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कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 7 नोट्स: समकालीन विश्व में सुरक्षा

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. सुरक्षा का बुनियादी अर्थ (Basic Meaning of Security) ​ परिभाषा: सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है 'खतरों से आज़ादी' । सीमित दृष्टिकोण: मानव जीवन और किसी देश का अस्तित्व हमेशा किसी न किसी खतरे से घिरा रहता है। लेकिन हर खतरे को सुरक्षा का विषय नहीं बनाया जा सकता। केवल उन्हीं खतरों को 'सुरक्षा' के दायरे में लाया जाता है, जिससे किसी देश या मानव जीवन के अस्तित्व को सीधा खतरा हो। सुरक्षा की धारणाएं: सुरक्षा की धारणा को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है: पारंपरिक धारणा (Traditional Notion): सैन्य खतरों और राज्य की सुरक्षा से जुड़ी। अपरंपरागत धारणा (Non-Traditional Notion): मानवीय अस्तित्व और वैश्विक खतरों से जुड़ी। 2. सुरक्षा की पारंपरिक धारणा (बाहरी सुरक्षा) ​ पारंपरिक धारणा के अनुसार, सुरक्षा का मुख्य संबंध 'राज्य' (देश) की संप्रभुता और उसकी सीमाओं की रक्षा से होता है। इस...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 9 नोट्स: वैश्वीकरण

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalization) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है? (Meaning of Globalization) ​ सरल परिभाषा: किसी एक देश की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति का विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति के साथ जुड़ाव या एकीकरण होना ही वैश्वीकरण कहलाता है। बहुआयामी अवधारणा: वैश्वीकरण केवल एक आर्थिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक बहुआयामी (Multi-dimensional) अवधारणा है, जिसके आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आयाम होते हैं। प्रवाह (Flows) का सिद्धांत: वैश्वीकरण का मूल तत्व 'प्रवाह' है। यह प्रवाह मुख्य रूप से चार रूपों में होता है: विचारों का प्रवाह: एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचारों और दर्शन का पहुंचना। पूँजी का प्रवाह: एक देश से दूसरे देश में धन या निवेश (Investment) का जाना। वस्तुओं का प्रवाह: देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और सामानों का आयात-निर्यात होना। लोगों का प्रवाह: बेहतर रोज़गार, शिक्षा या जीवन स्तर के लिए लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना। 2...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 8 नोट्स: पर्यावरण और संसाधन

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 8: पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. पर्यावरण वैश्विक राजनीति का हिस्सा क्यों बन गया? ​ पृष्ठभूमि: लंबे समय तक पर्यावरण को केवल भूगोल या विज्ञान का विषय माना जाता था। लेकिन 20वीं सदी के उत्तरार्ध से यह अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का एक मुख्य मुद्दा बन गया। राजनीतिक मुद्दा बनने के कारण (वैश्विक चिंताएं): कृषि भूमि में कमी: दुनिया भर में उपजाऊ और कृषि योग्य भूमि का आकार घट रहा है, जबकि मिट्टी की उत्पादकता कम हो रही है। पेयजल संकट: दुनिया के एक बड़े हिस्से में स्वच्छ पीने के पानी की भारी कमी हो रही है, जिससे भविष्य में जल-युद्ध (Water Wars) की आशंका जताई जा रही है। वनों की कटाई (Deforestation): जैव-विविधता (Biodiversity) का मुख्य आधार माने जाने वाले वर्षावनों को तेजी से काटा जा रहा है, जिससे अनेक प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। ओजोन परत का ह्रास (Ozone Depletion): पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद ओजोन परत (जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी कि...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 6 नोट्स: अंतर्राष्ट्रीय संगठन

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या हैं और इनकी आवश्यकता क्यों है? ​ परिभाषा: ऐसे संगठन जिनका कार्यक्षेत्र, सदस्यता और प्रभाव किसी एक देश तक सीमित न होकर पूरी दुनिया में होता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगठन कहा जाता है। आवश्यकता क्यों है? (बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण): युद्ध और शांति के मामलों में: कोई भी अकेला देश युद्ध को रोक नहीं सकता। ये संगठन देशों के बीच युद्ध को टालने और शांति स्थापित करने में मदद करते हैं। वैश्विक समस्याओं का समाधान: कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनसे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता (जैसे- ग्लोबल वार्मिंग, महामारी, आतंकवाद और परमाणु प्रसार)। इनके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। विवादों का शांतिपूर्ण समाधान: विभिन्न देशों के बीच सीमा, नदी जल या व्यापारिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए एक साझा मंच प्रदान करते हैं। चर्चिल का प्रसिद्ध कथन: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री वि...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 5 नोट्स: समकालीन दक्षिण एशिया

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. दक्षिण एशिया क्या है? (What is South Asia?) ​ भौगोलिक स्थिति: दक्षिण एशिया विश्व का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो प्राकृतिक रूप से चारों तरफ से घिरा हुआ है: उत्तर में: हिमालय पर्वत श्रृंखला। दक्षिण में: हिन्द महासागर। पूर्व में: बंगाल की खाड़ी। पश्चिम में: अरब सागर। शामिल देश: दक्षिण एशिया में मुख्य रूप से 7 देश शामिल हैं — भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव । अपवाद/विस्तार: अब अफगानिस्तान को भी दक्षिण एशिया का हिस्सा माना जाता है (वह 2007 में सार्क का सदस्य बना)। म्यांमार और चीन इस क्षेत्र के अंग नहीं हैं, हालांकि चीन का प्रभाव यहाँ महसूस किया जाता है। विविधता: इस क्षेत्र में भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता बहुत अधिक है, लेकिन इसके बावजूद यह क्षेत्र एक विशिष्ट भू-राजनीतिक पहचान रखता है। 2. दक्षिण एशिया के देशों की राजनीतिक प्रणाली ​ दक्षिण एशिया के देशों में शासन का कोई एक ...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 4 नोट्स: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 4: सत्ता के नए / वैकल्पिक केंद्र (New Centres of Power) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' का क्या अर्थ है? ​ परिभाषा: 1990 के दशक के शुरुआती सालों में सोवियत संघ के टूटने और अमेरिकी वर्चस्व (एक-ध्रुवीय विश्व) के उभरने के बाद, दुनिया में कुछ ऐसे संगठन और देश सामने आए जो अमेरिका की मनमानी पर अंकुश लगा सकते थे। इन्हीं राजनीतिक और आर्थिक शक्ति के रूपों को 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' कहा जाता है। मुख्य केंद्र: इसके अंतर्गत यूरोपीय संघ (EU) , आसियान (ASEAN) , ब्रिक्स (BRICS) जैसे क्षेत्रीय संगठनों तथा चीन , जापान , इजराइल और भारत जैसे शक्तिशाली देशों का अध्ययन किया जाता है। 2. यूरोपीय संघ (European Union - EU) ​ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। अमेरिका ने यूरोप के पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ी योजना शुरू की जिसे 'मार्शल योजना' (Marshall Plan) कहा जाता है। इसी योजना के तहत 1948 में 'यूरोपीय आ...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 3 नोट्स: समकालीन विश्व

1. वर्चस्व (Hegemony) का क्या अर्थ है? ​ परिभाषा: अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में जब कोई एक देश इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से पूरी दुनिया को प्रभावित या नियंत्रित करने लगता है, तो इस स्थिति को 'वर्चस्व' (Hegemony) कहा जाता है। शुरुआत: 1991 में सोवियत संघ (USSR) के विघटन के बाद दो-ध्रुवीय विश्व समाप्त हो गया और एक-ध्रुवीय विश्व (Unipolar World) का उदय हुआ, जिसका नेतृत्व अमेरिका कर रहा था। 2. नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत (The New World Order) ​ प्रथम खाड़ी युद्ध (First Gulf War - 1990-1991): कारण: अगस्त 1990 में इराक ने अपने पड़ोसी देश कुवैत पर आक्रमण कर उस पर अवैध कब्जा कर लिया। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कुवैत को मुक्त कराने के लिए बल प्रयोग की अनुमति दी। ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (Operation Desert Storm): अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (सीनियर) ने इस सैन्य अभियान का स्वागत करते हुए इसे 'नई विश्व व्यवस्था' कहा। सैन्य बल: 34 देशों की मिली-जुली सेना (6,600,000 सैनिक) ने इराक के खिलाफ युद्ध लड़ा। इस सेना में लगभग 75% सैनिक केवल अमे...
By Guddu Kumar

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 2 नोट्स: दो ध्रुवीयता का अंत

कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति ​ अध्याय 2: दो-ध्रुवीयता का अंत (The End of Bipolarity) ​ [CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स] ​ 1. सोवियत प्रणाली क्या थी? (What was the Soviet System?) ​ पृष्ठभूमि: रूस में 1917 की समाजवादी क्रांति (Socialist Revolution) के बाद सोवियत संघ (USSR - Union of Soviet Socialist Republics) अस्तित्व में आया। यह क्रांति पूंजीवाद के विरोध में और समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी। सोवियत प्रणाली की मुख्य विशेषताएं: एक दलीय व्यवस्था: शासन पर केवल कम्युनिस्ट पार्टी का पूरा नियंत्रण था। किसी भी अन्य राजनीतिक दल या विपक्ष को अनुमति नहीं थी। राज्य का नियंत्रण: भूमि, कारखानों और उत्पादन के सभी साधनों पर पूरी तरह से राज्य (सरकार) का स्वामित्व था। नियोजित अर्थव्यवस्था: अर्थव्यवस्था बाजार के भरोसे नहीं थी, बल्कि सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से चलाई जाती थी। बुनियादी सुविधाएं: सरकार ने अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल और लोक-कल्याण की बुनियादी ज़रूरतें बहुत कम (रियायती) दरों पर सुनिश्चित की थीं। बेरोजग...
By Guddu Kumar

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