🧳 अध्याय 2: प्रवास - प्रकार, कारण और परिणाम (Migration: Types, Causes and Consequences)
यह NCERT कक्षा 12 की द्वितीय पुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के दूसरे अध्याय का एक संपूर्ण, सरल और परीक्षा-उपयोगी (CBSE, CUET, BSEB/बिहार बोर्ड, SCERT) वन-शॉट डिजिटल नोट्स है।

📌 1. प्रवास (Migration) का बुनियादी परिचय
- प्रवास क्या है?: जब कोई व्यक्ति या जनसमूह अपने मूल निवास स्थान को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर स्थायी या अस्थायी रूप से जाकर रहने लगता है, तो इस प्रक्रिया को प्रवास कहते हैं।
- 📊 जनगणना में प्रवास की गणना: भारत की जनगणना में प्रवास की गणना दो मुख्य आधारों पर की जाती है:
- जन्म का स्थान (Place of Birth): यदि व्यक्ति का जन्म स्थान जनगणना वाले स्थान से भिन्न है।
- निवास का पिछला स्थान (Place of Last Residence): यदि व्यक्ति का पिछला निवास स्थान जनगणना के स्थान से अलग रहा हो।
🗺️ 2. प्रवास के प्रकार / धाराएँ (Streams of Migration)
भारत में प्रवास को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है:
A. आंतरिक प्रवास (Internal Migration)
देश की राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर होने वाले प्रवास को आंतरिक प्रवास कहते हैं। इसकी चार मुख्य धाराएँ होती हैं:
- ग्रामीण से ग्रामीण (Rural to Rural): यह मुख्य रूप से महिलाओं का प्रवास है, जिसका सबसे बड़ा कारण विवाह (Marriage) है।
- ग्रामीण से नगरीय (Rural to Urban): यह मुख्यतः पुरुषों का प्रवास है, जिसका मूल कारण रोजगार और आर्थिक अवसर की तलाश है।
- नगरीय से नगरीय (Urban to Urban): बेहतर नौकरियों और जीवन स्तर के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना।
- नगरीय से ग्रामीण (Urban to Rural): सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद या प्रदूषण से बचने के लिए शहरों से गाँवों की ओर लौटना।
B. अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International/External Migration)
एक देश से दूसरे देश में होने वाले जन-आवागमन को अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। इसके दो रूप हैं:
- उत्प्रवास (Emigration): भारत से बाहर दूसरे देशों (जैसे- USA, UAE, कनाडा) में जाकर बसना。
- आप्रवास (In-migration): पड़ोसी देशों (जैसे- बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान) से लोगों का भारत में आकर बसना。
🧲 3. प्रवास के कारण: प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक
लोग अपना मूल स्थान क्यों छोड़ते हैं? इन कारणों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
❌ A. प्रतिकर्ष कारक (Push Factors)
ये वे प्रतिकूल कारण हैं जो लोगों को अपना मूल स्थान छोड़ने पर मजबूर करते हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी और भूमि पर जनसंख्या का भारी दबाव।
- रोजगार के अवसरों की कमी (बेरोजगारी)。
- स्वास्थ्य, शिक्षा और मनोरंजन जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का अभाव।
- प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़ (जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान), सूखा (राजस्थान), चक्रवात या भूकंप।
- स्थानीय सामाजिक संघर्ष, दंगे, जातीय हिंसा या युद्ध।
✅ B. अपकर्ष कारक (Pull Factors)
ये वे अनुकूल अवसर हैं जो लोगों को नए गंतव्य स्थान (शहरों) की ओर आकर्षित करते हैं:
- शहरों में रोजगार के बेहतर और नियमित अवसर।
- नियमित काम और ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक वेतन / ऊँची मजदूरी।
- उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और उन्नत स्वास्थ्य (चिकित्सा) सुविधाएँ।
- बेहतर रहन-सहन की दशाएँ और सुरक्षित सामाजिक वातावरण।
- मनोरंजन के आधुनिक साधन。
📊 लिंग-आधारित प्रवृत्तियाँ (Gender Patterns): भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में 90% से अधिक महिला प्रवास का कारण विवाह है। इसके विपरीत, पुरुष प्रवास का मुख्य कारण आर्थिक और रोजगार संबंधी गतिविधियाँ हैं।
🔄 4. प्रवास के परिणाम (Consequences of Migration)
प्रवास का प्रभाव केवल गंतव्य स्थान पर ही नहीं, बल्कि उस स्थान पर भी पड़ता है जिसे लोग छोड़ते हैं। इसके मुख्य परिणाम निम्नलिखित हैं:
💰 A. आर्थिक परिणाम (Economic Consequences)
- हुंडियाँ / प्रेषित धन (Remittances): प्रवासियों द्वारा अपने घरों को भेजा गया धन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। इस धन का उपयोग कर्ज चुकाने, भोजन, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और कृषि निवेश में किया जाता है। (अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गई विदेशी मुद्रा देश के विकास में अहम भूमिका निभाती है)।
- चुनौती: बड़े शहरों (जैसे मुंबई, दिल्ली) पर जनसंख्या बढ़ने से अनौपचारिक रोजगार और संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है।
📉 B. जनसांख्यिकीय परिणाम (Demographic Consequences)
- जनसंख्या का पुनर्वितरण: देश के भीतर ग्रामीण से नगरीय प्रवास शहरों की आबादी बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता है।
- असंतुलन: आयु और कौशल के आधार पर चयनात्मक पुरुष प्रवास के कारण गाँवों में केवल वृद्ध, महिलाएं और बच्चे रह जाते हैं, जिससे ग्रामीण आयु-लिंग संरचना में भारी असंतुलन पैदा हो जाता है (जैसे- उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के गाँवों में)।
🌱 C. सामाजिक परिणाम (Social Consequences)
- सकारात्मक प्रभाव: प्रवासी अपने साथ नए विचार, तकनीक, परिवार नियोजन और बालिकाओं की शिक्षा जैसी नवीन सोच लेकर गाँवों में लौटते हैं, जिससे समाज में आधुनिकता आती है। इससे विभिन्न संस्कृतियों का सम्मिश्रण (Intermixing) होता है।
- नकारात्मक प्रभाव: अपरिचित शहरों में रहने से लोगों में एकाकीपन (Anonymity) और हीनभावना पैदा होती है, जो कभी-कभी उन्हें अपराध, चोरी या नशीली दवाओं के सेवन जैसी असामाजिक गतिविधियों की ओर ढकेल देती है।
🏗️ D. पर्यावरणीय परिणाम (Environmental Consequences)
- ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर अनियंत्रित प्रवास के कारण नगरों में सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ता है。
- इसके परिणामस्वरूप शहरों में गंदी बस्तियों / झुग्गी-झोपड़ियों (Slums) का अनियोजित विकास होता है।
- प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से वायु प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और भूजल की कमी जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं。
🎯 क्विक टेस्ट: खुद को परखें! (Self-Assessment)
चलिए देखते हैं इस डिजिटल नोट से आपने कितना सीखा! नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने मन में सोचें:
- भारत में ग्रामीण से ग्रामीण (Rural to Rural) प्रवास की धारा में किस वर्ग (पुरुष या महिला) का वर्चस्व सर्वाधिक है?
- सूखा, बाढ़ और महामारी प्रवास के किस कारक (Factor) के प्रमुख उदाहरण हैं?
- प्रवासियों द्वारा अपने मूल स्थान या परिवार को भेजा जाने वाला धन (पैसा) तकनीकी भाषा में क्या कहलाता है?
- भारतीय जनगणना के इतिहास में किस वर्ष की जनसांख्यिकी को 'महान विभाजक वर्ष' माना जाता है?
👀 सही उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:
- महिला वर्ग (मुख्य कारण: विवाह)
- प्रतिकर्ष कारक (Push Factors)
- हुंडियाँ या प्रेषित धन (Remittances)
- वर्ष 1921 (पिछले अध्याय के पुनरावलोकन से)
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