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Class 11 Physics Chapter 12 Notes Hindi NCERT

अध्याय 13: अणुगति सिद्धांत (Kinetic Theory of Gases - KTG)

यह अध्याय गैसों के व्यवहार को उनके सूक्ष्म परमाण्विक या आणविक स्तर पर जाकर समझाता है। जहाँ पिछले अध्याय (ऊष्मागतिकी) में हमने दाब और ताप जैसे स्थूल (Macroscopic) गुणों की बात की थी, वहीं अणुगति सिद्धांत हमें बताता है कि गैस के अणुओं की गति और उनकी टक्करों से यह दाब और ताप कैसे जनमते हैं। यह NEET, JEE, CUET और सभी State Boards के लिए एक अत्यंत संक्षिप्त और सूत्रों से भरपूर स्कोरिंग अध्याय है।


1. आदर्श गैस के नियम (Ideal Gas Laws)

अणुगति सिद्धांत मुख्य रूप से आदर्श गैस (Ideal Gas) के व्यवहार पर आधारित है, जो निम्न नियमों का पालन करती है:

  • बॉयल का नियम (Boyle's Law): नियत ताप () पर, गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। ()
  • चार्ल्स का नियम (Charles's Law): नियत दाब () पर, गैस का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है। ()
  • गे-लुसाक का नियम (Gay-Lussac's Law): नियत आयतन () पर, गैस का दाब उसके परम ताप के समानुपाती होता है। ()
  • आवोगाद्रो का नियम (Avogadro's Law): समान ताप और दाब पर, गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या () समान होती है।

📊 आदर्श गैस समीकरण (Ideal Gas Equation):

  • जहाँ:
  • (🚨 एकांक अणु के लिए उपयोग होता है)
  • वास्तविक गैसों का आदर्श व्यवहार: कोई भी वास्तविक गैस केवल उच्च तापमान (High Temp) और निम्न दाब (Low Pressure) पर ही आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है।

2. अणुगति सिद्धांत की मुख्य परिकल्पनाएँ (Postulates of KTG)

  1. प्रत्येक गैस अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी है, जिन्हें अणु कहते हैं। एक ही गैस के सभी अणु समरूप और पूर्णतः गोल व प्रत्यास्थ (Elastic) होते हैं।
  2. अणुओं के बीच की दूरी उनके आकार की तुलना में बहुत अधिक होती है (अणुओं का स्वयं का आयतन गैस के कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है)।
  3. गैस के अणु सभी संभव दिशाओं में सभी संभव वेगों से अनियमित गति (Random Motion) करते हैं।
  4. अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता, इसलिए उनकी स्थितिज ऊर्जा शून्य () होती है। गैस की कुल ऊर्जा केवल उसकी गतिज ऊर्जा (K.E.) होती है।
  5. अणुओं की आपस में और बर्तन की दीवारों से होने वाली टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ (Elastic) होती हैं (संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों सुरक्षित रहते हैं)।

3. आदर्श गैस का दाब (Pressure of an Ideal Gas)

जब गैस के अणु बर्तन की दीवारों से टकराकर वापस लौटते हैं, तो उनके संवेग में परिवर्तन होता है। इस संवेग परिवर्तन की दर से दीवारों पर एक बल लगता है, जिससे दाब जनमता है।

(जहाँ , है)।


4. अणुओं की विभिन्न चालें (Molecular Speeds)

गैस के सभी अणुओं का वेग एक समान नहीं होता। मैक्सवेल के वेग वितरण के अनुसार तीन मुख्य चालें परिभाषित हैं:

  1. वर्ग माध्य मूल चाल (Root Mean Square Speed - ): अणुओं के वेगों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल। (🚨 आंकिक प्रश्नों के लिए सबसे महत्वपूर्ण)
  2. औसत चाल (Average Speed - ): सभी अणुओं के वेगों का सामान्य औसत।
  3. सर्वाधिक प्रसंभाव्य चाल (Most Probable Speed - ): गैस के अधिकतम अणुओं द्वारा धारण की जाने वाली चाल।

📊 तीनों चालों की तुलना (Trick: RAM - Increasing Order):


5. ताप की गतिक व्याख्या और गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy & Temperature)

  • एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा:
  • 1 मोल गैस की कुल गतिज ऊर्जा:
  • 🚨 महत्वपूर्ण निष्कर्ष: गैस के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा केवल और केवल उसके परम ताप () पर निर्भर करती है, यह गैस की प्रकृति या उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। यदि तापमान (परम शून्य ताप) कर दिया जाए, तो अणुओं की गति पूर्णतः रुक जाएगी ()।

6. स्वातन्त्र्य कोटि और ऊर्जा समविभाजन नियम (Degrees of Freedom & Equipartition)

  • स्वातन्त्र्य कोटि (Degrees of Freedom - ): किसी स्वतंत्र कण की स्थिति या गति को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए आवश्यक स्वतंत्र निर्देशांकों या गतियों की कुल संख्या को स्वातन्त्र्य कोटि कहते हैं।
    • एकपरमाण्विक गैस (Monatomic - जैसे He, Ar): केवल 3 स्थानांतरणीय गतियाँ
    • द्विपरमाण्विक गैस (Diatomic - जैसे ): 3 स्थानांतरणीय + 2 घूर्णी गतियाँ
    • बहुपरमाण्विक गैस (Polyatomic - जैसे ): 3 स्थानांतरणीय + 3 घूर्णी गतियाँ (या रेखीय के लिए 7)
  • ऊर्जा समविभाजन का नियम (Law of Equipartition of Energy): तापीय साम्यावस्था में किसी गतिक निकाय की कुल ऊर्जा उसकी सभी स्वातन्त्र्य कोटियों में समान रूप से विभाजित होती है। प्रत्येक स्वातन्त्र्य कोटि के संगत प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा होती है।
    • अतः स्वातन्त्र्य कोटि वाले एक अणु की कुल ऊर्जा =

7. गैसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ ( & )

ऊर्जा समविभाजन नियम की मदद से हम विभिन्न गैसों के लिए विशिष्ट ऊष्मा का मान ज्ञात कर सकते हैं:

  • आंतरिक ऊर्जा () = (1 मोल के लिए)
  • नियत आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा () =
  • नियत दाब पर विशिष्ट ऊष्मा () =
  • विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात ():

📋 विभिन्न गैसों के लिए का मान (Directly asked in NEET/JEE):

  • एकपरमाण्विक ():
  • द्विपरमाण्विक ():
  • बहुपरमाण्विक ():

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / JEE Special)

  • 🚨 Mean Free Path ( - माध्य मुक्त पथ): गैस के किसी अणु द्वारा दो क्रमागत (लगातार) टक्करों के बीच तय की गई औसत दूरी को माध्य मुक्त पथ कहते हैं।(जहाँ , है)। बढ़ने या व्यास बढ़ने पर माध्य मुक्त पथ घट जाता है।
  • Gas Mixture Trick (Very Important): यदि दो अलग-अलग गैसों को मिलाया जाए, तो मिश्रण की प्रभावी विशिष्ट ऊष्मा:
  • Temperature Change vs Velocity Trick: यदि गैस का तापमान से बढ़ाकर (4 गुना) कर दिया जाए, तो अणुओं का वेग केवल 2 गुना होगा, क्योंकि होता है।

📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)

अणुगति सिद्धांत हमें स्थूल दुनिया (दाब, ताप) और सूक्ष्म दुनिया (अणुओं की टक्कर, वेग) के बीच का एक सुंदर सेतु प्रदान करता है। हमने सीखा कि गैस का दाब कुछ और नहीं बल्कि अरबों अणुओं द्वारा लगातार दीवारों पर किए जाने वाले सूक्ष्म प्रहारों का कुल योग है, और तापमान अणुओं की दौड़ने की बेताबी (गतिज ऊर्जा) का सीधा पैमाना है। ऊर्जा का समविभाजन नियम हमें परमाणुओं की बनावट के आधार पर गैसों की विशिष्ट ऊष्मा की सटीक गणना करने की अनोखी शक्ति देता है।

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