
सभी जीवधारियों को उनकी शारीरिक संरचना और कार्य के आघार पर पहचाना जा सकता है तथा उनका वर्गीकरण किया जा सकता है ।
- कोशिकीय संरचना और कार्य-वर्गीकरण का आघारभूत लक्षण है।
- वर्गीकरण की आधारभूत इकाई जाति (स्पीशीज) है ।
- जीवों का वर्गी करण उनके वि कास से सम्बन्धि त है ।
- विटेकर द्वारा वर्गीकरण के पाँच जगत् हैं – मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनीमेलिया। ये समूह कोशिकीय संरचना पोषण के सोत और तरीके तथा शारीरिक संगठन के आघार पर बनाए गए हैं।
- प्लांटी और एनिमेलिया को उनकी क्रमिक शारीरिक जटिलताओं के आधार पर वर्गी कृत किया गया है।
- पौघों को पाँच वर्गो में बाँटा गया है – शैवाल, बायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और ऐंजियोस्पर्म ।
- धैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में नग्न भ्रूण पाए जाते हैं । जिन्हें बीजाणु (Spore) कहते हैं।
- वे पौधे, जिनमें जनक ऊतक पूर्ण विकसित एवं विभेदित होते हैं तथा जनन-प्रक्रिया के पश्चात् बीज उत्पन्न करते हैं, फेनरोगेम कहलाते हैं।
- जन्तुओं को दस फाइलम में बाँटा गया है – पोरीफेरा, सीलेंटरेटा, स्लेटीहेल्मि न्थीज, निमेटोडा, एनीलिडा, आर्थो पोडा, मोलस्का, इकाइनोडर्मेटा, प्रोयोकॉर्डेटा और क्ररॅर्डेटा ।
- द्विपदनाम-पद्धति जीवों की सही पहचान में सहायता करती है।
- द्विपदनाम-पद्धति में पहला नाम जीनस और दूसरा स्पीशीज का लेता है।
- नामपद्धति प्रणाली जीवों की एक-दूसरे में पायी जानेवाली समानता और असमानता पर निर्भर करती है।
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