BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 12 Summary in Hindi
📜 Page 1 🕉️ Original Sanskrit Text द्वादशः पाठः स्वामिनः विवेकानन्दस्य व्यथा 1893 तमस्य वर्षस्य सितम्बरमासः। स्वामी विवेकानन्दः अमेरिकादेशे आयोजिते विश्वधर्मसम्मेलने भागं गृहीतवान्। तस्य भाषणानां कीर्तिः सर्वत्र प्रसृता जाता। अमेरिकानिवासिनः ततः अत्यन्तम् आकृष्टाः जाताः। कौचित् अमेरिकीयदम्पती स्वामिनं विवेकानन्दं स्वगृहं प्रति निमन्त्रितवन्तौ "अस्माकं गृहे भोजनसेवनेन विश्रामस्वीकरणेन च वयम् अनुग्रहीतव्याः" इति। स्वामिवर्यः तयोः निवेदनम् अङ्गीकृतवान्। सः तत् गृहं गत्वा रात्रौ भोजनं कृतवान्। 🌼 Simple Hindi Translation बारहवाँ पाठ: स्वामी विवेकानन्द की व्यथा (दुख) सितंबर 1893 का समय था। स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया था। उनके भाषणों की कीर्ति (यश) सब जगह फैल गई। वहाँ के रहने वाले अमेरिकी लोग उनसे अत्यधिक आकर्षित हुए। किसी अमेरिकी पति-पत्नी ( दम्पती ) ने स्वामी विवेकानन्द को अपने घर आमंत्रित किया और निवेदन किया— "हमारे घर पर भोजन ग्रहण करने और विश्राम करने से हम अनुग्रहीत (कृतार्थ) होंगे"। स्वामी जी ने उनका निवेदन स्वी...
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Guddu Kumar