BSEB Class 10 Varnika Chapter 5 Summary in Hindi
धरती कब तक घूमेगी साँवर दझ्या साँवर दइया राजस्थानी भाषा के एक प्रमुख कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में राजस्थानी समाज गहरे अर्थबोध एवं विविध छटाओं के साथ उपस्थित हुआ है । प्रस्तुत कहानी 'समकालीन भारतीय साहित्य' (अप्रैल-जून 1983 ई०) से यहाँ साभार संकलित है । इस कहानी का राजस्थानी से हिंदी में अनुवाद कहानीकार ने स्वयं किया है । यह महीना समाप्त होने में दो-चार दिन और बाकी हैं। सीता ने सोचा और निःश्वास छोड़ी । कुछ याद आते ही उसका मन भर आया । भर आयीं आँखें पोंछकर उसने आकाश की ओर देखा । फिर जमीन खुरचने लगी । उसे महसूस हुआ कि पृथ्वी और आकाश के बीच घुटन भरी हुई है । ठीक वैसी ही घुटन, जैसी उसके हृदय में भरी है। सब कुछ है और कुछ भी नहीं है । भरा-पूरा घर है। बेटे-बहुएँ हैं। पोते-पोतियाँ हैं। दोहित-दोहितियाँ हैं। मिलने को दोनों वक्त रोटी भी मिलती है । लेकिन फिर भी पता नहीं सब कुछ अजीब-अजीब सा लगता है । लगता है कि कहीं कुछ कमी है जरूर । पकड़ में चाहे न भी आए। दोनों वक्त खाना और निश्चिन्त होकर सोना ही तो सब कुछ नहीं होता ! रोटी के अलावा भी आदमी की कुछ आवश्यकता हुआ करती है । अलावा वाली इच्छाएँ ...
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Guddu Kumar