🇮🇳 पञ्चमः पाठः : भारतमहिमा 🇮🇳
(देवताओं द्वारा वंदित हमारी पावन और गौरवशाली भारत भूमि)

📖 [पाठ का परिचय / भूमिका]
अस्माकं देशं 'भारतवर्षम्' इति कथ्यते। अस्य महिमा सर्वत्र गीयते। पाठेऽस्मिन् पुराणवसाद् प्रथमा द्वितीयं च क्रमशः विष्णुपुराणात् भागवतपुराणाच्च गृहीतमस्ति। अवशिष्टानि पद्यानि अध्यक्षेण निर्मिय प्रस्तावितानि। भारतं प्रति अस्माकं भक्तिः कर्त्तव्यरूपेण वर्तते।
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: हमारे देश को 'भारतवर्ष' कहा जाता है। इसकी महिमा और गौरव का गान पूरी दुनिया में सब जगह होता है। इस पाठ में पहले दो श्लोक (पौराणिक) क्रमशः विष्णुपुराण और भागवतपुराण से लिए गए हैं। बाकी बचे श्लोक (आधुनिक) इस पुस्तक के अध्यक्ष द्वारा रचकर प्रस्तुत किए गए हैं। अपने भारत देश के प्रति सच्ची देशभक्ति रखना हम सभी नागरिकों का परम कर्तव्य (फर्ज) है।
🌟 [भाग 1: पौराणिक श्लोक - पुराणों से]
🔮 [श्लोक 1: देवताओं का मधुर गान - विष्णुपुराण]
गायन्ति देवाः किल गीतकानि, धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे।स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते, भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ॥1॥
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: स्वयं देवता भी निश्चित रूप से (किल) भारत भूमि के गीत गाते हैं और कहते हैं कि— "वे मनुष्य सचमुच बहुत भाग्यशाली (धन्य) हैं, जिनका जन्म भारत भूमि पर हुआ है।" यह भूमि स्वर्ग (स्वर्ग) और मोक्ष (अपवर्ग) का रास्ता दिखाने वाली (मार्गभूते) है। यहाँ जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं और अपने देवत्व को छोड़कर दोबारा (भूयः) मनुष्य के रूप में यहाँ जन्म लेते हैं।
🍯 [श्लोक 2: विधाता की असीम कृपा - भागवतपुराण]
अहो अमीषां किमकारि शोभनं, प्रसन्न एषां स्विदुत स्वयं हरिः।यैर्जन्म लब्धं नृषु भारताजिरे, मुकुन्दसेवौपयिकं स्पृहा ही नः ॥2॥
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: (देवता अचरज से कहते हैं—) "अरे वाह! इन मनुष्यों ने ऐसा कौन सा बहुत सुंदर (शोभनम्) काम किया है, जिससे स्वयं साक्षात भगवान हरि (विष्णु) इन पर बहुत प्रसन्न हो गए हैं? जिन लोगों ने भारत देश के आंगन (भारताजिरे) में मनुष्य के रूप में जन्म पाया है, वे भगवान मुकुंद (श्रीकृष्ण) की सेवा करने के योग्य बन जाते हैं। हमारी (देवताओं की) भी यही तीव्र इच्छा (स्पृहा) है कि काश हमें भी भारत में जन्म मिल जाए!"
🏔️ [भाग 2: आधुनिक श्लोक - आज के समय के]
🌊 [श्लोक 3: ममतामयी विशाल भारत भूमि]
इयं निर्मला वत्सला मातृभूमिः, प्रसिद्धं सदा भारतं वर्षमेतत् ।विभिन्ना जना धर्मजातिप्रभेदै-रिहैकत्वभावं वहन्तो वसन्ति ॥3॥
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: हमारी यह भारत भूमि हमेशा से पूरी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध है। यह भूमि अत्यंत साफ़-सुथरी (निर्मला) और बच्चों से प्यार करने वाली ममतामयी माता (वत्सला मातृभूमिः) के समान है। यहाँ अलग-अलग धर्मों और जातियों (धर्मजातिप्रभेदैः) के लोग बिना किसी भेदभाव के आपस में एक साथ, मिलकर भाईचारे और एकता के भाव (एकत्वभावम्) को धारण करते हुए निवास करते हैं।
🌳 [श्लोक 4: प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर]
विशालास्मदीया धरा भारतीया, सदा सेविता सागरै र्म्यरूपैः ।वनैः पर्वतै र्निर्झरै र्भव्यभूति-र्वहन्तीभिरेषा शुभाभिश्चगाभिः ॥4॥
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: हमारी यह भारतीय धरती (धरा) बहुत ही विशाल (विशाल) और वैभवशाली है। यह हमेशा सुंदर सागरों (सागरैः), घने जंगलों (वनैः), ऊंचे पहाड़ों (पर्वतैः), मीठे झरनों (निर्झरैः) और हमेशा कल्याण करने वाली पवित्र गंगा जैसी नदियों द्वारा पूजी और सींची जाती है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है।
🤝 [श्लोक 5: देशभक्ति का महामंत्र]
जगद्गौरवं भारतं शोभनीयं, सदास्माभिरेतत्तथा पूजनीयम् ।भवेद्देशभक्तिः समासां जनानां, परादर्शरूपा सदावर्जनीया ॥5॥
- 📝 सरल हिंदी अर्थ: हमारा भारत देश पूरे संसार का गौरव (जगद्गौरवं) और अत्यंत सुंदर व सुशोभित (शोभनीयम्) है। यह देश हम सभी भारतवासियों के लिए हमेशा पूजने योग्य (पूजनीयम्) है। इस देश में रहने वाले सभी मनुष्यों (जनानाम्) के मन में ऐसी श्रेष्ठ और आदर्श देशभक्ति (परादर्शरूपा देशभक्तिः) होनी चाहिए, जो दूसरों के मनों को अपनी तरफ़ खींचे और सबको आपस में जोड़े।
🎯 पाठ का मुख्य संदेश (Conclusion):
यह सुंदर पाठ हमें सिखाता है कि जिस भारत भूमि पर जन्म लेने के लिए साक्षात देवी-देवता भी तरसते हैं, उस पावन धरती पर जन्म पाना हमारे लिए बहुत बड़े सौभाग्य की बात है। हमारी नदियाँ, हमारे पहाड़ हमारी शान हैं। हमें अपनी जाति और मज़हब से ऊपर उठकर सबसे पहले अपने देश से प्रेम करना चाहिए।
📝 अभ्यास के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न (BSEB Board Special):
- प्रश्न 1. 'भारतमहिमा' पाठ के अनुसार देवता किसका गुणगान करते हैं?
- उत्तर: 'भारतमहिमा' पाठ के अनुसार देवता भारत भूमि और यहाँ जन्म लेने वाले भाग्यशाली मनुष्यों का गुणगान करते हैं।
- प्रश्न 2. भारत भूमि की क्या-क्या विशेषताएँ हैं?
- उत्तर: भारत भूमि बहुत विशाल, सुंदर, साफ़-सुथरी (निर्मला) और ममतामयी माता (वत्सला) के समान है। यह सागरों, पर्वतों, झरनों और गंगा जैसी पवित्र नदियों से हमेशा सींची जाती है।
- प्रश्न 3. इस पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?
- उत्तर: इस पाठ से हमें सीख मिलती है कि हमें अपनी मातृभूमि का सम्मान करना चाहिए। भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग एकता के साथ रहते हैं, इसलिए हमें भी आपस में भाईचारा और श्रेष्ठ देशभक्ति रखनी चाहिए।
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