खण्ड-'अ' ( वस्तुनिष्ठ प्रश्न )
- धम्ममहामात्रों को किसने नियुक्त किया ?
- चुद्रगुप्त मौर्य
- बिंदुसार
- अशोक
- कनिष्क ।
- त्रिपिटक साहित्य है
- (अ) जैन धर्म का
- (ब) बौद्ध धर्म का
- (स) शैव धर्म का
- (द) वैष्णव धर्म का ।
- कनिष्क की राज्यारोहण तिथि है
- 48 ई॰
- 78 ई॰
- 88 ई॰
- 98 ई॰
- महाभारत युद्ध कितने दिनों तक चला ? a. b. c. d.
- महावीर ने पार्श्वनाथ के सिद्धांतों में नया सिद्धांत क्या जोड़ा ? a. b. c. d.
- पुर्तगालियों ने गोवा पर कब अधिकार किया ? a. b. c. d.
- सहायक संधि की नीति कार्यन्वित की a. b. c. d.
- अवध में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ? a. b. c. d.
- 1857 का विद्रोह आरंभ हुआ a. b. c. d.
- भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के संस्थापक कौन माने जाते हैं ? a. b. c. d.
- वि जयनगर साप्राल्य की स्थापना कि सने की ? a. b. c. d.
- उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का आरंभ कि स संत ने किया ? a. b. c. d.
- कैप्टेन हॉकि न्स कि स मुगल शासक के दरबार में आया ? a. b. c. d.
- निम्नलि खि त में अकबर कि स पर अधि कार नहीं कर सका ? a. b. c. d.
- नि म्नलि खि त में कौन मुगल बादशाह (आलमगीर' के नाम से जाना जाता था ? a. b. c. d.
- 'गेटबे ऑफ इंडि या' का नि र्मा ण कब हुआ था ? a. b. c. d.
- 1942 में कौन आंदोलन हुआ ? a. b. c. d.
- “दि ल्ली चलो' का नारा कि सने दिया ? a. b. c. d.
- भारतीय संवि धान की प्रारूप समि ति के अध्यक्ष कौन थे ? a. b. c. d.
- भारतीय संवि धान के अनुसार संप्रभुता नि हि त है a. b. c. d.
- राखालदास बनर्जी को मोहनजोदड़ो के अवशेष कि स वर्ष मि ले ? a. b. c. d.
- सि न्धु घाटी सभ्यता ओं वि शाल स्नानागर के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए हैं ? a. b. c. d.
- सोलह महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली महाजनपद कौन था ? a. b. c. d.
- अर्थशास्त्र और इंडि का से कि स राजवंश के वि षय में जानकारी मि लती है ? a. b. c. d.
- कि स शि लालेख में अशोक के कलि ंग वि जय का उल्लेख है ? a. b. c. d.
- आइन-ए-अकबरी कि तने भागों में वि भक्त है ? a. b. c. d.
- औरंगजेब ने अपने जीवन का अंति म भाग बि ताया a. b. c. d.
- स्थापत्य कला का सबसे अधि क वि कास कि सके समय में हुआ ? a. b. c. d.
- शेख मुड्नुद्दीन चि श्ती की दरगाह स्थि त है a. b. c. d.
- इंग्लि श ईस्ट इंडि या कंपनी की स्थापना कब हुई थी ? a. b. c. d.
- कि स भारतीय शासक को नेपोलि यन की संज्ञा दी गई है ? a. b. c. d.
- एलोरा के कैलाश मंदि र का नि र्मा ण फि स राजवंश ने किया ? a. b. c. d.
- स्तूप का संबंध कि स धर्म से है ? a. b. c. d.
- अल-बि रूनी कि सके साथ भारत आया था ? a. b. c. d.
- इब्न बतूता कि स देश का नि वासी था ? a. b. c. d.
- मुस्लि म लीग कौ स्थापना कि स वर्ष हुई थी ? a. b. c. d.
- जालि याँवाला बाग हत्याकांड कि स वर्ष हुआ ? a. b. c. d.
- डाँडी कि स राज्य में स्थि त है ? - a. b. c. d.
- पूना समझौता कि स वर्ष हुआ था ? a. b. c. d.
- नि म्नलि खि त में कि सका प्रकाशन अबुल कलाम आजाद ने किया ? a. b. c. d.
खण्ड-'ब' ( लघु उत्तरीय प्रश्न )
सभी प्रश्नों के उत्तर दें ।
आयगार व्यवस्था के विषय में आप क्या जानते हैं ?
विजयनगर राज्य ने प्रचलित सथानीय प्रशासन में परिवर्तन कर आयागार व्यवस्था आरंभ की प्रत्येक ग्राम को स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई के रूप में गणित कर प्रशासन 12 व्यक्तियों के समूह को दिया गया । यह समूह आयगर कहलाता था । ये व्यक्ति राजकीय अधिकारी थे इनका पद आनुवंशिक था । वेतन के रूप में लगान और कर मुक्त भूमि दी जाती थी । आयगार ग्राम प्रशासन की देखभाल करते एवं शांति व्यवस्था बनाए रखते थे।
मीराबाई पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।
मेड़ता के शासक रत्न सिंह राठौर की पुत्री मीरा का जन्म 1398 ई॰ में हुआ था। इनका विवाह राणासांगा के पुत्र के साथ हुआ था । मीरा कृष्ण शक्ति कृष्ण भक्ति में लीन रहती थीं । उन्होंने के कई अनमोल पदों का सृजन किया जैसे कि –
"मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई ।
जा के सिर मोर मुकुट मेरो पति न सोई ॥
कुलक्ष्णी मान मीरा को मारने के प्रयास भी हुये परंतु भक्ति में डुबी मीरा कृष्ण-प्रेम से तनिक भी डगमग नहीं हुई ।
अकबर को 'राष्ट्रीय शासक' क्यों कहा जाता है ?
अकबर इतिहास में महान की उपाधि से विभूषित हैं और इसकी महानता का मुख्य कारण है – इसका विराट् व्यक्तित्व । साम्राज्य कौ सुदृढता, साम्राज्य में शांति स्थापना तथा मानवीय भावनाओं से उत्प्रेरत अकबर ने न सिर्फ गैर मुसलमानों को राहत दिया, राजपूतों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया बल्कि एक कुशल प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रदान किया । धार्मिक सामंजस्य के प्रतीक के रूप में उसका दीन-ए-इलाही प्रशंसनीय है ।
ब्रिटिश चित्रकारों ने 1857 के विद्रोह को किस रूप में देखा ?
ब्रिटिश पत्र-पत्रिकाओं, अखबारों, कार्टूनों में 1857 के विद्रोह के दो बिन्दुओं पर बल दिया गया – हिन्दुस्तानी सिपाहियों की वर्बरता और ब्रिटिश सत्ता की अजेयता का प्रदर्शन ।
टॉमस जोन्स वार्कर के 1859 के रिलीज ऑफ लखनऊ इन मेमोरियम, न्याय जैसे चित्रों के माध्यम से ब्रिटिश प्रतिरोध की भावना और उनकी अजेयता के भाव ही प्रदर्शित होते हैं ।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के मुख्य आदर्श क्या हैं ?
भारतीय संवि धान को प्रस्तावना हमें यह बताती है कि वास्तव में संवि धान का क्या उद्देश्य है । यह घोषणा करता है कि संवि धान का स्रोत भारत की जनता है । यह नि म्नलि खि त सि द्धांतों वथा आदरा पर बल देता है- (क) न्याव-सामाजि क, आर्थि क और राजनीति क । (ख) स्वतंत्रता-वि चार, अभि व्यक्ति , वि श्वास तथा पूजा-अर्चना की । (ग) समानता-प्रति ष्ठा तथा अवसर की समानता । (घ) ्रातृत्व-व्यक्ति को गरि मा तथा राष्ट्र की एकता व. अखंडता सुनि श्चि त करना तथा आपसी बन्धुत्व बढ़ाना ।
भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू किया गया ?
अभि लेखों से तात्पर्य है पाषाण, धातु या मि ट्टी के बर्तनों आदि पर खुदे हुए लेखाभि लेखों से क्त्कालीन राजनीति क सामाजि क, आर्थि क तथा धार्मि क जीवन की जानकारी मि लती है, अशोक कें अभि लेखों द्वारा उसके धम्म, प्रचार-प्रसार के उपाय, प्रशासन, मानवीय पहलूओं आदि के वि षय में सहज जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । इति हासं लेखन में अभि लेख की महत्ता इससे भी स्पष्ट हो जाती है कि मात्र अभि लेखों के ही आधार पर भण्डारकर महोदय ने अशोक का इतिहास लि खने क्या सफल प्रयत्न किया है ।
इतिहास लेखन में अभिलेखों का क्या महतव है ?
अभि लेखों से तात्पर्य है पाषाण, धातु या मि ट्टी के बर्तनों आदि पर खुदे हुए लेखाभि लेखों से क्त्कालीन राजनीति क सामाजि क, आर्थि क तथा धार्मि क जीवन की जानकारी मि लती है, अशोक कें अभि लेखों द्वारा उसके धम्म, प्रचार-प्रसार के उपाय, प्रशासन, मानवीय पहलूओं आदि के वि षय में सहज जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । इति हासं लेखन में अभि लेख की महत्ता इससे भी स्पष्ट हो जाती है कि मात्र अभि लेखों के ही आधार पर भण्डारकर महोदय ने अशोक का इतिहास लि खने क्या सफल प्रयत्न किया है ।
हड़प्पा सभ्यता के विस्तार की विवेचना करें।
हड्प्पा सभ्यता प्राचीन सभी सभ्यताओं में वि शालतम थी । यह उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षि ण में नर्मदा घाटी तक तथा पश्चि म में बलूचि स्तान मकरान तट से लेकर पूर्व में अलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) तक फैली हुई थी । कुल मि लाकर यह सभ्यता पूर्व से पश्चि म तक 1600 कि मी० दथा उत्तर से दुक्षि ण लगभग 1200 कि मी» तक वि स्तृत थी ।
हड़प्पावासियों द्वारा व्यवहत सिंचाई के साधनों का उल्लेख करें ।
हड़प्पावासियों द्वारा मुख्यतः नहरें, कुएँ और जल संग्रह करने वाले स्थानों को सिंचाई के रूप में प्रयोग में लाया जाता था ।
- (क) अफगानि स्तान में सौतुगई नामक स्थल से हड्प्पाई नहरों के चिह प्राप्त हुए हैं ।
- (ख) हड्प्पा के लोगों द्वारा सि ंचाई के लि ए कुओं का भी इस्तेमाल किया जाता था ।
- (ग) गुजरात के धोलावीरा नामक स्थान से तालाब मि ला है । इसे कृषि की सि ंचाई के लि ए, पानी देने के लि ए तथा जल संग्रह के लि ए प्रयोग किया जाता था ।
मौर्यकालीन इतिहास के प्रमुख स्रोतों का संक्षिप्त विवरण दें ।
मौर्यकालीन इतिहास की जानकारी हेतु हमारे पास साहि त्यि क एवं पुरातात्वि क दोनों प्रकार के स्रोत हैं । साहि त्यि क स्रोतों में कौटि ल्य का अर्थशास्त्र, मेगास्थनीज की इण्डि का वि शाखादत्त कौ मुद्राराक्षस महत्त्वपूर्ण है तो पुरातात्वि क स्रोतों में अशोक के शि लालेख, स्तम्भलेख, कुम्हरार के अवशेष महत्त्वपूर्ण एवं वि श्वसनीय जानकारी प्रदान करते हैं ।
गाँधार कला कौ विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
महामान बौद्ध धर्म के उदय के साथ गांधार कला का भी उदय हुआ । इनका वि कास गांधार क्षेत्र (अवि भाजि त भारत का पश्चि मोत्तर क्षेत्र) में हुआ इसलि ए इसे गांधार कला कहा गया । इस पर यूनानी कला-शैली का प्रभाव है । इस कला में पहली बार बुद्ध और बोधि सत्व र मानवाकार मूर्ति याँ वि भि न्न मुद्राओं में बनीं । मूर्ति यों में बालों के अलंकरण पर वि शेष ध्यान या गया ।
विजयनगर की स्थापत्य कला की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
वि यनगर स्थापत्य शैली में चोल, चालुक्य, पल्लव तथा होयसल शैली का शि क्षण मि लता है । वि ट्ठलस्वामो मदि र वीरूयाक्ष मंदि र इस शैली के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं । इनमें ग्रेनाइट पत्थरों के साथ-साथ शि ल्पकला में सेलखडी पत्थरों का उपयोग किया गया है । स्तम्भों को जानवरों तथा पौराणि क हि न्दू कथाओं से सजाया गया है । मण्डप चबूतरे पर बने हैं तथा मंदि रों में भव्य गोपुरम (प्रवेश द्वार) भी है
भारत में यूरोपीय उपनिवेशों की स्थापना के क्या कारण थे?
भारत में ईस्ट इंडि या कम्पनी के प्रशासन और गति वि धि यों से संबद्ध यह पंचवीं रि पोर्ट थी जि से 1813 में ब्रिटिश संसद में पेश किया गया । इसे एक प्रवर समि ति ने तैयार किया था । रि पोर्ट 1002 पृष्ठों में थी । इनमें मुख्यतः जमींदारों, रैयतों की अर्जि याँ, कलक्टर की रि पोर्ट बंगाल-मद्रास के राजस्व और न्यायि क और न्यायि क अधि कारि यों पर टि प्पणि याँ थी । रि पोर्ट पर ब्रिटिश संसद में लम्बी बहस हुई
'पाँचवीं रिपोर्ट' पर टिप्पणी लिखें।
पाँचवीं रि पोर्ट भारत में ईस्ट इण्डि या कम्पनी के प्रशासन तथा क्रि या-कलापों के सम्बन्ध में तैयार की गई थी । यह रि पोर्ट 1,002 पृष्ठों में उल्लि खि त थी । इस रि पोर्ट में जमौंदारों और रैयतों की अर्जि याँ, वि भि न्न जि लों के कलेक्टरों की रि पोर्ट, राजस्व न्यायि क, सांख्यि कीय तालि काएँ आदि पर टि प्पणि याँ शामि ल की गई । ब्रि टेन के कुछ ऐसे समूह भी थे जो भारत और चीन के साथ व्यापार पर ईस्ट इण्डि या कम्पनी के एकाधि कार का वि रोध करते थे । कम्पनी के कुशासन और अव्यवस्थि त प्रशासन के वि षय में प्राप्त सूचना पर ब्रि टेन में बहस छि ड्ना स्वाभावि क थ । ब्रि टेन के समाचार-पत्र कम्पनी की भ्रष्ट नीति यों का खुलासा कर रहे थे । इस प्रकार कम्पनी को बाध्य किया गया कि वह भारत के प्रशसन से सम्बन्धि त रि पोर्ट नि यमि त रूप से भेजे । यही पाँचवीं रि पोर्ट एक ऐसी रि पोर्ट है जो प्रवर समि ति द्वारा तैयार रि पोर्ट है । पाँचवीं रि पोर्ट तैयार करने वाले कम्पनी के प्रशासन को अलोचना करने में तुले हुये थे । पाँचवीं रि पोर्ट में दि ये गये साक्ष्यों एवं तर्कों को बि ना कि सी आलोचन के स्वीकार नहीं किया जा सकता । पाँचवीं रि पोर्ट एक सरकारी रि पोर्ट है और यह रि पोर्ट उक्त वर्णि त कारणों के तहत प्रस्तुत कौ गई । अतः मात्र इस रि पोर्ट के आधार पर कोई नि ष्कर्ष नि कालने से पूर्व अन्य उपलब्ध तत्युगीन स्रोतों का अवलोकन आवश्यक प्रतीत होता है । अर्था त्तत्युगीन स्रोत रूपी साक्ष्यों से इसकी पुष्टि करना आवश्यक है
स्थायी बंदोबस्त से कंपनी को क्या लाभ हुए?
1793 ई में लार्ड कार्नवालि स द्वारा बि हार, बंगाल, उड़ीसा में भूराजस्व को स्थायी बन्दोबस्त लागू की गई । इसमें जमींदारों को भूमि का साथी मानते हुए उन्हें नि यत ति थि पर नि श्चि त राजस्व सरकार के पास जमा करना पड़ता था । राजस्व दर सरकार बढ़ा नहों सकती थी । कम्पनी को आशा थी कि इससे उसकी आय नि श्चि त हो जायेगी और बार-बार बंदोबस्ती की व्यवस्था से भी उसे छुटकारा मि ल जायेगा । परन्तु कर की मात्रा अधि क होने तथा जमौंदारों द्वारा कृषि सम्बन्धी सुधार न होने से इस व्यवस्था के परि णाम सुखद नहीं रहे ।
संथालों ने ब्रिटिश शासन के वि रुद्ध विद्रोह क्यों किया ?
1855-56 ई° में संथाल परगना में संथालों ने सि द्धू और कान्हू के नेतृत्व में ब्रि टि श सरकार, जमौंदारों तथा महाजनों के खि लाफ विद्रोह कर दिया । इन्होंने अपनी जमीन वापस करने तथा स्वतंत्र जीवन जीने कौ माँग रखी । यद्यपि विद्रोह दबा दिया गया परंतु सरकार ने इस क्षेत्र में वि शेष भूमि कानूनों का नि र्मा ण कर इन्हें तुष्ट करने का प्रयास किया गया ।
खण्ड-'स' ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न )
सभी प्रश्नों के उत्तर दें ।
बर्नियर भारतीय नगरों को कि स रूप में देखता है ?
बर्भि यर के अनुसार मुगल काल में अनेक बढ़े और समृद्ध नगर थे । आबाद की आबादी की तुलना में मुगलकालीन नगरों प्रति शत भाग नगरों में दहता था । यूरोपीय शहरों राजधानी नगर के रूप में वि ख्यात थे । नगरों में अभि क घनी थी । दि ल्ली और आगरा नगर री शि ला उत्पादो के भव्य रायसी इमारतें, अमीरों के मकान और बढे बाजार थे । नगर दस्तकाबनाए जाते थे । नगर केन्द्र थे । नगर में राजकीय कारखाना थे जह्टाँ वि भि न्न प्रकार क॑ सामान में कलाकार, चि कि त्सक, अध्यापक, वकील, वास्तुकार, संगीतकार, सुलेखक रहते थे । जि न्हें राजकीय और अमीरी का संरक्षण प्राप्त था । नगरँ का एक प्रभावशाली वर्ग व्यापारी वर्ग था । पश्चि मी भारत में बढ़े व्यापारी मष्ठाजन कहलाते थे । इनका प्रधान सेठ कहलाता था । वर्नि यर नगरों की उत्पादन एवं व्यापार में भूमि का को स्वीकार करते हुए भी इनके बास्तवि क र र स्वीकार नहीं करता है । वदद मुगलकालीन नगरों को “शि वि र नगर' कहता है जो सत्य | अथव
अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की विवेचना कौजि ए ।
1573 ई में भारत में मुगल सम्राट अकबर ने म॑गोलों से प्रेरणा लेकर दशमलव पद्धति के आधार पर मनसबदारी प्रथा को चलाया । प्रत्येक मनसबदार को दो पद “जात” और “सवार' दि ये जाते थे । एक मनसबदार के पास जि तने सैनि क रखने होते थे, वह “जात का सूचक था । “सवार” से तात्पर्य मनसबारों को रखने याले घुढसवारों की संख्या से था । जहाँगीर ने so ed को 10000 और 5000 का मनसब दिया । अर्था त शाहजहाँ के पास 10000 और पाँच हजार घुडठसवार थे । सबसे छोय मनसब 10 का और बड़ा 60000 तक का था । बढ़े मनसब राजकुमारों तथा राज परि वार के सदस्यों को ष्टी दि ये जाते थे । जहाँगीर के काल में मनसबदारी व्यवस्था में दु-अश्वा (सवार पद के दुगने घोड़े), सि -आश्वा (सवार पद के ति गने घोडे) प्रणाली लागू हुई । हि न्दु, मुस्लि म यैन ममार हो सकते थे और इनकी नि युक्ति , पदोन्नति , पदच्युति सम्राट द्वारा की जाती थी ।
दिए गए मानचित्र में 1857 के विद्रोह के निम्न केंद्रों को इंगित करें :
- दिल्ली
- लखनऊ
- आरा
- कानपुर
- झाँसी ।
Solution
प्रश्नसंख्या 2 में उल्लि खि त स्थानों के वि षय में प्रत्येक दो पंक्ति यों में वि वरण दें ।
Solution
हड़प्पा सभ्यता के पतन के प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए ।
हड़प्पा सभ्यता के पतन के मुख्य कारणों की चर्चा निम्नलिखित रूप से की जा सकती है –
- (i) बाढ़ – इस मत के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख नगर नदियों के ही किनारे थे। अतः बाढ़ द्वारा इनका पतन हुआ होगा खुदाई में मिली बालू की मोटी परतें इस मत की पुष्टि करती है।
- (ii) अग्निकांड – खुदाई में जली हुई मोटे स्तरों की प्राप्ति से कुछ विद्वान अग्निकांड से इस सभ्यता के पतन की बात करते हैं ।
- (iii) ब्रह्म ( आर्य ) आक्रमण – खुदाई से प्राप्त नरकंकालों, वेदों में दस्युओं दुर्गो के विनाश का वर्णन के आधार पर बाह्य आक्रमण द्वारा पतन के विचार को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है ।
- (iv) लगातार गेहूँ उत्पादन से भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी से भी इस सभ्यता के पतन के विचार को बल मि लता है ।
इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन, नदियों द्वारा मार्ग बदलने, जल प्लावन के सिद्धान्त भी इस संदर्भ में उल्लेखनीय है ।
राजतंत्र और वर्ण में संबंध स्थापित करें ।
प्राचीन भारत में सैद्धान्ति क रूप से राजतंत्र और वर्ण में गहरा संबंध था । अर्थशास्त्र और धर्मसूत्रों में इस बात पर बल दिया गया है कि राजा को क्षत्रि य वर्ण का होना चाहि ए । शास्त्रों में वर्णि त यह व्यवस्था सदैव कारगर नहीं होती थी । इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ गैर-क्षत्रि यों. को राज्य करते हुए दि खलाया गया है । उदाहरण के लि ए नंदबंशी शूद्र थे, मौयों को शूद्र, क्षत्रि य अथवा नि म्नकुलोत्पन्न माना गया है । सुंग सातवाहन, ब्राह्मण थे । भारत आने वाले मध्य एशि याई राजाओं को यवन या मलेच्छ माना गया है । अनेक वि द्वान गुप्त शासकों को वैश्य मानते हैं । इस प्रकार सैद्धान्ति क रूप से क्षत्रि य को ही आदर्श राजा के रूप में मान्यता थी । परन्तु व्यवहारि क रूप से कि सी भी वर्ग का व्यक्ति शक्ति संसाधन सम्पन्न होकर राजा बन जा सकता था ।
संविधान सभा ने भाषा-विवाद को किस प्रकार सुलझाने का प्रयास किया ?
स्वतंत्र भारत के लिए संविधान निर्माण का कार्य जब संविधान सभा ने शुरू किया तो भाषा की समस्या एक विवादास्पद समस्या के रूप में उभरी । सवाधीनता के पश्चात् भारतवर्ष की राजभाषा और राष्ट्रभाषा क्या होगी, इसपर सदस्य गण एकमत नहीं थे । एक ओर महात्मा गाँधी के कुछ अनुयायी थे जो हिन्दी और उर्दू मिश्रित भाषा हिन्दुस्तानी को राष्ट्रभाषा बनाना चाहते थे, तो दूसरी ओर अभिजात्य वर्ग के लोग अंग्रेजी को ही राजभाषा के रूप में कायम रखना चाहते थे । तीसरा वर्ग उनलोगों का था जो देश की अधिकांश जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए देवनागरी में लिखित संस्कृत निष्ठ हिन्दी को राजभाषा और राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन देखना चाहते थे । हिन्दी के मुद्दे को बड़े ही आक्रामक ढंग से संविधान सभा में एक कांग्रेसी सदस्य आर॰ वी॰ धुलेकर ने पेश किया उन्होंने कहा कि जो हिन्दी नहीं जानते हैं उन्हें संविधान सभा का सदस्य बने रहने का कोई हक नहीं है । लेकिन हिन्दी के मार्ग की एक और बाधा थी । दक्षिण भारत के लोगों को लगता था कि स्वतंत्र भारत में हिन्दी के राष्ट्रभाषा बन जाने के बाद उनकी अपनी भाषाओं जैसे – तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम आदि भाषाओं का विकास खतरे में पड़े जायेगा । भारत में कई भाषाओं को बोलनेवाले लोग हैं और भाषाएँ अलग-अलग क्षेत्रों कौ संस्कृतियों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं । इन भाषाओं के समर्थकों में हिन्दी के कार्यस्त का भय था ।
इस परिस्थिति में संविधान सभा की भाषा-समिति ने एक ऐसा फार्मूला प्रस्तुत किया जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो । इसके अनुसार नागरी लिपि में हिन्दी देश की राजभाषा स्वीकार की गयी । किन्तु लिपी में हिन्दी की आगामी 15 वर्षों तक अंग्रेजी ही राजभाषा बनी रहेगी और हिन्दी धीरे-धीरे इसका स्थान लेगी । हर प्रान्त कौ अपनी एक क्षेत्रीय भाषा को अपने प्रान्त की राजभाषा घोषित करने का अधिकार होगा । हिन्दी के लिए देश की राष्ट्रभाषा के स्थान पर देश की राजभाषा शब्द का प्रयोग किया गया ।
आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर की देनों का मूल्यांकन कीजिए ।
डॉ० भीमराव अम्बेडकर उस तेजपुंज का नाम है जो प्रकाश-ही प्रकाश देता है, लेकिन जलाता नहीं। जीवन को समरसता से ग्रहण करते एवं विसंगतियों से संघर्ष करते हुए अपनी लेकिन जलाता नहीं । जीवन को समरसता से ग्रहण करते एवं विसंगतियों से संघर्ष करते हुए अपनी निन्दा एवं स्तुति से आत्मशोध की यात्रा में सदा अग्रसर होनेवाले महान सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतक बाबा साहब अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 ई॰ में महाराष्ट्र के महू नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम रामजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था । ये अपने माता-पिता के चौदहवीं संतान थे । ये महार जाति के थे और उस समय महार अछूत समझा जाता था । अम्बेडकर ने बचपन से ही अछूत होने की पीड़ा को भोगा था और उनका बाल-मन उसी काल से इस दुर्व्यवस्था से आक्रान्त हुआ था । मानवमात्र की सेवा में अपने को समर्पित करने वाला व्यक्तित्व दलितों, दुखियों, शोषितों एवं पीड़ितों की दर्दभरी मूक भाषा को अमर स्वर प्रदान करने वाला महामानव समाज में कभी-कभी ही आविर्भूत होता है और वह जन-जन के मानस में परमेश्वर की तरह आराध्य बन जाता है । अम्बेडकर उन्हीं प्रतिभाओं में से एक थे ।
बचपन से ही ये मेधावी और गहन चिंतक छात्र थे । चौदह वर्ष की उम्र में ही इनका विवाह रामबाई से हो गया । इसके बाद वे पिता के साथ 1905 ई॰ में मुम्बई आ गए और 1907 ई॰ मैट्रिक की परीक्षा पास की । 1912 ई॰ में इन्होंने बी॰ ए॰ की परीक्षा पास की । ये उच्च शिक्षा के लिए लालायित थे पर आर्थिक कठिनाई रास्ते में रुकावट बनी हुई थी । बड़ौदा नरेश ने एक मेधावी छात्र की प्रतिभा को कुंठित होते हुए देखा, तो उन्होंने आर्थिक सहायता देना स्वीकार कर लिया । 1913 ई॰ में अम्बेडकर बड़ौदा नरेश की सहायता से अमेरिका चले गये । 1915 ई॰ में इन्होंने वहाँ एम॰ ए॰ की डिग्री प्राप्त की और 1916 ई॰ में इन्हे पी-एच॰ डी॰ की डिग्री से सम्मानित किया गया । इसके बाद वे इंग्लैण्ड और जर्मनी भी गए जहाँ उन्होंने डी- एस-सी० और 'बारर एट लॉ' की डिग्री प्राप्त की । यही पर अम्बेडकर ने संसदात्मक प्रजातंत्र तथा उदारवादी प्रजातंत्र पर गहन अध्ययन किया । इसी अध्ययन-क्रम में वे संसार भर के देशों के संविधानों से परिचित हुए ।
अपने देश लौटने पर इन्होंने 1920 ई॰ में कोल्हापुर के महाराजा की सहायता से 'मूक नायक' नामक पत्रिका का सम्पादन प्रारम्भ किया जिसमें सामाजिक विकृतियों पर करारा प्रहार किया गया । सन् 1923 से 1931 तक का समय अम्बेडकर के लिए कठोर संघर्ष और अभ्युदय का समय था । इसी बीच वे दलितों के नेता एवं प्रवक्ता के रूप में उभर कर सामने आए । इन्होंने इंग्लैण्ड जाकर गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया और अंग्रेज शासक से दलितों की गई माँग मनवाईं। भारतीय दलितों को इन्होंने कहा-शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो ।
1935 ई॰ में इनकी धर्मपत्नी का देहान्त हो गया । इसी साल इन्होंने धर्म-परिवर्त्तन की भी घोषणा की । इन्होंने बहिष्कृत हितकारी सभा, सिद्धान्त महाविद्यालय एवं स्वतंत्र मजदूर दल की स्थापना की । 1946 ई॰ तक अम्बेडकर की ख्याति देश के एक कोने से दूसरे कोने तक फैल गयी थी । 1947 ई॰ में नेहरूजी के मंत्रिमंडल में इन्हें कानून मंत्री बनाया गया । 21 अगस्त, 1950 ई॰ को इन्होंने भारत का संविधान राष्ट्र को समर्पित कर दिया । इसी साल वे कोलम्बो गए और दिल्ली में अम्बेडकर भवन का शिलान्यास किया । 1956 ई॰ में उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और 6 दिसम्बर, 1956 ई॰ को ही इस महामानव का महापरिनिर्वाण हुआ ।
वे अछूतो और दलितों के मसीहा, उद्धारकर्त्ता और पथ-प्रदर्शक थे । 1990-91 ई॰ में इनको जन्म-शताब्दी धूम-धाम से मनाई गई और भावभीनी श्रद्धाजलि अर्पित की गई । दलितों को समान अधिकार देना और उनका यथोचित उत्थान करना हो बाबा साहब की सच्ची श्रद्धांजलि होगी । भारत के दलितों एवं पीड़ितों को उन्होंने जो जीवन-संदेश दिया था – 'उठकर आगे बढ़ो' – आज उससे सबों के हृदयतंत्री झंकृत हो रहे हैं और उनमें से मधुर संगीत का स्वर फूट रहा है ।
Conclusion
इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 12 इतिहास 2009 के प्रश्नों के सटीक उत्तर दिए गए हैं। BSEB परीक्षा में बेहतर अंक लाने के लिए इन Previous Year Questions का अभ्यास जरूर करें। किसी भी प्रश्न या संदेह के लिए नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।
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