BSEB Class 10 Godhuli Chapter 3 Summary in Hindi
मैक्समूलर विश्वविख्यात विद्वान फ्रेड्रिक मैक्समूलर का जन्म आधुनिक जर्मनी के डेसाउ नामक नगर में 6 दिसंबर 1823 ई० में हुआ था। जब मैक्समूलर चार वर्ष के हुए, उनके पिता विल्हेल्म मूलर नहीं रहे। पिता के निधन के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई, फिर भी मैक्समूलर की शिक्षा-दीक्षा बाधित नहीं हुई। बचपन में ही वे संगीत के अतिरिक्त ग्रीक और लैटिन भाषा में निपुण हो गये थे तथा लैटिन में कविताएँ भी लिखने लगे थे। 18 वर्ष की उम्र में लिपजिंग विश्वविद्यालय में उन्होंने संस्कृत का अध्ययन आरंभ कर दिया। उन्होंने 'हितोपदेश' का जर्मन भाषा में अनुवाद प्रकाशित करवाया। इसी समय उन्होंने 'कठ' और 'केन' आदि उपनिषदों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया तथा 'मेघदूत' का जर्मन पद्यानुवाद भी किया । मैक्समूलर उन थोड़े से पाश्चात्य विद्वानों में अग्रणी माने जाते हैं जिन्होंने वैदिक तत्त्वज्ञान को मानव सभ्यता का मूल स्रोत माना। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें 'वेदांतियों का भी वेदांती' कहा। उनका भारत के प्रति अनुराग जगजाहिर है। उन्होंने भारतवासियों के पूर्वजों की चिंतनराशि क...
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Guddu Kumar