Skip to content

गति के नियम Class 11 Physics Chapter 4 Hindi

Image of note
Notes

न्युटन के गति के नियम

गति के नियमो को सबसे पहले सर आइनक न्यूटन के सन्‌ 1637 मे अपनी पुस्तक "प्रिंयिपीया" में प्रतिपादित किया। ड्सलिए आइनक न्यूटन के सम्मान मे डन नियमों को न्यूटन के गति नियम कहते है।

जड़त्व

किसी पिण्ड का वह गुण जिसके कारण पिण्ड विराम की अवस्था में अथवा, वेग से गति की अवस्था मे किसी भी प्रकार के परिवर्तन का विरोध करता हैं। इसे ही जड़त्व कहते हें।

हमारे दैनिक जीवन में अनेकों घटनाए घटित होती हैं। उनमें जड़त्व को आसानी से देखा जा सकता हैं। किसी वस्तु का भार जितना अधिक होगा वह वस्तु अपने मे परिवर्तन का उतना ही अधिक विरोध करती हैं। अतः जड़त्व की परिभाषा स्पस्ट होता है कि उस वस्तु का जड़त्व भी अधिकतम होगा।

जड़त्व का नियम

इस नियम के अजुसार गहि कोई वस्तु विरामावस्था में हैं तो वह विरामावस्था मे ही रहेगी। अथवा कोई वस्तु एकसमान वेग से सीधि सरल रेखा मे गति शि ल हैं तो वह गति करती ही रहेगी। जब तक उस वस्तु पर कोई बाह्य बल न लगाया नाए। इसे जड़त्व का नियम कहते हें। जड़त्व के नियम को न्युटन के गति का प्रथम नियम भी कहा जाता हैं।

जड़त्व के प्रकार –

जड़त्वो को तीन भागों में बाटा गया है। अर्थात किसी वस्तु मे जड़त्व को तीन प्रकार से देखा जा सकता हैं।

  1. विराम का जड़त्व
  2. गति का जड़त्व
  3. दिशा का जड़त्व

1. विराम का जड़त्व

जैसे कि नाम से स्पष्ट हैं कि किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह वस्तु अपनी विराम की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती हैं। विराम का जड़त्व कहते हैं। उदाहरण द्वारा समझा जा सकता हें।

उदाहरण –
  • (क) जब किसी बस के अचानक चलने पर उसमें खड़े गात्री पीछे की और गिर जाते हैं। इसका कारण यह हैं कि यात्री विराम की अवस्था मे होता हैं एवं बस के चलने पर उसका शरीर बस की ओर गति का विरोध करता हैं। अतः विराम के जड़त्व के कारण यात्री पीछे की ओर गीर जाते हें।
  • (ख) पेड़ को अचानक हि लाने पर उसके फलों का गिरना ।

2. गति का जड़त्व

इसकी परिभाषा भी नाम से ही स्पष्ट हैं कि किसी वस्तु का वह गुण जिसमें वस्तु स्वयं अपनी गति की अवस्था मे परिवर्तन का विरोध करती हैं। गति का जड़त्व कहलाता हैं।

उदाहरण –
  • (क) चलती रेलगाड़ी से अचानक उतर जाने पर व्यक्ति आगे की ओर गिर जाता है।
  • (ख) चलती बस के अचानक खुकने पर यात्री का आगे की ओर झुकना।

3. दिशा का जड़त्व

किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह वस्तु स्वयं की गति की दिशा में होनें पाली परिवर्तन का विरोध करती हैं। दिशा का जड़त्व कहलाता है।

उदाहरण –
  • (क) जब कोई बस दायी ओर मुइती हैं तो दिशा के जड़त्व के कारण उसमें बैठे यात्री बायी ओर झुक जाती है।

न्युटन के गति के नियम

न्युटन के गति के तीन नियम हैं।

  1. गति का प्रथम नियम - नइत्ब फा नियम
  2. गति का द्वितिय नियम - संवेग का नियम
  3. गति का तृतिय नियम - क्रिया-प्रतिक्रिया नियम

1. गति का प्रथम नियम - ( जड़त्वर का नियम )

न्युटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार गदि कोई वस्तु विराम अबस्था में हैं तो वह विरामाबस्था में ही रहेगी। वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाकर ही वस्तु को बि रामाबरस्था मे गति की अबस्था में परिबर्तित किया जा सकता हैं। एवं यदि कोई वस्तु गतिशिल अवस्था मे हैं तो वह एक समान चाल से सरल रेखा में चलती ही रहेगी , जब तक उस वस्तु पर बाह्य बल न लगाया जाए। इसे गति का प्रथम नियम कहते हैं। इसे न्युटन का नियम श्री कहा जाता हैं।

उदाहरण –
  • (क) चलती रेलगाड़ी से अचानक उतर जाने पर व्यक्ति आगे की और गिर जाते हैं।
  • (ख) खिड़की के शिशें पर बन्दुक से गोली मारने पर शिशें में छेड़ हो जाता हैं।

2. गति का द्वितिय नियम (संवेग का नियम)

न्युटन के गति का द्वितिय नियम के अनुसार रेखि य संवेग मे परि वर्तन की दूर उस वस्तु पर लगाए गए बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती हैं। एबं संवेग परिवर्तन वस्तु पर लगाए गए बल की दि शा में ही होता हैं। इसे गति का द्वितिय नियम कहते हैं एवं इस नियम को संयोग का नियम भी कहते हैं।

उदाहरण –

क्रिकेट खेल में खिलाड़ी तेजी से आति गेंद को कैच करते समय अपने हाथो को पीछे की ओर कर लेते हैं। इससे गेंद का वेग कम हो जाता हैं और खिलाड़ी को कोई चोट नही लगती हैं।

3. गति का तृतिय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम)

न्युटन के गति के तृतिय नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया के बराबर एवं बिपरित दिशा मे प्रतिक्रिया होती है। गति के तृतिय नियम को क्रिया-प्रति क्रिया नियम भी कहते है।

उदाहरण –
  • (क) गति के तृतीय नियम को ऐसा समझते हैं कि आप किसी टेबल पर हाथ रख कर खड़े हैं तो जितना बल आपका हाथ टेबल पर बल लगा रहा हैं। उतना ही बल तेबल आपके हाथ पर लगा रही है। आपने देखा होगा कि कमनोर छत पर ब्याद्वा बल अर्थात कई व्यक्तियों के बेॅंठने पर वह छत प्रतिक्रिया बल उतना नही लगा पाति हैं जितना व्यक्ति उस पर क्रिया बल लगा देते हैं।
  • (ख) कुए से नल खीचते समय रस्सी टूटने पर रस्सी खीचनें वाला पीछे की और गिर जाता हैँ।
  • (ग) बन्दुक से गोली मारने पर पीछे की और धक्का लगना।

संवेग

वह राशि जो किसी वस्तु के बेग ब दव्यमान पर निर्भर करती हैं अर्थात किसी गतिशिल बस्त्र के द्रव्यमान ऑर उसके वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं। इसे P से प्रदृर्शित करते हैं। माना किसी गतिशिल वस्तु का दव्यमान m तथा वेग v हो तो संवेग की परिभाषा p = mv। संवेग एक सदिश राशि हैं। इसकी दिशा वही होती हैं जो वस्तु की वेग की दिशा होती हैं। सदिश रूप मे संवेग

p = mv

संवेग का MKS पद्धति मे मात्रक kg m/s होता हैं। एवे इसे न्युटन सेकेण्ड श्री कहते हैं।

संवेग संरक्षण का नियम

इस नियम के अनुसार, यदि पिण्डों के किसी निकाय पर बाह्य बल शून्य हैं तो निकाय कर सम्पूर्ण संवेग संरक्षित रहता हें। इसमें समय के साथ कोई परिवर्तन नही होता हैं। यही संवेग संरक्षण का नियम हैं।

संवेग संरक्षण सिद्धान्त ( नियम ) का निगमन

घर्षण बल

जब ढ़ो पिण्ड परस्पर सम्पर्क मे होते हैं एबं एक वस्तु दुसरी वस्तु के पृष्ट पर गति करती हैं। तो इनके सम्पर्क तलों के बीच एक बल कार्य करता हैं। नो वस्तुओं की गति का वि रोध करता हैं डस बल को घर्षण बल कहते हें।

उदाहरण :-

घर्षण बल को उदाहरण द्वारा अच्छी तरह समझा जा सकता हैं। मान लिजिए एक मेज हैं जिसके ऊपर कोई वस्तु हैं। यदि हम वस्तु को किसी वेग से धक्‍का दे तो वस्तु कुछ टूर चलने के बाद रुक जाएगी या बिरामावस्था में आ जाएगी तो ध्यान देने वाली बात यह हैं कि वस्तु क्यों रुकी।

चूँकि हम जानते हैं कि किसी भी गतिशिल वस्तु को रोकने के लिए एक बाह्य बल की आवश्‍यकता होती हैं। वस्तु तथा मेज के सम्पर्क तलो के बिच एक बल कार्यरत हैं जो इनकी गति का विरोध करता हैं। इस बल को ही घर्षण बल कहते हैं। चित्र द्वारा स्पष्ट होता हैं।

घर्षण बल के प्रकार

घर्षण बल दो प्रकार के होते हें।

  1. गतिक घर्षण बल
  2. स्थैतिक द्घर्षण बल

1. गतिक घर्षण बल

जब दो वस्तुओं के बीच परस्पर गति होती हैं तो इन वस्तुओं के बिच एक बल आरोपित हो जाता हैं। जिसे गतिक धर्षण बल कहते हैं।

अर्थात्, दो वस्तुओं के बीच उनकी गति के कारण उत्पन्न बल को गति घर्षण बल कहते हैं। इसे fk द्वारा प्रदर्शित किया जाता हैँ

जहां uk एक नियतांक हैं जिसे गतिक घर्षण गुणांक कहते हैं।

2. स्थैतिक घर्षण बल

जब दो वस्तुएं एक दूसरे के सम्पर्क मे होती हैं लेकिन उनके बीच कोई गति नहीं होती हैं अर्थात् वह विरामाबस्था मे होती हैं। तो इन वस्तुओं के बीच आरोपित बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं अर्थात , वस्तुओं के बीच उनकी विरामावस्था के कारण उत्पन्न बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं। इसे fs से प्रदर्शि त करते हें।

नहाँ us एक नियतांक हैं जिसे स्थैतिक घर्षण गुणांक कहते हैं।

घर्षण के नियम

  1. घर्षण बल सदैव गतिशील वस्तुओं पर उनकी गति की दिशा के विपरित आरोपित होता हें।
  2. जब दो वस्तुए परस्पर एक दूसरे के सम्पर्क में होती हैं तो उनके बीच घर्षण बल, अभिलम्ब प्रतिक्रिया R के अनुक्रमानुपाति होता है।

घर्षण गुणांक

घर्षण निगम से स्पस्ट होता हैं कि घर्षण बल F अभिलम्ब प्रतिक्रिया R के अनुक्रमानुपाति होता हैं। तो

f ∝ R या f = uR

जहाँ u एक नियतांक हैं नि से घर्षण गुणांक कहते हैं।

घर्षण कोण

सीमांत घर्षण की दिशा में, अभिलम्ब प्रतिक्रिया R एवं इसका परिमाणी B के बीच कोण को घर्षण कोण कहते हैं। घर्षण कोण को θ से प्रदर्शित करते हें।

चतुर्गुण OABC में

AB = OC = fs तथा OA = BC = R

अब AOCB में

tanθ =

अब घर्षण के सूत्र fs = usR

tanθ =

या

यही द्र्षण कोण का सूत्र हैं।

लोटनिक घर्षण

किसी भी वस्तु को दुसरी वस्तु के पृष्ट पर सरकाने की अपेक्षा लुढ़काना अधिक आसान हैं। अर्थात एक पिण्ड किसी दूसरे पिण्ड के तल पर लुढ़कता हैं। तो दोनों पिण्डों के सम्पर्क तलों के बीच एक बल आरोपित हो जाता है। जिसे लोटनिक घर्षण कहते हैं

तरल घर्षण

जब द्रव को किसी बर्तन में लेकर तेजी से घुमाया जाता है तो द्रव्य कृछ समय धूमने के पश्चात रुक जाता हैं। इससे स्पष्ट होता हैं कि द्रव की विभिन्न परतो के मध्य एक बल कार्य करता हैं। जो द्रव की गति का विरोध करता हैं। इसे तरल दर्षण कहते हैं।

Join the Discussion

Show Comments

No comments

No comments yet.

Post a Comment

Popular Post

संक्षेपण लेखन: नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण टिप्स

संक्षेपण लेखन: नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण टिप्स

संक्षेपण-लेखन (Precis Writing) संक्षेपण-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश : संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 1 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 2 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 3 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 4 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 5 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 6 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 7 संक्षेपण उदाहरण (Precis Example) - 8 Conclusion संक्षेपण-लेखन (Precis Writing) ​ संक्षेपण-लेखन एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा पठित/अपठित गंद्यांश की मूल बातों/भावों को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। और, यह संक्षेपित रूप उस मूल उद्धरण की आत्मा होती है। संक्षेपण-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश : ​ Notes 1 दिए गए उद्धरण या गद्यांश को दो-तीन बार ठीक ढंग से पढ़ना चाहिए , जिससे मूल बातें समझ में आ जाएँ । Notes 2 पढ़ते समय गद्यांश के महत्त्वपूर्ण वाक्य या शब्दों के नीचे लकीर देकर चिह्नित कर लेना चाहिए । Notes 3 गद्यांश में निहित शब्दों की संख्या की गिनती कर लेनी चाहिए और एक ऐसा खाका तैयार करना चाहिए जिसमें शब्दों की संख्या मूल गद्यांश की एक तिहाई हो। अगर संक्षेपित गद...
By Guddu Kumar
Algebra Class 6 to 8 Worksheet with Solutions in Hindi

Algebra Class 6 to 8 Worksheet with Solutions in Hindi

1. बीजीय व्यंजक प्रश्नावली 1.1 प्रश्नावली 1.2 प्रश्नावली 1.3 प्रश्नावली 1.4 प्रश्नावली 1.5 प्रश्नावली 1.6 2. गुणनखंड प्रश्नावली 2 3. एक चर वाले रेखिक समीकरण प्रश्नावली 3.1 प्रश्नावली 3.2 प्रश्नावली 3.3 4. शाब्दिक समीकरण 1. बीजीय व्यंजक ​ प्रश्नावली 1.1 ​ प्रश्‍न 1 ​ (क) p + 7 (ख) (ग) − 5p (घ) 2m − 11 (ङ) 5y + 3 (च) 5y − 16 (छ) −5y + 16 (ज) (झ) z × z (ञ) (ट) x 2 + y 2 (ठ) 10 − yz (ड) (a × b) − (a + b) (ढ) 2x + 1 (यहाँ x वह संख्या है) (ण) x℃ − 20℃ (त) 3m (परिमाप = m + m + m) (थ) आयत का क्षेत्रफल = k × n (द) x + 1 (ध) x और x + 2 (यहाँ x एक विषम संख्या है।) (न) x और x + 2 (यहाँ x एक सम संख्या है।) (प) 5n (यहाँ n कोई भी पूर्णांक है, जैसे 1, 2, 3...) (फ) (यहाँ x भिन्न का अंश (numerator) है और x+1 उसका हर (denominator)) प्रश्‍न 2 ​ (क) पद: −4x, 5y गुणनखंड: –4x → –4, x 5y → 5, y पेड़ आरेख (Tree Diagram) : (ख) पद: xy, 2x 2 y 2 गुणनखंड: xy → x, y 2x 2 y 2 → 2, x, x, y, y पेड़ आरेख (Tree Diagram) : (ग) पद: 1, x, x 2 गुणनखंड: 1 → 1 x → x x 2 → x, x पेड़ आरेख (Tree...
By Guddu Kumar
NCERT Class 11 Math Chapter 3 Objective Questions Hindi

NCERT Class 11 Math Chapter 3 Objective Questions Hindi

Bihar Board PYQ, Sample Questions, Model Paper Question Level 1 PYQ Level 2 Level 3 Level 1 ​ प्रश्‍न 1 : यदि tan θ = है, तो sin θ है − परंतु नहीं − या परंतु − इनमें से कोई नहीं उत्तर : सही विकल्प (B) है। क्योंकि tan θ = ऋणात्मक है, इसलिए θ या तो दूसरे चतुर्थांश में है या चौथे चतुर्थांश में है। इस प्रकार, sin θ = यदि θ दूसरे चतुर्थांश में स्थित है या sin θ = , यदि θ चौथे चतुर्थांश में स्थित है। प्रश्‍न 2 : यदि sin θ और cos θ समीकरण ax 2 − bx + c = 0 के मूल है, तो a, b और c निम्नलिखित संबंध को संतुष्ट करते है : a 2 + b 2 + 2ac = 0 a 2 − b 2 + 2ac = 0 a 2 + c 2 + 2ab = 0 a 2 − b 2 − 2ac = 0 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 3 : sin x cos x का अधिकतम मान है: 1 2 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 4 : sin 20° sin 40° sin 60° 80° का मान है: उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 5 : cos cos cos cos का मान है: 0 उत्तर : … Coming Soon Solution प्रश्‍न 6 : यदि sin θ + cosec θ = 2, तो sin 2 θ + cosec 2 θ बराबर है – 1 4 2 इनमें से कोई नहीं उत्तर : … Coming Soon So...
By Guddu Kumar

अपठित गद्यांश: Intermediate Hindi Unseen Passage Guide

अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर-लेखन ​ परीक्षा में कभी-कभी ऐसे गद्यांश दिए जाते हैं जिनका पाठ्यपुस्तकों से कोई संबंध नहीं रहता। फिर भी उस अंश से संबद्ध कई प्रकार के प्रश्‍न रहते हैं। छात्रों को उनका उत्तर देना पड़ता है। इस अभ्यास से बौद्धिक क्षमता और भाषा पर उनकी कैसी पकड़ है, इसका ज्ञान होता है । उदाहरणार्थ कुछ गद्यांश और उनसे संबंधित प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर-लेखन अपठित गद्यांश 1 अपठित गद्यांश 2 अपठित गद्यांश 3 अपठित गद्यांश 4 अपठित गद्यांश 5 अपठित गद्यांश 6 अपठित गद्यांश 7 अपठित गद्यांश 8 अपठित गद्यांश 9 अपठित गद्यांश 10 अपठित गद्यांश 11 अपठित गद्यांश 12 अपठित गद्यांश 13 अपठित गद्यांश 14 अपठित गद्यांश 15 अपठित गद्यांश 16 अपठित गद्यांश 17 अपठित गद्यांश 18 अपठित गद्यांश 1 ​ विश्वविद्यालय कोई ऐसी वस्तु नहीं हैजो समाज से काटकर अलग की जा सके । समाज दरिद्र है तो विश्वविद्यालय भी दरिद्र होंगे, समाज कदाचारी है, तो विश्वविद्यालय भी कदाचारी होंगे और समाज में अगर लोग आगे बढ़ने के लिए गलत रास्ते अपनाते हैं तो विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी सही रास्तों को छोड़कर ...
By AvN Learn

Class 6-8 Number System Quiz PDF with Answers in Hindi

0 से छोटे प्रत्येक पूर्णांक का चिह्न होता है - + − × ÷ संख्या रेखा पर 0 के दायीं ओर 5 इकाई की दूरी पर पूर्णाक है - + 5 − 5 + 4 − 4 पूर्णाक −1 का पूर्ववती है - 0 2 −2 1 पूर्णाकों −1 और 1 के बीच पूर्णाकों की संख्या है - 1 2 3 0 −5 और 5 के बीच स्थित पूर्ण संख्याओं की संख्या है - 10 3 4 5 −10 और −15 के बीच स्थित सबसे बड़ा पूर्णाक है - −10 −11 −15 −14 −10 और −15 के बीच स्थित सबसे छोटा पूर्णाक है - −10 −11 −15 −14 संख्या रेखा पर, पूर्णाक 5 स्थित है - 0 के बायीं ओर 0 के दायीं ओर 1 के बायीं ओर −2 के बायीं ओर पूर्णाकों के किस युग्म में, पहला पूर्णांक संख्या रेखा पर दूसरे पूर्णांक के बायीं ओर स्थित नहीं है? (−1, 10) (−3, −5) (−5, −3) (−6, 0) ऋणात्मक चिहण (−) वाला पूर्णाक सदैव निम्नलिखित से छोटा होता है 0 −3 −1 −2 धनात्मक चिहू (+) वाला पूर्णाक सदैव निम्नलिखित से बड़ा होता है - 0 1 2 3 −50 के पूर्ववर्ती का परवर्ती है −48 −49 −50 −51 एक ऋणात्मक पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम - सदैव ऋणात्मक होता है सदैव धनात्मक होता है वही पूर्णांक होता है शून्य होता है अमूल्य और अमर कश्मीर में क्रमशः दो स्थानों 2 और 5 पर...
By Guddu Kumar

संख्या स्थानीय मान सारणी: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

संख्या स्थानीय मान सारणी (Place value chart) ​ संख्या स्थानीय मान सारणी (Place value chart) भारतीय पद्धति (Indian System) अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (International System) भारतीय पद्धति (Indian System) ​ भारतीय पद्धति (Indian System) संख्या (Commas) Scientific Notation इकाई 1 10 0 दहाई 10 10 1 सैकड़ा 100 10 2 हज़ार 1,000 10 3 दस हज़ार 10,000 10 4 लाख 1,00,000 10 5 दस लाख़ 10,00,000 10 6 करोड़ 1,00,00,000 10 7 दस करोड़ 10,00,00,000 10 8 अरब 1,00,00,00,000 10 9 दस अरब 10,00,00,00,000 10 10 खरब 1,0...
By AvN Learn

Number System Class 6 to 8 Worksheet with Answer in Hindi

1. प्राकृत संख्याएँ ​ 2. पूर्ण संख्याएँ 3. गुणनखंड और गुणज​ 1. प्राकृत संख्याएँ ​ ​ प्रश्‍न 1 ​ 6 अंकों की कुल संख्याएँ: 9,00,000 (नौ लाख) सबसे बड़ी संख्या: 9,99,999 सबसे छोटी संख्या: 1,00,000 प्रश्‍न 2 ​ 4, 7, 5, 0 से बनी संख्याएँ: सबसे बड़ी संख्या: 7,540 सबसे छोटी संख्या: 4,057 प्रश्‍न 3 ​ 2, 0, 4, 7, 6, 5 से बनी संख्याएँ और उनका योग: सबसे बड़ी संख्या: 7,65,420 सबसे छोटी संख्या: 2,04,567 योग: 9,69,987 प्रश्‍न 4 ​ 4, 5, 6, 0, 7, 8 से बनी 5 संख्याएँ: 4,56,078; 8,76,540; 5,04,678; 7,80,456; 6,54,780 प्रश्‍न 5 ​ 4, 5, 6, 7, 8, 9 से 8 अंकों की 3 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 9,98,76,544 4,45,67,899 8,87,76,544 प्रश्‍न 6 ​ 3, 0, 4 से 6 अंकों की 5 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 3,00,044; 4,33,000; 3,40,340; 4,00,433; 3,33,440 प्रश्‍न 7 ​ 8 अंकों की सबसे छोटी संख्या से अगली 5 संख्याएँ (आरोही क्रम): 1,00,00,000 (एक करोड़) 1,00,00,001 (एक करोड़ एक) 1,00,00,002 (एक करोड़ दो) 1,00,00,003 (एक करोड़ तीन) 1,00,00,004 (एक करोड़ चार) 1,00,00,005 (एक करोड़ पाँच) प्रश्‍न 8 ​ तुलना और क्रम: सबसे छोटी संख्या:...
By Guddu Kumar

120+ पर्यायवाची शब्द लिस्ट: Paryayvachi Shabd in Hindi

पर्यायवाची शब्द ​ पर्यायवाची शब्द ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– अभ्यास Conclusion किसी शब्द के समान अर्थवाले अन्य शब्दों को पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसे - आँख के बदले नेत्र, नयन, लोचन आदि शब्द पर्यायवाची शब्द कहे जाते हैं । हिन्दी में अधिकतर शाब्द ऐसे हैं जिनके बदले बहत से शब्द प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– ​ अंग : अंश, अवयव, खंड, भाग, विभाग, हिस्सा । अंधकार : अँधियारा, अँधेरा, तम, तमिस्र, तिमिर, ध्वांत। अदरक : अनूपज, अपाकशाक, आदी, आर्द्रशाक, कटुभद्र । अनुपम : अतुल्य, अद्वितीय, अदभुत, अनूठा, अनोखा, अपूर्व । अपमान : अनादर, अवज्ञा, अवमान, अवमानना, अवहेलना, तिरस्कार । अभिमान : अहं, अहंकार, अहंभाव, गर्व, घमंड, दर्प, दंभ, मद । अमृत : अमी, अमिय, पीयूष, मधु, सुधा, सोम । अर्जुन : गांडीवधर, गांडीवी, पांडुनन्दन, पांडुपुत्र, पार्थ, मध्यमपांडव, वृहन्नला, सव्यसाची । आँख : अंबक, अक्ष, अक्षि, ईक्षण, चश्म, चक्षु, दृक्‌, दृग्‌, दृष्टि, नजर, नयन, नेत्र, नैन,. लोचन, बिलोचन । आकाश : अंबर, अंतरिक्ष, अनंत, अभ्र, अर्श, आसमान, ख, गगन, तारापथ, दिव,...
By AvN Learn
फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

Notes फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) प्रश्‍न सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) प्रश्‍न फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) ​ वस्तु(Object) फारेनहाइट मापन (Farenheit Scale) सेल्सियस मापन (Celsius Scale) पानी का जमना 32°F 0°C पानी का ऊवलना 212°F 100°C फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) ​ °C = ((°F - 32) × 5) ÷ 9 या (or) °C = (°F - 32) × 5/9 या (or) °C = ∘ F − 32 9 × 5 प्रश्‍न ​ 75°F को सेल्सियस में बदलें। हल : °C = 75 − 32 9 × 5 = 43 9 × 5 = 23.89°C सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) ​ °F = { ( °C × 9 ) ÷ 5 } + 32 या (or) °F = ( °C × 9/5 ) + 32 या (or) °F = °C × 9 5 + 32 प्रश्‍न ​ 20°C को फारेनहाइट में बदलें। हल : °F = (20 × 9/5) + 32 = 68°F
By AvN Learn

AvN Learn English

AvN Learn English

No blogs found in this list.

Share