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Class 6 to 8 Hindi Vyakaran: NCERT & BSEB Grammar Guide

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व्याकरण

1. भाषा, लिपि और व्याकरण

अपने मन के भावों व विचारों का आदान-प्रदान करना भाषा कहलाता है।

भाषा के मुख्य तीन भेद हैं –

  • (क) मौखिक
  • (ख) लिखत
  • (ग) सांकेतिक

(क) मौखिक

बोलकर अपने विचार प्रकट करना और सुनकर दूसरों की बात समझना, भाषा का मौखिक रूप कहलाता है। उदाहरण – आपसी बातचीत, भाषण, वाद-विवाद, रेडियो पर सुनाए जाने वाले समाचार आदि।

(ख) लिखत

लिखकर अपने विचार प्रकट करना और पढ़कर दूसरों की बात समझना, भाषा का लिखत रूप कहलाता है। उदाहरण – पुस्तकें, पत्र-पत्रि काएँ तथा समाचार-पत्र आदि ।

(ग) सांकेतिक

सांकेतिक भाषा : अनेक बार हम विभिन्न संकेतों द्वारा भी अपने मन की बात दूसरों तक पहुँचाते हैं; जैसे – चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक पुलिसवाला हाथ के इशारे से वाहनों को आने-जाने का नि र्देश देता है।

लिपि

मौखिक ध्वनियों को लिखने के लिए निश्चित चिह्नों वाली व्यवस्था लिपि कहलाती है। प्रत्येक भाषा की अपनी एक विशेष लिपि होती है। जैसे – संस्कृत और हिन्दी को देवनागरी में, अंग्रेजी को रोमन में और उर्दू को फारसी लिपि में लिखी जाती है।

भाषालिपिभाषालिपि
हिंदीदेवनागरीउर्दूफ़ारसी
अंग्रेज़ीरोमनपंजाबीगुरुमुखी
तमिलतमिलनेपालीदेवनागरी

व्याकरण

वह शास्त्र है जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध रूप से बोलना, लिखना व पढ़ना सीखते है।

इसके तीन प्रमुख विभाग होते हैं –

  1. वर्ण-विचार : वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है। इसमें वर्णों की सही ध्वनिव लिपि संकेतों पर विचार किया जाता है।
  2. शब्द-विचार : अक्षरों के संयोग से शब्द बनते हैं। इसमें शब्दों के प्रकार, रूप, बनावट आदि के नियमों पर विचार किया जाता है।
  3. वाक्य-विचार : इसमें वाक्य-निर्माण, वाक्य-भेद, विराम चिह्नों आदि का वर्णन किया जाता है।

2. वर्ण-विचार (Phonology)

वर्ण भाषा कौ वह सबसे छोटी इकाई है जिसके और खंड नहीं किए जा सकते।

वर्णमाला

वर्णों का व्यवस्थित समूह "वर्णमाला" कहलाता है।

  • स्वर : अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
  • व्यंजन
प्रथम वर्णद्वितीय वर्णतृतीय वर्णचतुर्थ वर्णपंचम वर्ण / अनुनासिक / पंचमाक्षर
क-वर्णक्ख्ग्घ्ङ्
च-वर्णच्छ्ज्झ्ञ्
ट-वर्णट्ठ्ड्ढ्ण्
त-वर्णत्थ्द्ध्न्
प-वर्णप्फ्ब्भ्म्
  • य र ल व

  • श ष स ह

  • अं और अः अयोगवाह वर्ण हैं।

  • ऑ, ज़, फ़ आगत ध्वनियाँ हैं, जिन्हें दूसरी भाषाओं से लिया गया है।

  • ड़, ढ़ अतिरिक्त वर्ण हैं।

वर्णों के भेद

(क) स्वर

जिस वर्ण के उच्चारण में किसी दूसरे वर्ण की सहायता नहीं ली जाती है, स्वर वर्ण कहलाती है। जैसे – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

स्वर के तीन भेद होते हैं –
  1. हृस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) : इनके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है।
  2. दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) : इनके उच्चारण में हृस्व स्वरों के उच्चारण से दुगुना समय लगता है।
  3. प्लुत स्वर (ओऽम्‌/ॐ): इनके उच्चारण में हृस्व स्वरों के उच्चारण से तिगुना समय लगता है। प्लुत स्वर एक ही है। ये अब चलन में नहीं है।
  • अनुस्वार (ं) : इस वर्ण का उच्चारण नाक से होता है; जैसे– पंख, चंदन, कंगन, दंगल, जंगल आदि ।
  • अनुनासिक (ँ) : इस वर्ण का उच्चारण नाक और गले दोनों से होता है; जैसे– चाँद, गाँव, आँगन आदि।
  • विसर्ग (ः) – इसका उच्चारण 'ह' ध्वनि के समान होता है। जैसे– दुःख, अतः, नम: आदि ।
स्वरों की मात्राएँ

स्वरों के लिए निर्धारित चिह्न मात्राएँ कहलाती हैं। अ' स्वर के अतिरिक्त सभी स्वर व्यंजनों के साथ जुड़कर मात्राओं का रूप ले लेते हैं।

स्वर
मात्रा×ि
व्यंजनक्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्
संयोगकाकिकीकुकूकृकेकैकोकौ

(ख) व्यंजन

व्यंजन बे वर्ण हैं, जि नके उच्चारण में स्वरों की सहायता ली जाती है। ये अपने आप में स्वतंत्र नहीं होते। व्यंजनों का उच्चारण करने में हवा मुँह में कहीं-न-कहीं टकराकर बाहर निकलती है। हिंदी वर्णमाला में कुल पैंतीस (35) व्यंजन होते है।

व्यंजन के भेद

उच्चारण के आधार पर पर व्यंजन के तीन भेद होते हैं।

  • (i) स्पर्श व्यंजन – इन व्यजनों को बोलते समय समस जीभ मुख के किसी-न-किसी भाग को छूती है। कवर्ग से पवर्ग तक सभी 25 व्यंजन स्पर्श व्यंजन होते हैं। इनके अतिरिक्त 'ड़' तथा 'ढ़' भी स्पर्श व्यंजन होते है। 'प' वर्ग के उच्चारण में होंठों का स्पर्श होता है।
  • (ii) अंतःस्थ व्यंजन – इन व्यंजनों के उच्चारण में हवा मुख के अंदर रुक-सी जाती है। य, र, ल तथा व कुल चार अंतःस्थ व्यंजन होते हैं।
  • (ii) ऊष्म व्यंजन – इन वर्णो के उच्चारण में हवा अत्यधि क मात्रा में मुँह से बाहर निकलती है तथा हवा के रगड़ खाने से मुख में गरमी (ऊष्मा) पैदा होती है। 'श', 'ष', 'स' तथा 'ह' कुल चार ऊष्म व्यंजन है।
  • संयुक्त व्यंजन - जिन व्यंजनों की रचना दो या अधि क व्यंजनों को मि लाकर को जाती है, वे संयुक्‍त व्यंजन कहलाते हैं उनकी संख्या चार हैं-
    • क्‌+ ष + क्ष = (कक्षा, क्षमा)
    • त्‌ + र + त्र = (त्रिशूल, त्रिभुज)
    • ज्‌+ ज + ज्ञ = (संज्ञा, विज्ञान)
    • र + श्र = (श्रमिक, विश्राम)
  • द्वित्व व्यंजन – दो समान या एक जैसे व्यंजनों से मि लकर बने व्यंजन द्वि त्व व्यंजन कहलाते हैं; जैसे–
    • कू + क = क्क (पक्का, धक्का)
    • च्‌ + च = च्च (कच्चा, बच्चा)
    • द्‌ + द = दूद (कद्दू, गदूदा)
    • म्‌ + म = म्म (चम्मच, अम्मा)
    • ट्‌ + ट = टूट (मि ट्टी, पट्टी)
    • प्‌ + प = प्प (थप्पड़, चप्पल)
    • त्‌ + त = त्त (कुत्ता, पत्ता)
    • ज्‌ + ज = ज्ज (लज्जा, सज्जा)
    • ल्‌ + ल = ल्ल (बि ल्ली, गि ल्ली)
  • दो अलग-अलग व्यंजनों के मि लने से बने अक्षर संयुक्ताक्षर कहलाते हैं; जैसे –
    • च् ‌+ छ = च्छ (स्वच्छ, अच्छा)
    • द्‌+ य = दूय (वि द्या, वि द्यार्थी )

'र' के विभिन्न प्रयोग

  • स्वर रहित 'र' (र्‌) को 'रेफ' बोलते हैं। इसे कि सी पूर्ण व्यंजन के साथ जोड़ने पर यह "'" रूप में लिखा जाता है; जैसे –
    • क + र्‌ + मत = कर्म
    • ध + र्‌ + मत = धर्म
    • व + र्‌ + षा = वर्षा
  • यदि 'र' में कोई स्वर रहित व्यंजन जुड़ता है, तो यह () रूप में लि खा जाता है, जि से पदेन कहते हैं; जैसे –
    • क्‌ + र + अ + म = क्रम
    • उ + म्‌ + र + अ = उम्र
    • प्‌ + र + अ + ण + अ = प्रण
  • गोल घुंडी वाले स्वर रहि त व्यंजनों (ट, ड) के साथ र” पदेन () के रूप में लि खा जाता है; जैसे–
    • ट् + र + क = ट्रक
    • ड्‌ + र + म = ड्रम

4. शब्द-विचार

एक या एक से अधिक वर्णों का समूह, जिसका एक निश्चित अर्थ होता है, शब्द कहलाता है।

शब्द के भेद

हिंदी भाषा में शब्दों को चार आधार पर बाँटा गया है –

(i) रूपांतर के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं –

(क) विकारी शब्द

वे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन तथा काल के कारण परिवर्तन आ जाता है, विकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे – लड़का/लड़की, मेरा-मेरे, मेरी आदि ।

ये चार प्रकार के विकारी शब्द होते हैं।

  • संज्ञा
  • सर्वनाम
  • विशेषण
  • क्रिया

(ख) अविकारी शब्द

वे शब्द जिनके रूप में कभी भी, किसी भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता अविकारी शब्द कहलाते हैं; जैसे – शीघ्र, धीरे, शाबाश, तेज़ आदि । इन्हें अव्यय भी कहा जाता है।

ये चार प्रकार के अविकारी शब्द होते है। हिंदी भाषा में

  • क्रियाविशेषण
  • संबंधबोधक
  • समुच्चयबोधक तथा
  • विस्मयादिबोधक

(ii) उत्पत्ति के आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं –

(क) तत्सम शब्द

वे शब्द जो संस्कृत भाषा से हिंदी भाषा में ज्यों-के-त्यों अर्थात्‌ उसी रूप में ले लिए जाते हैं, जिस रूप में ये संस्कृत में होते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं; जैसे – भ्राता, ग्राम, सत्य, सूर्य, अग्नि आदि ।

(ख) तद्भव शब्द

वे शब्द जो संस्कृत शब्दों के रूप में कुछ बदलाव के साथ हिंदी भाषा में प्रयोग होते हैं, तदभव शब्द कहलाते हैं; जैसे – भाई (भ्राता), साँप (सर्प), गाँव (ग्राम), सच (सत्य), आग (अग्नि), नाक (नासिका) आदि ।

तत्समतद्भव
अग्निआग
भ्राताभाई
सर्पसाँप
ग्रामगाँव
सत्यसच
नासिकानाक
अष्टआठ
चन्द्रचाँद
दधिदही
दुग्धदूध
रात्रीरात्री

(ग) देशज शब्द

'देशज' अर्थात्‌ देश में उत्पन्न। ये शब्द भारत के विभिन्न क्षेत्रों से तथा आम बोलचाल को भाषा से लिए गए हैं; जैसे – जूता, पगड़ी, मकान, झाड़ू, करवट, खिड़की आदि ।

(ग) विदेशज शब्द

जो शब्द विभिन्न भाषाओं से हिंदी भाषा में आ गए हैं विदेशी शब्द कहलाते हैं; जैसे – लालटेन, स्टेशन, स्कूल, पादरी, ज़मीन, बंदूक, सब्जी, आदमी, वकील, सौगात, रूमाल, तौलिया, कमरा आदि ।

(iii) बनावट के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं –

(क) रूढ़ शब्द

ये ऐसे शब्द होते हैं जिनके टुकड़े नहीं किए जा सकते। अगर इनके टुकड़े करके देखें भी, तो इनका कोई अर्थ नहीं निकलता; जैसे– घोड़ा, कमल, कुर्सी , देश, हाथ आदि ।

(ख) यौगिक शब्द

ये शब्द दो शब्दों के योग से बनते हैं। "योग" का अर्थ होता है – जोड़। अत: दो शब्दों के जोड़ से बने ऐसे शब्द, जो सार्थक होते हैं – यौगिक शब्द कहलाते हैं। इनके टुकड़े किए जा सकते हैं; जैसे –

  • दुध + वाला = दूधवाला
  • फूल + दान = फूलदान
  • रसोई + घर = रसोईघर
  • नील + कमल नीलकमल

(ग) योगरूढ़ शब्द

ये ऐसे शब्द होते हैं जिनके टुकड़े तो हो सकते हैं, परंतु उन टुकड़ों का सीधा अर्थ न निकलकर कोई विशेष अर्थ निकलता है; जैसे –

  • पंक + ज = पंकज (पंक कीचड़ में, ज जन्मा अर्थात्‌ कमल)
  • नीला + कंठ = नीलकंठ (नीले कंठ वाला अर्थात्‌ शिव)
  • चार + पाई = चारपाई (चार हैं पायें जि सके अर्थात्‌ खाट)

(iv) अर्थ के आधार पर शाब्द तीन प्रकार के होते हैं –

(क) समानार्थी शब्द

वे शब्द जो अलग-अलग होते हुए भी एक ही अर्थ को प्रकट करते हैं समानार्थी शब्द कहलाते हैं। समानार्थी शब्दों को पर्यायवाची शब्द भी कहते हैं; जैसे –

  • महिला, स्त्री, औरत
  • गगन, आकाश, आसमान
  • भूमि, धरती, पृथ्वी आदि ।

(ख) विलोमार्थी शब्द

ऐसे दो शब्द जिनके अर्थ एक दूसरे के विपरीत होते हैं, विलोमार्थी शब्द कहलाते है। इन्हें विपरीतार्थक या विलोम शब्द भी कहते हैं; जैसे–

  • निकट – दूर
  • गुरु – शिष्य
  • धूप – छाया आदि

(ग) अनेकार्थी शब्द

ऐसे शब्द जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं, अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं; जैसे –

  • अंबर - आकाश, कपड़ा, कपास
  • वर - योग्य, दूल्हा, वरदात्त आदि ।

5. संज्ञा (Noun)

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी अथवा भाव के नाम का बोध कराने वाले शब्द संज्ञा (Noun) कहलाते हैं।

संज्ञा के तीन भेद होते हैं –

  • (क) व्यक्तिवाचक संज्ञा
  • (ख) जातिवाचक संज्ञा
    • (i) द्रव्यवाचक संज्ञा
    • (ii) समूहवाचक संज्ञा
  • (ग) भाववाचक संज्ञा

(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी विशेष प्राणी, वस्तु या स्थान के नाम का बोध कराते हैं, व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे – महाभारत, कुरुक्षेत्र, अर्जुन, गीता, श्रीकृष्ण, राज, रजनी, सूर्य, पृथ्वी, भारत, मलेशिया, ताजमहल, सोमवार, दीपावली, हिंदी, अंग्रेजी, अगस्त, हिमालय आदि ।

(ख) जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी प्राणी, वस्तु या स्थान की संपूर्ण जाति के नाम का बोध कराते जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। उदाहरण – विद्यार्थी , देश, पर्वत, नदी, दिन, महीना, पशु, पक्षी, आदमी, नारी, बालक, भाषा, अध्यापक, फल, इमारत आदि ।

कुछ विद्वान जाति वाचक संज्ञा के दो भेद और मानते हैं –

  • (i) द्रव्यवाचक संज्ञा
  • (ii) समूहवाचक संज्ञा

(i) द्रव्यवाचक संज्ञा

जो संज्ञा शब्द कि सी द्रव्य, धातु, या पदार्थ का बोध कराते हैं, वे द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते है।

(ii) समूहवाचक संज्ञा

जो संज्ञा शब्द कि सी समूह या समुदाय राते हैं समूहवाचक संज्ञा कहलाते हैं

(ग) भाववाचक संज्ञा

जिन संज्ञा शब्दों से किसी प्राणी, वस्तु या स्थान के गुण-दोष, दशा, भाव आदि का बोध होता है, वे भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं।

जातिवाचक संज्ञा से

जातिवाचक संज्ञाभाववाचक
मित्रमित्रता
बूढ़ाबूढ़ापा
बच्चाबचपन
देवदेवत्व
मातामातृत्व
शिशुशैशव
मनुष्यमनुष्यता
सेवकसेवा
वीरवीरता
लड़कालड़कपन
पुरुषपुरुषत्व
नारीनारीत्व
मानवमानवता
शत्रुशत्रुता

सर्वनाम से

सर्वनामभाववाचक
समसमता
परायापरायापन
अपनाअपनापन/अपनत्व
स्वस्वत्व
ममममता/ममत्व
निजनिजत्व

विशेषण से

विशेषणभाववाचक
गोलगोलाई
डरपोकडर
गरमगरमी
ठंडाठंडक
महानमहानता
भूखाभूख
प्यासाप्यास
बड़ाबड़प्पन
वीरवीरता
ऊँचाऊँचाई
मीठामिठास
चौड़ाचौड़ाई

क्रिया से

क्रियाभाववाचक
लिखनालिखाई/लिखावट
लिखनालिखाई/लिखावट
रोनारुलाई
चलनाचाल
हँसनाहँसी
देनादान
पढ़नापढ़ाई
उड़नाउड़ान
दौड़नादौड़

6. संज्ञा के विकार (Declension of Noun)

लिंग

शब्द के जिस रूप से उसके पुरुष जाति या स्त्री जाति होने का बोध होता है; उसे लिंग कहते हैं

लिंग के दो भेद होते हैं –

  • (क) पुल्लिंग
  • (ख) स्त्रीलिंग

(क) पुल्लिंग

पुरुष जाति का बोध कराने वाले शब्द पुल्लिंग कहलाते हैं। जैसे – अध्यापक, नौकर, धोबी आदि।

TIP

  • पुल्लिंग की पहचान – जिन शब्दों के पीछे 'आ', 'पन', 'पा', 'अक' तथा 'न' आता हो, वे पुल्लिंग शब्द होते हैं; जैसे – लड़का, बचपन, बुढ़ापा, गायक, दोनों, लेन-देन, आदि।
  • जो नाम पुल्लिंग होते हैं, वे इस प्रकार हैं – दिनों के नाम, महीनों के नाम, पेड़ों के नाम (इमली को छोड़कर), पहाड़ों के नाम, ग्रहों के नाम (पृथ्वी को छोड़कर), देशों के नाम, राज्यों के नाम, समुद्रों के नाम।
  • कुछ संज्ञा शब्द स्त्री तथा पुरुष दोनों के लिए समान रूप में प्रयोग किए जाते हैं; जैसे- राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मंत्री, डॉक्टर, इंजीनि यर, खि लाड़ी आदि ।
  • कुछ शब्दो में नर तथा मादा लगाकर पुल्लिंग या स्त्रीलिंग शब्द बनाया जाता है।
    • नर मच्छर – मादा मच्छर
    • नर कौआ – मादा कौआ
    • नर खरगोश – मादा खरगोश
    • नर भालू – मादा भालू

(ख) स्त्रीलिंग

स्त्री जाति का बोध कराने वाले शब्द स्त्रीलिंग कहलाते हैं। जैसे – अध्यापिक, नौकरानी, धोविन आदि।

TIP

  • स्त्रीलिंग की पहचान– जि न संज्ञा शब्दों के पीछे ई”, इया”, आवट”, “आनी”, “ता”, 'इन' आदि लगा होता है, वे स्त्रीलिंग होते हैं; जैसे– बोली, डिबिया, थकावट, महारानी, पंडि ताइन, मित्रता, धोबिन आदि ।
  • जो नाम स्त्रीलि ंग होते हैं, वे इस प्रकार है- ति थि यों के नाम, नदि यों के नाम (ब्रह्मपुत्र, सि ंधु, सोन अपवाद हैं) के नाम, कोमल भावों के नाम (दया, करुणा, ममता), शक्तिसूचक नाम (पुलि स, सेना, संमि ति ), लि पि यों के नाम (देव फ़ारसी), बोलि यों के नाम।
  • कुछ शब्द सदा स्त्रीलि ंग रहते हैं; जैसे– मक्खी, कोयल, मछली, छि पकली आदि ।

वचन

शब्द के जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

हिंदी में वचन के दो भेद होते हैं -

  • (क) एकवचन
  • (ख) बहुवचन

(क) एकवचन

शब्द के जिस रूप से उसके एक होने का बोध हो, उसे एकवचन कहते हैं। जैसे – घोड़ा, पत्ता, रोटी।

(ख) बहुवचन

शब्द के जिस रूप से उसके अनेक होने का बोध हो, उसे बहुवचन कहते है। जैसे – घोड़े, पत्ते, रोटियाँ।

कारक (case)

जो वाक्य में आए संज्ञा, सर्वनाम शब्दों का क्रिया के साथ संबंध बताए, उसे कारक कहते हैं।

कारक के आठ भेद होते है–

कारकविभक्ति-चिह्न
1. कर्ताने
2. कर्मको
3. करणसे, के साथ, के द्वारा
4. संप्रदानके लिए, को (किसी को कुछ देने के भाव में)
5. अपादानसे (अलग होना)
6. संबंधका, के, की
7. अधिकरणमें, पर
8. संबोधनहे!, अरे!

वाक्य प्रयोग– वाक्य में कारक-चि हनों का प्रयोग इस प्रकार होता है–

1. कर्ता

  • मयंक ने पुस्तक पढ़ी।

2. कर्म

  • कपिल ने वैभव को खूब दौड़ाया।

3. करण

  • माँ चाकू से फल काटती है।

4. संप्रदान

  • माँ मेघा के लिए खिलौने लाई।

5. अपादान

  • छत से पानी टपक रहा है।

6. संबंध

  • यह घर अर्पित का है।
  • कार्तिक के पिता अफ़सर हैं।
  • अनुराधा की बहन अच्छा गाती है।

7. अधिकरण

  • पतीले में दूध रखा है।
  • रस्सी पर कपड़े सूख रहे हैं।

8. संबोधन

  • अरे! मेरी बात भी तो सुनो।
  • हे प्रभु! इनकी रक्षा करो।

TIP

कारक का प्रयोग करने पर संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण का मूल रूप बदल जाता है।

6. सर्वनाम (Pronoun)

संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्द सर्वनाम (Pronoun) कहलाते हैं।

सर्वनाम के छह भेद होते हैं –

  • (क) पुरुषवाचक सर्वनाम
  • (ख) निश्चयवाचक सर्वनाम
  • (ग) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  • (घ) प्रश्‍नवाचक सर्वनाम
  • (ङ) संबंधवाचक सर्वनाम
  • (च) निजवाचक सर्वनाम

(क) पुरुषवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाले, सुनने वाले या अन्य व्यक्ति के लिए किया जाता है, वे पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – मैं, तुम, वह आदि ।

पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं

  • (i) उत्तम पुरुष - मैं (बोलने वाला अपने लि ए)
  • (ii) मध्यम पुरुष - तुम (सुनने वाले के लि ए)
  • (iii) अन्य पुरुष - वह (अन्य सभी के लि ए)

(ख) निश्चयवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम शब्द निश्चित वस्तु या प्राणी की ओर संकेत करते हैं; वे निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – यह, वह, वे, इस, ठस आदि ।

(ग) अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जब हम निश्चित रूप से प्राणी या वस्तु के बारे में नहीं बता पाते, तब हम कोई, किसी, कुछ आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं।

किसी अनिश्चित प्राणी या वस्तु के लिए प्रयोग किए जाने वाले सर्वनाम शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

(घ) प्रश्‍नवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग प्रश्‍न पूछने के लिए किया जाता है, वे प्रश्‍नवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – कौन, क्या, कि से, कि सका, कहाँ आदि ।

(ङ) संबंधवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम शब्द वाक्य में दूसरे सर्वनाम या संज्ञा शब्द से संबंध बताने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, वे संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – जो-सो, जिसने-उसने, जिसका-उसका आदि ।

(च) निजवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग अपने लिए किया जाता है, वे निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे– स्वयं, खुद, अपने-आप आदि ।

7. विशेषण (Adjective)

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता, या गुण धर्म बताते हैं, वे विशेषण (Adjective) कहलाते हैं।

विशेषण के भेद

विशेषण के चार भेद होते हैं–

  • (क) गुणवाचक विशेषण
  • (ख) संख्यावाचक विशेषण
  • (ग) परिमाणवाचक विशेषण
  • (घ) सार्वनामिक विशेषण

(क) गुणवाचक विशेषण

संज्ञा/सर्वनाम शब्दो गण, अवस्था, रूप, रंग, आकार आदि का बोध कर हैं, वे गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे –

  • अवस्था – स्वस्थ, कमज़ोर, युवा, बीमार
  • रूप-रंग – गोरा, हरा, नीला, पीला, सुंदर, कुरूप
  • आकार – ऊंचा, बड़ा, लंबा, गोल, चौकोर
  • गुण – भोला, चतुर, मूर्ख, वाचाल, चंचल

(ख) संख्यावाचक विशेषण

जो शब्द संज्ञा शब्दों की संख्या या क्रम बताते हैं, वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे – दो, एक, पाँच, कुछ, तीन आदि।

संख्यावाचक विशेषण को दो भागों में बाँटा गया है –

(i) निश्चित संख्यावाचक

निश्चित संख्यावाचक विशेषण अपने विशेष्यों की निश्चित संख्या बताते हें;

(ii) अनिश्चित संख्यावाचक

अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण से वि शेष्यों की नि श्चि त संख्या पता नहीं लगती है; जैसे– कुछ बच्चे, कई आदमी आदि ।

(ग) परिमाणवाचक विशेषण

जो शब्द संज्ञा का माप-तौल बताते हैं, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।

परिमाणवाचक विशेषण को दो भागों में बाँटा गया है –

(i) निश्चित परिमाणवाचक

निश्चित परिमाणवाचक विशेषण अपने विशेष्यों को निश्चित मात्रा बताते हैं; जैसे – दो मीटर कपड़ा, एक लीटर दूध आदि ।

(ii) अनिश्चित परिमाणवाचक

अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण विशेष्यों की नि श्चि त मात्रा नहीं बताते; जैसे- थोड़ी चीनी, कुछ खिलौने आदि ।

(घ) सार्वनामिक विशेषण

जो सर्वनाम शब्द संज्ञा से पहले लगकर उसकी विशेषता बताते हैं, वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। जैसे – यह लड़का, वह आदमी आदि।

8. काल (Tense)

क्रिया के जिस रूप से उसके होने के समय का बोध होता है, उसे काल (Tense) कहते हैं।

काल के तीन भेद होत हैं –

  • (क) भूतकाल
  • (ख) वर्तमान काल
  • (ग) भविष्यत काल

(क) भूतकाल

क्रिया के जिस रूप सें उसके बीते हुए समय में होने का बोध हो, उसे भूतकाल कहते हैं; जैसे – अरूण स्कूल गया था।, गारिमा नाच रही थी।

(ख) वर्तमान काल

क्रिया के जिस रूप से उसके वर्तमान समय में होने का बोध हो, उसे वर्तमान काल कहते हैं; जैसे – छात्र पाठ पढ़ते हैं।, मोर नाच रहा है।

(ग) भविष्यत काल

क्रिया के जिस रूप से उसके आने वाले समय में होने का पता चले, उसे भविष्यत्‌ काल कहते हैं; जैसे – प्रतीक अपना जन्मदिन मनाएगा।, माता जी मंदिर जाएँगी।

9. अविकारी शब्द (Indeclinable Words)

जिन शब्दों के रूप में कभी कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं।

अविकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं –

  • (क) क्रियाविशेषण (Adverb)
  • (ख) संबंधबोधक (Prepositions)
  • (ग) समुच्चयबोधक (Conjunction)
  • (घ) विस्मयादिबोधक (Introjunction)

(क) क्रियाविशेषण (Adverb)

क्रिया की विशेषता बताने बताने शब्द क्रियाविशेषण (Adverb) कहलाते हैं।

  1. कालावाचक क्रियाविशेषण : ये शब्द क्रिया के होने का समय बताते हैं; जैसे– कल, परसों, आज, अभी, सदा, जब तक, हमेशा, रोज़ आदि । कालवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए कब प्रश्‍नवाचक शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण : ये शब्द क्रि या के होने का स्थान बताते हैं; जैसे– ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर, इधर, उधर, दूर, पास, दाएँ, बाएँ, सामने, पीछे आदि । स्थानवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए कहाँ, कि धर जैसे प्रश्‍नवाचक शब्दों का प्रयोग कि या जाता है।
  3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण : ये शब्द क्रि या की मात्रा या नाप-तौल के संबंध में बताते हैं अर्थात्‌ क्रिया 'कितनी हुई' से संबंधित जानकारी देते हैं; जैसे – थोड़ी, आधा, ज़्यादा, कम, काफ़ी, लगभग, खूब, बहुत, अधिक, बिलकुल, इतना, उतना आदि । परिमाणवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए कितना प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग कि या जाता है।
  4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण : ये शब्द क्रि या के होने का ढंग या रीति बताते हैं अर्था त्‌क्रि या “कैसे को जा रही हैः या "कैसे हो रही हैः आदि से संबंधि त जानकारी देते हैं; जैसे – धीरे-धीरे, तेज़, शांति पूर्वक, ध्यान से, रोते-रोते, दौड़कर, अच्छा, अचानक, जल्दी आदि । रीतिवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए कैसे प्रश्‍नवाचक शब्द का प्रयोग कि या जाता है।

(ख) संबंधबोधक (Prepositions)

वे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के साथ जुड़कर उनका संबंध वाक्य के वाक्य के अन्य शब्दों से बताते हैं, संबंधबोधक कहलाते हैं। कुछ अन्य संबंधबोधक शब्द– के बाहर, के मारे, के भीतर, की ओर, के सामने, के पीछे, के समान, की तरह, के अंदर, के आगे, के साथ, के वि परीत, की तरफ़ आदि ।

(ग) समुच्चयबोधक (Conjunction)

वे शब्द जो वाक्य के दो शब्दों, वाक्यांशों या दो वाक्यों को जोड़ते हैं, समुच्चयबोधक कहलाते हैं। जैसे – लेकि न, परंतु, कि ंतु, यद्यपि , तथापि , क्योंकि , कि , ताकि , जोकि , मगर, एवं, तथा, बल्कि, पर, तो, अन्यथा, अथवा आदि । समुच्चयबोधक को योजक भी कहते हैं

10. वाक्य (Sentence)

व्यवस्थित शब्द-समूह और जिसके द्वारा विचार पूर्ण रूप से प्रकट हो जाते हैं, वाक्य (Sentence) कहलाता है।

वाक्य के अंग

वाक्य के दो अंग होते है –

  • (क) उद्देश्य
  • (ख) विधेय

उदाहरण – वैभव बाजा बजा रहा है। इसमें 'वैभव' उद्देश्य तथा 'बाजा' बजा रहा है विधेय है।

(क) उद्देश्य

वाक्य का कर्त्ता या वह भाग जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उद्देश्य होता है।

(ख) विधेय

जो कुछ भी उद्देश्य के विषय में कहा जाता है, उसे विधेय कहते है।

वाक्य के प्रकार

वाक्यों को दो भागों में बाट सकते हैं –

  • (क) रचना के आधार पर
  • (ख) अर्थ के आधार पर

(क) रचना के आधार पर वाक्य-भेद

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं –

  • (i) सरल वाक्य
  • (ii) संयुक्त वाक्य और
  • (iii) मिश्र वाक्य।

(i) सरल वाक्य

सरल वाक्य बहुत आसान होते हैं। इनमें कि सी भी प्रकार के योजक चि हन का प्रयोग नहीं किया जाता है। इन वाक्यों में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होता है; जैसे–

  • अर्पित कार चला रहा है।
  • बतखें पानी में तैर रही हैं।

(ii) संयुक्त वाक्य

संयुक्त अर्थात्‌ जुड़ा हुआ। ऐसा वाक्य जो दो वाक्यों को योजक चिह्नों की सहायता से जोड़कर बना है, संयुक्त वाक्य कहलाता है। इसमें दोनों वाक्य ही अपना स्वतंत्र महत्त्व रखते हैं। जैसे –

  • विनोद दिनभर सोया परंतु दर्द कम नहीं हुआ।
  • सुबह हुई और दि न नि कल आया।

(iii) मिश्र वाक्य।

मिश्र अर्थात्‌ मिला-जुला। ऐसा प्रधान वाक्य जिसमें एक या एक से अधिक आश्रित उप जोड़ दिए गए हों, मिश्र वाक्य कहलाता है; जैसे–

  • शिक्षक ने बताया कि कल अवकाश रहेगा।
  • उसको बुलाओ जो बाहर बैठा है।

(ख) अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद

अर्थ के आधार पर वाक्य आठ प्रकार के होते हैं –

  • (i) विधानवाचक वाक्य : इस प्रकार के वाक्यों में किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थिति के बारे में सामान्य जानकारी मिलती है; जैसे –
    • शेर जंगल में रहता है।
    • आज बैंक बंद है।
  • (ii) निषेधवाचक वाक्य : इन वाक्यों में कि सी काम के न होने या न कर पाने का पता चलता है; जैसे –
    • नल में पानी नहीं आ रहा।
    • मैंने बहन का काम नहीं कि या।
  • (iii) प्रश्‍नवाचक वाक्य : इन वाक्यों में प्रश्‍न संबंधी जानकारी मिलती है; जैसे–
    • क्या तुम्हारे पास लाल कमीज है?
    • होली कब मनाई जाती है?
  • (iv) आज्ञावाचक वाक्य : इन वाक्यों में कि सी को कोई काम करने का आदेश या नि र्देश दि या जाता है; जैसे–
    • टी॰ वी॰ बंद करो और खाना खाओ।
    • तुम जाकर पढ़ाई करो।
  • (v) संदेहबाचक वाक्य : इस प्रकार के वाक्यों में कि सी कार्य के होने के बारे में संदेह प्रकट किया जाता है; जैसे–
    • शायद कल में ऑफिस न आऊ
    • शायद आज बारिश हो।
  • (vi) इच्छावाचक वाक्य : इस प्रकार के वाक्यों में वकता को इच्छा, आशीर्वा द, शुभकामना आदि का पता चलता है; जैसे–
    • भगवान तुम्हें सुखी रखे!
    • तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो।
  • (vii) विस्मयादिवाचक वाक्य : इन वाक्यों में आश्चर्य, खुशी, दुःख, पीड़ा, शोक, घृणा आदि के भाव व्यक्त होते हैं; जैसे–
    • वाह! भारत ने क्या शानदार जीत पाई।
    • छिः! कि तनी गंदगी हे यहाँ।
  • (viii) संकेतवाचक वाक्य : ये वाक्य कि सी भी कार्य को सफलता या असफलता की ओर संकेत करते हैं; जैसे–
    • पानी न बरसता तो तालाब सूख जाता।
    • यदि खाना नहीं खाओगे, तो सेहत कैसे बनेगी?

11. शब्द-भंडार (Vocabulary)

पर्यायवाची शब्द (ऽynonyms)

लगभग समान अर्थ वाले शब्दों को पर्यायवाची शब्द (ऽynonyms) या समानार्था शब्द कहते हैं।

  • बाग – बगीचा,उद्या, वाटि
  • पेड़ – कबृक्ष, तरु, कुसुम
  • फूल – पुष्प, सुमन, विटप
  • संसार – दुनिया, विश्व, जगत
  • मनुष्य – मानव, मनुज, इनसान
  • साँप – भुजंग, सर्प, विषधर
  • अध्यापक – शिक्षक, गुरु, आचार्य
  • अँधेरा – अंधकार, तम, तिमिर
  • असूर – दानव, दैत्य, राक्षस
  • इच्छा – चाह, कामना, अभिलाषा
  • बेटा – पुत्र, तनय, सुत
  • मित्र – दोस्त, सखा, सहचर
  • वर्षा – बरसात, बारिश, बरखा
  • विद्यार्थी – छात्र, शिष्य, शागिर्द
  • सबह – प्रातः, भोर, सवेरा
  • समुद्र – सागर, रत्नाकर, सिंधु
  • आग – अग्नि, अनल, पावक
  • धरती – भूमि, धरा, पृथ्वी
  • हवा – वायु, पवन, समीर
  • पानी – जल, नीर, सलिल
  • आकाश – नभ, अंबर, आसमान
  • रात – रात्रि, रजनी, निशा
  • दिन – दिवस, दिवा, वार
  • बादल – मेघ, घन, जलद
  • सूरज – दिनकर, रवि, दिवाकर
  • चाँद – चंद्र, चंद्रमा, शशि
  • कपड़ा – वस्त्र, पट, वसन
  • घर – गृह, आलय, निकेतन
  • जंगल – वन, कानन, विपिन
  • झंडा – ध्वज, पताका, ध्वजा
  • बिजली – दामिनी, विद्युत, चपला
  • नदी – सरिता, तरंगिनी, तटिनी
  • शाम – सांय, संध्या, साँझ
  • पत्त – पत्र, पल्लव, पर्ण
  • प्रयत्न – कोशिश, प्रयास, चेष्टा
  • हाथी – गज, कुंजर, हस्ती
  • पक्षी – खग, विहग, खेचर
  • पहाड़ – पर्वत, अचल, नग
  • पाठशाला – विद्यालय, मदरसा, गुरुकुल
  • प्रसन्नता – खुशी, आनंद, हर्ष

विलोम शब्द (Antonyms)

जो शब्द एक-दूसरे का विपरीत अर्थ प्रस्तुत करते हैं, वे विपरीतार्थक या विलोम शब्द (Antonyms) कहलाते हैं।

शब्दविलोम
आदानप्रदान
अंधकारप्रकाश
स्वतंत्रपरतंत्र
आदरनिरादर
स्वस्थअस्वस्थ
आरंभअंत
पापपुण्य
दानवमानव
सबलनिर्बल
स्वर्गनरक
बंधनमुक्ति
सुयशअपयश
धनवाननिर्धन
कृतज्ञकृतघ्न
प्राचीननवीन
स्वाधीनपराधीन
आशानिराशा
यशअपयश
सौभाग्यदुर्भाग्य
एकताअनेकता
उदयअस्त
अनुजअग्रज
प्रशंसानिंदा
उचितअनुचित
श्वेतश्याम
युद्धशांति
प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष (परोक्ष)
वीरकायर
आयव्यय
गुणदोष
आस्तिकनास्तिक
विद्वानमूर्ख
सरसनीरस
जीवनमरण (मृत्यु)
उपकारअपकार
संतोषअसंतोष
हानिलाभ
अँधेराउजाला
आकाशपाताल
उतारचढ़ाव
सुबहशाम
नयापुराना
सचझूठ
सुगमदुर्गम
धर्मअधर्म
कोमलकठोर
उन्नतिअवनति
सज्जनदुर्जन
स्वदेशविदेश
प्रातःसांय
बलवानदुर्बल
सत्यअसत्य
खुशबुबदबू
विस्तुतसंक्षिप्त

श्रुतिसम-भिन्नार्थक शब्द (Pair of similar words-distinguished)

ऐसे शब्द जो सुनने में एक समान हों, परंतु जिनका अर्थ भिन्न हो, वे श्रुतिसम-भिन्नार्थक शब्द (Pair of similar words-distinguished) कहलाते हैं।

अनेकार्थी शब्द (Word with Many Meanings)

जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, वे अनेकार्थी शब्द (Word with Many Meanings) कहलाते हैं।

  • अंबर – आकाश, कपड़ा, कपास
  • कर – हाथ, टैक्स, कि रण
  • नायक – नेता या मार्गदर्शक, नाटक का मुख्य पात्र
  • भाग – दौड़, हि स्सा, बाँटना
  • तीर – बाण, कि नारा, पास
  • कुल – सब, वंश, गोत्र
  • विधि – रीति , भाग्य, ब्रह्मा
  • हरि – विष्णु, शिव, वानर, शेर
  • हल – समाधान, खेत जोतने का यंत्र
  • गुण – खूबी, स्वभाव, कौशल, रस्सी
  • अधर – नीचे का होंठ, धरती और आसमान के बीच
  • मत – राय, वोट, नहीं
  • दंड – डंडा, जुर्मा ना, एक प्रकार की कसरत
  • वर – दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान
  • अंक – गोद, गि नती, नाटक का कोई भाग
  • गति – चाल, दशा, मोक्ष
  • कोष – खजाना, फूल के अंदर का भाग
  • घन – बादल, घना, हथौड़ा

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One word Substitution)

जिन शब्दों के एक अधिक अर्थ होते हैं, वे अनेकार्थी शब्द (अनेक शब्दों के लिए एक शब्द) (One word Substitution) कहलाते हैं।

  1. जिसका आदि न हो – अनादि
  2. जिसका अंत न हो – अनंत
  3. जिसकी कभी मृत्यु न हो – अमर
  4. जिसका जन्म न होता हो – अजन्मा
  5. जो दिखाई न देता हो – अदृश्य
  6. जिसका मूल्य आँका न जा सके – अमूल्य
  7. जिसका भाग्य अच्छा हो – भाग्यशाली
  8. जिसमें दया की भावना न हो – निर्दयी
  9. जिसमें भगवान के प्रति आस्था हो – आस्तिक
  10. जिसकी कोई उपमा न हो — अनुपम
  11. जिसका कोई आकार न हो – निराकार
  12. जिसे क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य
  13. जिसमें शाक्ति हो – शाक्तिमान
  14. जो हाथ से लिखा हुआ हो – हस्तलिखित
  15. जो गणित का जानकार हो – गणितज्ञ
  16. जिसके आर-पार देखा न जा सके – अपारदर्शी
  17. जिस पर विश्वास न किया जा सके – अविश्वसनीय
  18. जो बिना वेतन के काम करे – अवैतनिक
  19. जो किसी का पक्ष न ले – निष्पक्ष
  20. जो दूसरों से ईर्ष्या रखता हो – ईर्ष्यालु
  21. जो कार्य छोड़ा जा सके – वैकल्पिक
  22. जो देखने में प्रिय लगता है – प्रियदर्शी

मुहावरे (Idioms)

जब कोई वाक्यांश अपना सामान्य अर्थ छोड़कर कोई विशेष अर्थ व्यक्त करता है, तो वह मुहावरा कहलाता है।

  1. चिकना घड़ा (कुछ असर न होना)– कपि ल पर कि सी भी बात का कोई असर नहीं होता, वह तो चि कना घड़ा है।
  2. कान भरना (चुगली करना)– मौका मि लते ही हर्षि त ने नि पुण के कान भरने शुरू कर दि ए।
  3. अगर-मगर करना (टाल-मटोल करना)- माँ ने नमन से पढ़ने के लि ए कहा तो वह अगर-मगर करने लगा।
  4. अंग-अंग ढीला होना (बहुत थक जाना)– दि नभर मेहनत करने के बाद अजय का अंग-अंग ढीला हो रहा है।
  5. आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना)– ठग यात्री की आँखों में धूल झोंककर उसका सारा सामान लेकर भाग गया।
  6. बाएँ हाथ का खेल (बहुत आसान काम)- परीक्षा में अच्छे अंक लाना मेरे लि ए बाएँ हाथ का खेल है।
  7. नमक-मिर्च लगाना (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)– पारुल नमक-मि र्च लगाकर बात बताती है।
  8. बाल-बाल बचना (बहुत कठि नाई से बचना) रेल दुर्घटना में श्री राधेश्याम बाल-बाल बच गए।
  9. काम तमाम करना (मार डालना) शेर ने कुछ ही पलों में हिरन का काम तमाम कर दि या।
  10. हवा से बातें करना (बहुत तेज़ भागना)– राणा प्रताप का घोड़ा चेतक हवा से बातें करता था।

लोकोक्तियाँ या कहावतें (Proverbs)

  1. लातों के भूत बातों से नहीं मानते (दुष्ट व्यक्ति प्यार से नहीं मानते) – अध्यापि का ने वि द्यार्थी को प्यार से समझाया कि अपनी गलती मान ले, परंतु वह नहीं माना। डाँट खाने पर उसने हाँ कर दी। इसे कहते है- लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
  2. जैसी करनी वैसी भरनी (कार्य के हि साब से फल मि लना)– सलीम ने सारा साल खेल-कूद में विता दि या, इसलि ए परीक्षा में उसके अच्छे अंक नहीं आए। इसे कहते हैं- जैसी करनी वैसी भरनी।
  3. चिराग तले अँधेरा (अपना दोष न दि खना)– वि शाखा के पि ता गणि त में बहुत होशि यार हैं, परंतु वि शाखा को गणि त समझ ही नहीं आता। यह तो वही बात हुई– चि राग तले अँघेरा।
  4. उलटा चोर कोतवाल को डाँटे (अपराधी नि रपराध पर दोष लगाए)- एक तो नीलेश ने राघव की पुस्तक फाड़ दी, ऊपर से उसे ही दोष दे रहा है। इसे कहते हैं- उलटा चोर कोतवाल को डाटे।
  5. पाँचों अँगुलि याँ बराबर नहीं होतीं (सभी लोग एक समान नहीं होते)– नमि ता की कक्षा में कुछ बच्चे होशि यार, तो कुछ शेतान हैं। इसे कहते हैं– पाँचों अंगुलि याँ बराबर नहीं होती।
  6. एक अनार सौ बीमार (एक वस्तु, अनेक इच्छुक )– फ्रि ज में केवल एक ही पेस्ट्री रखी है, लेकि न सभी उसे खाना चाहते हैं। यह तो वही बात हो गई– एक अनार सौ बीमार।
  7. मान न मान, मैं तेरा मेहमान (ज़बरदस्ती गले पड़ना)– नीलि मा साधना से दूर भागती है, फिर भी साधना उसका पीछा नहीं छोड़ती। इसे कहते हैं– मान न मान, में तेरा मेहमान।
  8. नाच न जाने आँगन टेढ़ा (खुद को काम न आने पर दूसरों को दोष देना)– वि नायक से प्रश्‍नहल नहीं हो रहा था, तो वह कहने लगा कि प्रश्‍नही गलत है। यह तो वही बात हुई नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
  9. दूध का दूध, पानी का पानी (उचि त न्याय करना)– बीरबल ने गरीब कि सान को न्याय दि लाकर दृध का दूध, पानी का पानी कर दि या।
  10. चोर की दाढ़ी में तिनका (दोषी व्यक्ति का अपने दोष के कारण स्वयं डरना)– मीरा ने काँच का गि लास तोड़ दि या, तो उसकी घबराहट देखकर मॉ समझ गई कि चोर की दाढ़ी में ति नका है।

12. विराम-चिह्न

बोलते या लिखते समय वि राम प्रकट करने वाले चिह्ननों को वि राम-चिह्नन कहते हैं

1. पूर्ण विराम

पूर्ण वि राम का अर्थ है– पूरी तरक रुकना। वाक्य पूरा होने पर अंत में पूर्ण वि राम लगाया जाता है। प्रश्‍नवाचकतथा वि स्मयादि बोधक वाक्यों को छोड़कर अन्य सभी वाक्यों के अंत में पूर्ण वि राम का प्रयोग कि या जाता है; जैसे–

  • मैं विद्यालय जा रहा हूँ।
  • पिंकी गुड़िया से खेल रही है।

2. प्रश्नवाचक चिह्न ?

जि न वाक्यों में कोई प्रश्‍नपूछा जाता है, वहाँ प्रश्‍नवाचकचि ह्न का प्रयोग कि या जाता है; जैसे–

आप बाज़ार से कब आए? ° आपके हाथ में क्या है? ° यह काम केसे करना हे? इन वाक्यों में छपे रंगीन शब्द प्रश्‍नवाचकशब्द हैं।

3. विस्मयादिबोधक चिह्न !

मन के भाव यानी हर्ष (खुशी), शोक, भय, आश्‍चर्य,घृणा आदि को प्रकट करने वाले वाक्यों में वि स्मयादि बोधक चि ह्न का प्रयोग कि या जाता है; जैसे- ° छि ः! यहाँ कि तनी गंदगी है। ° वाह! तुमने खूब छक्का मारा।

4. अल्प विराम ,

अल्प वि राम का अर्थ– थोड़ा वि राम। वाक्य बोलते समय जब हम थोड़ा रुकते हैं, तब अल्प वि राम का प्रयोग कि या जाता है; जैसे– ® लाल, नीला, हरा और पीला मेरे प्रि य रंग हैं ° आसमान में बि जली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं और वर्षा भी हो रही है। ® सज्जनो, मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनो।

5. योजक चिह्न -

तुलना करने वाले शब्दों तथा शब्द-युग्मों के साथ योजक चि हन का प्रयोग कि या जाता है; जैसे– ® अपने माता-पि ता का आदर करो। ® थोड़ा-सा, ऐसा-वैसा, मोटा-सा आदि ।

6. उद्धरण चिह्न

उद्धरण चि ह्न दो प्रकार के होते हैं–

1. इकहरा उद्धरण चिह्न

इस चि ह्न का प्रयोग कि सी अक्षर, शब्द, कि ताब, वस्तु या व्यक्ति का नाम लि खने के लि ए कि या जाता है; जैसे-

® “रामायण” एक धार्मि क ग्रंथ है। ® अध्यापि का ने सभी छात्रों को “मानसरोवर” पुस्तक नि कालने के लि ए कहा।

2. दोहरा उद्धरण चिह्न

इस चि हन का प्रयोग कि सी के द्वारा कही गई बात (कथन) को ज्यो-का-त्यों दि खाने के लि ए कि या जाता है; जैसे– ® स्वामी वि वेकानंद ने कहा, “उठो, आगे बढ़ो, अज्ञान का अंधकार दूर करो।” ® गांधी जी ने कहा, “करो या मरो।”

7. अर्ध विराम ;

वाक्य लि खते या बोलते समय, एक बड़े वाक्य में एक से अधि क छोटे वाक्यों को जोड़ने के लि ए अर्ध वि राम का प्रयोग कि या जाता है; जैसे– *« कपास से सूत तैयार कि या जाता है; सूत से कपड़ा बनता है। « गांधी जी राष्ट्रपि ता ही नहीं थे; वि श्‍वपुरुषभी थे।

8. लाघव चिह्न

इस चि हन का प्रयोग शब्दों को संक्षि प्त रूप में दि खाने के लि ए कि या जाता है; जैसे- ० प्रन - प्र० ० उत्तर - उ० ०° डॉक्टर - डॉ० ° टेलीवि ज़न - टी०वी०

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अपठित गद्यांश: Intermediate Hindi Unseen Passage Guide

अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर-लेखन ​ परीक्षा में कभी-कभी ऐसे गद्यांश दिए जाते हैं जिनका पाठ्यपुस्तकों से कोई संबंध नहीं रहता। फिर भी उस अंश से संबद्ध कई प्रकार के प्रश्‍न रहते हैं। छात्रों को उनका उत्तर देना पड़ता है। इस अभ्यास से बौद्धिक क्षमता और भाषा पर उनकी कैसी पकड़ है, इसका ज्ञान होता है । उदाहरणार्थ कुछ गद्यांश और उनसे संबंधित प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर-लेखन अपठित गद्यांश 1 अपठित गद्यांश 2 अपठित गद्यांश 3 अपठित गद्यांश 4 अपठित गद्यांश 5 अपठित गद्यांश 6 अपठित गद्यांश 7 अपठित गद्यांश 8 अपठित गद्यांश 9 अपठित गद्यांश 10 अपठित गद्यांश 11 अपठित गद्यांश 12 अपठित गद्यांश 13 अपठित गद्यांश 14 अपठित गद्यांश 15 अपठित गद्यांश 16 अपठित गद्यांश 17 अपठित गद्यांश 18 अपठित गद्यांश 1 ​ विश्वविद्यालय कोई ऐसी वस्तु नहीं हैजो समाज से काटकर अलग की जा सके । समाज दरिद्र है तो विश्वविद्यालय भी दरिद्र होंगे, समाज कदाचारी है, तो विश्वविद्यालय भी कदाचारी होंगे और समाज में अगर लोग आगे बढ़ने के लिए गलत रास्ते अपनाते हैं तो विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी सही रास्तों को छोड़कर ...
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Class 6-8 Number System Quiz PDF with Answers in Hindi

0 से छोटे प्रत्येक पूर्णांक का चिह्न होता है - + − × ÷ संख्या रेखा पर 0 के दायीं ओर 5 इकाई की दूरी पर पूर्णाक है - + 5 − 5 + 4 − 4 पूर्णाक −1 का पूर्ववती है - 0 2 −2 1 पूर्णाकों −1 और 1 के बीच पूर्णाकों की संख्या है - 1 2 3 0 −5 और 5 के बीच स्थित पूर्ण संख्याओं की संख्या है - 10 3 4 5 −10 और −15 के बीच स्थित सबसे बड़ा पूर्णाक है - −10 −11 −15 −14 −10 और −15 के बीच स्थित सबसे छोटा पूर्णाक है - −10 −11 −15 −14 संख्या रेखा पर, पूर्णाक 5 स्थित है - 0 के बायीं ओर 0 के दायीं ओर 1 के बायीं ओर −2 के बायीं ओर पूर्णाकों के किस युग्म में, पहला पूर्णांक संख्या रेखा पर दूसरे पूर्णांक के बायीं ओर स्थित नहीं है? (−1, 10) (−3, −5) (−5, −3) (−6, 0) ऋणात्मक चिहण (−) वाला पूर्णाक सदैव निम्नलिखित से छोटा होता है 0 −3 −1 −2 धनात्मक चिहू (+) वाला पूर्णाक सदैव निम्नलिखित से बड़ा होता है - 0 1 2 3 −50 के पूर्ववर्ती का परवर्ती है −48 −49 −50 −51 एक ऋणात्मक पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम - सदैव ऋणात्मक होता है सदैव धनात्मक होता है वही पूर्णांक होता है शून्य होता है अमूल्य और अमर कश्मीर में क्रमशः दो स्थानों 2 और 5 पर...
By Guddu Kumar

संख्या स्थानीय मान सारणी: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

संख्या स्थानीय मान सारणी (Place value chart) ​ संख्या स्थानीय मान सारणी (Place value chart) भारतीय पद्धति (Indian System) अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (International System) भारतीय पद्धति (Indian System) ​ भारतीय पद्धति (Indian System) संख्या (Commas) Scientific Notation इकाई 1 10 0 दहाई 10 10 1 सैकड़ा 100 10 2 हज़ार 1,000 10 3 दस हज़ार 10,000 10 4 लाख 1,00,000 10 5 दस लाख़ 10,00,000 10 6 करोड़ 1,00,00,000 10 7 दस करोड़ 10,00,00,000 10 8 अरब 1,00,00,00,000 10 9 दस अरब 10,00,00,00,000 10 10 खरब 1,0...
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Number System Class 6 to 8 Worksheet with Answer in Hindi

1. प्राकृत संख्याएँ ​ 2. पूर्ण संख्याएँ 3. गुणनखंड और गुणज​ 1. प्राकृत संख्याएँ ​ ​ प्रश्‍न 1 ​ 6 अंकों की कुल संख्याएँ: 9,00,000 (नौ लाख) सबसे बड़ी संख्या: 9,99,999 सबसे छोटी संख्या: 1,00,000 प्रश्‍न 2 ​ 4, 7, 5, 0 से बनी संख्याएँ: सबसे बड़ी संख्या: 7,540 सबसे छोटी संख्या: 4,057 प्रश्‍न 3 ​ 2, 0, 4, 7, 6, 5 से बनी संख्याएँ और उनका योग: सबसे बड़ी संख्या: 7,65,420 सबसे छोटी संख्या: 2,04,567 योग: 9,69,987 प्रश्‍न 4 ​ 4, 5, 6, 0, 7, 8 से बनी 5 संख्याएँ: 4,56,078; 8,76,540; 5,04,678; 7,80,456; 6,54,780 प्रश्‍न 5 ​ 4, 5, 6, 7, 8, 9 से 8 अंकों की 3 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 9,98,76,544 4,45,67,899 8,87,76,544 प्रश्‍न 6 ​ 3, 0, 4 से 6 अंकों की 5 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 3,00,044; 4,33,000; 3,40,340; 4,00,433; 3,33,440 प्रश्‍न 7 ​ 8 अंकों की सबसे छोटी संख्या से अगली 5 संख्याएँ (आरोही क्रम): 1,00,00,000 (एक करोड़) 1,00,00,001 (एक करोड़ एक) 1,00,00,002 (एक करोड़ दो) 1,00,00,003 (एक करोड़ तीन) 1,00,00,004 (एक करोड़ चार) 1,00,00,005 (एक करोड़ पाँच) प्रश्‍न 8 ​ तुलना और क्रम: सबसे छोटी संख्या:...
By Guddu Kumar

120+ पर्यायवाची शब्द लिस्ट: Paryayvachi Shabd in Hindi

पर्यायवाची शब्द ​ पर्यायवाची शब्द ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– अभ्यास Conclusion किसी शब्द के समान अर्थवाले अन्य शब्दों को पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसे - आँख के बदले नेत्र, नयन, लोचन आदि शब्द पर्यायवाची शब्द कहे जाते हैं । हिन्दी में अधिकतर शाब्द ऐसे हैं जिनके बदले बहत से शब्द प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– ​ अंग : अंश, अवयव, खंड, भाग, विभाग, हिस्सा । अंधकार : अँधियारा, अँधेरा, तम, तमिस्र, तिमिर, ध्वांत। अदरक : अनूपज, अपाकशाक, आदी, आर्द्रशाक, कटुभद्र । अनुपम : अतुल्य, अद्वितीय, अदभुत, अनूठा, अनोखा, अपूर्व । अपमान : अनादर, अवज्ञा, अवमान, अवमानना, अवहेलना, तिरस्कार । अभिमान : अहं, अहंकार, अहंभाव, गर्व, घमंड, दर्प, दंभ, मद । अमृत : अमी, अमिय, पीयूष, मधु, सुधा, सोम । अर्जुन : गांडीवधर, गांडीवी, पांडुनन्दन, पांडुपुत्र, पार्थ, मध्यमपांडव, वृहन्नला, सव्यसाची । आँख : अंबक, अक्ष, अक्षि, ईक्षण, चश्म, चक्षु, दृक्‌, दृग्‌, दृष्टि, नजर, नयन, नेत्र, नैन,. लोचन, बिलोचन । आकाश : अंबर, अंतरिक्ष, अनंत, अभ्र, अर्श, आसमान, ख, गगन, तारापथ, दिव,...
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फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

Notes फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) प्रश्‍न सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) प्रश्‍न फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) ​ वस्तु(Object) फारेनहाइट मापन (Farenheit Scale) सेल्सियस मापन (Celsius Scale) पानी का जमना 32°F 0°C पानी का ऊवलना 212°F 100°C फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) ​ °C = ((°F - 32) × 5) ÷ 9 या (or) °C = (°F - 32) × 5/9 या (or) °C = ∘ F − 32 9 × 5 प्रश्‍न ​ 75°F को सेल्सियस में बदलें। हल : °C = 75 − 32 9 × 5 = 43 9 × 5 = 23.89°C सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) ​ °F = { ( °C × 9 ) ÷ 5 } + 32 या (or) °F = ( °C × 9/5 ) + 32 या (or) °F = °C × 9 5 + 32 प्रश्‍न ​ 20°C को फारेनहाइट में बदलें। हल : °F = (20 × 9/5) + 32 = 68°F
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