कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति
अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia)
[CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स]
1. दक्षिण एशिया क्या है? (What is South Asia?)
- भौगोलिक स्थिति: दक्षिण एशिया विश्व का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो प्राकृतिक रूप से चारों तरफ से घिरा हुआ है:
- उत्तर में: हिमालय पर्वत श्रृंखला।
- दक्षिण में: हिन्द महासागर।
- पूर्व में: बंगाल की खाड़ी।
- पश्चिम में: अरब सागर।
- शामिल देश: दक्षिण एशिया में मुख्य रूप से 7 देश शामिल हैं — भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव।
- अपवाद/विस्तार: अब अफगानिस्तान को भी दक्षिण एशिया का हिस्सा माना जाता है (वह 2007 में सार्क का सदस्य बना)। म्यांमार और चीन इस क्षेत्र के अंग नहीं हैं, हालांकि चीन का प्रभाव यहाँ महसूस किया जाता है।
- विविधता: इस क्षेत्र में भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता बहुत अधिक है, लेकिन इसके बावजूद यह क्षेत्र एक विशिष्ट भू-राजनीतिक पहचान रखता है।
2. दक्षिण एशिया के देशों की राजनीतिक प्रणाली
दक्षिण एशिया के देशों में शासन का कोई एक निश्चित रूप नहीं रहा है। यहाँ लोकतंत्र और राजतंत्र/सैन्य शासन दोनों का अनुभव देखा गया है:
- भारत और श्रीलंका: आजादी के बाद से (भारत 1947, श्रीलंका 1948) इन दोनों देशों में लोकतंत्र सफलतापूर्वक कायम है।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश: इन दोनों देशों में लोकतंत्र और सैन्य शासन (Military Dictatorship) का मिला-जुला रूप रहा है।
- नेपाल: यहाँ लंबे समय तक संवैधानिक राजतंत्र (Monarchy) रहा, लेकिन 2008 में राजशाही पूरी तरह समाप्त हो गई और नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
- भूटान: यहाँ 2008 में राजा के नेतृत्व में 'संवैधानिक राजतंत्र' स्थापित हुआ और बहुदलीय लोकतंत्र की शुरुआत हुई।
- मालदीव: 1965 तक यह एक सल्तनत था। 1968 में यह एक गणतंत्र (Republic) बना और 2005 में यहाँ बहुदलीय शासन प्रणाली अपनाई गई।
3. पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र (Military and Democracy in Pakistan)
पाकिस्तान में लोकतंत्र कभी भी लंबे समय तक स्थायी नहीं रह पाया। वहाँ बार-बार चुनी हुई सरकारों को हटाकर सेना ने शासन अपने हाथ में लिया:
- पहला सैन्य शासन: देश का पहला संविधान बनने के बाद जनरल अय्यूब खान ने शासन पर कब्जा कर लिया। उनके खिलाफ जनता के गुस्से के बाद जनरल याहिया खान ने सैन्य कूट संभाली (जिनके समय 1971 का भारत-पाक युद्ध हुआ)।
- लोकतांत्रिक दौर: 1971 के बाद जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार बनी जो 1977 तक चली।
- दूसरा सैन्य शासन: 1977 में जनरल जिया-उल-हक ने भुट्टो सरकार को हटाकर सैन्य शासन लागू कर दिया।
- पुनः लोकतंत्र (1988-1999): 1988 में बेनजीर भुट्टो (पीपुल्स पार्टी) और बाद में नवाज़ शरीफ (मुस्लिम लीग) के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकारें बनीं।
- तीसरा सैन्य शासन: 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का तख्तापलट कर दिया और 2001 में खुद राष्ट्रपति बन गए। 2008 के बाद से पाकिस्तान में पुनः नागरिक सरकारें चुनी जा रही हैं, लेकिन सेना का हस्तक्षेप आज भी बहुत मजबूत है।
पाकिस्तान में लोकतंत्र के असफल होने के कारण:
- सेना, धर्मगुरु और भू-स्वामियों का दबदबा: पाकिस्तानी समाज में सेना, कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं और बड़े जमींदारों का सामाजिक-राजनीतिक प्रभुत्व बहुत ज्यादा है।
- भारत के साथ तनातनी: भारत के साथ हमेशा तनाव रहने के कारण सेना समर्थक समूह यह बहाना बनाते हैं कि पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए केवल सेना ही मजबूत विकल्प है।
- अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की कमी: अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने अपने स्वार्थों (जैसे आतंकवाद के खिलाफ जंग और शीत युद्ध के समीकरण) के लिए पाकिस्तान में सैन्य शासन को बढ़ावा दिया।
- राजनीतिक दलों का भ्रष्टाचार: राजनीतिक दलों की आपसी खींचतान और नेताओं के भ्रष्टाचार ने भी लोकतंत्र को कमजोर किया।
4. बांग्लादेश में लोकतंत्र का सफर
- पृष्ठभूमि: 1947 से 1971 तक बांग्लादेश 'पूर्वी पाकिस्तान' का हिस्सा था। पश्चिमी पाकिस्तान के शासक पूर्वी पाकिस्तान की बंगाली संस्कृति पर उर्दू भाषा थोप रहे थे और उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करते थे।
- आंदोलन: बंगाली जनता ने शेख मुजीबुर रहमान (आवामी लीग) के नेतृत्व में इस भेदभाव के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया। 1970 के चुनाव में मुजीबुर रहमान की पार्टी को भारी बहुमत मिला, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और पूर्वी पाकिस्तान की जनता पर भीषण दमन चक्र चलाया।
- बांग्लादेश का जन्म (1971): लाखों शरणार्थी भारत भाग कर आए। भारत ने पूर्वी पाकिस्तान की आजादी की मांग का समर्थन किया, जिसके कारण दिसंबर 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ। पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व में आया।
- राजनीतिक संकट: आजादी के बाद शेख मुजीब ने संसदीय प्रणाली को बदलकर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया और अपनी पार्टी 'आवामी लीग' को छोड़कर बाकी सब पर प्रतिबंध लगा दिया। 1975 में सेना ने उनकी हत्या कर दी। इसके बाद जनरल जियाउर रहमान और बाद में जनरल एच. एम. इरशाद ने सैन्य शासन चलाया।
- लोकतंत्र की बहाली: 1990 में भारी जन-आंदोलन के बाद इरशाद को पद छोड़ना पड़ा और 1991 से बांग्लादेश में बहुदलीय लोकतंत्र पूरी तरह बहाल है।
5. नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र
- इतिहास: नेपाल लंबे समय तक एक हिन्दू राज्य और संवैधानिक राजतंत्र रहा। आम जनता एक मजबूत लोकतांत्रिक शासन चाहती थी, लेकिन राजा ने सेना की मदद से लोकतंत्र को दबाए रखा।
- माओवादी आंदोलन: 1990 के दशक में नेपाल के माओवादियों (साम्यवादियों) ने राजा की सेना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया। इस तरह नेपाल में राजा की सेना, लोकतंत्र समर्थक और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष छिड़ गया।
- लोकतंत्र की जीत: 2002 में राजा ज्ञानेंद्र ने संसद को भंग कर दिया। इसके विरोध में 2006 में देशव्यापी अहिंसक आंदोलन हुआ, जिसे सप्तदलीय गठबंधन (Seven Party Alliance - SPA), माओवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर चलाया। राजा को झुकना पड़ा और संसद बहाल हुई।
- वर्तमान स्थिति: 2008 में राजशाही को पूरी तरह खत्म करके नेपाल को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। 2015 में नेपाल ने अपना नया लोकतांत्रिक संविधान अपनाया।
6. श्रीलंका में जातीय संघर्ष (Ethnic Conflict in Sri Lanka)
श्रीलंका में आजादी (1948) के बाद से लोकतंत्र तो कायम रहा, लेकिन उसे एक भीषण जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा।
- विवाद का कारण: यह संघर्ष दो समुदायों के बीच था:
- सिंहली (Sinhala): यह श्रीलंका का बहुसंख्यक समुदाय है (मूल निवासी)। इनका मानना था कि श्रीलंका सिर्फ सिंहलियों का है और तमिलों को कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
- तमिल (Tamil): यह अल्पसंख्यक समुदाय है जो भारत से जाकर श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बस गए थे। ये अपने अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे थे।
- लिट्टे (LTTE - Liberation Tigers of Tamil Eelam): 1983 में तमिलों ने अपने अधिकारों के लिए एक उग्र संगठन 'लिट्टे' बनाया, जिसने श्रीलंका की सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध शुरू किया और एक अलग देश 'तमिल ईलम' की मांग की।
- भारतीय हस्तक्षेप: तमिलों के दबाव में भारत सरकार ने 1987 में श्रीलंका सरकार के साथ एक समझौता किया और वहाँ शांति स्थापित करने के लिए भारतीय शांति सेना (IPKF) भेजी। श्रीलंका के लोगों ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना। 1989 में भारत ने बिना लक्ष्य हासिल किए अपनी सेना वापस बुला ली।
- संघर्ष का अंत: 2009 में श्रीलंकाई सेना ने लिट्टे के प्रमुख वेल्लुपिल्लई प्रभाकरन को मार गिराया, जिसके साथ ही यह खूनी जातीय संघर्ष समाप्त हो गया।
- सकारात्मक पहलू: इस भयंकर संघर्ष के बावजूद श्रीलंका ने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखी, जनसंख्या वृद्धि दर पर नियंत्रण पाया और दक्षिण एशिया में सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
7. भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के मुद्दे
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध शुरू से ही तनावपूर्ण रहे हैं। इनके बीच विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कश्मीर विवाद: 1947 के विभाजन के बाद से ही कश्मीर दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद है। इसके कारण 1947-48 और 1965 में सीधे युद्ध हुए। कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है जिसे भारत POK (पाक अधिकृत कश्मीर) कहता है।
- सामरिक विवाद: 1999 में पाकिस्तान की घुसपैठ के कारण दोनों देशों के बीच कारगिल युद्ध हुआ।
- आतंकवाद (Cross-border Terrorism): भारत का आरोप है कि पाकिस्तान भारत (विशेषकर कश्मीर) में आतंकवाद फैलाने के लिए आतंकियों को हथियार, ट्रेनिंग और धन देता है। 2016 (उरी हमला) और 2019 (पुलवामा हमला) के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया है।
- सियाचिन ग्लेशियर विवाद: दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन पर नियंत्रण और सीमा रेखा के निर्धारण को लेकर विवाद है।
- सर क्रीक विवाद: गुजरात के कच्छ के रन में स्थित सर क्रीक जल-सीमा रेखा को लेकर दोनों देशों में असहमति है।
- नदी जल विवाद: सिंधु नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद था, जिसे 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) द्वारा सुलझाया गया। यह संधि आज भी कायम है।
8. भारत के अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंध
अ. भारत और बांग्लादेश
- विवाद के मुद्दे: गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मतभेद; बांग्लादेश से भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ (Infiltration); बांग्लादेश द्वारा भारत विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी समूहों को अपनी धरती का इस्तेमाल करने देना; भारत को पूर्वोत्तर राज्यों में जाने के लिए रास्ता न देना।
- सहयोग के क्षेत्र: पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भारी सुधार हुआ है; दोनों देश आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और व्यापार के मामलों पर लगातार सहयोग कर रहे हैं; 2015 में दोनों देशों ने ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौता (Land Boundary Agreement) करके कई सीमा विवाद सुलझाए।
ब. भारत और नेपाल
- विवाद के मुद्दे: नेपाल और चीन की बढ़ती नजदीकियों को लेकर भारत चिंतित रहता है; नेपाल सरकार का आरोप है कि भारत उसके आंतरिक मामलों में दखल देता है और नेपाल के व्यापारिक रास्तों को ब्लॉक करता है (जैसे 2015 की नाकाबंदी); कालापानी और लिपुलेख सीमा को लेकर भी हाल में विवाद उठा है।
- सहयोग के क्षेत्र: दोनों देशों के बीच एक विशेष संधि है जिसके तहत दोनों देशों के नागरिक बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के देश में आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं; व्यापार, पनबिजली परियोजनाएं और वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देश साथ हैं।
स. भारत और श्रीलंका
- विवाद के मुद्दे: श्रीलंका में तमिलों पर होने वाले अत्याचार और उनके राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा; दोनों देशों के मछुआरों का एक-दूसरे की जल-सीमा में प्रवेश करने पर गिरफ्तारी का विवाद।
- सहयोग के क्षेत्र: दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू है; श्रीलंका में आई सुनामी और आर्थिक संकट के समय भारत ने बड़े पैमाने पर आर्थिक और मानवीय मदद भेजी है।
9. क्षेत्रीय सहयोग: सार्क (SAARC) और साफ्टा (SAFTA)
दक्षिण एशिया के देशों ने महसूस किया कि आपस में लड़ाई करने के बजाय यदि वे सहयोग करें, तो इस क्षेत्र का विकास तेजी से हो सकता है।
- सार्क (SAARC - South Asian Association for Regional Cooperation):
- हिन्दी नाम: दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन)।
- स्थापना: दिसंबर 1985 में ढाका (बांग्लादेश) में हुई।
- मुख्यालय: काठमांडू (नेपाल)।
- कमजोरी: भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी अविश्वास और तनाव के कारण सार्क बहुत अधिक सफल नहीं हो पाया है। 2016 के बाद से इसका कोई बड़ा शिखर सम्मेलन नहीं हुआ है।
- साफ्टा (SAFTA - South Asian Free Trade Area):
- हिन्दी नाम: दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र।
- स्थापना/हस्ताक्षर: 2004 में इस्लामाबाद सार्क सम्मेलन में इस पर हस्ताक्षर हुए और यह 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ।
- उद्देश्य: पूरे दक्षिण एशिया के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाना और देशों के बीच आपसी व्यापार पर लगने वाले सीमा शुल्क (Customs Duty) को कम करना।
- चिंता: छोटे देशों को डर रहता है कि साफ्टा के बहाने भारत उनके बाजारों पर कब्जा कर लेगा और उनके घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुँचाएगा। हालाँकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इन देशों की मदद के लिए तैयार है।
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