BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 19 Summary in Hindi
📜 Page 1 (अनुच्छेद 1, 2 और 3) 🕉️ Original Sanskrit Text जागरण-गीतम् जागृष्व उत्तिष्ठ तत्परो भव ते लक्ष्यमार्ग आवाहयति । लोकोऽयं सहसा प्रेरयति । भेरी नादम् उच्चारयति। सत्यं, ध्येयं दूरेऽस्माकं, साहसमपि नहि न्यूनम् अस्ति। सङ्गे मित्राणि बहूनि पथि, चरणेषु तथाङ्गदबलमस्ति। भस्मीकर्तुम् स्वर्णिम लङ्कां, स अग्नियुतस्तु समायाति ॥ 🌼 Simple Hindi Translation जागरण-गीत (जगाना या चेतना फूंकने वाला गीत) हे मनुष्य! जाग जाओ, उठो और (अपने कर्तव्य के प्रति) तत्पर (तैयार) हो जाओ, तुम्हारा लक्ष्य का मार्ग तुम्हें पुकार रहा है । यह संसार तुम्हें अचानक (आगे बढ़ने की) प्रेरणा दे रहा है और रणभेरी (युद्ध का नगाड़ा) अपना गंभीर नाद (ध्वनि) गूँजा रही है। यह सच है कि हमारा ध्येय (मंजिल) हमसे दूर है, लेकिन हमारा साहस भी थोड़ा सा भी कम नहीं है । रास्ते में हमारे साथ बहुत से मित्र हैं और हमारे चरणों में अंगद जैसा अटूट बल (स्थिरता और शक्ति) है। सोने की लंका को भस्म करने के लिए, वह (हनुमान जी की भाँति) अग्नि से युक्त होकर आगे आ रहा है। 📖 Word Meanings जागृष्व — जाग जाओ / सचेत हो जाओ तत्परः भव — तैयार हो ...
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Guddu Kumar