📚 अध्याय 1: सम्बन्ध एवं फलन (Relations and Functions)
यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB), अन्य राज्य बोर्ड (SCERT) तथा प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE Main & Advanced, NDA) के हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तैयार किए गए हैं।

1. सम्बन्धों के प्रकार (Types of Relations)
माना
🔹 1. रिक्त सम्बन्ध (Empty Relation)
यदि समुच्चय
🔹 2. सार्वत्रिक सम्बन्ध (Universal Relation)
यदि समुच्चय
- नोट: रिक्त और सार्वत्रिक सम्बन्धों को 'तुच्छ सम्बन्ध' (Trivial Relations) भी कहा जाता है।
🔹 3. तत्समक सम्बन्ध (Identity Relation)
यदि समुच्चय
- उदाहरण: यदि
, तो । यदि सम्बन्ध में आ जाए, तो वह तत्समक नहीं रहेगा।
2. मुख्य सम्बन्ध (तुल्यता सम्बन्ध के आधार)
किसी समुच्चय
🌟 I. स्वतुल्य सम्बन्ध (Reflexive Relation)
समुच्चय
- शर्त:
🌟 II. सममित सम्बन्ध (Symmetric Relation)
यदि
- शर्त: यदि
🌟 III. संक्रामक सम्बन्ध (Transitive Relation)
यदि
- शर्त: यदि
तथा - ⚠️ महत्वपूर्ण बिंदु (NDA/JEE): यदि
हो परन्तु ऐसा कोई न हो जिसके लिए , तो वह सम्बन्ध संक्रामक माना जाता है (जब तक विरोध सिद्ध न हो)।
💡 तुल्यता सम्बन्ध (Equivalence Relation): यदि कोई सम्बन्ध
स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक तीनों हो, तो उसे तुल्यता सम्बन्ध कहते हैं।
3. तुल्यता वर्ग (Equivalence Class)
यदि
- गुणधर्म:
- दो तुल्यता वर्ग या तो पूरी तरह समान होते हैं या पूरी तरह असंयुक्त (Disjoint) होते हैं (
या )। - सभी भिन्न तुल्यता वर्गों का संघ (Union) मूल समुच्चय
के बराबर होता है।
4. फलनों के प्रकार (Types of Functions)
माना
[Image] एकैकी (One-One) बहु-एक (Many-One)A B A B——> [ a ] —–> [ a ]——> [ b ] —/——> [ c ] ——> [ b ]
🔹 1. एकैकी फलन (One-One or Injective Function)
यदि प्रांत
- जाँचने की विधि (Algebraic): यदि
- Calculus Method (JEE/NDA): यदि फलन अपने पूरे प्रांत में निरंतर वर्धमान (Strictly Increasing) या निरंतर ह्रासमान (Strictly Decreasing) हो, तो वह एकैकी होता है अर्थात्
या । - क्षैतिज रेखा परीक्षण (Horizontal Line Test): यदि मुख्य अक्ष के समांतर खींची गई कोई रेखा फलन के आरेख (Graph) को एक से अधिक बिंदु पर न काटे।
🔹 2. बहु-एक फलन (Many-One Function)
यदि प्रांत
- यदि फलन एकैकी नहीं है, तो वह निश्चित रूप से बहु-एक होगा। (जैसे:
)
🔹 3. आच्छादक फलन (Onto or Surjective Function)
यदि सहप्रांत
- शर्त: फलन का परिसर (Range) = सहप्रांत (Codomain)
🔹 4. अंतःक्षेपी फलन (Into Function)
यदि सहप्रांत
- शर्त: परिसर (Range)
सहप्रांत (Codomain)
🌟 5. एकैकी आच्छादी फलन (Bijective Function)
यदि कोई फलन
- 💡 नोट: केवल एकैकी आच्छादी (Bijective) फलनों का ही व्युत्क्रम (Inverse) सम्भव होता है।
5. फलनों का संयोजन (Composition of Functions)
माना
- सूत्र:
- अस्तित्व की शर्त:
के परिभाषित होने के लिए का परिसर (Range), के प्रांत (Domain) का उपसमुच्चय होना चाहिए। - मुख्य गुणधर्म:
- फलनों का संयोजन सामान्यतः क्रमविनिमेय नहीं होता है (
)। - फलनों का संयोजन साहचर्य नियम का पालन करता है (
)। - यदि
और दोनों एकैकी आच्छादी (Bijective) हैं, तो भी एकैकी आच्छादी होगा और (Reversal Law)।
- फलनों का संयोजन सामान्यतः क्रमविनिमेय नहीं होता है (
6. व्युत्क्रमणीय फलन (Invertible Function)
एक फलन
जहाँ
- महत्वपूर्ण प्रमेय: फलन
व्युत्क्रमणीय है यदि और केवल यदि एकैकी आच्छादी (Bijective) है। - व्युत्क्रम निकालने की विधि:
- दिए गए फलन को
के रूप में लिखें। - इस समीकरण को
के पदों में हल करें, जिससे प्राप्त हो। - प्राप्त
ही है। अंत में चर को से प्रतिस्थापित कर दें।
- दिए गए फलन को
7. द्विआधारी संक्रियाएँ (Binary Operations)
(नोट: यह खंड वर्तमान संशोधित CBSE पाठ्यक्रम से हटाया गया है, परन्तु बिहार बोर्ड (BSEB) तथा JEE/NDA के लिए महत्वपूर्ण है)
किसी समुच्चय
- क्रमविनिमेय नियम (Commutative): यदि
- साहचर्य नियम (Associative): यदि
- तत्समक अवयव (Identity Element -
): - व्युत्क्रम अवयव (Inverse Element -
):
🎯 क्विक रीविज़न की-पॉइंट्स (JEE / NDA / Boards)
- कुल सम्बन्धों की संख्या: यदि समुच्चय
में अवयव हैं, तो पर कुल सम्भव सम्बन्धों की संख्या होती है। - स्वतुल्य सम्बन्धों की संख्या:
- सममित सम्बन्धों की संख्या:
- फलनों की संख्या: यदि
और हो, तो से में कुल फलनों की संख्या होती है। - एकैकी फलनों की संख्या: यदि
और हो: - यदि
- यदि
- यदि
- आच्छादक फलनों की संख्या: यदि
और हो, तो कुल आच्छादक फलन होते हैं।
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