BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 15 Summary in Hindi
📜 Page 1 (अनुच्छेद 1 और 2) 🕉️ Original Sanskrit Text जयतु संस्कृतम् (मालकौश रागे) जयतु संस्कृतं जयतु संस्कृतम् संस्कृता सुरभारती या, देशगौरवकारिणी वन्दनीया सेवनीया सर्वदा हितकारिणी। जगति विश्रुतं तदिह संस्कृतम्, जयतु………… लोकवेदमयी सुभाषा, रागताललयान्विता, या चतुः पुरुषार्थदा सा, साधयत्युपयोगिताः चरतु संस्कृतं पठतु संस्कृतम्। जयतु………… 🌼 Simple Hindi Translation संस्कृत की विजय हो! (जयतु संस्कृतम्) (गायन निर्देश: मालकौश राग में) संस्कृत भाषा की विजय हो, संस्कृत की विजय हो! जो संस्कृत देववाणी ( सुरभारती ) है, देश का गौरव बढ़ाने वाली ( देशगौरवकारिणी ), वंदना करने योग्य (वन्दनीया), सेवा करने योग्य (सेवनीया) और हमेशा सबका कल्याण करने वाली ( हितकारिणी ) है। इस संसार में जो बहुत प्रसिद्ध ( विश्रुतम् ) है, वही यहाँ यह संस्कृत भाषा है; संस्कृत की विजय हो! यह सुंदर भाषा लौकिक साहित्य और वेदों के ज्ञान से परिपूर्ण ( लोकवेदमयी ) है, जो सुंदर राग, ताल और लय से युक्त ( रागताललयान्विता ) है। यह चारों पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को देने वाली है और अपनी उपयोगिता को सिद्ध करती है। ऐसी स...
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Guddu Kumar