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BSEB Class 11 Home Science Chapter 3: संक्रमण एवं प्रतिरक्षता

🦠 अध्याय 3: संक्रमण एवं प्रतिरक्षता (Infection & Immunity) — सम्पूर्ण नोट्स एवं सारांश

यह नोट्स बिहार बोर्ड (BSEB / SCERT) के कक्षा 11 गृह विज्ञान (Home Science) के तृतीय अध्याय के अनुसार तैयार किए गए हैं। इसे परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत सरल, रोचक और याद रखने योग्य बनाया गया है। 🎓


🌟 1. संक्रमण (Infection) क्या है?

  • अर्थ: स्वस्थ शरीर में विभिन्न रोगों के रोगाणुओं (जीवाणु या विषाणु) का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रवेश करना, वहाँ संख्या बढ़ाना (गुणन) और एक निश्चित अवधि के बाद रोग के लक्षण उत्पन्न करना संक्रमण कहलाता है।
  • संक्रामक बीमारियों का वर्गीकरण: इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
    1. संसर्गजनित रोग (Contagious Diseases): जो रोगी के सीधे संपर्क (Touch) में आने से फैलते हैं (जैसे— त्वचा के रोग, एड्स)।
    2. संक्रमित रोग (Infectious Diseases): जिनके जीवाणु विभिन्न माध्यमों (वायु, जल, भोजन) से स्वस्थ शरीर में पहुँचते हैं।

🛤️ 2. संक्रमण के माध्यम (Channels of Infection)

रोगाणु स्वस्थ व्यक्ति तक तीन मुख्य स्रोतों से पहुँचते हैं:

संक्रमण के माध्यम│┌──────────────────────┼──────────────────────┐▼                      ▼                      ▼मानवीय स्रोत            निर्जीव स्रोत          पराश्रयी जीव(Human Sources)      (Non-living Sources)    (Flies & Parasites)• श्वसन (खाँसने-छींकने)  • दूषित जल             • मक्खियाँ (हैजा, टाइफाइड)• आँत व मूत्र मार्ग     • संदूषित भोजन/दूध     • मच्छर (मलेरिया, डेंगू)• त्वचा (खरोंच/टिटनेस)  • सूखी धूल व गंदी हवा  • कृमि (गोल कृमि)• लार व रक्त संक्रमण   • रोगी के दूषित पदार्थ • चूहे, जूँ व खटमल

⏳ 3. संक्रामक रोग की विभिन्न अवस्थाएँ (Stages of Disease)

किसी रोगाणु के शरीर में प्रवेश करने से लेकर ठीक होने तक ६ मुख्य अवस्थाएँ होती हैं:

  1. सम्प्रति काल (Incubation Period): शरीर में जीवाणु के प्रवेश से लेकर रोग का पहला लक्षण प्रकट होने तक का समय।
  2. संक्रमण काल (Infection Period): जब बीमारी के सभी लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं।
  3. चरम सीमा (Period of Invasion): बीमारी की सबसे गंभीर/उग्र अवस्था जो कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है।
  4. सुधार की अवस्था (Decline Period): इलाज के बाद जीवाणुओं के विष का प्रभाव घटने लगता है और रोगी बेहतर महसूस करता है।
  5. बीमारी समाप्त होना (Convalescence): लक्षण समाप्त हो जाते हैं पर शरीर में अत्यधिक कमजोरी रहती है।
  6. आकृति (Relapse): कमजोरी की स्थिति में सही देखभाल न मिलने पर जीवाणुओं का पुनः हमला होना और बीमारी का दुबारा लौट आना।

🤒 4. प्रमुख संक्रामक रोग: कारण, लक्षण एवं उपचार

🔴 (A) खसरा (Measles) — वायु जनित

  • कारण: यह विषाणु (Virus) द्वारा बच्चों में फैलने वाला तीव्र रोग है।
  • सम्प्रति काल: 10 से 12 दिन (या 10-21 दिन)।
  • लक्षण: शुरुआत में सर्दी-जुकाम, आँखों का लाल होना और ४-५ दिन में मुँह व पूरे शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकलना।
  • बचाव: जन्म के 9वें महीने में खसरे का टीका अवश्य लगवाएं।

🫧 (B) छोटी चेचक (Chicken Pox) — वायु जनित

  • कारण: रोगी के कफ, थूक या दानों से निकलने वाले द्रव्य और पपड़ी द्वारा वायु के माध्यम से फैलता है।
  • लक्षण: हल्का बुखार, कँपकँपी और छाती, मुँह तथा पीठ पर सरसों के दाने के बराबर छोटे-छोटे दाने निकलना।
  • उपचार: दानों पर खुजली होने पर नारियल या चंदन का तेल लगाएं और सुपाच्य भोजन दें।

🦒 (C) डिफ्थीरिया या गलगोटू (Diphtheria)

  • कारण: यह क्लैब्स लिओअर बेसिलस जीवाणु द्वारा फैलता है जो गले/स्वर यंत्र में वृद्धि करते हैं।
  • लक्षण: तीव्र बुखार, गले में सूजन और श्वास नली में एक जाली (जाल) बन जाना जिससे दम घुटने लगता है।
  • बचाव/उपचार: बच्चों को जन्म के बाद D.P.T. का टीका लगवाएं। गंभीर स्थिति में नली द्वारा पेट में तरल भोजन पहुँचाया जाता है।

😮‍💨 (D) तपेदिक या क्षय रोग (Tuberculosis - T.B.)

  • कारण: यह ट्यूबरकुल बेसीलस (Mycobacterium tuberculosis) जीवाणु द्वारा फैलता है जो सूखी धूल में कई महीनों तक जीवित रह सकता है।
  • प्रकार: यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है— फेफड़े की टी.बी. (80% मामलों में), हड्डियों की टी.बी., गले की टी.बी. और आँतों की टी.बी.।
  • लक्षण: १ महीने से अधिक समय तक लगातार खाँसी, हल्का बुखार रहना, वजन कम होना और अंतिम अवस्था में बलगम या मल के साथ खून आना।
  • उपचार व बचाव: बी.सी.जी. (B.C.G.) का टीका लगवाएं। रोगी के भोजन में प्रोटीन की मात्रा सामान्य से दुगुनी होनी चाहिए।

💧 (E) हैजा (Cholera) — जल जनित महामारी

  • कारण: यह विब्रिओ कालरा (Vibrio Cholera) जीवाणु द्वारा दूषित जल और मक्खियों के माध्यम से फैलता है।
  • लक्षण: चावल के माड (पानी) जैसे पतले दस्त और लगातार उल्टियाँ होना, जिससे शरीर में जल की भारी कमी (निर्जलीकरण/Dehydration) हो जाती है। आँखें धँस जाती हैं और पेशाब बंद हो जाता है।
  • 🚨 जीवन रक्षक घोल (O.R.S.): निर्जलीकरण से बचाने के लिए ORS का घोल पिलाया जाता है। ३० ग्राम के एक पैकेट का संगठन इस प्रकार है:
    • सोडियम क्लोराइड (नमक): 3.5 ग्राम
    • पोटेशियम क्लोराइड: 1.5 ग्राम
    • सोडियम साइट्रेट: 2.9 ग्राम
    • डेक्सट्रोज (शर्करा): 20.0 ग्राम
  • बचाव टिप: खाली पेट रहने से आमाशय में एसिड (HCl) कम बनता है, जिससे हैजे के जीवाणु आसानी से हमला कर देते हैं; अतः महामारी के समय भूखे न रहें।

🌡️ (F) मियादी बुखार या मोतीझरा (Typhoid)

  • कारण: यह साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) जीवाणु द्वारा आँतों को प्रभावित करने वाला रोग है, जो दूषित पानी और भोजन से फैलता है।
  • लक्षण: बुखार लगातार बढ़ना (104°-105°F तक पहुँचना), जीभ का मध्य भाग सफेद और किनारे लाल होना, तथा दूसरे सप्ताह में पेट व छाती पर गुलाबी दाने निकलना।

🟡 (G) हेपेटाइटिस या पीलिया (Hepatitis / Jaundice)

यह यकृत (Liver) को प्रभावित करने वाला वायरस जनित रोग है, जो मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  1. हेपेटाइटिस 'ए' (Hepatitis A): दूषित पानी से फैलता है। भूख न लगना, उल्टी आना और त्वचा, आँख व पेशाब का रंग गहरा पीला होना इसके मुख्य लक्षण हैं। उपचार हेतु गन्ने या मौसमी का रस (फ्रक्टोज के लिए) और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन देना चाहिए।
  2. हेपेटाइटिस 'बी' (Hepatitis B): यह अधिक खतरनाक होता है। सही इलाज न मिलने पर यकृत खराब हो जाता है और पेट में पानी भर जाता है, जिसे लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) कहते हैं। इसके बचाव के लिए ३ खुराकों वाला टीका लगाया जाता है।

🛡️ 5. प्रतिरक्षता (Immunity) और इसके प्रकार

प्रतिरक्षता: शरीर की हानिकारक जीवाणुओं और रोगों से लड़ने की आंतरिक शक्ति या ताकत को प्रतिरक्षता क्षमता कहते हैं।

प्रतिरक्षता के प्रकार│┌────────────────────────┴────────────────────────┐▼                                                 ▼प्राकृतिक प्रतिरक्षता                              प्राप्त की गई प्रतिरक्षता(Natural Immunity)                                 (Acquired Immunity)(जो जन्म के साथ मिलती है)                         (जो जन्म के बाद अर्जित की जाती है)│                                                 │┌─────┴─────┐                                     ┌─────┴─────┐▼           ▼                                     ▼           ▼सामान्य      विशिष्ट                               सक्रिय      निष्क्रिय(सबमें)   (विशेष जाति में)                         (Active)    (Passive)│         (रेडीमेड सीरम द्वारा)┌─────────────┴─────────────┐▼                           ▼प्राकृतिक सक्रिय             कृत्रिम सक्रिय(एक बार रोग होने पर)         (टीकाकरण/Vaccination द्वारा)

💉 कृत्रिम सक्रिय प्रतिरक्षता के आधार (टीकों के प्रकार):

  1. जीवित शक्तिहीन जीवाणु से: जैसे— बी.सी.जी. (टी.बी. के लिए) और चेचक का टीका।
  2. मरे हुए जीवाणुओं से: जैसे— टाइफाइड, हैजा और रेबीज के टीके।
  3. जीव विष (Toxoid) द्वारा: जीवाणुओं के विषैले तत्वों को निष्क्रिय करके बनाए गए टीके, जैसे— डिफ्थीरिया और टिटनेस।

📅 6. राष्ट्रीय टीकाकरण तालिका (Vaccination Schedule)

बच्चों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए सही समय पर निम्नलिखित टीके लगाए जाते हैं:

उम्र / समयटीका (Vaccine)किस रोग से सुरक्षा
जन्म के २४ घंटे के भीतरबी.सी.जी. (B.C.G.)तपेदिक / क्षय रोग (T.B.)
1½ माह की आयु मेंD.P.T. (पहला) + पोलियो (1st) + हेपेटाइटिस बीडिफ्थीरिया, टिटनेस, काली खाँसी, पोलियो, पीलिया
2½ माह की आयु मेंD.P.T. (दूसरा) + पोलियो (2nd) + हेपेटाइटिस बीडिफ्थीरिया, टिटनेस, काली खाँसी, पोलियो, पीलिया
3½ माह की आयु मेंपोलियो (तीसरी खुराक) + हेपेटाइटिस बीपोलियो और हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा
9 से 12 माह की आयु मेंखसरे का टीकाखसरा (Measles)
15 से 18 माह की आयु मेंD.P.T. बूस्टर + पोलियो बूस्टर + MMRरोगों के प्रति दीर्घकालिक सुरक्षा
5 से 6 वर्ष की आयु मेंD.P.T. बूस्टर + पोलियो बूस्टर + टाइफाइडस्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा
10 एवं 16 वर्ष की आयु मेंटिटनेस का बूस्टर टीका + टाइफाइड बूस्टरटिटनेस और मियादी बुखार से सुरक्षा

📝 🎯 बिहार बोर्ड विशेष: परीक्षा उपयोगी बिंदु (Exam-Points)

  1. VVIP डायरेक्ट क्वेश्चन (BSEB 2014): ORS घोल के दो मुख्य घटकों के नाम लिखें। उत्तर: सोडियम क्लोराइड (नमक) और डेक्सट्रोज (शर्करा)।
  2. केस स्टडी आधारित प्रश्न: राधा को १ महीने से अधिक समय से खाँसी, वजन में कमी और हल्का बुखार है, उसे कौन सा रोग है? उत्तर: उसे तपेदिक (T.B.) है। देखभाल के नियम: उसे अलग हवादार कमरे में रखें, भोजन में प्रोटीन की मात्रा दुगुनी दें, और उसके कफ/बलगम को जलाकर नष्ट करें। बच्चों को बचाने के लिए जन्म के समय बी.सी.जी. (BCG) का टीका लगवाएं।
  3. ऑब्जेक्टिव स्पेशल: DPT का टीका किन तीन बीमारियों से बचाता है? उत्तर: D = Diphtheria (डिफ्थीरिया), P = Pertussis (काली खाँसी), T = Tetanus (टिटनेस)।
  4. महत्वपूर्ण परिभाषा: 'सम्प्रति काल' (Incubation Period) क्या है? उत्तर: शरीर में रोगाणु के प्रवेश से लेकर रोग के प्रथम लक्षण प्रकट होने के बीच की समय अवधि।

💡 याद रखने की ट्रिक (Tip-Trick)

💡 हैजा (Cholera) के लक्षण याद रखने की ट्रिक: "O-W-L"

  • O = Outflow (लगातार दस्त और उल्टी होना)
  • W = Water loss (शरीर में पानी की भारी कमी या निर्जलीकरण)
  • L = Low temperature (शरीर का तापमान सामान्य से कम या ठंडा पड़ना)

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

संक्रामक रोग हमारे अस्वच्छ वातावरण और रोगाणुओं के प्रसार के कारण फैलते हैं। इनसे बचने का सबसे प्रभावी हथियार टीकाकरण (Vaccination) और व्यक्तिगत स्वच्छता है। समय पर राष्ट्रीय टीकाकरण तालिका के अनुसार टीके लगवाकर हम बच्चों को इन जानलेवा बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।

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