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BSEB Class 11 Home Science Chapter 16 Notes: वस्त्र तन्तु

🧵 वस्त्र तन्तु (Textile Fibres): पूर्ण डिजिटल नोट्स एवं सारांश

यह शार्ट, आकर्षक और समझने में आसान मास्टर-नोट्स BSEB (Bihar Board), SCERT, SBTE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, State Exams) के गृह विज्ञान (Home Science) पाठ्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं।


📌 1. परिचय एवं तन्तु का अर्थ (Meaning of Fibre)

  • मूलभूत इकाई: वस्त्र निर्माण सामग्री की सबसे छोटी, सूक्ष्म और प्राथमिक इकाई को तन्तु या रेशा (Fibre) कहते हैं। उत्तम वस्त्र के निर्माण के लिए उत्तम तन्तु का होना अनिवार्य है।
  • निर्माण चक्र: अनेक सूक्ष्म तन्तुओं को मिलाकर कताई द्वारा धागा (Sूत) बनता है और तैयार धागे से बुनाई (Weaving) की प्रक्रिया द्वारा वस्त्र का निर्माण होता है।
  • महत्व: तन्तुओं से निर्मित वस्त्र हमें प्राकृतिक आपदाओं, सूर्य की तेज किरणों, संक्रमण (Infection) और अग्नि से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

⚡ 2. वस्त्र तन्तुओं का वर्गीकरण (Classification of Fibres)

प्राप्ति के स्रोतों के आधार पर तन्तुओं को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

वस्त्र तन्तु (Fibres)│┌──────────────────────────┴──────────────────────────┐प्राकृतिक तन्तु (Natural)                             कृत्रिम तन्तु (Artificial)│                                                     │├─ वानस्पतिक (सूत, लिनन, जूट, हेम्प)                  ├─ मानवकृत रेशे (रेयॉन)├─ प्राणिज्य/प्रोटीन (ऊन, रेशम)                       └─ रासायनिक रेशे (नायलॉन, पोलिएस्टर)└─ खनिज तन्तु (सोना-चाँदी के तार, जरी)

🌾 3. प्राकृतिक तन्तु (Natural Fibres)

(अ) वानस्पतिक तन्तु (Cellulose Fibres) - पौधों से प्राप्त

  1. सूत / कपास (Cotton): यह कपास के पौधे के बीजों से प्राप्त होता है। इसके संगठन में 90% सेल्यूलोज तथा 10% मोम व खनिज होते हैं। सूत उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
    • भौतिक गुण: इसके रेशे 1 से 5 सेमी लंबे होते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इसमें प्राकृतिक ऐंठन (Natural Twist) दिखाई देती है जो इसे मजबूती देती है। इसमें लचीलापन कम होता है, अतः सिलवटें जल्दी पड़ती हैं।
    • विशेषता: यह नमी सोखने में उत्तम है, इसलिए गर्म प्रदेशों (गर्मियों) के लिए सर्वोत्तम है। गीली अवस्था में इसकी मजबूती और बढ़ जाती है। यह उच्च ताप सह सकता है, इसलिए इस पर गर्म इस्तिरी (Ironing) की जा सकती है।
    • रासायनिक गुण: इस पर हल्के क्षारों (जैसे कास्टिक सोडा) का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन सान्द्र अम्लों से रेशा नष्ट हो जाता है। इसे सोडियम हाइपोक्लोराइड द्वारा ब्लीच किया जा सकता है।
  2. लिनन (Linen): यह फ्लाक्स (Flax) नामक पौधे के तने से प्राप्त होता है। इसमें हाथों का श्रम अधिक होने के कारण यह महँगा होता है।
    • गुण: मजबूती में इसका रेशम के बाद दूसरा स्थान है। यह ताप का उत्तम संवाहक (Cool) है। यह नमी को बहुत तेजी से सोखता और सुखाता है, इसलिए तौलिए, नैपकिन और रूमाल के लिए सर्वोत्तम है। सूत की तरह इस पर भी फफूंदी जल्दी लगती है।
  3. जूट (Jute) व हेम्प (Hemp): जूट के पौधे के तने को पानी में फुलाकर रेशा निकाला जाता है। यह पीले रंग का, चमकदार और कोमल होता है, जिससे बोरे, टाट, दरियाँ और हस्तशिल्प की वस्तुएं बनती हैं। हेम्प का मुख्य उपयोग कागज उद्योग, कालीन और जूतों के तले बनाने में होता है।

(ब) प्राणिज्य तन्तु (Protein Fibres) - जीव-जन्तुओं से प्राप्त

  1. ऊन (Wool): यह मुख्यतः भेड़ों के बालों से प्राप्त एक प्रोटीन तन्तु है।
    • गुण: इसकी लंबाई 1 से 3 इंच होती है और यह सभी रेशों में सबसे कमजोर होता है। इसमें प्रत्यास्थता (Elasticity) और प्रतिस्कन्दता (Resilience) का गुण कूट-कूट कर भरा होता है (दबाने या खींचने पर वापस पुराने आकार में आ जाता है)।
    • सावधानी: यह ताप का कुचालक है, इसलिए सर्दियों के लिए उत्तम है। तीव्र क्षार और सल्फ्यूरिक अम्ल से यह रेशा पूरी तरह गल/नष्ट हो जाता है। ऊनी वस्त्रों को कीड़े बहुत जल्दी नष्ट कर देते हैं
  2. रेशम (Silk): यह शहतूत के पेड़ों पर पलने वाले रेशम के कीड़े (बॉम्बिक्स मोराई / Bombyx mori) के कोकून (Cocoon) से प्राप्त होता है। कीड़ा जब प्यूपा अवस्था में होता है, तो उसकी ग्रंथियों से लसदार लार निकलती है जो हवा के संपर्क में आकर महीन कड़ा तार बन जाती है।
    • गुण: यह समस्त प्राकृतिक रेशों में सबसे लम्बा और सबसे मजबूत रेशा है। यह प्रोटीन युक्त और ताप का बुरा संवाहक है। तीव्र क्षार, अम्ल और तेज धूप से इसकी चमक नष्ट हो जाती है।

(स) खनिज तन्तु (Mineral Fibres)

  • प्राचीन काल से राजा-महाराजाओं के वस्त्रों को सजाने के लिए सोने और चाँदी के अविरल तारों का प्रयोग किया जाता था, जिन्हें जरी या गोटा कहते हैं। आधुनिक समय में चांदी के तारों को काला पड़ने से बचाने के लिए एल्युमिनियम के वर्क पर पोलिएस्टर की स्वच्छ परत चढ़ाई जाती है, जिसे मैलार (Mylar) कहते हैं।

🧪 4. कृत्रिम तन्तु (Artificial Fibres)

(अ) मानवकृत रेशा - रेयॉन (Rayon)

  • परिभाषा: रेयॉन वह मानव निर्मित रेशा है जिसमें कच्ची सामग्री के रूप में प्राकृतिक सेल्यूलोज (जैसे— बाँस की लुग्दी और कपास) का प्रयोग करके रासायनिक प्रक्रिया (कास्टिक सोडा + कार्बन डाई ऑक्साइड + गंधक का अम्ल) द्वारा स्पिनरेट के छिद्रों से अविरल धागा निकाला जाता है। इसे बनाने में विस्कोस विधि का सर्वाधिक प्रयोग होता है।
  • कमी: गीली अवस्था में रेयॉन अत्यंत कमजोर हो जाता है और अपनी 70% शक्ति खो देता है। तीव्र ताप पर यह पिघल जाता है और अम्ल से नष्ट हो जाता है।

(ब) रासायनिक रेशा - नायलॉन (Nylon)

  • निर्माण: यह पूर्णतः रासायनिक रेशा है जिसे हेक्सामेथिलीन डायमीन तथा एडिपिक एसिड के संयोग से ऑटोक्लेव में गर्म करके (लीनर सुपर पॉलीमर चेन बनाकर) तैयार किया जाता है।
  • विशेषताएँ: इसमें नमी सोखने की क्षमता का पूरी तरह अभाव होता है, जिससे यह बहुत जल्दी सूखता है। यह अत्यधिक मजबूत और टिकाऊ होता है। इस पर रगड़ या सामान्य क्षारीय साबुनों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। यह ताप पर पिघल जाता है।

(स) पोलिएस्टर रेशा (Polyester / Terylene)

  • इसे टेरीलीन भी कहा जाता है, जिसकी खोज सर्वप्रथम डू-पोंट की अनुसंधान संस्था में हुई थी। इसके रासायनिक संगठन में 85% कार्बोॉक्सिलिक अम्ल होता है।
  • गुण: यह नायलॉन की तरह चिकना, सीधा और अत्यधिक अपघर्षक रोधी होता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें एक बार हीट सेट करने के बाद क्रीज (कड़क स्त्री) और प्लेट्स लंबे समय तक टिकी रहती हैं। धूप के प्रति अच्छी प्रतिरोधकता के कारण यह परदों के लिए सर्वश्रेष्ठ कपड़ा है।

👔 5. मिश्रित वस्त्र (Blended Fabrics)

जब दो या दो से अधिक अलग-अलग प्रकार के तन्तुओं (प्राकृतिक + कृत्रिम) को मिलाकर धागा और वस्त्र बनाया जाता है, तो उसे मिश्रित वस्त्र कहते हैं। इसके ३ प्रमुख उदाहरण हैं:

  1. 👕 टेरीकॉट (Terrycot): यह पोलिएस्टर (65%) तथा कपास/सूत (35%) का मिश्रण है। सूत के कारण इसमें नमी सोखने की क्षमता शुद्ध पोलिएस्टर से अधिक होती है और इसकी रंगाई-धुलाई व इस्तरी करना बेहद सरल होता है।
  2. 👗 टेरीसिल्क (Terry Silk): यह पोलिएस्टर और रेशम (Silk) के तन्तुओं का मिश्रण है। यह शुद्ध रेशम से अधिक मजबूत, टिकाऊ और सस्ता होता है, इसमें सिलवटें कम पड़ती हैं और कीड़े या फफूंदी लगने का कोई भय नहीं होता।
  3. 🧥 टेरीवूल (Terry Wool): यह पोलिएस्टर और ऊन (Wool) का मिश्रण है (सामान्यतः 65:35 के अनुपात में)। यह शुद्ध ऊनी कपड़ों से अधिक मजबूत, हल्का और सस्ता होता है। ऊन के कारण इसकी ज्वलनशीलता कम हो जाती है और इस्तरी करने पर इस पर टिकाऊ क्रीज बनती है। इसे कीड़ों से बचाने के लिए अत्यधिक तामझाम की जरूरत नहीं होती।

💡 टिप और ट्रिक (Exam Tips & Tricks)

  • TRICK-1 (मिश्रण का गणित): परीक्षा में 'टेरी' शब्द का मतलब हमेशा पोलिएस्टर समझें।
    • टेरी + कॉट = पोलिएस्टर + कॉटन (कपास)
    • टेरी + सिल्क = पोलिएस्टर + रेशम
    • टेरी + वूल = पोलिएस्टर + ऊन
  • BSEB Exam Point 1: सूती (कपास) के रेशे को माइक्रोस्कोप से देखने पर उसमें प्राकृतिक ऐंठन (Convolutions) दिखाई देती है, जो इसे कताई के समय प्राकृतिक मजबूती प्रदान करती है।
  • BSEB Exam Point 2: रेशम का कीड़ा पालने की कला को सेरीकल्चर (Sericulture) कहते हैं, और इसके सबसे उच्च कोटि के कीड़े का वैज्ञानिक नाम बॉम्बिक्स मोराई (Bombyx mori) है।
  • BSEB Exam Point 3: रेयॉन का संकट: रेयॉन को कभी भी गीला करके ज्यादा रगड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि यह पानी में भीगने पर अपनी 70% ताकत खो देता है और टूट सकता है।

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

वस्त्र तन्तु हमारे परिधान विज्ञान की वो अदृश्य बुनियाद हैं जिनके गुणों पर ही अंतिम वस्त्र का टिकाऊपन, आराम और मूल्य निर्भर करता है। परीक्षाओं के दृष्टिकोण से कपास की संरचना (90% सेल्यूलोज), प्राणिज्य रेशों के प्रकार (ऊन व रेशम), रेयॉन की विस्कोस विधि और मिश्रित वस्त्रों (टेरीकॉट, टेरीवूल) का संघटन सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु हैं।

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