
स्वास्थ्य वह अवस्था है, जिसके अंतर्गत शारीरिक, मानसिक तथा सामाजि क कार्य समुचित क्षमता द्वारा उचित प्रकार से सम्पन्न होता है।
- सामुदायि क स्वच्छता व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, आवश्यक है ।
- शारीर में जब कोई रोग होता है, तो शरीर के एक अथवा अनेक अंगों एवं तंत्रों में क्रिया अथवा संरचना में खराबी परिलक्षित होने लगती है ।
- कुछ ऐसे रोग (जैसे – खाँसी, जुकाम) हैं, जो बहुत कम अवधि के लिए होते हैं, उसे तीव्र रोग कहते हैं तथा कुछ ऐसे रोग (जैसे – फीलपाँव, एलिफेन्टाइटिस) हैं, जो लंबी अवधि तक अथवा जीवनपर्यंत रहते हैं, उसे दीर्घकालिक रोग कहते हैं ।
- दीर्घकालिक रोग, तीव्र रोग की अपेक्षा लोगों के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक विपरीत प्रभाव बनाये रखते हैं ।
- वैसे रोग, जिनके तात्कालि क कारक सूक्ष्म जीव होते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं ।
कुछ ऐसे रोग हैं, जो बैक्टीरि या द्वारा फैलते हैं । जैसे–टायफॉइड, बुखार, हैजा, क्षयरोग तथा ऐएंथेक्स । प्रोटोजोआ से फैलनेवाले रोग हैं मलेरि या तथा कालाजार । वायु द्वारा फैलनेवाले रोगों के उदाहरण हैं -खाँसी, जुकाम, नि मोनि या तथा क्षयरोग । कुछ रोग ऐसे हैं, जो जंतुओं द्वारा फैलते हैं । ये जन्तु रोगाणुओं को रोगी से लेकर अन्य नए पोषी तक पहुँचा देते हैं । अत: ये मध्यस्थ का काम करते हैं, जि न्हें रोगवाहक (वेक्टर) कहते हैं । नई कोशि काओं के बनने के प्रक्रम को शोथ (॥e॥ingitis) कहते हैं । इस प्रक्रम के अंतर्गत म प्रभाव; जैसे–फूलना तथा दर्द होना और सामान्य प्रभाव; जैसे–बुखार होते ' हेपेटाइटि स के कुछ वाइरस, जि ससे पीलि या होता है, पानी द्वारा संचारि त होता है । हेपेटाइटि स-A के लि ए टीका उपलब्ध है । आजकल संक्रामक रोगों (जैसे -टेटनस, डि ष्यीरि या, कुकरखाँसी, चेचक, पोलि यो आदि ) के नि वारण के लि ए अनेक प्रकार के टीके उपलब्ध हैं, जो रोग-नि वारण का वि शि ष्ट साधन प्रदान करते हैं ।
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