कक्षा 12 गणित अध्याय 5 सांतत्य तथा अवकलनीयता नोट्स | NCERT
📚 अध्याय 5: सांतत्य तथा अवकलनीयता (Continuity and Differentiability) यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB), अन्य राज्य बोर्ड (SCERT) तथा प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE Main & Advanced, NDA) के हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तैयार किए गए हैं। 1. फलन का सांतत्य (Continuity of a Function) 🔹 बिंदु पर सांतत्य की परिभाषा कोई वास्तविक फलन अपने प्रांत के किसी बिंदु पर सतत (Continuous) कहलाता है, यदि उस बिंदु पर फलन की सीमा (Limit) का अस्तित्व हो और वह फलन के वास्तविक मान के बराबर हो। गणितीय शर्त: अ र ् थ ा त ् व ा म ह स ् त स ी म ा द क ् ष ि ण ह स ् त स ी म ा ब ि ं द ु प र फ ल न क ा म ा न LHL (Left Hand Limit): RHL (Right Hand Limit): यदि इन तीनों में से कोई भी एक आपस में बराबर न हो, तो फलन पर असतत (Discontinuous) कहलाता है। 🔹 अंतराल में सांतत्य (Continuity in an Interval) विवृत अंतराल में: फलन अंतराल के प्रत्येक बिंदु पर सतत होना चाहिए। संवृत अंतराल में: फलन में सतत हो, पर दाईं ओर से सतत हो ( ) तथा पर बाईं ओर से सतत हो ( )। 🚀 महत्वपूर्ण सतत फलन (Direct Result...
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Guddu Kumar