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BSEB Class 9 Science Chapter 15 Notes: खाद्य संसाधनों में सुधार

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Notes

हमारे देश की अधि कांश जनसंख्या अपने जीवनयापन के लि ए कृषि पर नि र्भर करती है।

संपूषणीय जीवनयापन के लि ए मि श्रि त खेती, अंतराफसलीकरण तथा संघटि त कृषि - प्रणालि याँ अपनानी चाहि ए । पौधे सूर्य के प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं । कुछ ऐसी फसलें हैं, जि न्हें हम वर्षा ऋतु में उगाते हैं, खरीफ फसल कहते हैं। धान सोयाबीन, अरहर, मक्का, मूँग तथा उड़द खरीफ फसलें हैं । कुछ फसलें शीतकऋतु में उगायी जाती हैं, जो नवम्बर से अप्रैल माह तक में होती है । इन फसलों को रबी फसल कहते हैं । गेहूँ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी रबी फसलें हैं। भारत में सन्‌1960 से सन्‌2004 तक कृषि -भूमि की पैदावार में चारगुनी वृद्धि हुई है । में 25% की वृद्धि हुई है, जबकि अन्न खाद बनाने में हम जैवि क कचरे का उपयोग करते हैं । फसल के लि ए पोषकों के मुख्य सोत खाद तथा उर्वरक हैं । कुशल फसलीकरण पद्धति आवश्यक हैं । के लि ए मि श्रि त खेती, अंतरफसलीकरण तथा फसल-चक्र मि श्रि त फसल में दो अथवा दो से अधि क फसलों को एकसाथ एक ही खे त में उगाते 1 एक वि शेष फॉर्म में फसल-उत्पादन तथ पशुपालन आदि मि श्रि त खेती-तंत्र कहते हैं। में बढ़ावा देनेवाली खेती को दो या दो से अधि क फसलों को नि श्चि त कतार-पैरटर्न में उगाने को अंतराफसलीकरण कहते हैं । एक ही खेत में वि भि न्न फसलों को पूर्व नि योजि त अनुक्रम में उगाएँ, तो उसे फसल- चक्र कहते हैं । समुद्र तथा अंतः:स्थली स्रोतों से मछलि याँ प्राप्त कर सकते हैं । मधुमक्खी पालन मधु तथा मोम को प्राप्त करने के लि ए कि या जाता है। फार्म पशुओं के लि ए उचि त देखभाल तथा प्रबंधन; जैसे–आवास, आहार, जनन तथा रोगों पर नि यंत्रण की आवश्यकता होती है । इसे पशुपालन कहते हैं ।

फसल उत्पादन में उन्नति

मुख्य स्रोत और पोषक तत्व

  • अनाज (गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार): ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट)
  • दालें (चना, मटर, उड़द, मूँग, अरहर, मसूर): प्रोटीन
  • तेल वाले बीज (सोयाबीन, मूँगफली, तिल, अरंड, सरसों, अलसी, सूरजमुखी): वसा
  • सब्जियाँ, मसाले, फल: विटामिन, खनिज, कुछ प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट
  • चारा फसलें (वर्सीम, जई, सूडान घास): पशु चारा

फसलों की वृद्धि पर प्रभावी पर्यावासीय कारक

  • जलवायु, तापमान, दीप्तिकाल (photoperiod) — पुष्पन और वृद्धि सूर्य-प्रकाश पर निर्भर

फसल मौसम (भारत के सन्दर्भ में)

  • खरीफ: वर्षा ऋतु (जून — अक्टूबर) — उदाहरण: धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, मूँग, उड़द
  • रबी: शीत ऋतु (नवंबर — अप्रैल) — उदाहरण: गेहूँ, चना, मटर, सरसों, अलसी

कृषि उत्पादन में वृद्धि (1952–2010, भारत)

  • कृषि भूमि में ~25% वृद्धि; अनाज पैदावार में ~4 गुना वृद्धि

फसल उत्पादन में उन्नति के तीन चरण (व्यवस्थात्मक दृष्टि)

  1. बीज का चयन (फसल की किस्मों में सुधार)
  2. फसल की उचित देखभाल (फसल-उत्पादन प्रबंधन)
  3. फसल सुरक्षा व कटाई के बाद संरक्षण (फसल सुरक्षा प्रबंधन)

उन्नति के प्रमुख वर्ग (संक्षेप)

  • फसल किस्मों में सुधार: उन्नत/हाइब्रिड/बीज उपचार, रोग-प्रतिरोधी व अधिक उपज देने वाली किस्में
  • फसल-उत्पादन प्रबंधन: बुआई समय, उचित सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन (उर्वरक), पारगमन/कटाई तकनीकें, आदर्श कृषि अभ्यास
  • फसल सुरक्षा प्रबंधन: कीट, रोग व खरपतवार नियंत्रण; भंडारण और पोस्ट-हार्वेस्ट हानि कम करना

फसल की किस्मों में सुधार (मुख्य बिंदु)

  • उद्देश्य: फसलों की उपज, गुणवत्ता और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उत्पादन स्थिर व अधिक करना।
  • मुख्य विधियाँ:
    • संकरण (hybridization): अंतराकिस्मीय, अंतरास्पीशीज या अंतरावंशीय संकरण से इच्छित जातीय गुण जोड़े जाते हैं।
    • जीन प्रविष्टि (genetic modification): विशिष्ट गुण सीधे जीन स्तर पर डाले जाते हैं (जीएम फसलें)।
  • नए प्रभेद अपनाने से पहले: विभिन्न क्षेत्रों/परिस्थितियों में परीक्षण आवश्यक; उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज उपलब्ध होने चाहिए।
  • सुधार के प्रमुख लक्ष्यों/गुण:
    1. उच्च उत्पादन — प्रति एकड़ उपज बढ़ाना।
    2. बेहतर उत्पादन गुणवत्ता — दालों में प्रोटीन, तिलहन में तेल आदि की गुणवत्ता।
    3. जीववैज्ञानिक व अजैविक प्रतिरोधकता — रोग, कीट, निमेटोड; तथा सूखा, क्षारता, जलाक्रांति, गर्मी, ठंड, पाला इत्यादि सहने की क्षमता।
    4. परिपक्वन काल में कमी — जल्दी पकने वाली किस्में, अधिक फसल चक्र व कम लागत।
    5. व्यापक अनुकूलता — विविध जलवायु व मिट्टी में स्थिर प्रदर्शन।
    6. वांछित सस्य-विज्ञान गुण — चारे हेतु घना व लम्बा वृक्ष, अनाज हेतु बौने पौधे इत्यादि (कृषि प्रबंधन में लाभकारी)।

यदि आप चाहें तो मैं:

  • किसी विशेष फसल (जैसे गेहूँ/धान/मक्का/सोयाबीन) के लिए किस्म सुधार के तरीकों पर विस्तृत निर्देश दे सकता/सकती हूँ, या
  • किस्म विकास में इस्तेमाल होने वाली प्रजनन तकनीकें (backcrossing, pedigree, recurrent selection, marker-assisted selection) और उनके लाभ/सीमाएँ स्पष्ट कर सकता/सकती हूँ।

फसल उत्पादन प्रबंधन (मुख्य बिंदु)

  1. उत्पादन प्रणालियाँ और लागत
  • किसान भिन्न संसाधन (भूमि, धन, सूचना, तकनीक) के अनुसार अलग–अलग उत्पादन प्रणालियाँ अपनाते हैं: बिना लागत, अल्प लागत, अधिक लागत।
  • निवेश और उत्पादन में सहसंबंध है — अधिक निवेश से उच्च उत्पादन की संभावना बढ़ती है।
  1. पोषक प्रबंधन
  • पौधों को पोषक हवा (C, O), पानी (H, O) व मिट्टी से अन्य तत्व मिलते हैं। मिट्टी से मिलने वाले प्रमुख पोषक:
    • वृहत्-पोषक: N, P, K, Ca, Mg, S
    • सूक्ष्म-पोषक: Fe, Mn, B, Zn, Cu, Mo, Cl
  • खाद (ऑर्गेनिक): कंपोस्ट/वर्मी-कंपोस्ट व हरी खाद मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ व पोषक बढ़ाती हैं; मिट्टी की संरचना व जलधारण क्षमता में सुधार करती हैं।
  • उर्वरक (इनॉर्गेनिक): तेज़ वृद्धि व अधिक उपज दिलाते हैं पर महँगे हैं और अनुचित प्रयोग से मिट्टी उर्वरता घटती है तथा जल प्रदूषण हो सकता है।
  • संतुलन आवश्यक: उर्वरक की सही मात्रा, सही समय व सिंचाई-संयोजन लागू करें; कार्बनिक पदार्थों की नियमित पूर्ति जरूरी।
  • कार्बनिक खेती: रासायनिक प्रतिरोधक/उर्वरक कम/न के बराबर; जैविक खाद, फसल चक्रीकरण, अंतर-फसलीकरण, जैव-कीटनाशक प्रयोग।
  1. सिंचाई
  • भारत की अधिकांश कृषि मानसून-आधारित; अनियमित वर्षा सूखा और उपज घटने का कारण बनता है।
  • सिंचाई स्रोत: खुदे कुएँ, नलकूप, नहरें, नदी से जल उठाव, तालाब/छोटे जलाशय।
  • जल सरंक्षण व प्रबंधन (वर्षा जल संचय, छोटे बाँध, जल विभाजन) से जलस्तर बढ़ता है और मृदा अपरदन घटता है।
  • सूखे-प्रतिरोधी किस्में व सिंचाई के उन्नत तरीके सूखे के प्रभाव को कम करते हैं।
  1. फसल पैटर्न (उद्यमशीलता व जोखिम-नियंत्रण)
  • मिश्रित फसल: एक ही खेत में 2+ फसलें; जोखिम विभाजन और फसल की स्थिरता।
  • अंतराफसलीकरण (row intercropping): पंक्तिबद्ध पैटर्न में अलग फसलें; पोषक उपयोग का अनुकूलन और रोग/कीट के प्रसार को रोकना।
  • फसल चक्र (crop rotation): ऋतुओं व परिपक्वन काल के अनुरूप क्रमवार फसलें उगाना; मिट्टी की सेहत और पोषक संतुलन बनाए रखना; वर्ष में 2–3 फसलों तक उत्पादन बढ़ाना संभव।

यदि आप चाहें तो मैं किसी एक उपविभाग (उदाहरण: उर्वरक खुराक निर्धारण, सिंचाई शेड्यूल, या किसी फसल के लिए उपयुक्त अंतराफसलीकरण/फसल चक्र का उदाहरण) पर विस्तृत, चरण-दर-चरण योजना दे दूँ।

फसल सुरक्षा प्रबंधन

संक्षेप — फसल सुरक्षा प्रबंधन (मुख्य बिंदु)

  1. खतरे और प्रभाव
  • प्रमुख शत्रु: खर-पतवार, कीट-पीडक, रोगजनक (बैक्टीरिया, कवक, वायरस), भंडारण में कीट/कृंतक/कवक।
  • प्रभाव: पौधे से पोषक, स्थान व प्रकाश की प्रतिस्पर्धा; पत्तियाँ/तने/मूल क्षतिग्रस्त; रस चूसना; फल/बीज में छेद; उपज एवं गुणवत्ता में कमी; भंडारण में वजन, अंकुरण क्षमता व मूल्य घटाना।
  1. खर-पतवार नियंत्रण
  • प्रारम्भिक हटाना: रोपण के शुरुआती चरण में निकालें—प्रतियोगिता कम होती है।
  • यांत्रिक विधि: दरौपण, नालियाँ/क्यारियाँ, हाथ से हटाना, हल चालन (ग्रीष्म में गहराई से)।
  • कृषिगत निरोधक: समय पर बुआई, अंतराफसलीकरण, मिश्रित फसल व फसल चक्र — खरपतवार के प्रसार और प्रतिकूल प्रभाव घटते हैं।
  • रासायनिक नियंत्रण: शाकनाशी (herbicides) आवश्यकतानुसार—परंतु अनुशासित उपयोग ताकि पर्यावरण व लाभप्राणी प्रभावित न हों।
  • ऑर्गेनिक/प्रवर्तनात्मक: ढकने वाली फसल, मल्चिंग, जैविक उपाय आदि।
  1. कीट-पीडक और रोग नियंत्रण
  • रोकथाम: रोग-प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग; स्वस्थ बीज; खेत की स्वच्छता और बचे हुए पादप अवशेष को नष्ट करना।
  • जैविक नियंत्रण: नेचुरल शिकारी/परजीवी, बैक्टीरियल/फंगी जैव-नियंत्रक, पीषक-प्रेरित (pheromone) ट्रैप इत्यादि।
  • रासायनिक नियंत्रण: कीटनाशक/कवकनाशक का लक्ष्यनिष्ठ, नियमानुसार और न्यूनतम प्रभाव वाले उत्पादों का उपयोग; लागू समय और खुराक का पालन।
  • कृषि प्रबंधन: अंतराफसलीकरण, मिश्रित फसल, फसल चक्र और उपयुक्त पौध-घनत्व से रोग व कीट के प्रसार को सीमित करें।
  • कृषि-संवेधन (IPM): निरीक्षण, थ्रेसहोल्ड निर्धारित कर तभी रासायनिक उपचार; संयोजन—जैविक, सांस्कृतिक, यांत्रिक व रासायनिक उपाय।
  1. भंडारण प्रबंधन (अनाज व कृषि उत्पाद)
  • नुकसान के कारण: जैविक (कीट, कृंतक, कवक, चिंचड़ी, जीवाणु) तथा अजैविक (अत्यधिक नमी/उचित ताप का अभाव)।
  • तैयारी: कटाई के बाद अच्छी तरह सुखाना (पहले सूर्य में, फिर छाया), सफाई और नमी नियंत्रित करना।
  • रोकथाम: भंडारण से पहले धूमक (fumigation) तथा आवश्यक उपचार; साफ-सुथरे, सूखे और कीट-रहित गोदाम।
  • निगरानी: गोदाम में नियमित निरीक्षण; नमी/तापमान नियंत्रण; उपयुक्त पैकेजिंग व सिल-बंद भंडारण।
  • जैविक विकल्प: नीम या अन्य प्राकृतिक धूमक/अवरोधक; कंटेनर-सुक्षा व स्वच्छता बढ़ाना।
  1. व्यावहारिक सिफारिशें (फार्म-स्तर पर)
  • निरिक्षण-आधारित निर्णय लें: नियमित फील्ड सर्वे और ध्यान देकर समस्या पहचानें।
  • प्राथमिक रोकथाम पर जोर: स्वच्छता, प्रतिरोधक किस्में, विविधीकरण (इंटरक्रॉप/फसल चक्र)।
  • IPM अपनाएँ: यांत्रिक/जीववैज्ञानिक उपाय पहले; रासायनिक केवल आवश्यकता पर और निर्देशानुसार।
  • कटाई के बाद त्वरित सुखाना व सही भंडारण—भंडारण हानियों को बहुत घटाता है।
  • किसान शिक्षा व प्रमाणित उपायों/उत्पादों का उपयोग सुनिश्चित करें।

यदि आप चाहें तो मैं किसी एक भाग पर विस्तृत कार्ययोजना दे सकता/सकती हूँ — उदाहरण: किसी विशेष फसल के लिए IPM चरण-दर-चरण, भंडारण के लिए ताप/नमी मानक व कंटेनर डिज़ाइन, या स्थानीय खरपतवार/कीट की पहचान व नियंत्रण सूची।

पशुपालन और संबंधित प्रणालीयाँ (मुख्य बिंदु)

  1. परिभाषा व लक्ष्य
  • पशुपालन = पशुधन का समग्र प्रबंधन (आहार, प्रजनन, स्वास्थ्य, आवास) ताकि दूध, मांस, अंडा, कार्यशक्ति व अन्य उत्पाद की मात्रा व गुणवत्ता बढ़े।
  1. पशु उत्पादों का पोषण संकेत (सारांश)
  • दूध (गाय): ~3.6% वसा, 4% प्रोटीन, 4.5% शर्करा, ≈87% जल; विटामिन B1, B2, B12, D, E।
  • अंडा: ≈12% वसा, 13% प्रोटीन, ≈74% जल; विटामिन B2, D।
  • मांस: ≈3.6% वसा, 21% प्रोटीन, ≈74% जल; विटामिन B2, B12।
  • मछली: ≈2.5% वसा, 19% प्रोटीन, ≈77% जल; नियासीन इत्यादि।
  1. पशु कृषि (उद्देश्य व नस्ल)
  • उद्देश्य: दुग्ध-उत्पादन व कृषि कार्य (ड्राफ्ट)। प्रमुख भारतीय स्पीशीज़: गाय (Bos indicus), भैंस (Bos bubalis)।
  • दुग्धोत्पादन बढ़ाने हेतु: दुग्धस्रावण अवधि बढ़ाना; विदेशी नस्ल (जर्सी, ब्राउन स्विस) उच्च उत्पादन, देसी नस्लें (रेड सिन्धी, साहीवाल) रोग-प्रतिरोधी; क्रॉसब्रेडिंग से दोनों लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
  1. कुक्कुट पालन (अंडे व ब्रॉलर)
  • ब्रॉलर: तेज वृद्धि व उच्च आहार दक्षता के लिए उच्च प्रोटीन व वसा वाले आहार, विटामिन (A, K) आवश्यक; आवास—उचित ताप व स्वच्छता; रोग नियंत्रण व टीकाकरण अनिवार्य।
  • लेयर (अंडे देने वाले): प्रकाश प्रबंधन, पोषण संतुलन, संचित रोग-प्रबंधन।
  • प्रबंधन हेतु: उचित आवास, ताप-नियंत्रण, पोषण तालिका, रोग-निगरानी व जैवसुरक्षा अपनाएँ।
  1. मत्स्य उत्पादन (मछली पालन)
  • दो स्रोत: प्राकृतिक (पकड़ना) व संवर्धन (aquaculture)।
  • समुद्री मत्स्यकी: प्रमुख मछलियाँ (पॉमफ्रेट, मैकेरल, टुना, सार्डिन इत्यादि); मेरीकल्चर से स्टॉक बढ़ाना।
  • अंतःस्थली (फ़्रेशवाटर) मत्स्यकी: तालाब/पोखर/नाले; मिश्रित संवेधन (poly-culture) — विभिन्न स्पीशीज़ जिनके आहार भिन्न हों, तालाब के संसाधन का अधिकतम उपयोग।
  • समस्याएँ व समाधान: गुणवत्ता वाले डिंभ की उपलब्धता, प्रजनन का नियंत्रण (हॉर्मोन)।
  1. मधुमक्खी पालन
  • शहद उत्पादन व मोम के लिए लाभकारी; कम पूँजी में आरंभ। प्रमुख प्रजातियाँ: Apis indica, Apis dorsata, Apis florea; व व्यावसायिक रूप से Apis mellifera (इटली-मक्खी) उपयोगी।
  • अच्छा प्रबंधन: उपयुक्त मधुवाटिका, चरागाह की उपलब्धता, रोग/परजीवी नियंत्रण व सही निष्कर्षण तकनीक।
  1. सामान्य प्रबंधन सुझाव (सभी प्रजातियों पर लागू)
  • पोषण: संतुलित आहार, स्वच्छ जल, पोषक तत्वों का अनुपात लक्षित उत्पादन के अनुरूप रखें।
  • स्वास्थ्य: नियमित टीकाकरण, रोग-निगरानी, परजीवी नियंत्रण, जैवसुरक्षा और स्वच्छता।
  • प्रजनन: उद्देश्य (दूध/मांस/उत्पादन) के अनुसार नस्ल चयन और योजनाबद्ध ब्रीडिंग।
  • कल्याण व आवास: पर्यावरणीय अनुकूल आवास, आरामदायक तापमान, उचित रोशनी व जगह।
  • बाजार व आर्थिक पक्ष: लागत-अनुकूल तकनीक (छोटे व बड़े पैमाने दोनों के लिए), विविधीकरण (एक से अधिक उत्पाद) व मूल्य वर्धन (प्रसंस्करण, भंडारण) पर ध्यान दें।

यदि आप चाहें तो बताइए — किस पशु (गाय/भैंस/मुर्गी/ब्रॉलर/मछली/मधुमक्खी) पर आप विस्तृत पोषण तालिका, टीकाकरण शेड्यूल या फार्म-स्तर पर चरण-दर-चरण प्रबंधन योजना चाहते हैं।

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1. प्राकृत संख्याएँ ​ 2. पूर्ण संख्याएँ 3. गुणनखंड और गुणज​ 1. प्राकृत संख्याएँ ​ ​ प्रश्‍न 1 ​ 6 अंकों की कुल संख्याएँ: 9,00,000 (नौ लाख) सबसे बड़ी संख्या: 9,99,999 सबसे छोटी संख्या: 1,00,000 प्रश्‍न 2 ​ 4, 7, 5, 0 से बनी संख्याएँ: सबसे बड़ी संख्या: 7,540 सबसे छोटी संख्या: 4,057 प्रश्‍न 3 ​ 2, 0, 4, 7, 6, 5 से बनी संख्याएँ और उनका योग: सबसे बड़ी संख्या: 7,65,420 सबसे छोटी संख्या: 2,04,567 योग: 9,69,987 प्रश्‍न 4 ​ 4, 5, 6, 0, 7, 8 से बनी 5 संख्याएँ: 4,56,078; 8,76,540; 5,04,678; 7,80,456; 6,54,780 प्रश्‍न 5 ​ 4, 5, 6, 7, 8, 9 से 8 अंकों की 3 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 9,98,76,544 4,45,67,899 8,87,76,544 प्रश्‍न 6 ​ 3, 0, 4 से 6 अंकों की 5 संख्याएँ (अंक दोहराते हुए): 3,00,044; 4,33,000; 3,40,340; 4,00,433; 3,33,440 प्रश्‍न 7 ​ 8 अंकों की सबसे छोटी संख्या से अगली 5 संख्याएँ (आरोही क्रम): 1,00,00,000 (एक करोड़) 1,00,00,001 (एक करोड़ एक) 1,00,00,002 (एक करोड़ दो) 1,00,00,003 (एक करोड़ तीन) 1,00,00,004 (एक करोड़ चार) 1,00,00,005 (एक करोड़ पाँच) प्रश्‍न 8 ​ तुलना और क्रम: सबसे छोटी संख्या:...
By Guddu Kumar

120+ पर्यायवाची शब्द लिस्ट: Paryayvachi Shabd in Hindi

पर्यायवाची शब्द ​ पर्यायवाची शब्द ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– अभ्यास Conclusion किसी शब्द के समान अर्थवाले अन्य शब्दों को पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसे - आँख के बदले नेत्र, नयन, लोचन आदि शब्द पर्यायवाची शब्द कहे जाते हैं । हिन्दी में अधिकतर शाब्द ऐसे हैं जिनके बदले बहत से शब्द प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है– ​ अंग : अंश, अवयव, खंड, भाग, विभाग, हिस्सा । अंधकार : अँधियारा, अँधेरा, तम, तमिस्र, तिमिर, ध्वांत। अदरक : अनूपज, अपाकशाक, आदी, आर्द्रशाक, कटुभद्र । अनुपम : अतुल्य, अद्वितीय, अदभुत, अनूठा, अनोखा, अपूर्व । अपमान : अनादर, अवज्ञा, अवमान, अवमानना, अवहेलना, तिरस्कार । अभिमान : अहं, अहंकार, अहंभाव, गर्व, घमंड, दर्प, दंभ, मद । अमृत : अमी, अमिय, पीयूष, मधु, सुधा, सोम । अर्जुन : गांडीवधर, गांडीवी, पांडुनन्दन, पांडुपुत्र, पार्थ, मध्यमपांडव, वृहन्नला, सव्यसाची । आँख : अंबक, अक्ष, अक्षि, ईक्षण, चश्म, चक्षु, दृक्‌, दृग्‌, दृष्टि, नजर, नयन, नेत्र, नैन,. लोचन, बिलोचन । आकाश : अंबर, अंतरिक्ष, अनंत, अभ्र, अर्श, आसमान, ख, गगन, तारापथ, दिव,...
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फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

फारेनहाइट और सेल्सियस: तापमान बदलने का आसान तरीका

Notes फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) प्रश्‍न सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) प्रश्‍न फारेनहाइट और सेल्सियस (Farenheit and Celsius) ​ वस्तु(Object) फारेनहाइट मापन (Farenheit Scale) सेल्सियस मापन (Celsius Scale) पानी का जमना 32°F 0°C पानी का ऊवलना 212°F 100°C फारेनहाइट से सेल्सियस में बदलने का सुत्र (Convert to fahrenheit to celsius) ​ °C = ((°F - 32) × 5) ÷ 9 या (or) °C = (°F - 32) × 5/9 या (or) °C = ∘ F − 32 9 × 5 प्रश्‍न ​ 75°F को सेल्सियस में बदलें। हल : °C = 75 − 32 9 × 5 = 43 9 × 5 = 23.89°C सेल्सियस से फारेनहाइट में बदलने का सुत्र (Convert to celsius to fahrenheit) ​ °F = { ( °C × 9 ) ÷ 5 } + 32 या (or) °F = ( °C × 9/5 ) + 32 या (or) °F = °C × 9 5 + 32 प्रश्‍न ​ 20°C को फारेनहाइट में बदलें। हल : °F = (20 × 9/5) + 32 = 68°F
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English Synonyms with Hindi Meaning | Daily Use Word List

1. Synonyms (पर्यायवाची शब्द ) ​ Word Hindi Meaning Synonyms Ability दक्षता/क्षमता/निपुणता skill, power, capacity Accident दुर्घटना Casualty, Mishap, Mischance Abode निवास Residence, Habitation, Dwelling place Absence अनुपस्थिति Dearth, Deficiency, Scarcity Accent दबाव/जोर Emphasis, Stress, Pitch Access पहुँच Approach,Admission, Entrance Alliance संधि/समझौता Coalition, Agreement, Treaty Ancestor पूर्वज Forefather, Predecessor, Antecedent Ancient प्राचीन Obsolete, Oldfashioned, Out of date Antipathy घृणा/अनिच्छा Hostility, Dislike, Enemity, Hate Barrier अवरोध Obstacle, Fence, Impedime Barbarian असभ्य/गँवार Savage, Illiterate, Boor Battalion सैन्य दल/ पलटन Regiment, Brigade, Company Behaviour व्यवहार/चाल ढाल Conduct, Manner, Dealing Benefit लाभ Gain, Profit, Advantage Absolute पूर्ण/शुद्ध Complete, Exact, Unconditional Abnormal असामान्य/प्रतिकूल Anomalous, Insane, Irregular Admirable प्रशसनीय Excellent, Commendable, Estimable Abundant प्रचुर Ample, plentiful, Copious Alert सतर्क Quick, P...
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