कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति
अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations)
[CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स]
1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या हैं और इनकी आवश्यकता क्यों है?
- परिभाषा: ऐसे संगठन जिनका कार्यक्षेत्र, सदस्यता और प्रभाव किसी एक देश तक सीमित न होकर पूरी दुनिया में होता है, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संगठन कहा जाता है।
- आवश्यकता क्यों है? (बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण):
- युद्ध और शांति के मामलों में: कोई भी अकेला देश युद्ध को रोक नहीं सकता। ये संगठन देशों के बीच युद्ध को टालने और शांति स्थापित करने में मदद करते हैं।
- वैश्विक समस्याओं का समाधान: कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनसे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता (जैसे- ग्लोबल वार्मिंग, महामारी, आतंकवाद और परमाणु प्रसार)। इनके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
- विवादों का शांतिपूर्ण समाधान: विभिन्न देशों के बीच सीमा, नदी जल या व्यापारिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए एक साझा मंच प्रदान करते हैं।
- चर्चिल का प्रसिद्ध कथन: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था— "हथियार लड़ाने से बेहतर है कि ज़ुबान लड़ा ली जाए" (यानी युद्ध करने से बेहतर आपस में बातचीत करना है)।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organisation - UNO)
संयुक्त राष्ट्र संघ दुनिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
- पृष्ठभूमि (लीग ऑफ नेशंस): प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद दुनिया को अगले युद्ध से बचाने के लिए 'लीग ऑफ नेशंस' (League of Nations) की स्थापना की गई थी। लेकिन यह संगठन दूसरा विश्व युद्ध (1939-1945) रोकने में पूरी तरह असफल रहा।
- स्थापना: दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद लीग ऑफ नेशंस के उत्तराधिकारी के रूप में 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की स्थापना की गई।
- संस्थापक सदस्य: शुरुआत में इसके चार्टर पर 51 देशों ने हस्ताक्षर किए थे।
- भारत की सदस्यता: भारत 30 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल हुआ था।
- मुख्यालय: न्यूयॉर्क (अमेरिका)।
- वर्तमान सदस्य संख्या: 193 देश (नवीनतम सदस्य 'दक्षिणी सूडान' है)।
- मुख्य उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना; देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को बढ़ावा देना; सामाजिक-आर्थिक विकास और मानवाधिकारों की रक्षा करना।
3. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग (Prinicipal Organs)
संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य रूप से 6 अंग हैं:
- आम सभा (General Assembly - महासभा): यह यूएन की संसद की तरह है, जहाँ सभी 193 सदस्य देशों को एक-एक वोट देने का अधिकार प्राप्त है।
- सुरक्षा परिषद (Security Council): यह सबसे शक्तिशाली अंग है, जिसे दुनिया की 'पुलिस' भी कहा जाता है। इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं (5 स्थायी और 10 अस्थायी)।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice): यह संयुक्त राष्ट्र की मुख्य न्यायिक शाखा है। इसका मुख्यालय द हेग (नीदरलैंड) में है। इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं जो 9 साल के लिए चुने जाते हैं।
- सचिवालय (Secretariat): यह यूएन के दैनिक कार्यों और प्रशासनिक मामलों को संभालता है। इसके प्रमुख को 'महासचिव' (Secretary-General) कहा जाता है। वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुटेरेश (पुर्तगाल) हैं।
- आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC): यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करती है। इसके 54 सदस्य होते हैं।
- न्यास परिषद (Trusteeship Council): इस अंग का काम उन क्षेत्रों की देखरेख करना था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र नहीं हो पाए थे। 1994 में पलाऊ के स्वतंत्र होने के बाद से इस अंग के काम को स्थगित कर दिया गया है।
4. सुरक्षा परिषद की संरचना और वीटो पावर (Veto Power)
सुरक्षा परिषद अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसकी संरचना नीचे दी गई है:
- स्थायी सदस्य (Permanent 5 - P5): ये 5 देश हैं— अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन। इन्हें स्थायी सदस्यता दूसरे विश्व युद्ध के विजेता होने और उस समय सबसे शक्तिशाली होने के कारण मिली थी।
- अस्थायी सदस्य: इनकी संख्या 10 होती है। इन्हें आम सभा द्वारा केवल 2 वर्ष के लिए चुना जाता है। इनका चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर होता है और ये तुरंत दोबारा नहीं चुने जा सकते।
- वीटो पावर (निषेधाधिकार):
- सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों को 'वीटो पावर' प्राप्त है।
- यदि सुरक्षा परिषद में किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला होना हो, और कोई एक स्थायी सदस्य देश भी उस फैसले के विरोध में वोट (वीटो) कर दे, तो वह प्रस्ताव या फैसला वहीं खारिज हो जाता है।
- अस्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर नहीं होती।
5. संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार के मुद्दे (UN Reforms)
शीत युद्ध की समाप्ति (1991) के बाद से ही संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता और संरचना में सुधार की मांग लगातार उठ रही है। सुधार के दो मुख्य पहलू हैं:
अ. संगठन के ढांचे और प्रक्रियाओं में सुधार
- सुरक्षा परिषद का विस्तार: मांग की जा रही है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि 1945 के मुकाबले आज दुनिया बदल चुकी है।
- प्रतिनिधित्व में कमी: सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लातिनी अमेरिका (दक्षिण अमेरिका) के देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
ब. यूएन के क्षेत्राधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा
- कुछ देशों का मानना है कि यूएन को शांति और सुरक्षा के मामलों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जबकि विकासशील देश चाहते हैं कि यह विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे मानवीय कार्यों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करे।
सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए नए मापदंड (1997 में प्रस्तावित):
1997 में यूएन के तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने नए स्थायी सदस्यों के लिए कुछ योग्यताएं तय की थीं, जैसे कि वह देश:
- एक बड़ी आर्थिक शक्ति हो।
- एक बड़ी सैन्य शक्ति हो।
- संयुक्त राष्ट्र के बजट में बड़ा योगदान देता हो।
- आबादी के लिहाज से एक बड़ा राष्ट्र हो।
- ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करता हो।
- वह देश भूगोल, आर्थिक प्रणाली और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता का प्रतिनिधित्व करता हो।
6. भारत और संयुक्त राष्ट्र में सुधार (India's Claim for UNSC Permanent Seat)
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत के पक्ष में मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- विशाल जनसंख्या: भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, जिसमें विश्व की कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा रहता है।
- मजबूत लोकतंत्र: भारत दुनिया का सबसे बड़ा और निरंतर चलने वाला सफल लोकतंत्र है।
- आर्थिक शक्ति: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
- शांति सेना में योगदान: भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों (UN Peacekeeping Operations) में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में अग्रणी रहा है।
- बजट और वित्तीय योगदान: भारत यूएन के बजट में अपना नियमित योगदान देता है और इसकी सभी नीतियों का पालन करता है।
- बाधा: भारत की सदस्यता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा चीन है, जो अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके भारत को स्थायी सदस्य बनने से रोकता है। कुछ अन्य देश भी भारत के परमाणु हथियारों और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर सवाल उठाते हैं।
7. संयुक्त राष्ट्र संघ की महत्वपूर्ण एजेंसियां (महत्वपूर्ण संक्षिप्त रूप)
यूएन अपने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक कार्यों को अपनी विशेष संस्थाओं के माध्यम से पूरा करता है:
- UNESCO (यूनेस्को): United Nations Educational, Scientific and Cultural Organisation (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन)। काम: शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति को बढ़ावा देना। मुख्यालय: पेरिस (फ्रांस)।
- UNICEF (यूनिसेफ): United Nations Children's Fund (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष)। काम: दुनिया भर में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए धन जुटाना और काम करना। मुख्यालय: न्यूयॉर्क (अमेरिका)।
- WHO (डब्ल्यूएचओ): World Health Organisation (विश्व स्वास्थ्य संगठन)। काम: वैश्विक स्वास्थ्य मामलों पर नजर रखना और महामारियों से लड़ना। मुख्यालय: जेनेवा (स्विट्जरलैंड)।
- ILO (आईएलओ): International Labour Organisation (अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन)। काम: दुनिया भर के मजदूरों के अधिकारों और काम की स्थितियों में सुधार करना। मुख्यालय: जेनेवा।
- UNHRC: United Nations Human Rights Council (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद)। काम: वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा करना।
8. अन्य महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन
- विश्व बैंक (World Bank): स्थापना 1944 में हुई। यह विकासशील देशों को मानवीय और आर्थिक विकास (सड़क, बिजली, शिक्षा) के लिए ऋण (लोन) और अनुदान देता है। मुख्यालय: वाशिंगटन डी.सी. (अमेरिका)।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली की देखरेख करता है और देशों को भुगतान संतुलन (आर्थिक संकट) के समय तकनीकी और वित्तीय सहायता देता है।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO): यह 1995 में GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) के स्थान पर बनाया गया। यह देशों के बीच व्यापार के नियम तय करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA): 1957 में स्थापित। यह संगठन परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है और सैन्य उद्देश्यों (परमाणु बम बनाने) में इसके इस्तेमाल को रोकता है।
- एम्नेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International): यह एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाता है।
- ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch): यह भी मानवाधिकारों के हनन पर शोध करने और वकालत करने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है।
9. एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका (क्या यूएन अमेरिका पर अंकुश लगा सकता है?)
सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका दुनिया की एकमात्र महाशक्ति बन गया। ऐसी स्थिति में यूएन की भूमिका पर सवाल उठते हैं:
- अमेरिका का प्रभाव: संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका की मनमानी को पूरी तरह नहीं रोक सकता क्योंकि यूएन का मुख्यालय अमेरिका में है, यूएन के बजट में सबसे ज्यादा योगदान अमेरिका देता है और इसकी नौकरशाही में कई अमेरिकी नागरिक काम करते हैं।
- सैन्य अभियानों में अनदेखी: अमेरिका ने कई बार यूएन की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाइयां की हैं (जैसे 2003 में इराक पर हमला)।
- महत्व फिर भी क्यों है? इसके बावजूद यूएन बेकार नहीं है। यह एकमात्र ऐसा मंच है जहाँ दुनिया के सभी देश एक साथ बैठकर अमेरिका की गलत नीतियों की कूटनीतिक आलोचना कर सकते हैं। यह अमेरिका और शेष विश्व के बीच बातचीत के लिए एक सेतु (पुल) का काम करता है।
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