परदेश की विद्या पढ़ने का क्या परिणाम हुआ? [2018A-I]
- सबकी बुद्धि भारतीय हो गई
- सबकी बुद्धि विदेशी हो गई
- सबकी बुद्धि आध्यात्मिक हो गई
- उपर्युक्त सभी
'प्रेमघन' अपना आदर्श किसे मानते थे? [2018A-II]
- महात्मा गांधी
- विवेकानंद
- रवीन्द्रनाथ टैगोर
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र
'हिन्दुस्तानी नाम सुनि, अब ये सकुचि लजात'–पंक्ति किस कविता से उद्धृत है? [2020A-I]
- भारतमाता
- जनतंत्र का जन्म
- अक्षर ज्ञान
- स्वदेशी
'स्वदेशी' शीर्षक पाठ के रचनाकार हैं [2020A-II]
- रामधन
- मालधनी
- श्यामधन
- प्रेमघन
'प्रेमघन' किस युग के प्रमुख कवि थे? [2021A-I, 2022A-II]
- प्रयोगवाद युग के
- प्रपद्यवाद युग के
- भारतेन्दु युग के
- छायावाद युग के
'जीर्ण जनपद' किस कवि की रचना है? [2021A-I, 2025A-I]
- बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन की
- अनामिका की
- घनानंद की
- रसखान की
'स्वदेशी' कविता संकलित है [2021A-I, 2025A-I]
- ग्राम्या से
- भग्नदूत से
- रसखान रचनावली से
- 'प्रेमघन सर्वस्व' से
कवि प्रेमघन के अनुसार कौन-सी विद्या पढ़कर लोगों की बुद्धि विदेशी हो गयी है? [2021A-II]
- छल विद्या
- कपट विद्या
- विदेशी विद्या
- तकनीकी विद्या
'भारत सौभाग्य' किनका प्रसिद्ध नाटक है? [2021A-II, 2024A-I, 2024A-II]
- कुँवर नारायण का
- प्रेमघन का
- अनामिका का
- जीवनानंद दास का
बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की रचनाएँ किस नाम से संगृहीत हैं? [2022A-I]
- भारत सौभाग्य
- प्रेमघन सर्वस्व
- प्रयाग रामागमन
- जीर्ण जनपद
'प्रयाग रामागमन' शीर्षक नाटक किसकी रचना है? [2022A-II]
- घनानंद
- अनामिका
- वीरेन डंगवाल
- बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
"हिन्दुस्तानी नाम सुनि, अब ये सकुचि लजात। भारतीय सब वस्तु ही, सों ये हाय घिनात।।"–यह पंक्ति किस कविता से है? [2022A-II]
- स्वदेशी
- भारतमाता
- जनतंत्र का जन्म
- हमारी नींद
कवि बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' का जन्म किस वर्ष हुआ था? [2023A-I]
- 1855 ई०
- 1857 ई०
- 1858 ई०
- 1859 ई०
'स्वदेशी' शीर्षक कविता किससे संकलित है? [2023A-I]
- प्रेमघन सर्वस्व से
- जीर्ण जनपद से
- भारत सौभाग्य से
- प्रयाग रामागमन से
ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी चित्रण 'प्रेमघन' रचित किस काव्य में है? [2023A-I]
- प्रयाग रामागमन में
- भारत सौभाग्य में
- जीर्ण जनपद में
- इनमें से कोई नहीं
"ठढे विदेसी ठाठ सब, बन्यो देस बिदेस। सपनेहूँ जिनमें न कहूँ, भारतीयता लेस।।"– यह पंक्ति किस शीर्षक कविता से है? [2023A-II]
- भारतमाता
- अक्षर-ज्ञान
- जनतंत्र का जन्म
- स्वदेशी
'अंग्रेजी बाहन, बसन, वेष रीति और नीति'– यह पंक्ति किस शीर्षक कविता की है? [2024A-I]
- स्वदेशी
- मेरे बिना तुम प्रभु
- हिरोशिमा
- भारतमाता
"मनुज भारती देखि कोउ, सकत नहीं पहिचान"– यह पंक्ति किस कविता से है? [2024A-I]
- भारतमाता
- स्वदेशी
- अक्षर ज्ञान
- हमारी नींद
बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' ने किस मासिक पत्रिका का संपादन किया? [2024A-I]
- सरस्वती
- इन्दु
- आनंद कादंबिनी
- हिन्दी प्रदीप
भारतेन्दु-युग के कवि कौन हैं? [2024A-II]
- प्रेमघन
- गुरु नानक
- घनानंद
- अनामिका
'हाटक में देखहु भरा, बसै अंग्रेजी माल' पंक्ति के कवि हैं [2025A-I]
- रसखान
- प्रेमघन
- अज्ञेय
- दिनकर
कवि बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' के अनुसार किस वृत्ति का विकास चारों ओर हुआ है? [2026A-I]
- दास-वृत्ति का
- प्रभुभक्ति-वृत्ति का
- उपासना-वृत्ति का
- अहिंसा-वृत्ति का
'स्वदेशी' शीर्षक पाठ में भारतीय हिंदी की जगह किस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं? [2026A-II]
- उर्दू
- हिन्दी
- अंग्रेजी
- फ़ारसी
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