
तरंग
1. सरल आवर्त गति
- आवर्त गति (Periodic Motion) : एक निश्चित पथ पर गति करती वस्तु जब एक निश्चित समय-अन्तराल के पश्चात् बार-बार अपनी पूर्व गति को दोहराती है, तो इस प्रकार की गति को आवर्त गति कहते हैं ।
- दोलन गति (Oscillatory Motion): किसी पिंड की साम्य स्थिति के इधर-उधर गति करने को दोलन अथवा काम्पनि क गति कहते हैं ।
- एक दोढन या एक कम्पन : दोलन करने वाले कण का अपनी साम्य स्थिति के एक ओर जाना फिर साम्य स्थिति में आकर दूसरी ओर जाना और पुनः साम्य स्थिति में वापस लौटना, एक दोलन या कम्पन कहललाता है ।
- आवर्तकाल (Time Period) : एक दोलन पूरा करने के समय को आवर्तकाल कहते है।
- आवृति (Frequency) : कम्पन करने वाली वस्तु एक सेकेण्ड में जितना कम्पन करती है, उसे उसकी आवृत्ति कहते हैं। इसका S.I. मात्रक हरटर्ज (Hertz) होता है । यदि आवृति n तथा आवर्तकाल T हो, तो n =
होता है । - सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) : यदि कोई वस्तु एक सरल रेखा पर मध्यमान स्थिति (Mean Position) के इधर-उधर इस प्रकार की गति करे कि वस्तु का त्वरण मध्यमान स्थि ति से वस्तु के वि स्थापन के अनुक्रमानुपाती हो तथा त्वरण की दिशा मध्यमान स्थि ति की और हो, तो उसकी गति सरल आवर्त गति कहलाती है।
2. ध्वनि तरंग
- ध्वनि तरंग अनुदैर्घ्य यांत्रि क तरंगें होती हैं।
- जिन यांत्रिक तरंगों की आवृति 20 Hz से 20000 Hz के बीच होती है, उनकी अनुभूति हमें अपने कानों के द्वारा होती है, और इन्हें हम ध्वनि के नाम से पुकारते हैं।
- ध्वनि तरंगों का आवृति परिसर
- अवश्रव्य तरंगें (nfrasonic Waves): 20 Hz से नीचे की आवृति वाळली ध्वनि तरंगों को "अवश्रव्य तरंगें" कहते हैं । इसे हमारा कान सुन नहीं सकता है।इस प्रकार की तरंगों को बहुत बड़े आकार के स्रोतों से उत्पन्न कि या जा सकता है ।
- श्रव्य तरंगें (Audible Waves): 20 Hz से 20,000 Hz के बीच की आवृति वाली तरंगों को "श्रव्य तरंग" कहते हैं। इन तरंगों को हमारा कान सुन सकता है ।
- पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Wave): 20,000 Hz से ऊपर की आवृति वाली तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहा जाता है । मनुष्य के कान इसे नहीं सुन सकता है । परन्तु कुछ जानवर जैसे–कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ आदि, इसे सुन सकते हैं । इन तरंगों को गाल्टन की सीटी के द्वारा तथा दाब विद्युत् प्रभाव की विधि द्वारा क्वाट्र्ज के क्रिस्टल के कम्पनों से उत्पन्न करते हैं। इन तरंगों की आवृति बहुत ऊँची होने के कारण इसमें बहुत अधिक ऊर्जा होती है । साथ ही इनका तरंगदैर्घ्य छोटी होने के कारण इन्हें एक पतले कि रण-पुंज के रूप में बहुत दूर तक भेजा जा सकता है। उपयोग - (i) संकेत भेजने में (ii) समुद्र की गहराई का पता लगाने में (iii) कीमती कपड़ों, वायुयान तथा घड़ियों के पुर्जों को साफ करने में (iv) कल-कारखानों की चिमनियों से कालिख हटाने में (v) दूध के अन्दर के हानि कारक जीवाणुओं को नष्ट करने में (vi) गठि या रोग के उपचार एवं मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने में ।
- विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल भि न्न-भि न्न होती है। कि सी माध्यम में ध्वनि की चाल मुख्यतः माध्यम की प्रत्यास्थता तथा घनत्व पर निर्भर करती है।
- ध्वनि की चाळ सबसे अधिक ठोस में, उसके बाद द्रव में और उसके बाद गैस में होती है ।
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