📚 अध्याय 5: सांतत्य तथा अवकलनीयता (Continuity and Differentiability)
यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, बिहार बोर्ड (BSEB), अन्य राज्य बोर्ड (SCERT) तथा प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE Main & Advanced, NDA) के हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तैयार किए गए हैं।
1. फलन का सांतत्य (Continuity of a Function)
🔹 बिंदु पर सांतत्य की परिभाषा
कोई वास्तविक फलन
गणितीय शर्त:
- LHL (Left Hand Limit):
- RHL (Right Hand Limit):
- यदि इन तीनों में से कोई भी एक आपस में बराबर न हो, तो फलन
पर असतत (Discontinuous) कहलाता है।
🔹 अंतराल में सांतत्य (Continuity in an Interval)
- विवृत अंतराल
में: फलन अंतराल के प्रत्येक बिंदु पर सतत होना चाहिए। - संवृत अंतराल
में: फलन में सतत हो, पर दाईं ओर से सतत हो ( ) तथा पर बाईं ओर से सतत हो ( )।
🚀 महत्वपूर्ण सतत फलन (Direct Result): सभी बहुपदीय फलन (Polynomials), त्रिकोणमितीय फलन (
2. अवकलनीयता (Differentiability)
🔹 परिभाषा
माना
गणितीय शर्त:
- वाम हस्त अवकलज (LHD):
- दक्षिण हस्त अवकलज (RHD):
🌟 अति महत्वपूर्ण प्रमेय (Graph & Concept - JEE/NDA)
- "प्रत्येक अवकलनीय फलन अनिवार्य रूप से सतत होता है, परन्तु इसका विलोम (Converse) सदैव सत्य नहीं होता।"
- उदाहरण: मापांक फलन
, बिंदु पर सतत तो है, परन्तु अवकलनीय नहीं है क्योंकि इसके आरेख (Graph) पर पर एक तीक्ष्ण कोना (Sharp Corner/Kink) बनता है जहाँ LHD = -1 और RHD = 1 होता है।
3. अवकलन के मूलभूत नियम एवं सूत्र (Standard Derivatives)
यदि
- योग/अंतर नियम:
- गुणन नियम (Product Rule):
- भाग नियम (Quotient Rule):
📊 मानक अवकलन सूत्र तालिका
| फलन | अवकलज | फलन | अवकलज |
|---|---|---|---|
| అचर ( |
4. श्रृंखला नियम एवं प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों का अवकलन
🔹 श्रृंखला नियम (Chain Rule - फलनों के फलन का अवकलन)
यदि
🔹 प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों (ITF) के अवकलज
5. विशिष्ट फलनों के अवकलन की विधियाँ
🔹 1. अस्पष्ट फलनों का अवकलन (Implicit Differentiation)
जब
🔹 2. लघुगणकीय अवकलन (Logarithmic Differentiation)
जब फलन [फलन]^[फलन] के रूप में हो (
- विधि: दोनों पक्षों का प्राकृतिक लॉग (
या ) लेते हैं, लॉग के गुणधर्मों से सरलीकृत करते हैं और फिर अवकलन करते हैं। - 🚀 JEE/NDA शॉर्टकट ट्रिक:
🔹 3. प्राचलिक फलनों का अवकलन (Parametric Differentiation)
जब
🔹 4. द्वितीय कोटि का अवकलज (Second Order Derivative)
यदि
- ⚠️ सावधानी (प्राचलिक फलन के लिए):
। सही विधि: ।
6. मुख्य माध्यमान प्रमेय (Mean Value Theorems)
(नोट: यह खंड प्रयोगात्मक रूप से बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं दोनों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है)
🌟 I. रोले का प्रमेय (Rolle's Theorem)
यदि एक वास्तविक फलन
, संवृत अंतराल में सतत है। , विवृत अंतराल में अवकलनीय है। तो विवृत अंतराल में कम से कम एक बिंदु ऐसा अवश्य होगा जहाँ फलन का अवकलज शून्य होगा।
- ज्यामितीय अर्थ: वक्र पर बिंदु
पर खींची गई स्पर्श रेखा -अक्ष के समांतर होती है।
🌟 II. लैन्ड्रैंज का माध्यमान प्रमेय (Lagrange's Mean Value Theorem - LMVT)
यदि एक वास्तविक फलन
, संवृत अंतराल में सतत है। , विवृत अंतराल में अवकलनीय है। (यहाँ हो सकता है) तो विवृत अंतराल में कम से कम एक बिंदु ऐसा अवश्य होगा जहाँ:
- ज्यामितीय अर्थ: बिंदु
पर खींची गई स्पर्श रेखा, जीवा (Chord) AB के समांतर होती है।
🎯 क्विक रीविज़न की-पॉइंट्स (JEE / NDA / Boards)
- सांतत्यता का अनियत रूप (K का मान ज्ञात करना): परीक्षाओं में बार-बार फलन को सतत देकर अज्ञात राशि
का मान पूछा जाता है। ऐसे प्रश्नों में सीधे रखकर समीकरण हल करें। - अवकलनीयता की जाँच का शॉर्टकट (JEE/NDA): यदि फलन सतत हो, तो सीधे फलन का अवकलन करके
और पर मान निकालें। यदि दोनों मान बराबर आते हैं, तो फलन अवकलनीय है (यह केवल तभी कार्य करता है जब अवकलज फलन उस बिंदु के आस-पास सतत हो)। - अनन्त श्रेणियों का अवकलन: यदि
हो, तो इसका शॉर्टकट अवकलज होता है।
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