🗺️ अध्याय: भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास (Planning and Sustainable Development in Indian Context)
यह NCERT कक्षा 12 की द्वितीय पुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के महत्वपूर्ण अध्याय का एक संपूर्ण, सरल और परीक्षा-उपयोगी (CBSE, CUET, BSEB/बिहार बोर्ड, SCERT, UPSC/State PCS) वन-शॉट डिजिटल नोट्स है।

📌 1. नियोजन (Planning) क्या है?
- मूल संकल्पना: आर्थिक विकास के लिए सोच-विचार कर लक्ष्यों को निर्धारित करना तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए देश के संसाधनों का उचित उपयोग करने की प्रक्रिया को नियोजन (Planning) कहते हैं।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में स्वतंत्रता के बाद नियोजन का कार्य योजना आयोग (Planning Commission) को सौंपा गया था, जो पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) तैयार करता था।
- 💡 वर्तमान स्थिति: 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog - National Institution for Transforming India) का गठन किया गया है, जो सरकार के 'थिंक टैंक' के रूप में कार्य करता है।
📊 नियोजन के दो मुख्य रूप (Approaches to Planning):
- खंडीय नियोजन (Sectoral Planning): इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे- कृषि, उद्योग, परिवहन, ऊर्जा, निर्माण आदि) के विकास के लिए योजनाएँ बनाई जाती हैं।
- प्रादेशिक नियोजन (Regional Planning): इसका उद्देश्य देश के सभी क्षेत्रों के बीच के आर्थिक और सामाजिक विकास के अंतर (प्रादेशिक असमानता) को कम करना है। इसके तहत पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
⛰️ 2. लक्षित क्षेत्र नियोजन (Target Area Planning)
आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए प्रादेशिक नियोजन के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम चलाए गए, जिन्हें 'लक्षित क्षेत्र नियोजन' कहा जाता है:
- प्रमुख कार्यक्रम: कमान क्षेत्र विकास कार्यक्रम (CADP), सूखा संभावित क्षेत्र विकास कार्यक्रम (DPAP), पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (HADP) और मरुस्थल विकास कार्यक्रम (DDP)।
- 🎯 उद्देश्य: इन क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे (सड़क, जल, शिक्षा) का विकास करना ताकि वहाँ के लोगों का जीवन स्तर सुधरे।
🏔️ केस स्टडी 1: पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (HADP - भरमौर जनजाति क्षेत्र)
- अवस्थिति: यह हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले की पाँच तहसीलों में से एक है, जहाँ 'गद्दी' (Gaddi) नामक अनुसूचित जनजाति निवास करती है। यहाँ की जलवायु अत्यंत कठोर है और आधारभूत ढाँचा बहुत पिछड़ा हुआ था।
- विकास योजना (1970 का दशक): भरमौर को समन्वित जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) के तहत शामिल किया गया।
- सकारात्मक परिणाम:
- परिवहन (सड़कों), पेयजल, बिजली और स्कूलों का तेजी से विकास हुआ।
- गद्दी जनजाति के लोगों के साक्षरता स्तर में भारी सुधार हुआ (विशेष रूप से महिला साक्षरता बढ़ी)।
- कृषि के पारंपरिक तरीकों में बदलाव आया और दलहन (दालों) व नकदी फसलों (फलों) के उत्पादन को बढ़ावा मिला।
- मौसमी प्रवास (ऋतुप्रवास) की प्रवृत्ति में कमी आई।
💧 3. सततपोषणीय विकास (Sustainable Development)
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1960 के दशक तक विकास का अर्थ केवल 'आर्थिक वृद्धि' (GDP) माना जाता था। लेकिन पर्यावरण के नुकसान और असमानता के कारण विकास की नई संकल्पना आई।
- 🌎 ब्रंडलैंड रिपोर्ट (Brundtland Report - 1987): संयुक्त राष्ट्र के विश्व पर्यावरण और विकास आयोग (WCED) ने 'अवर कॉमन फ्यूचर' (Our Common Future) नाम से रिपोर्ट जारी की।
- सर्वोत्तम परिभाषा: सततपोषणीय विकास वह विकास है "जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को आने वाली भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए बिना पूरा करता है।" अर्थात पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना विवेकपूर्ण विकास करना।
🌾 केस स्टडी 2: इंदिरा गांधी नहर (नहर कमान क्षेत्र)
यह भारत के संदर्भ में सततपोषणीय विकास और पर्यावरण नियोजन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- बुनियादी परिचय: पहले इसे 'राजस्थान नहर' कहा जाता था। यह भारत के सबसे बड़े नहर तंत्रों में से एक है। इसकी शुरुआत पंजाब में सतलुज और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज से होती है।
- विस्तार: यह मुख्य रूप से राजस्थान के शुष्क और मरुस्थलीय जिलों (जैसे- बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर) में जलापूर्ति करती है।
🔄 नहर का प्रभाव (कृषि और पर्यावरण पर):
- सकारात्मक प्रभाव:
- मरुस्थल की सूखी भूमि को पर्याप्त जल मिलने से वह हरी-भरी हो गई।
- वनीकरण (पेड़ लगाने) और चरागाहों के विकास से मृदा अपरदन (मिट्टी का कटना) रुका।
- जिन क्षेत्रों में पहले केवल चना और बाजरा जैसी शुष्क फसलें होती थीं, वहाँ अब चावल, कपास, गेहूँ और गन्ना जैसी जल-गहन नकदी फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन होने लगा (कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हुई)।
- नकारात्मक प्रभाव (पारिस्थितिक समस्याएँ):
- अत्यधिक और अनियंत्रित सिंचाई के कारण मरुस्थलीय क्षेत्रों में जलभराव (Waterlogging) की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई।
- मिट्टी में लवणीकरण (Salinisation) और क्षारीयता बढ़ने लगी, जिससे कुछ क्षेत्रों में भूमि बंजर होने की कगार पर पहुँच गई।
🌿 5. इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में सततपोषणीय विकास के उपाय
NCERT के अनुसार, इस क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने और सतत विकास को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित 7 सूत्रीय उपाय अपनाए जाने चाहिए (UPSC & Board Long Answers के लिए अति महत्वपूर्ण):
- जल प्रबंधन: सिंचाई के लिए केवल जल-गहन तकनीकों के स्थान पर फव्वारा (Sprinkler) और टपकन (Drip Irrigation) प्रणाली को कड़ाई से लागू करना।
- फसल प्रारूप में बदलाव: किसानों को चावल और गन्ने जैसी अत्यधिक पानी चाहने वाली फसलों के स्थान पर खट्टे फल, चारे की फसलें और बागवानी को अपनाना चाहिए।
- कमान क्षेत्र का विकास: नहर के किनारों को पक्का करना और जल के रिसाव (Seepage) को रोकना।
- वनीकरण और वृक्षारोपण: मरुस्थल के प्रसार को रोकने के लिए हवा की दिशा के समकोण पर वृक्षों की रक्षक मेखला (Shelterbelts) बनाना।
- भूमि सुधार: जलभराव और लवणीय भूमि के उपचार के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करना।
- साझा संपत्ति संसाधन का विकास: आर्थिक रूप से कमजोर चरवाहों के लिए सामाजिक और पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- वित्तीय सहायता: गरीब और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने के लिए ऋण और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
🎯 क्विक टेस्ट: खुद को परखें! (Self-Assessment)
चलिए देखते हैं इस डिजिटल नोट से आपने कितना सीखा! नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने मन में सोचें:
- भारत में योजना आयोग (Planning Commission) के स्थान पर गठित की गई नई संस्था का नाम क्या है?
- 'अवर कॉमन फ्यूचर' (Our Common Future) नामक रिपोर्ट किस वर्ष जारी की गई थी, जिसने सतत विकास को परिभाषित किया?
- इंदिरा गांधी नहर की शुरुआत पंजाब में किन दो नदियों के संगम पर बने 'हरिके बैराज' से होती है?
- हिमाचल प्रदेश के भरमौर क्षेत्र में मुख्य रूप से कौन सी अनुसूचित जनजाति निवास करती है?
👀 सही उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:
- नीति आयोग (NITI Aayog - 1 जनवरी 2015)
- वर्ष 1987 (ब्रंडलैंड रिपोर्ट के तहत)
- सतलुज और ब्यास नदी
- गद्दी (Gaddi) जनजाति
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