BSEB Class 10 Godhuli Chapter 8 Summary in Hindi
बीएसटीबीपीसी-2015 पंडित बिरजू महाराज एबीडी सॉल्यूशंस एब्सोल्ज़ पटना एस जित जित मैं निरखत हूँ आज कलाप्रेमी जनसाधारण तथा नृत्य रसिकों के बीच कथक और बिरजू महाराज एक-दूसरे के पर्यायवाची से बन गये हैं। महाराज की अथक साधना, एकांतनिष्ठा और कल्पनाशील सर्जनात्मकता के संयोग से ही यह संभव हो सका है। कथक के व्याकरण और कौशल को उन्होंने सार्थक सौंदर्यबोध और काव्य दिया है। वे कथक के लालित्य के कवि हैं। परंपरा की प्रामाणिकता की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्जनात्मक साहस के साथ कथक का अनेक नई दिशाओं में विस्तार किया है तथा यह सिद्ध किया है कि शास्त्रीय कला जड़ या स्थिर नहीं है। उसमें एक निरंतर गतिशीलता और समकालीनता बरकरार है। लखनऊ घराने के वंशज और सातवीं पीढ़ी के इस कलाकार में मानो सातों पीढ़ियों का सौंदर्य केंद्रीभूत हो गया है। सौम्य, हँसमुख, मिलनसार व्यक्तित्व और सहज-निष्कपट लगभग बच्चे का भोलापन लिए बिरजू महाराज को देखकर इनकी महान प्रतिभा का अंदाज लगाना कठिन है। किंतु बात करते-करते उनका न जाने कहाँ खो जाना, उँगलियों का निरंतर गिनती में उलझे रहना और अचानक चेहरे पर नितांत शून्य भाव बेचैन करने वाला होता ...
By
Guddu Kumar