दृष्टि से काफी बाद में शुरू हुआ, क्योंकि प्रकृति पहले से थी, मनुष्य बाद में आया । लेकिन अपने विकास के क्रम में मनुष्य ने शीघ्र ही प्रकृति पर अपनी इच्छा आरोपित करनी चाही । और तब से, संघर्ष और स्वीकृति का एक लोमहर्षक नाटक मनुष्य और प्रकृति के बीच चला आ रहा है। आज भी मनुष्य प्रकृति का ही पुत्र है। जन्म, जीवन, यौवन, जरा, मरण आदि अपनी अनेक स्थितियों में वह आज भी प्राकृतिक नियमों से मुकत नहीं हो सका है। इसके बावजूद निरंतर उसकी चेष्टा यही रही है कि वह ज्ञान-विज्ञान की अपनी सामूहिक उद्यमशीलता के बल पर प्रकृति को पूर्णतः अपने वश में कर ले। यह इतिहास मनुष्य की विजय और प्रगति का इतिहास है या उसकी पराजय और दुर्गति का, इसे वह स्वयं भी ठीक-ठीक नहीं समझ सका है । पर जिसे हम मनुष्य की जयगाथा कहकर पुलकित हो रहे हैं, वह असल में मनुष्य की पराजय और उसके आत्महनन की गाथा है।


प्रश्‍न :

  1. प्रस्तुत गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दें ।
  2. विकास के क्रम में मनुष्य ने किस पर और क्या आरोपित करना चाहा ?
  3. मनुष्य क्या ठीक-ठीक नहीं समझ सका है ?
  4. मनुष्य की पराजय और आत्महनन की गाथा क्या है ?

उत्तर :

  1. प्रकृति और मनुष्य का संबंध ।
  2. विकास के क्रम में मनुष्य ने शीघ्र ही प्रकृति पर अपनी इच्छा आरोपित करनी चाही ।
  3. मनुष्य अपनी विजय और प्रगति' या “पराजय और दुर्गति” को भी ठीक-ठीक नहीं समझ सका है।
  4. प्रकृति और मनुष्य का संबंध ऐतिहासिक दृष्टि से काफी बाद में शुरू हुआ क्योंकि प्रकृति पहले से थी, मनुष्य बाद में आया । लेकिन विकास के क्रम में मनुष्य ने शीघ्र ही प्रकृति पर अपनी इच्छा आरोपित करनी चाही । आज भी मनुष्य प्रकृति का ही पुत्र है। जिसे हम मनुष्य की जयगाथा कहकर पुलकित हो रहे हैं, वह असल में मनुष्य की पराजय और उसके आत्महनन की गाथा है।

अपठित गद्यांश 16

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

एक गुरुकुल था–विशाल और प्रख्यात थे। एक दिन आचार्य ने सभी छात्रों उनके सामने एक समस्या रखी कि उन्हें अपनी कन्या के विवाह के लिए थधन की आवश्यकता है। कुछ धनी परिवार के बालकों ने अपने घर से धन लाकर देने की बात कही । किंतु गुरुजी ने कहा कि इस तरह तो आपके घरवाले मुझे लालची समझेंगे। लेकिन फिर गुरुजी ने एक उपाय बताया कि सभी विद्यार्थी चुपचाप अपने-अपने घरों से धन लाकर दें, मेरी समस्या सुलझ जाएगी । लेकिन यह बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए ।

सभी छात्र तैयार हो गए । इस तरह गुरुजी के पास धन आना शुरू हो गया। लेकिन एक बालक कुछ नहीं लाया । गुरुजी ने उससे पूछा कि क्या उसे गुरु की सेवा नहीं करनी है? उसने उत्तर दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन मुझे ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ कोई देख न रहा हो।”” गुरुजी ने कहा, “कभी तो ऐसा समय आता होगा जहाँ कोई न देख रहा हो।”” गुरुजी का भी ऐसा ही आदेश था।

तब वह बालक बोला, “गुरुदेव ठीक है पर ऐसे स्थान में कोई रहे न रहे, मैं तो वहाँ रहता हूँ। कोई दूसरा देखे न देखे मैं स्वयं तो अपने कुकर्मा को देखता हूँ ।”” आचार्य ने गले लगाते हुए कहा, ““तू मेरा सच्चा शिष्य है । क्योंकि तूने गुरु के कहने पर भी चोरी नहीं की । यह तो सच्चे चरित्र का सबूत है। तू ही मेरी कन्या का सच्चा और योग्य वर है।”” और, उन्होंने अपनी कन्या का विवाह उससे कर दिया । विद्या ऊँचे चरित्र का निर्माण करती है उसे उन्नति के शिखर पर ले जाती है।


प्रश्‍न :

  1. आचार्य ने अपने श्ष्यों को बुलाकर क्या कहा ?
  2. कुछ न ला सकनेवाले शिष्य पर आचार्य क्यों प्रसन्न हुए ?
  3. आचार्य को अपनी कन्या के लिए. सच्चा और योग्य वररूपी मिला ?
  4. गुरुकुल के आचार्य किस प्रकार के व्यक्ति थे ?
  5. लोग उन्नति के शिखर पर कैसे पहुँचते हैं ?
  6. इस गद्यांश का उचित शीर्षक दें ।

उत्तर :

  1. आचार्य ने अपने शिष्यों को बुलाकर कहा कि उनकी कन्या के विवाह के लिए धन की आवश्यकता है। सभी विद्यार्थी अपने- अपने घर से धन लाकर दें, किंतु इसका पता किसी को नहीं चलना चाहिए ।
  2. कुछ न ला सकनेवाले शिष्य पर आचार्य इसलिए प्रसन्न हुए क्योंकि वही उनका सच्चा शिष्य था। वह चरित्रवान्‌ था। गुरु के कहने पर भी उसने अपने घर में चोरी नहीं की ।
  3. धन की खोज थी । वह उन्हें एक सच्चे शिष्य के रूप में मिला । वह शिष्य सच्चा और चरित्रवान्‌ था।
  4. गुरुकुल के आचार्य बड़े विद्वान्‌ थे। वे स्वयं चरित्रवान्‌ और गुणज्ञ थे । वे अपने शिष्यों को भी सच्चा और सच्चरित्र देखना चाहते थे तथा उसी के अनुरूप शिक्षा भी देते थे।
  5. विद्या ऊचे चरित्र का निर्माण करती है और उन्नति के शिखर पर ले जाती है।
  6. शीर्षक : सद्विद्या का महत्त्व ।

अपठित गद्यांश 17

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

सांप्रदायिक दंगों में भगत जी सड़क पर नाच-नाचकर हिंदू-मुसलिम एकता के पद गाते थे । दोनों तरफ के गुंडों को अपनी चीलम पिलाते थे । उनके मन की भड़क सुनते और उनको सूक्ति शैली में उपदेश देते । एक बार भगत जी कहीं गायब हो गए । किसी मुसीबत में फैँसे मुसलमान परिवार को किसी सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने गए थे | हिंदुओं ने मुसलमानों और मुसलमानों ने हिंदुओं पर आशंका की । बड़ी भीषण तैयारियाँ हई, तभी भगत जी प्रकट हो गए और गलियों में फूटा कनस्तर बजा-बजाकर गाते फिरे–या जग अंधा मैं केहि समुझावौं ।


प्रश्‍न :

  1. भगत जी किस प्रकार के गुंडों को उपदेश देते थे ?
  2. भगत जी के गायब हो जाने का क्या कारण था?
  3. भगत जी के गायब हो जाने से समाज में क्या प्रतिकिया हई ?
  4. 'या जग अंधा मैं केहि समुझावौं' का तात्पर्य क्या है ?

उत्तर :

  1. भगत जी सांप्रदायिक दंगों केसमय सड़क पर नाच-नाचकर हिंदू-मुसलिम एकता के पद गाते थे। वे सांप्रदायिक दंगों को भड़काने वाले दोनों तरफ के गुंडों को “सूक्ति” शैली में उपदेश देते थे।
  2. भगत जी के गायब हो जाने का यह कारण था कि कोई मुसलमान परिवार मुसीबत में फैँस गया था, जिन्हें वेबचाने के खयाल से किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने गए थे।
  3. भगत जी के गायब हो जाने से समाज में यह प्रतिक्रिया हुई कि हिंदू मुसलमानों को और मुसलमान हिंदुओं को शंका की दृष्टि से देखने लगे। दोनों ओर से दंगे की भीषण तैयारियाँ हुईं।
  4. 'या जग अंधा मैं केहि समुझावौं' का तात्पर्य है कि जब पूरा संसार ही अंधा अर्थात्‌ मूर्ख-अज्ञानी है तो फिर किसे कुछ समझाया जाए । मूर्खो को समझाना सर्वथा व्यर्थ है।

अपठित गद्यांश 18

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :

वहाँ वह सूर्य है जो चमकता है। तो सूर्य आखिर है क्या ? वेदों में इसे एक पहिएवाले सुनहरे रथ पर सवार देवता कहा गया है जिसे सात शक्तिशाली घोड़े पलकें झपकते ही 365 लीग की रफ्तार से दौड़ा कर ले जाते हैं। वह अपने रथ पर सवार होकर आसमान में घूमता रहता है और संसार की हर गतिविधि पर नजर रखता है । किसने इसे बनाया, जिसपर धरती पर मौजूद जीवन पूरी तरह से निर्भर है ? क्या यह मरता हुआ विशाल तारा है या कोई वैज्ञानिक चमत्कार या वाकई सूर्य देवता है जो वेदों की साकार आत्मा है और जो त्रिदेव का प्रतिनिधित्व करता है–दिन में ब्रह्म, दोपहर में शिव और शाम में विष्णु । भारतीय पौराणिक गाथाओं के अनुसार सूर्य के माता-पिता थे अदिति और कश्यप । अतिदि के आठ बच्चे थे। आठवाँ बच्चा अंडे की शक्ल का था। इसलिए उसका नाम रखा गया मार्तड यानी मृत अंडे का पुत्र और उसका परित्याग कर दिया गया। वह आसमान में चला गया और खुद को वहाँ महिमामंडित कर लिया । दूसरा किस्सा है किअदिति ने एकबार अपने पहले सात पुत्रों सेकहा कि वे ब्रह्मांड का सृजन करें । किंतु, वे इसमें असमर्थ रहे । क्योंकि, वे सिर्फ जन्म को जानते थे, मृत्यु को नहीं। जीवनचक्र स्थापित करने के लिए अमरत्व की जरूरत नहीं थी, सो अदिति ने मार्तंड से कहा । उन्होंने फौरन दिन और रात का सृजन कर दिया, जो जीवन और मृत्यु के प्रतीक थे।


प्रश्‍न :

  1. वेदों में सूर्य का किस रूप में वर्णन किया गया है ?
  2. मार्तंड के संबंध में पुराणों में क्या कहा गया है ? ब्रह्मांड-सृजन के संबंध में किसी पौराणिक कथा का उल्लेख करें ।
  3. सूर्य के दो पर्यायवाची शब्द लिखें । अथवा, उपर्युक्त गद्यांश का एक उचित शीर्षक दें ।

उत्तर:

  1. ….
  2. ….
  3. ….

Join the Discussion

Show Comments

No comments

No comments yet.

Post a Comment

Popular Post

बीजगणित (Algebra) Important MCQ Questions with Answers

बीजगणित (Algebra) Important MCQ Questions with Answers

Level - 1 Level - 2 Level - 3 Conclusion NCERT, BIHAR Board, CBSE, Olympiad Level - 1 ​ प्रश्‍न 1 : 4a बराबर है 4 + a 4 × a a × a × a × a 4 ÷ a उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 2 : संख्या के तीन गुने से 8 अधिक को निम्नलिखित रूप में निरूपित किया जा सकता है। 8 + x + 3 3x − 8 3x + 8 8x + 3 उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 3 : निम्नलिखित में से कौन एक समीकरण है ? x + 7 2y + 3 = 7 2p < 10 12x उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 4 : यदि एक माचिस की डिब्बी में 50 तीली हों, तो माचिस की ऐसी n डिब्बियों के लिए आवश्यक तीलियों की संख्या हे – 50 + n 50n 50 ÷ n 12 − n उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 5 : अमूल्य की वर्तमान आयु x वर्ष है। 5 वर्ष पहले उसकी आयु थी – (5 − x) वर्ष (5 + x) वर्ष (x − 5) वर्ष (5 ÷ x) वर्ष उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 6 : निम्नलिखित में से कौन 6 × x निरूपित करता है – 6x 6 + x 6 − x उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 7 : निम्नलिखित में से कौन एक समीकरण है? x + 1 x − 1 x − 1 = 0 x + 1 > 0 उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 8 : यदि x का मान 2 हो, तो x + 1...
By Guddu Kumar
NCERT Class 9 Science Ch 4 Imp Questions Hindi

NCERT Class 9 Science Ch 4 Imp Questions Hindi

Bihar Board Class 9 Science परमाणु एवं अणु Important Question, PYQ and Model Paper or Sample Paper Bihar Board PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Level - 1 लघु उत्तरीय प्रश्‍न दीर्घ उत्तरीय प्रश्‍न Level - 2 Level - 3 Level - 1 ​ प्रश्‍न 1 : कैथोड किरणों में क्या उपस्थित रहते हैं? इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन परमाणु उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 2 : कैथोड किरणों में विद्यमान होता है – केवल द्रव्यमान केवल आवेश आवेश और द्रव्यमान दोनों में कोई नहीं आवेश तथा द्रव्यमान दोनों ही उत्तर : सही विकल्प (d) है। प्रश्‍न 3 : निम्नलिखित में किसमें न्यूट्रॉन नहीं होता ? हीलियम ट्राइटियम हाइड्रोजन ड्यूटीरियम उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 4 : कक्षों के ऊर्जा स्तर नाभिक से दूर जाने पर बढ़ते हैं नाभिक से दूर जाने पर समान रहते हैं नाभिक से दूर जाने पर घटते हैं इनमें कोई नहीं उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 5 : एक कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या दी जाती है 2n 2 द्वारा n 2 द्वारा n 2 /2 द्वारा n 2 + 1 द्वारा उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 6 : 14 6 C के एक परमाणु में ...
By Guddu Kumar
कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 5 Objective Questions MCQ

कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 5 Objective Questions MCQ

JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Book Based Questions (BBQs) Value Based Questions (VBQs) उच्च स्तरीय बुद्धि कौशल प्रश्न [High Order Thinking Skills (HOTS) Questions] भूमिका (Introduction) कार्य और गतिज ऊर्जा की धारणा : कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Notions of Work and Kinetic Energy : The Work-Energy Theorem) कार्य (Work) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Variable Force) स्थितिज ऊर्जा की अभिधारणा (The Concept of Potential Energy) यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण (The Conservation of Mechanical Energy) किसी स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा (The Potential Energy of a Spring) ऊ...
By Guddu Kumar
Class 11 Maths Chapter 4 MCQ in Hindi: सम्मिश्र संख्याएं

Class 11 Maths Chapter 4 MCQ in Hindi: सम्मिश्र संख्याएं

JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Level - 1 Level - 2 Level - 3 Level - 4 Level - 1 ​ प्रश्‍न 1 : किसी पूर्णांक k के लिए, i 4k = ? 1 − 1 i − i उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 2 : किसी पूर्णांक k के लिए, i 4k+1 = ? 1 − 1 i − i उत्तर : सही विकल्प (c) है। प्रश्‍न 3 : किसी पूर्णांक k के लिए, i 4k+2 = ? 1 − 1 i − i उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 4 : किसी पूर्णांक k के लिए, i 4k+3 = ? 1 − 1 i − i उत्तर : सही विकल्प (d) है। प्रश्‍न 5 : (−5i) = ? i − उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 6 : (−i)(2i) उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 7 : (5 − 3i) 3 = ? 10 + 198i − 10 − 198i 10 − 198i − 10 + 198i उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 8 : (− + )(2 − i) = ? (−6 + ) + (1 + 2 )i (−6 + ) + (1 − 2 )i (−6 − ) + (1 + 2 )i (6 + ) + (1 + 2 )i उत्तर : सही विकल्प (a) है। प्रश्‍न 9 : = ? 1 − 2 i 1 + 2 i −1 + 2 i −1 − 2 i उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 10 : i −35 = ? −i 1 −1 i उत्तर : सही विकल्प (d) है। प्रश्‍न 11 : (5i) = ? 4 5 15 3 उत्तर :...
By Guddu Kumar
Class 11 Physics Chapter 5 Important Questions Hindi

Class 11 Physics Chapter 5 Important Questions Hindi

JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Book Based Questions (BBQs) Value Based Questions (VBQs) High Order Thinking Skills (HOTs) Higher Order Thinking Skills Level - 1 Level - 2 Book Based Questions (BBQs) ​ प्रश्‍न 1 : जड़त्व का गुण किसी-किसी वस्तु में होता है प्रत्येक वस्तु में होता है किसी भी वस्तु में नहीं होता है केवल गति शील वस्तु में होता है उत्तर : सही विकल्प (b) है। प्रश्‍न 2 : जब किसी वस्तु की गति त्वरित होती है तो उसकी चाल में हमेशा वृद्धि होती है उसके वेग में हमेशा वृद्धि होती है वह हमेशा पृथ्वी की ओर गिरती है उसपर हमेशा कोई बल कार्य करता है ...
By Guddu Kumar
संक्षेपण लेखन: नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण टिप्स

संक्षेपण लेखन: नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण टिप्स

संक्षेपण-लेखन (Precis Writing) संक्षेपण-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश : संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 1 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 2 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 3 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 4 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 5 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 6 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 7 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 8 Conclusion संक्षेपण-लेखन (Precis Writing) ​ संक्षेपण-लेखन एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा पठित/अपठित गंद्यांश की मूल बातों/भावों को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। और, यह संक्षेपित रूप उस मूल उद्धरण की आत्मा होती है। संक्षेपण-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश : ​ Notes 1 दिए गए उद्धरण या गद्यांश को दो-तीन बार ठीक ढंग से पढ़ना चाहिए , जिससे मूल बातें समझ में आ जाएँ । Notes 2 पढ़ते समय गद्यांश के महत्त्वपूर्ण वाक्य या शब्दों के नीचे लकीर देकर चिह्नित कर लेना चाहिए । Notes 3 गद्यांश में निहित शब्दों की संख्या की गिनती कर लेनी चाहिए और एक ऐसा खाका तैयार करना चाहिए जिसमें शब्दों की संख्या मूल गद्यांश की एक तिहाई हो। अगर संक्षेपित गद...
By Guddu Kumar
NCERT Class 11 Math Chapter 3 Objective Questions Hindi

NCERT Class 11 Math Chapter 3 Objective Questions Hindi

Bihar Board PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Level 1 PYQ Level 2 Level 3 Level 1 ​ प्रश्‍न 1 : यदि tan θ = है, तो sin θ है − परंतु नहीं − या परंतु − इनमें से कोई नहीं उत्तर : सही विकल्प (B) है। क्योंकि tan θ = ऋणात्मक है, इसलिए θ या तो दूसरे चतुर्थांश में है या चौथे चतुर्थांश में है। इस प्रकार, sin θ = यदि θ दूसरे चतुर्थांश में स्थित है या sin θ = , यदि θ चौथे चतुर्थांश में स्थित है। प्रश्‍न 2 : यदि sin θ और cos θ समीकरण ax 2 − bx + c = 0 के मूल है, तो a, b और c निम्नलिखित संबंध को संतुष्ट करते है : a 2 + b 2 + 2ac = 0 a 2 − b 2 + 2ac = 0 a 2 + c 2 + 2ab = 0 a 2 − b 2 − 2ac = 0 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 3 : sin x cos x का अधिकतम मान है: 1 2 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 4 : sin 20° sin 40° sin 60° 80° का मान है: उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 5 : cos cos cos cos का मान है: 0 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 6 : यदि sin θ + cosec θ = 2, तो sin 2 θ + cosec 2 θ बराबर है – 1 4 2 इनमें से कोई नहीं उत्तर : … Coming Soon So...
By Guddu Kumar
Class 11 Maths Chapter 6 क्रमचय-संचय: Objective Qs

Class 11 Maths Chapter 6 क्रमचय-संचय: Objective Qs

क्रमचय एवं संचय: महत्वपूर्ण प्रश्न (हल सहित) हिंदी में ​ JEE Main, NDA, CBSE, BSEB, UP, PYQ, Sample Questions, Model Paper Question क्रमचय एवं संचय: महत्वपूर्ण प्रश्न (हल सहित) हिंदी में उच्च स्तरीय बुद्धि कौशल प्रश्न [High Order Thinking Skills (HOTS) Questions] 2019 (II) 2019 (I) 2018 (II) 2018 (I) 2017 (II) 2017 (I) 2016 (II) 2016 (I) 2015 (II) 2015 (I) 2014 (I) प्रश्‍न 1 : A और B के बीच चार बस मार्ग हैं तथा B और C के बीच तीन बस मार्ग हैं। एक व्यक्ति B से होकर A से C तक जाने में बस द्वारा राउंड यात्रा (round trip), अर्थात् आने-जाने की यात्रा कर सकता है। यदि वह एक बस मार्ग का एक से अधिक बार प्रयोग नहीं करना चाहता है, तो वह आने-जाने की यात्रा कितनी विधियों से कर सकता है? 72 144 14 19 उत्तर : हल : (A) सही उत्तर है। नीचे दी आकृति में, A से B तक A ⇄ B ⇄ C 4 बस मार्ग हैं और B से C तक 3 मार्ग हैं। अतः, A से C तक जाने के लिए, 4 × 3 = 12 प्रकार या विधियाँ हैं। यह आने-जाने की यात्रा है, इसलिए वह व्यक्ति C से A, B से होकर वापस भी जाएगा। यह प्रतिबंध है कि वह C से B और फिर B से A उसी बस मार्ग स...
By Guddu Kumar

AvN Learn English

AvN Learn English

No blogs found in this list.

Share