कक्षा 12 समकालीन विश्व राजनीति
अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalization)
[CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB) एवं अन्य राज्य बोर्डों के लिए संपूर्ण एवं सरल नोट्स]
1. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है? (Meaning of Globalization)
- सरल परिभाषा: किसी एक देश की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति का विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति के साथ जुड़ाव या एकीकरण होना ही वैश्वीकरण कहलाता है।
- बहुआयामी अवधारणा: वैश्वीकरण केवल एक आर्थिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक बहुआयामी (Multi-dimensional) अवधारणा है, जिसके आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आयाम होते हैं।
- प्रवाह (Flows) का सिद्धांत: वैश्वीकरण का मूल तत्व 'प्रवाह' है। यह प्रवाह मुख्य रूप से चार रूपों में होता है:
- विचारों का प्रवाह: एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचारों और दर्शन का पहुंचना।
- पूँजी का प्रवाह: एक देश से दूसरे देश में धन या निवेश (Investment) का जाना।
- वस्तुओं का प्रवाह: देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और सामानों का आयात-निर्यात होना।
- लोगों का प्रवाह: बेहतर रोज़गार, शिक्षा या जीवन स्तर के लिए लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना।
2. वैश्वीकरण के कारण (Causes of Globalization)
वैश्वीकरण रातों-रात होने वाली घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:
- प्रौद्योगिकी (Technology) और विज्ञान: वैश्वीकरण को बढ़ावा देने में तकनीक का सबसे बड़ा योगदान है। टेलीग्राफ, टेलीफोन, माइक्रोचिप, कंप्यूटर और इंटरनेट के आविष्कार ने पूरी दुनिया को एक 'वैश्विक गांव' (Global Village) में बदल दिया है।
- परिवहन के उन्नत साधन: जहाज़रानी, रेलवे और हवाई जहाजों के विकास के कारण अब भारी सामान और इंसानों का एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँचना बेहद आसान और तेज़ हो गया है।
- पारस्परिक जुड़ाव की समझ: आज दुनिया के देश यह समझ चुके हैं कि वे अलग-थलग रहकर तरक्की नहीं कर सकते। एक देश में होने वाली घटना (जैसे- आर्थिक मंदी या महामारी) का असर तुरंत दूसरे देशों पर भी पड़ता है।
3. वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव (Political Consequences)
वैश्वीकरण के कारण राज्य (정부) की भूमिका और उसकी शक्ति पर गहरा असर पड़ा है, जिसके दो विपरीत दृष्टिकोण हैं:
क. राज्य की क्षमता में कमी (कमज़ोर पक्ष):
- कल्याणकारी राज्य का अंत: अब राज्य का पारंपरिक 'लोक-कल्याणकारी' (Welfare) रूप कम हो रहा है। राज्य अब न्यूनतम हस्तक्षेपवादी बन गया है, जो केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित हो रहा है।
- बाज़ार का दबदबा: आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का निर्धारण अब सरकारें नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) और बाज़ार की ताकतें कर रही हैं।
ख. राज्य की क्षमता में वृद्धि (मजबूत पक्ष):
- तकनीक का लाभ: आधुनिक तकनीक के कारण सरकारें अब अपने नागरिकों के बारे में ज्यादा सटीक जानकारी रख सकती हैं और इसके जरिए वे कानून-व्यवस्था तथा शासन को पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से चला सकती हैं।
- संप्रभुता बरकरार: वैश्वीकरण के बावजूद राज्यों की बुनियादी संप्रभुता (Sovereignty) खत्म नहीं हुई है। आज भी अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कानून और सीमाओं के भीतर राज्य ही सबसे महत्वपूर्ण संस्था बने हुए हैं।
4. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव (Economic Consequences)
यह वैश्वीकरण का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक आयाम है, जिसे लेकर दुनिया भर में सबसे ज्यादा बहस होती है:
आर्थिक वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव (लाभ):
- व्यापार में वृद्धि: व्यापारिक बाधाओं (जैसे आयात शुल्क या कोटा) के हटने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बहुत तेजी से बढ़ा है।
- रोज़गार के नए अवसर: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर रोज़गार (विशेषकर आईटी और सेवा क्षेत्र में) पैदा हुए हैं।
- उपभोक्ताओं को फायदा: बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण उपभोक्ताओं को अब कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता वाली विदेशी वस्तुएं आसानी से मिल जाती हैं।
- विदेशी निवेश: विकासशील देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी मात्रा में विदेशी पूँजी और आधुनिक तकनीक मिल रही है।
आर्थिक वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव (हानि):
- अमीर-गरीब की चौड़ी खाई: इसका लाभ केवल अमीर देशों और बड़े पूंजीपतियों को मिला है, जिससे दुनिया भर में अमीर और गरीब के बीच की दूरी बहुत बढ़ गई है।
- स्थानीय उद्योगों को नुकसान: बड़ी विदेशी कंपनियों के सामने विकासशील देशों के छोटे और कुटीर उद्योग टिक नहीं पाते और बंद हो जाते हैं।
- सुरक्षा कवच का अंत: सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक रियायतें (Subsidy) और सामाजिक सुरक्षा स्कीमें कम होने से समाज के गरीब और कमज़ोर वर्ग संकट में आ गए हैं।
5. वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव (Cultural Consequences)
वैश्वीकरण ने हमारे खान-पान, पहनावे, भाषा और सोच के तरीकों को भी बहुत प्रभावित किया है:
- सांस्कृतिक समरूपता (Cultural Homogenization):
- इसका अर्थ है पूरी दुनिया की संस्कृतियों का एक जैसा हो जाना। वास्तव में यह 'पश्चिमीकरण' या अमेरिकी संस्कृति का प्रसार है।
- उदाहरण: दुनिया भर के युवाओं में नीली जींस (Blue Jeans) पहनना, मैकडॉनल्ड्स का बर्गर खाना, पेप्सी पीना और अंग्रेजी संगीत सुनना आधुनिकता की पहचान बन चुका है। आलोचक इसे पश्चिमी देशों का सांस्कृतिक साम्राज्यवाद मानते हैं।
- सांस्कृतिक वैविध्यीकरण (Cultural Heterogenization):
- वैश्वीकरण का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि इससे संस्कृतियां पूरी तरह खत्म नहीं होतीं, बल्कि बाहरी संस्कृतियों के मेल से उनका दायरा और बड़ा हो जाता है।
- उदाहरण: भारत का पारंपरिक कुर्ता-पायजामा अब जींस के ऊपर (कुर्ता-जींस) पहना जाने लगा है। उसी तरह, अमेरिकी लोग अब भारतीय मसालों वाले खाने और योग को अपनी जीवनशैली में अपना रहे हैं।
6. वैश्वीकरण का विरोध और WSF (World Social Forum)
वैश्वीकरण के जनविरोधी और पर्यावरण विरोधी पहलुओं के कारण पूरी दुनिया में इसका कड़ा विरोध हो रहा है:
- वामपंथी दृष्टिकोण: इनका मानना है कि वैश्वीकरण पूंजीवाद की एक नई शक्ल है, जो केवल अमीर कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुँचाती है और गरीबों तथा श्रमिकों का शोषण करती है।
- दक्षिणपंथी दृष्टिकोण: इनका मानना है कि वैश्वीकरण से उनकी पारंपरिक संस्कृति, भाषा और स्वदेशी पहचान को गंभीर खतरा पहुँच रहा है।
- वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF):
- यह वैश्वीकरण का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों, मजदूरों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का एक बड़ा विश्वव्यापी मंच है।
- इसकी पहली बैठक 2001 में ब्राजील के पोर्टो एलेग्रे में हुई थी। यह मंच नव-उदारवादी वैश्वीकरण के खिलाफ एक मजबूत आवाज़ उठाता है।
7. भारत और वैश्वीकरण (India and Globalization)
- इतिहास (1991 के आर्थिक सुधार): आजादी के बाद भारत ने 'संरक्षणवाद' की नीति अपनाई थी ताकि घरेलू उद्योगों को सुरक्षित रखा जा सके। लेकिन 1991 के गंभीर वित्तीय संकट के बाद भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों में ऐतिहासिक बदलाव किए, जिसे LPG मॉडल (Liberalization - उदारीकरण, Privatization - निजीकरण, Globalization - वैश्वीकरण) कहा जाता है।
- भारत पर प्रभाव:
- आर्थिक विकास: सुधारों के बाद भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर (GDP) बहुत तेजी से बढ़ी और भारत दुनिया के शीर्ष आर्थिक देशों में शामिल हो गया।
- सेवा क्षेत्र (Service Sector) का कमाल: भारत का आईटी सेक्टर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और कॉल सेंटर पूरी दुनिया में मशहूर हो गए। अमेरिका की सिलिकॉन वैली से लेकर यूरोप तक भारतीय पेशेवरों की मांग बढ़ गई।
- घरेलू मोर्चे पर विरोध: भारत में भी वामपंथी दल और स्वदेशी जागरण मंच जैसी संस्थाएं इसका विरोध करती रही हैं। उनका तर्क है कि इससे किसानों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं, पेटेंट कानूनों के कारण दवाएं महंगी हुई हैं और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से भारतीय पारिवारिक मूल्य कमज़ोर हो रहे हैं।
📌 बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ (Timeline)
- 1991: भारत में नई आर्थिक नीति (LPG) की शुरुआत।
- 1995: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना (जो वैश्वीकरण की मुख्य संचालक संस्था है)।
- 2001: वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF) की पहली बैठक ब्राजील में।
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