卐 इकाई-5: नाजीवाद (Nazism)
दो महायुद्धों के बीच यूरोपीय राजनीति में सबसे विनाशकारी बदलाव तानाशाहों का उत्कर्ष था। इटली में मुसोलनी के नेतृत्व में 'फासीवाद' और जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में 'नाजीवाद' का उदय हुआ। नाजीवाद एक ऐसी उग्र और आक्रामक विचारधारा थी, जो राष्ट्र की सर्वोपरिता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दमन और सैन्य शक्ति पर टिकी थी।
🧭 1. हिटलर के उदय और नात्सी क्रांति के कारण
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी की बदहाली ने हिटलर के उदय का रास्ता साफ किया, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
- 🏛️ वाइमर गणतंत्र (Weimar Republic) की असफलता: प्रथम विश्वयुद्ध में हार के बाद जर्मन सम्राट कैसर विलियम द्वितीय 10 नवंबर 1918 को हॉलैंड भाग गया। इसके बाद जर्मनी में गणतंत्र की स्थापना हुई, जिसका संविधान 1919 में 'वाइमर' नामक स्थान पर बना। यह कमजोर सरकार तत्कालीन संकटों को संभालने में असफल रही।
- ⚖️ वर्साय की अपमानजनक संधि (1919): मित्र राष्ट्रों ने नए वाइमर गणतंत्र पर यह अपमानजनक संधि थोप दी। जर्मनी का अंग-भंग कर दिया गया, अल्सास-लारेन क्षेत्र फ्रांस को दे दिया गया, 'सार' कोयला खदानों पर 15 वर्ष के लिए फ्रांस का कब्ज़ा हो गया और राइन नदी घाटी को सेना रहित कर दिया गया।
- 📉 भीषण आर्थिक संकट और बेरोजगारी: युद्ध के कारण जर्मनी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। कल-कारखाने बंद हो गए, व्यापार नष्ट हो गया और बेरोजगारी अपने चरम पर पहुँच गई।
- 🪙 क्षतिपूर्ति की कठोर शर्तें: जर्मनी पर 6 अरब 10 करोड़ पौंड का भारी जुर्माना लगाया गया, जिसे चुकाना खास्ताहाल जर्मनी के लिए असंभव था।
- 🚩 साम्यवाद (Communism) का बढ़ता खतरा: 1917 की रूसी क्रांति के प्रभाव से जर्मनी के उद्योगपति, पूँजीपति और जमींदार वर्ग डरे हुए थे। हिटलर ने साम्यवाद विरोधी नारा देकर इन अमीर वर्गों का समर्थन हासिल कर लिया।
🪖 2. एडोल्फ हिटलर: परिचय एवं कार्य (Introduction to Hitler)
- 👶 जन्म: एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 ई० को ऑस्ट्रिया के 'ब्रौना' नामक शहर में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन में वह चित्रकार बनना चाहता था।
- 🎖️ प्रथम विश्वयुद्ध: हिटलर जर्मनी की तरफ से लड़ा और उसकी असाधारण बहादुरी के लिए उसे 'आयरन क्रॉस' से सम्मानित किया गया था।
- 🦅 नाजी पार्टी का गठन: युद्ध के बाद वह 'जर्मन वर्कर्स पार्टी' में शामिल हुआ, जिसका नाम 1920 में बदलकर 'नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी' (नाजी पार्टी) रखा गया। धीरे-धीरे हिटलर इसका सर्वमान्य नेता (फ्यूहरर) बन गया।
- 📖 मीनकैम्फ (Mein Kampf - मेरा संघर्ष): 1923 ई० में हिटलर ने वाइमर गणतंत्र के खिलाफ एक असफल विद्रोह किया, जिसके बाद उसे जेल में डाल दिया गया। जेल में ही उसने अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा 'मीनकैम्फ' लिखी, जिसमें उसने अपने भावी तानाशाही कार्यक्रमों की रूपरेखा दी।
- 👑 सत्ता पर कब्ज़ा: 1929 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी ने हिटलर को जीवनदान दिया। उसने बेरोजगार युवाओं और मध्यम वर्ग को सुनहरे सपने दिखाए। जर्मन संसद 'राइखस्टैग' (Reichstag) के चुनावों में नाजी पार्टी की सीटें लगातार बढ़ती गईं:
- 1924: 32 सीटें ➡️ 1928: 12 सीटें ➡️ 1930: 107 सीटें ➡️ 1932: 230 सीटें।
- 🛑 तानाशाही की शुरुआत: 30 जनवरी 1933 ई० को राष्ट्रपति हिंडेनवर्ग ने हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। अगस्त 1934 में हिंडेनवर्ग की मृत्यु के बाद हिटलर ने राष्ट्रपति और चांसलर के पदों को मिलाकर खुद को जर्मनी का सर्वेसर्वा घोषित कर दिया और 'तृतीय राइख' की स्थापना की।
👁️🗨️ 3. नाजीवादी दर्शन के मुख्य सिद्धांत (Nazi Ideology)
नाजीवाद के प्रमुख वैचारिक स्तंभ निम्नलिखित थे:
- 🚫 लोकतंत्र और उदारवाद का कट्टर विरोध: सत्ता में आते ही हिटलर ने प्रेस, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया और सभी विरोधी दलों का सफाया कर दिया।
- ❌ अंतरराष्ट्रीय समाजवाद का विरोध: हिटलर मार्क्सवाद और समाजवाद का कट्टर विरोधी था, जिससे उसे ब्रिटेन और फ्रांस का परोक्ष समर्थन भी मिला।
- 🏢 सर्वसत्तावादी राज्य (Totalitarian State): इस दर्शन के अनुसार राज्य ही सब कुछ है—"राज्य के भीतर ही सब कुछ है, राज्य के बाहर और उसके विरुद्ध कुछ भी नहीं।"
- 🗣️ उग्र राष्ट्रवाद और नस्लीय श्रेष्ठता: हिटलर जर्मन (आर्य) नस्ल को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मानता था। उसने अपमान का बदला लेने के लिए पूरे देश में युद्ध का माहौल तैयार कर दिया।
- 🩸 हिंसा और सैन्य शक्ति का महिमामंडन: नाजीवाद शांति का विरोधी और युद्ध का समर्थक था। हिटलर ने आंतरिक सुरक्षा और दमन के लिए खूंखार गुप्तचर पुलिस 'गेस्टापो' (Gestapo) का गठन किया और विशेष यातना शिविर (Concentration Camps) बनवाए।
- ❌ प्रतीक चिह्न: नाजी पार्टी ने आर्यों की पवित्रता के सूचक 'स्वास्तिक' (卐) को अपने प्रतीक के रूप में अपनाया।
🌍 4. हिटलर की आक्रामक विदेश नीति (Foreign Policy)
हिटलर की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य वर्साय की संधि का बदला लेना, साम्राज्य विस्तार करना और सभी जर्मन लोगों को एक सूत्र में बांधना था. इसके लिए उसने निम्नलिखित कदम उठाए:
- 🚪 राष्ट्रसंघ से पृथक होना (1933): जेनेवा निःशस्त्रीकरण सम्मेलन की विफलता के बाद हिटलर ने 1933 ई० में 'राष्ट्रसंघ' (League of Nations) की सदस्यता छोड़ दी।
- 🛠️ वर्साय संधि को तोड़ना (1935): हिटलर ने वर्साय संधि की सैन्य पाबंदियों को धता बताते हुए जर्मनी में अनिवार्य सैनिक सेवा लागू कर दी।
- 🤝 पोलैंड और ब्रिटेन से कूटनीतिक समझौते: 1934 में पोलैंड के साथ 10 वर्षीय अनाक्रमण समझौता किया और 1935 में ब्रिटेन के साथ नौसैनिक समझौता कर अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने की छूट पा ली।
- 🔗 रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी (1936): साम्यवाद के खिलाफ जर्मनी, इटली और जापान के बीच 'कामिन्टर्न विरोधी समझौता' हुआ, जो आगे चलकर 'धुरी राष्ट्र' (Axis Powers) के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
- 🗺️ साम्राज्य विस्तार: उग्र राष्ट्रवाद के बल पर हिटलर ने 1938 ई० में ऑस्ट्रिया का विलय किया और 1939 ई० में पूरे चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया। मित्र राष्ट्र (ब्रिटेन-फ्रांस) अपनी 'तुष्टिकरण की नीति' के कारण मूकदर्शक बने रहे।
- 💥 पोलैंड पर आक्रमण और अंत: हिटलर ने पोलैंड से डान्जिंग बंदरगाह और पोलिश गलियारे की मांग की। पोलैंड के इनकार करने पर 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया, जिससे द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई।
🏁 निष्कर्ष (Conclusion)
शुरुआती आशातीत सफलताओं के बाद, मित्र राष्ट्रों की संयुक्त शक्ति के सामने हिटलर का तंत्र बिखर गया। 1945 ई० में जब सोवियत और अमेरिकी सेनाएं बर्लिन पहुँचीं, तब हिटलर ने अपने भूमिगत बंकर में आत्महत्या कर ली। इस प्रकार विश्व को एक क्रूर तानाशाह से मुक्ति मिली और भविष्य में ऐसी तबाही को रोकने तथा वैश्विक शांति के लिए 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की स्थापना की गई।
संक्षेप में, कक्षा 9 इतिहास की इकाई-5 "नाजीवाद" (Nazism) हमें जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के उदय, उसकी आक्रामक विदेश नीति और क्रूर तानाशाही के काले इतिहास से परिचित कराती है। इस अध्याय को समझकर हम यह जान सकते हैं कि कैसे लोकतांत्रिक विफलताओं ने एक विनाशकारी विचारधारा को जन्म दिया, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध का मार्ग प्रशस्त किया। आशा है कि ये विशेष नोट्स आपकी BSEB बोर्ड और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में बेहतरीन अंक लाने में मददगार साबित होंगे।
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