🌍 अध्याय-2: भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच — संपूर्ण सारांश (Complete Summary)

📌 अध्याय का मुख्य उद्देश्य (Chapter Goal)
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य भारत के विविध भौतिक स्वरूपों (पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल और द्वीप समूह) की बनावट, उनकी भूगर्भीय उत्पत्ति (जैसे प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत) और भारत की भौगोलिक संपदा को पूरी गहराई से समझना है। 🏔️
⚡ त्वरित रिवीज़न माइंड-मैप (Quick Revision Mind-Map)
- उत्पत्ति का मुख्य सिद्धांत 🌐 ➡️ प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत (Plate Tectonics) | पृथ्वी की ऊपरी भूपर्पटी 6 बड़ी और 9 छोटी प्लेटों में विभाजित है।
- प्राचीनतम आधार भूमि 🪵 ➡️ प्रायद्वीपीय पठार (गोंडवाना लैंड का हिस्सा) | यह भारत का सबसे पुराना और स्थिर भूखंड है।
- नवीनतम संरचना ⛰️ ➡️ हिमालय पर्वतमाला (वलित पर्वत) | यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के टकराने से 'टेथिस सागर' के मलबे में मोड़ पड़ने से बना।
- भौतिक विभाजन 🗺️ ➡️ भारत को 6 मुख्य भौतिक विभागों में बाँटा गया है।
📖 अध्याय का विस्तृत सारांश (Detailed Chapter Summary)
1. 🌋 भूगर्भीय इतिहास और प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
- सिद्धांत का प्रतिपादन: प्लेट विवर्तनिक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम तुजो विल्सन (1965) ने किया, लेकिन इस सिद्धांत को डब्ल्यू० जे० मॉर्गन (1967) ने प्रतिपादित किया।
- प्लेटों की गतियाँ: प्लेटों की गतियों को तीन भागों में बाँटा गया है:
- विनाशी प्लेट सीमा (Convergent): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के करीब आती हैं।
- निर्माणकारी प्लेट सीमा (Divergent): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं।
- संरक्षी प्लेट सीमा (Transform): जब दो प्लेटें एक-दूसरे को रगड़ती हुई विपरीत दिशा में खिसकती हैं।
- पैंजिया और गोंडवाना लैंड: प्राचीन काल में पूरा भूमंडल एक ही भूखंड था जिसे पैंजिया कहते थे। इसके उत्तरी भाग को अंगारा लैंड और दक्षिणी भाग को गोंडवाना लैंड कहा जाता था, तथा इनके मध्य में टेथिस सागर था। हमारा प्रायद्वीपीय पठार इसी गोंडवाना लैंड का हिस्सा है।
2. 🗺️ भारत का 6 भौतिक विभागों में वर्गीकरण
(i) 🏔️ हिमालय पर्वत श्रेणी
- विशेषता: यह भूगर्भीय रूप से नवीन और बनावट में वलित (मोड़दार) पर्वत श्रृंखला है। यह सिन्धु और ब्रह्मपुत्र नदी के बीच लगभग 2,500 किमी की लम्बाई में एक चाप (अर्द्धवृत) के रूप में फैली है।
- तीन समानांतर श्रेणियाँ:
- महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि): सबसे ऊँची श्रेणी (औसत ऊँचाई 6,100 मीटर)। इसमें विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर, नेपाल) स्थित है। भारत का सबसे ऊँचा शिखर के-2 (गाडविन आस्टिन - 8,611 मीटर) इसके उत्तर में काराकोरम (ट्रांस हिमालय) श्रेणी में है।
- लघु या मध्य हिमालय (हिमाचल): यह स्वास्थ्यवर्द्धक पर्यटन स्थलों (जैसे- शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के घास के मैदानों को कश्मीर में मर्ग (जैसे- गुलमर्ग, सोनमर्ग) कहते हैं।
- बाहरी हिमालय (शिवालिक): यह सबसे नवीन और निचली श्रृंखला है। इसमें स्थित घाटियों को दून या द्वार (जैसे- देहरादून, हरिद्धार) कहते हैं।
- बिहार विशेष: बिहार के पश्चिमी चम्पारण में स्थित सोमेश्वर की पहाड़ियाँ इसी शिवालिक श्रृंखला का हिस्सा हैं।
- नदी घाटियों के आधार पर वर्गीकरण:
- पंजाब हिमालय: सिन्धु और सतलुज के बीच।
- कुमायूँ हिमालय: सतलुज और काली नदी के बीच।
- नेपाल हिमालय: काली और तिस्ता नदी के बीच।
- असम हिमालय: तिस्ता और दिहांग (ब्रह्मपुत्र) के बीच।
(ii) 🌾 उत्तर का विशाल मैदान
- निर्माण: यह सिन्धु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से बना है। यह विश्व का सबसे अधिक उपजाऊ और घनी आबादी वाला मैदान है।
- मिट्टी और बनावट के आधार पर 4 भाग:
- भाबर: शिवालिक के गिरिपाद में 8-16 किमी चौड़ी कंकड़-पत्थरों की पट्टी जहाँ नदियाँ लुप्त हो जाती हैं।
- तराई: भाबर के दक्षिण का वह दलदली और घने जंगलों वाला क्षेत्र जहाँ नदियाँ पुनः प्रकट होती हैं।
- बांगर: नदियों के बाढ़ क्षेत्र से ऊपर स्थित पुरानी जलोढ़ मिट्टी का मैदान।
- खादर: निचले मैदान जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का नया पानी नयी मिट्टी की परत जमा करता है (खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ)।
- नदी द्वीप: ब्रह्मपुत्र के मैदान में स्थित माजोली द्वीप विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है।
- बिहार का मैदान: बिहार का अधिकांश भाग गंगा के मैदान (उत्तरी और दक्षिणी गंगा का मैदान) में आता है। यहाँ की कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहते हैं। नए जलोढ़ वाले निम्न क्षेत्रों को स्थानीय भाषा में 'जल्ला' या 'टाल' भी कहा जाता है।
(iii) ⛰️ दक्षिण का प्रायद्वीपीय पठार
- विशेषता: यह त्रिभुजाकार आकृति वाला भारत का सबसे प्राचीन स्थिर भूखंड है जो लावा निर्मित चट्टानों से बना है।
- दो मुख्य भाग:
- मध्य उच्चभूमि: इसके अंतर्गत मालवा का पठार, बुंदेलखंड और खनिज संपदा से भरपूर छोटानागपुर का पठार आता है। छोटानागपुर की सबसे ऊँची पहाड़ी पारसनाथ (1,365 मीटर) है। अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरूशिखर (1,722 मीटर) है।
- दक्कन का पठार (दक्कन ट्रैप): यह मुख्य रूप से लावा (बेसाल्ट) से बना है।
- घाट (पर्वतीय सीमाएँ):
- पश्चिमी घाट (सहयाद्रि): यह एक सतत श्रृंखला है जिसमें थालघाट, भोरघाट और पालघाट दर्रे हैं। दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर अन्नामुडी (2,695 मीटर) इसी पर है।
- पूर्वी घाट: यह अत्यधिक कटा-छँटा है क्योंकि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ इसे काटते हुए बहती हैं।
(iv) 🌊 तटीय मैदान
- पश्चिमी तटीय मैदान: खम्भात की खाड़ी से कन्याकुमारी तक विस्तृत संकीर्ण मैदान है। इसके उत्तरी भाग को कोंकण और दक्षिणी भाग को मालावार तट कहते हैं। यहाँ की नदियाँ तीव्र गति के कारण ज्वारनदमुख (एस्चुयरी) बनाती हैं।
- पूर्वी तटीय मैदान: यह पश्चिमी तट की तुलना में अधिक चौड़ा और समतल है। इसके उत्तरी भाग को गोलकुण्डा तट और दक्षिणी भाग को कोरोमण्डल तट कहते हैं। यहाँ नदियाँ उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं।
(v) 🏜️ भारतीय मरुस्थल (थार का मरुस्थल)
- अरावली पर्वत के पश्चिम में स्थित यह एक विशाल शुष्क प्रदेश है जहाँ सालाना वर्षा 15 सेमी से भी कम होती है।
- यहाँ बालू के टीले और बरखान (अर्द्धचन्द्राकार बालू के टीले) पाए जाते हैं।
- इस क्षेत्र की एकमात्र सबसे बड़ी अन्तःप्रवाह नदी लूनी नदी है, जो कच्छ के रन में विलीन हो जाती है।
(vi) 🏝️ द्वीप समूह
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: बंगाल की खाड़ी में स्थित 572 द्वीपों का समूह जो जलमग्न पर्वतों के ऊपरी भाग हैं। इन्हें 10 डिग्री चैनल दो भागों में बाँटता है।
- लक्षद्वीप समूह: अरब सागर में स्थित प्रवाल निक्षेपों (Coral) से बना द्वीप समूह है, जिसे 11 डिग्री चैनल दो भागों में बाँटता है।
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