BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 22 Summary in Hindi
📜 Page 1 (अनुच्छेद 1, 2 और 3) 🕉️ Original Sanskrit Text पाठ-22 प्रियं भारतम् राजतां मे मनसि नः प्रियं भारतम्। द्योतितं तत्स्वरूपं लसतु शाश्वतम्। मेखला विन्ध्यगोदावरी-जाह्नवी मस्तकं हिमगिरिः सागरो नूपुरम् ॥ राजतां मे…………… शिविदधीचिप्रभृतिभिस्तथा सेवितम् चन्द्रशेखर-भगतसिंह-विस्मिल प्रियम्। गान्धिना यत् प्रदत्तं स्वकं जीवनम् प्राणसर्वस्वदानैः कृतार्थीकृतम्॥ राजतां मे…………… स्वप्नदर्शि-प्रजातन्त्र-सम्पोषकम् विश्वनेतृप्रियं नेहरूपण्डितम्। शास्त्रि राजेन्द्र-अब्दुलहमीदादिकम् पुत्रजातं च लब्ध्वातिदर्पान्वितम्।। राजतां मे……………. 🌼 Simple Hindi Translation पाठ-22: प्रिय भारत हमारा यह प्रिय भारत देश मेरे मन में सदा सुशोभित रहे (राजताम्) । इसका प्रकाशमान दिव्य स्वरूप हमेशा ( शाश्वतम् ) चमकता रहे। विंध्याचल पर्वतमाला, गोदावरी और गंगा ( जाह्नवी ) नदियां जिसकी करधनी ( मेखला ) हैं, हिमालय पर्वत जिसका मस्तक (मुकुट) है और विशाल महासागर जिसके चरणों के घुँघरू ( नूपुरम् ) हैं, वह प्रिय भारत मेरे मन में सुशोभित रहे। यह वही भूमि है जो राजा शिपि और महर्षि दधीचि जैसे महान त्यागियों द्वारा ...
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Guddu Kumar