🗳️ अध्याय 9: भारतीय राजनीति - नए बदलाव (Recent Developments in Indian Politics)
यह NCERT कक्षा 12 राजनीति विज्ञान की द्वितीय पुस्तक 'स्वतंत्र भारत में राजनीति' के अंतिम अध्याय का एक संपूर्ण, सरल और परीक्षा-उपयोगी (CBSE, CUET, BSEB/बिहार बोर्ड, SCERT, BSTBPC, UPSC) वन-शॉट डिजिटल नोट्स है।

⏳ 1. 1980 के दशक के आखिरी सालों के पाँच बड़े बदलाव
1989 के बाद भारतीय राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। इस दौर में पाँच ऐसी बड़ी घटनाएँ हुईं जिन्होंने समकालीन राजनीति की दिशा तय की:
- 📉 कांग्रेस प्रणाली का अंत: 1989 के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार हुई। इसके साथ ही भारतीय राजनीति से 'एक दल के प्रभुत्व का दौर' हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
- 🌾 मण्डल मुद्दा (Mandal Issue): राष्ट्रीय राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने का मुद्दा गरमाया, जिसने पिछड़ी जातियों की राजनीतिक ताकत को बढ़ा दिया।
- 💸 नई आर्थिक नीतियां (1991): भारत सरकार ने वित्तीय संकट से उबरने के लिए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) के आर्थिक सुधारों को लागू किया, जिसे ढांचागत समायोजन कार्यक्रम भी कहा गया।
- 💔 बाबरी मस्जिद विध्वंस (दिसंबर 1992): अयोध्या विवाद के कारण देश में धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को लेकर एक नई बहस शुरू हुई और सांप्रदायिक दंगे भड़के।
- 🕊️ राजीव गांधी की हत्या (मई 1991): चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में लिट्टे (LTTE) के आतंकवादियों ने आत्मघाती बम हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव आया और पी. वी. नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने।
🤝 2. गठबंधन की राजनीति का युग (The Era of Coalitions)
1989 के चुनावों के बाद से भारत में एक लंबा दौर (1989 से 2014 तक) शुरू हुआ, जहाँ केंद्र में किसी भी एक राजनीतिक दल को लोकसभा में स्पष्ट पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इसके कारण गठबंधन सरकारों का युग प्रारंभ हुआ।
- 🏢 राष्ट्रीय मोर्चा (National Front - 1989): जनता दल और कुछ क्षेत्रीय दलों ने मिलकर राष्ट्रीय मोर्चा बनाया। इसे v. पी. सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए भाजपा (BJP) और वामपंथ (Left Front) दोनों ने बाहर से (आपसी वैचारिक मतभेदों के बावजूद) केवल 'कांग्रेस विरोध' के नाम पर समर्थन दिया था।
- 🛡️ संयुक्त मोर्चा (United Front - 1996): 1996 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए एक नया गठबंधन बना, जिसे कांग्रेस और वामपंथियों ने बाहर से समर्थन दिया।
🏛️ दो बड़े राष्ट्रीय गठबंधन (National Coalitions):
समय के साथ भारतीय राजनीति दो बड़े राष्ट्रीय ध्रुवों (गठबंधनों) में सिमट गई:
- 🥇 NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन / राजग): इसका नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) करती है। इसकी पहली स्थाई सरकार 1998-1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी।
- 🥈 UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन / संप्रग): इसका नेतृत्व कांग्रेस (INC) करती है। इसके तहत 2004 से 2014 तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में लगातार दो बार सरकार चली।
🌾 3. मण्डल आयोग और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का राजनीतिक उत्थान
- OBC का अर्थ: अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes) के अंतर्गत वे अनुसूचित जातियां या जनजातियां शामिल नहीं हैं, बल्कि वे हिंदू व गैर-हिंदू जातियां शामिल हैं जो शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई हैं।
- 🏢 मण्डल आयोग (Mandal Commission - 1979): जनता पार्टी सरकार ने 1979 में बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल (B.P. Mandal) की अध्यक्षता में 'द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया।
- प्रमुख सिफारिशें (1980): आयोग ने देश की पिछड़ी जातियों की पहचान की और सिफारिश की कि केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।
- 🚀 लागू होना (अगस्त 1990): राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह ने मंडल आयोग की इस 27% आरक्षण की सिफारिश को देश में लागू करने की घोषणा कर दी।
- विरोध और 'इंदिरा साहनी केस': इस फैसले के खिलाफ उत्तर भारत के शहरों में छात्रों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किए (मण्डल विरोधी आंदोलन)। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जिसे 'इंदिरा साहनी वाद' (1992) कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस 27% आरक्षण के फैसले को संवैधानिक रूप से वैध और सही ठहराया।
🕌 4. सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और अयोध्या विवाद
1980 के दशक के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने के लिए 'हिंदुत्व' और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्रमुखता दी।
- शाह बानो मामला (1985): एक 62 वर्षीय तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाह बानो के गुजारे भत्ते के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया। रूढ़िवादी मुसलमानों के विरोध के आगे झुककर राजीव गांधी सरकार ने संसद में कानून बदलकर इस फैसले को पलट दिया, जिसकी भाजपा और बुद्धिजीवियों ने तीव्र आलोचना की और इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' का नाम दिया।
- 🧱 अयोध्या विवाद और रथ यात्रा: अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक एक विशाल 'रॉथ यात्रा' निकाली, जिसने देश की राजनीति का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर दिया।
- 💥 बाबरी मस्जिद विध्वंस (6 दिसंबर 1992): कारसेवकों के एक विशाल समूह ने अयोध्या में स्थित विवादास्पद बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहा दिया। इसके कारण पूरे देश (विशेषकर मुंबई) में भयानक सांप्रदायिक दंगे भड़के। उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह (BJP) सरकार को बर्खास्त कर दिया गया और देश में धर्मनिरपेक्षता की बुनियादी पहचान पर एक बड़ा संकट खड़ा हुआ।
🤝 5. राजनीतिक सहमति का उदय (A New Consensus)
1990 के दशक की भयानक राजनीतिक उथल-पुथल, दंगों और गठबंधन की अस्थिरताओं के बावजूद, 2000 के दशक तक आते-आते भारत के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच चार बड़े मुद्दों पर एक 'मजबूत राजनीतिक सहमति' का उदय हुआ:
- नई आर्थिक नीतियों पर सहमति: यद्यपि कई दल आर्थिक सुधारों (LPG) का दिखावे के लिए विरोध करते हैं, लेकिन केंद्र या राज्य की सत्ता में आने पर सभी दल इन नीतियों को कड़ाई से लागू करते हैं।
- पिछड़ी जातियों के राजनीतिक दावे की स्वीकृति: देश के सभी दलों ने स्वीकार कर लिया है कि शासन और राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को उचित आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना अनिवार्य है।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका की स्वीकार्यता: राष्ट्रीय दलों (BJP और कांग्रेस) ने मान लिया है कि क्षेत्रीय दलों के सहयोग के बिना केंद्र में एक मजबूत और स्थाई सरकार चलाना अब नामुमकिन है।
- विचारधारा के स्थान पर कार्य-साधकता (Pragmatism): अब गठबंधन सरकारें किसी कठोर राजनीतिक विचारधारा (जैसे साम्यवाद या समाजवाद) के आधार पर नहीं बनतीं, बल्कि वे सत्ता प्राप्ति और व्यावहारिक साझा कार्यक्रमों (Minimum Common Programme) के आधार पर काम करती हैं।
🎯 क्विक टेस्ट: खुद को परखें! (Self-Assessment)
चलिए देखते हैं इस अंतिम और ऐतिहासिक अध्याय से आपने कितना सीखा! नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने मन में सोचें:
- केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण की सिफारिश करने वाले 'द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग' के अध्यक्ष कौन थे?
- वर्ष 1990 में किस प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को देश में लागू करने की घोषणा की थी?
- अयोध्या विवाद के समय वर्ष 1992 में उत्तर प्रदेश में किस राजनीतिक दल की सरकार थी जिसे ढांचा ढहने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था?
- भाजपा (BJP) के नेतृत्व में बने राष्ट्रीय स्तर के बड़े राजनीतिक गठबंधन को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
👀 सही उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:
- बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल (B.P. Mandal - मंडल आयोग)
- विश्वनाथ प्रताप सिंह (V. P. Singh)
- भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री: कल्याण सिंह)
- NDA (National Democratic Alliance / राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन - राजग)
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