BSEB Class 10 Varnika Chapter 4 Summary in Hindi
नगर सुजाता सुजाता का वास्तविक नाम एस० रंगराजन है। इनका जन्म 3 मई 1935 ई० में चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ । अपनी रचना-शैली तथा विषय-वस्तु के द्वारा इन्होंने तमिल कहानी में उल्लेखनीय बदलाव किए। इनकी रचनाएँ खूब लोकप्रिय हुईं। इन्होंने कुछ अभिनेय नाटक भी लिखे । इनके कुछ उपन्यासों पर चलचित्र भी बने। इनकी पच्चीस से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें 'करैयेल्लान शेण्बकप्पू', 'कनवुत् तोलिरशालै' आदि उपन्यास काफी चर्चित और सम्मानित हुए । यह कहानी 'आधुनिक तमिल कहानियाँ' (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया) से यहाँ साभार संकलित है। इस कहानी के अनुवादक के० ए० जमुना हैं । काल्डवेल के 'तुलनात्मक व्याकरण' में लिखा है- "मदुरै पांडिय लोगों की दूसरी राजधानी है । हमारे देश में प्राचीन मानचित्रों में 'मथरा' नाम से उल्लिखित, अंग्रेजों द्वारा 'मदुरा' और यूनानी लोगों द्वारा 'मेदोरा' कहे जाने वाला नगर तमिल लोगों का मदुरै ही है ।" दीवारों पर मोटे अक्षरों में छपे, विविध वस्तुओं का विज्ञापन करनेवाले, तरह-तरह के पोस्टर लगे हुए थे । निजाम लेडी तंबाकू, ए० के...
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Guddu Kumar