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Class 11 Biology Chapter 13 Notes Hindi NCERT

अध्याय 13: उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis in Higher Plants)

प्रकाश-संश्लेषण एक भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया (Physico-chemical process) है, जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अकार्बनिक पदार्थों ( और ) से कार्बनिक भोजन (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं [1.1]। यह पृथ्वी पर जीवन का मुख्य आधार है क्योंकि यह संपूर्ण खाद्य शृंखला के लिए भोजन का निर्माण करता है और वायुमंडल में ऑक्सीजन () मुक्त करता है। NEET, CUET और सभी State Boards की परीक्षाओं में इस अध्याय के प्रकाशिक (Light) और अप्रकाशिक (Dark) चक्रों से गहरे वैचारिक प्रश्न पूछे जाते हैं।


🧪 1. ऐतिहासिक प्रयोग (Historical Experiments)

प्रकाश-संश्लेषण की गुत्थी को सुलझाने में कई वैज्ञानिकों के ऐतिहासिक प्रयोग शामिल हैं:

  • जोसेफ प्रीस्टले (Joseph Priestley - 1770): इन्होंने हवा को शुद्ध करने में पौधों की भूमिका को दर्शाया। इन्होंने खोजा कि जलती मोमबत्ती या चूहा हवा को दूषित करते हैं, परंतु जब एक पुदीने का पौधा (Mint plant) बेलजार में रखा जाता है, तो चूहा जीवित रहता है। इन्होंने 1774 में ऑक्सीजन () की खोज की
  • जैन इंजनहाउस (Jan Ingenhousz - 1779): इन्होंने साबित किया कि प्रकाश-संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है। इन्होंने जलीय पौधे के साथ दिखाया कि धूप में पौधे के हरे भागों के आस-पास छोटे-छोटे बुलबुले (ऑक्सीजन के) बनते हैं, अंधेरे में नहीं।
  • जूलियस वॉन सैक (Julius von Sachs - 1854): इन्होंने पहली बार प्रयोगात्मक प्रमाण दिया कि पौधे जब वृद्धि करते हैं, तो ग्लूकोज (Glucose) बनता है। यह ग्लूकोज आमतौर पर मंड (स्टार्च / Starch) के रूप में संचित होता है।
  • टी. डब्ल्यू. एंगेलमैन (T.W. Engelmann): इन्होंने क्लेडोफोरा (Cladophora) नामक हरी शैवाल को प्रिज्म द्वारा अलग किए गए प्रकाश के सतरंगी रंगों (VIBGYOR) में उगाया। इन्होंने देखा कि वायवीय जीवाणु (Bacteria) मुख्य रूप से नीले और लाल प्रकाश के क्षेत्र में एकत्र हुए। यह प्रकाश-संश्लेषण का पहला सक्रियता स्पेक्ट्रम (Action Spectrum) था।
  • कॉर्निलियस वैन नील (Cornelius van Niel) — ⭐ NEET का हॉट-शॉट पॉइंट: इन्होंने बैंगनी और हरे गंधक बैक्टीरिया (Sulfur bacteria) पर काम करके यह क्रांतिकारी निष्कर्ष दिया कि प्रकाश-संश्लेषण में निकलने वाली गैस जल () से आती है, न कि carbon dioxide () से। (बाद में रेडियोधर्मी समस्थानिकों का उपयोग करके इसकी पुष्टि की गई)।

🍏 2. प्रकाश-संश्लेषण कहाँ होता है और इसके वर्णक (Pigments)

  • हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट / Chloroplast): यह प्रकाश-संश्लेषण का वास्तविक केंद्र है। इसमें दो स्पष्ट भाग होते हैं:
    1. झिल्ली तंत्र (Grana / थाइलेकॉइड): यह प्रकाश ऊर्जा को सोखने और ATP व बनाने के लिए जिम्मेदार है (यहाँ प्रकाशिक अभिक्रिया होती है)।
    2. स्ट्रोमा (अधात्री): यहाँ एंजाइमों द्वारा को स्थिर करके शर्करा (ग्लूकोज) में बदला जाता है (यहाँ अप्रकाशिक अभिक्रिया होती है)।
  • प्रकाश-संश्लेषण में भाग लेने वाले 4 मुख्य वर्णक (Pigments): इन्हें पेपर क्रोमैटोग्राफी द्वारा अलग किया जा सकता है:
    • क्लोरोफिल-ए (): चमकीला या नीला-हरा (यह मुख्य वर्णक है जो रिएक्शन सेंटर बनाता है)।
    • क्लोरोफिल-बी (): पीला-हरा।
    • जैंथोफिल (Xanthophyll): पीला।
    • कैरोटीनॉयड (Carotenoids): पीला से नारंगी-पीला।
    • 🚨 नोट: , जैंथोफिल और कैरोटीनॉयड को सहायक वर्णक (Accessory pigments) कहते हैं। ये प्रकाश की विभिन्न तरंगदैर्ध्य को सोखकर ऊर्जा को मुख्य क्लोरोफिल-ए को सौंप देते हैं और क्लोरोफिल-ए को फोटो-ऑक्सीकरण (तीव्र प्रकाश में नष्ट होने) से बचाते हैं

☀️ 3. प्रकाशिक अभिक्रिया: इलेक्ट्रॉन परिवहन (Light Reaction)

प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction या photochemical phase) ग्रैना के थाइलेकॉइड में संपन्न होती है। इसमें दो प्रकाश तंत्र (Photosystems - PS I और PS II) भाग लेते हैं, जिनका नामकरण उनकी खोज के क्रम के आधार पर किया गया है। प्रत्येक प्रकाश तंत्र में एक लाइट हार्वेस्टिंग सम्मिश्र (LHC) होता है जिसमें सैकड़ों वर्णक अणु होते हैं।

  • PS II (प्रकाश तंत्र II): इसका रिएक्शन सेंटर क्लोरोफिल-ए के प्रकाश को सोखता है (इसलिए इसे P680 कहते हैं)।
  • PS I (प्रकाश तंत्र I): इसका रिएक्शन सेंटर क्लोरोफिल-ए के प्रकाश को सोखता है (इसे P700 कहते हैं)।

🔄 Z-स्कीम / अचक्रीय फोटो-फॉस्फोरिलीकरण (Non-cyclic Photophosphorylation)

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  1. जब PS II () पर प्रकाश गिरता है, तो इसके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर इलेक्ट्रॉन ग्राही द्वारा साइटोक्रोम सिस्टम के माध्यम से PS I तक पहुँचाए जाते हैं।
  2. जल का प्रकाश-अपघटन (Splitting of Water): PS II से निकले इलेक्ट्रॉनों की कमी को पूरा करने के लिए पानी का अणु टूट जाता है। यह क्रिया थाइलेकॉइड की भीतरी झिल्ली की तरफ होती है:(जल अपघटन के लिए मैंगनीज () और क्लोरीन () आयन अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं)
  3. इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला (ETS) में नीचे गिरते समय इस ऊर्जा से ATP बनता है।
  4. अंत में ये इलेक्ट्रॉन PS I से होते हुए के पास पहुँचते हैं, जहाँ वह अपचयित होकर बनाता है। इस पूरे रेडॉक्स पथ को इसके विशिष्ट आकार के कारण Z-स्कीम कहते हैं। इसमें ATP और दोनों बनते हैं।

🔄 चक्रीय फोटो-फॉस्फोरिलीकरण (Cyclic Photophosphorylation)

  • कब होता है? जब केवल से अधिक तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उपलब्ध हो।
  • कहाँ होता है? स्ट्रोमा लैमिली (Stroma lamellae) की झिल्लियों में (क्योंकि स्ट्रोमा लैमिली में PS II और रिडक्टेज एंजाइम दोनों अनुपस्थित होते हैं)।
  • विशेषता: उत्तेजित इलेक्ट्रॉन घूमकर वापस अपने ही चक्र (PS I) में लौट आता है। इसमें केवल ATP का निर्माण होता है, और ऑक्सीजन का निर्माण नहीं होता।

🔋 4. रसोपरासरणी परिकल्पना (Chemiosmotic Hypothesis) — पीटर मिशेल

यह सिद्धांत समझाता है कि थाइलेकॉइड के भीतर वास्तव में ATP का निर्माण कैसे होता है। ATP का निर्माण थाइलेकॉइड झिल्ली के आर-पार प्रोटॉन प्रवणता (Proton Gradient) के बनने और टूटने के कारण होता है।

📊 प्रोटॉन प्रवणता बनने के 3 मुख्य कारण:

  1. जल का प्रकाश अपघटन थाइलेकॉइड के भीतर (ल्युमेन / गुहा) में होता है, जिससे ल्युमेन में (प्रोटॉन) जमा होते जाते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन ETS में आगे बढ़ते हैं, तो साइटोक्रोम पंप बाहर (स्ट्रोमा) से प्रोटॉनों को खींचकर भीतर ल्युमेन में भेज देता है।
  3. रिडक्टेज एंजाइम स्ट्रोमा की तरफ होता है, जो बनाते समय स्ट्रोमा से आयन सोख लेता है।
  • 🚨 परिणाम: थाइलेकॉइड की गुहा (Lumen) में प्रोटॉनों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है और स्ट्रोमा में बहुत कम हो जाती है।
  • ATP का निर्माण: जब यह उच्च प्रवणता टूटती है, तो प्रोटॉन झिल्ली में मौजूद एटीपेज (ATPase) एंजाइम के रास्ते सुरंग से बाहर (स्ट्रोमा की तरफ) भागते हैं। चैनल से गुजरते समय उत्पन्न ऊर्जा से भाग में विन्यासात्मक परिवर्तन होता, जो ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट को जोड़कर ATP बना देता है।

🌚 5. अप्रकाशिक अभिक्रिया: जैव संश्लेषण प्रावस्था (Dark Reaction)

इस प्रावस्था में प्रकाश की सीधी आवश्यकता नहीं होती, परंतु यह प्रकाशिक अभिक्रिया के उत्पादों (ATP और ) पर पूरी तरह निर्भर करती है। यह स्ट्रोमा में संपन्न होती है। को स्थिर करने के आधार पर पौधे दो प्रकार के चक्र अपनाते हैं:

① कैल्विन चक्र या चक्र (Calvin Cycle) — मेल्विन कैल्विन

कैल्विन ने रेडियोधर्मी का उपयोग करके खोजा कि स्थिरीकरण का पहला स्थायी उत्पाद 3 कार्बन वाला अम्ल (3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल / 3-PGA) है, इसलिए इसे चक्र कहते हैं। यह सभी पौधों (चाहे हो या ) में पाया जाता है।

📊 कैल्विन चक्र के 3 मुख्य चरण (Steps):

  1. कार्बोक्सीकरण (Carboxylation) — 가장 मुख्य चरण: इसमें का प्राथमिक ग्राही 5 कार्बन वाला शर्करा रिबुलोज-1,5-बाईफॉस्फेट (RuBP) होता है। यह को ग्रहण करके रूबिस्को (RuBisCO) एंजाइम की उपस्थिति में 3-PGA के दो अणु बनाता है।
  2. अपचयन (Reduction): इसमें शर्करा (ग्लूकोज) के निर्माण के लिए प्रति अणु 2 ATP और 2 का उपभोग (खर्च) किया जाता है।
  3. पुनरुद्भावन (Regeneration): चक्र को जारी रखने के लिए प्राथमिक ग्राही RuBP का दोबारा बनना आवश्यक है। इसके लिए 1 ATP खर्च होता है।

💸 कुल खर्च का हिसाब (NEET Numerical Base): ग्लूकोज के एक अणु () को बनाने के लिए चक्र को 6 बार घूमना पड़ता है।

  • निवेश (In):
  • निर्गत (Out): (अर्थात् 1 ग्लूकोज के लिए कुल 18 ATP और 12 की आवश्यकता होती है)

② हैच-स्लैक चक्र या चक्र ( Pathway) — ⭐

यह चक्र उन पौधों में पाया जाता है जो शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (जैसे—मक्का, गन्ना, ज्वार/Sorghum) में उगते हैं। इन पौधों ने अत्यधिक उच्च तापमान और तीव्र प्रकाश में बिना पानी खोए अधिक उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह विशेष चक्र विकसित किया है।

🔬 क्रैन्ज शारीरिकी (Kranz Anatomy) — विशेष बनावट:

पौधों की पत्तियों में संवहन बंडल (Vascular bundles) के चारों ओर बड़ी कोशिकाओं का एक घेरा होता है, जिसे पुल आच्छद (बंडल शीथ / Bundle Sheath) कहते हैं। ये कोशिकाएँ कई परतों में माला की तरह सजी होती हैं (Kranz = माला)। इनमें भारी संख्या में बड़े क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जिनकी दीवारें मोटी व गैसों के लिए अप्रवेश्य होती हैं और इनमें अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।

📊 चक्र की कार्यप्रणाली (Mechanism):

यह क्रिया दो अलग-अलग कोशिकाओं (मेसोफिल और बंडल शीथ) में बँटी होती है:

  1. मेसोफिल कोशिका (Mesophyll Cell) में: का प्राथमिक ग्राही 3 कार्बन वाला अणु फॉस्फोइनोल पायरुवेट (PEP) होता है। यह PEP कार्बोक्सीलेज (PEPcase) एंजाइम की उपस्थिति में को जोड़कर पहला 4 carbon वाला स्थायी उत्पाद ऑक्जेलोएसิตिक अम्ल (OAA) बनाता है (इसीलिए इसे चक्र कहते हैं)।
  • 🚨 नोट: मेसोफिल कोशिकाओं में रूबिस्को (RuBisCO) एंजाइम पूर्णतः अनुपस्थित होता है।

    1. OAA बदलकर मैलिक अम्ल बनता है, जो बंडल शीथ कोशिका में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
    2. बंडल शीथ कोशिका (Bundle Sheath Cell) में: यहाँ मैलिक अम्ल का विमार्बोक्सीकरण (Decarboxylation) होता है, जिससे मुक्त होती है। इस मुक्त हुई को यहाँ उपस्थित रूबिस्को (RuBisCO) एंजाइम सोखकर साधारण (कैल्विन) चक्र चलाता है और ग्लूकोज बनाता है।
  • 💸 का कुल खर्च: पौधों में 1 ग्लूकोज अणु बनाने के लिए कुल 30 ATP और 12 खर्च होते हैं (यह की तुलना में अधिक खर्चीला है, परंतु उत्पादकता के मामले में सर्वश्रेष्ठ है)।


🍂 6. प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) — एक विनाशकारी प्रक्रिया

रूबिस्को (RuBisCO) पूरे ब्रह्मांड का सबसे प्रचुर प्रोटीन है, परंतु इसके पास एक दोहरा चरित्र है—यह को भी जोड़ सकता है (कारबोक्सीलेज कार्य) और ऑक्सीजन () को भी जोड़ सकता है (ऑक्सीजनेज कार्य)। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों में से किसकी सांद्रता अधिक है।

  • घटना: जब पौधों में उच्च तापमान और तीव्र प्रकाश के कारण ऑक्सीजन की सांद्रता बढ़ जाती है, तो रूबिस्को को छोड़कर से जुड़ जाता है। इसे प्रकाश-श्वसन कहते हैं।
  • हानि: इस प्रक्रिया में न तो शर्करा (भोजन) बनता है और न ही ATP/ का निर्माण होता है; बल्कि इसमें संचित ऊर्जा और ATP खर्च हो जाती है और बाहर निकल जाती है। इसीलिए इसे एक "व्यर्थ / विनाशकारी प्रक्रिया" कहा जाता है।
  • 🚨 पौधों की सर्वोच्चता: पौधों में प्रकाश-श्वसन बिल्कुल नहीं होता है, क्योंकि इनके पास क्रैन्ज शारीरिकी होती है जो बंडल शीथ के भीतर रूबिस्को के पास की सांद्रता को हमेशा अत्यधिक उच्च बनाए रखती है। इसी कारण पौधों की उत्पादकता से बहुत अधिक होती है।

📊 7. प्रकाश-संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक

  • ब्लैकमैन का सीमाकारी कारकों का नियम (Law of Limiting Factors - 1905) — ⭐: "यदि कोई रासायनिक प्रक्रिया एक से अधिक कारकों द्वारा प्रभावित होती है, तो उस प्रक्रिया की दर उस कारक पर निर्भर करेगी जो अपने न्यूनतम (सबसे कम) मान पर उपलब्ध हो।" इसे सीमाकारी कारक कहते हैं।
  • प्रमुख कारक:
    1. प्रकाश (Light): कम प्रकाश में प्रकाश और प्रकाश-संश्लेषण की दर में सीधा संबंध होता है। परंतु उच्च प्रकाश तीव्रता पर अन्य कारक सीमाकारी हो जाते हैं। सूर्य के कुल प्रकाश का केवल भाग ही प्रकाश संतृप्ति (Saturation) के लिए काफी है।
    2. की सांद्रता: यह प्रकाश-संश्लेषण का मुख्य सीमाकारी कारक है क्योंकि वायुमंडल में इसका स्तर बहुत कम () है। पौधे पर संतृप्त हो जाते हैं, जबकि पौधे पर। (इसीलिए टमाटर और बेल मिर्च जैसी फसलों को समृद्ध ग्रीनहाउस में उगाने पर पैदावार बहुत बढ़ जाती है)।
    3. तापमान: अप्रकाशिक अभिक्रिया एंजाइमों पर आधारित है, इसलिए यह ताप के प्रति संवेदनशील है। पौधे उच्च तापमान को सहन कर सकते हैं, जबकि पौधों के लिए कम तापमान अनुकूल होता है।

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards)

  • 🚨 Van Niel Radioisotope Card: प्रकाश-संश्लेषण में मुक्त होने वाली गैस जल () से आती है, कार्बन डाइऑक्साइड से नहीं। इसकी खोज वैन नील ने की थी।
  • Grana vs Stroma Location Rule:
    • ग्रैना (Thylakoid) प्रकाशिक अभिक्रिया (ATP, और का बनना)।
    • स्ट्रोमा (तरल) अप्रकाशिक अभिक्रिया (कैल्विन चक्र, ग्लूकोज का बनना)।
  • Stroma Lamellae Missing Tools: स्ट्रोमा लैमिली की झिल्लियों में PS II और रिडक्टेज एंजाइम दोनों अनुपस्थित होते हैं, इसीलिए यहाँ केवल चक्रीय फोटो-फॉस्फोरिलीकरण होता है।
  • vs ATP Audit Sheet: परीक्षाओं में सीधे गुणा-भाग का प्रश्न आता है:
  • 1 ग्लूकोज के लिए प्रक्रम में खर्च = 18 ATP और 12
    • 1 ग्लूकोज के लिए प्रक्रम में खर्च = 30 ATP और 12
  • Photorespiration Status: यह प्रक्रिया केवल पौधों में होती है (एक व्यर्थ प्रक्रिया)। पौधों में प्रकाश-श्वसन पूर्णतः अनुपस्थित होता है (क्रैन्ज शारीरिकी के कारण)।

📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)

उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण अध्याय हमें इस धरा पर जीवन को ऊर्जा देने वाले सबसे बड़े प्राकृतिक कारखाने के भौतिक-रासायनिक नियमों से परिचित कराता है। जोसेफ प्रीस्टले की ऑक्सीजन खोज और वैन नील के जल-अपघटन सिद्धांतों ने इस प्रक्रिया की रासायनिक बुनियाद रखी। थाइलेकॉइड की झिल्लियों में सजे PS II और PS I के वर्णक जब सूर्य की किरणों को सोखते हैं, तो Z-स्कीम की लहरों पर सवार होकर इलेक्ट्रॉन पानी को तोड़ते हैं, जिससे जीवन रक्षक ऑक्सीजन मुक्त होती है। पीटर मिशेल की रसोपरासरणी परिकल्पना (Chemiosmosis) हमें समझाती है कि कैसे थाइलेकॉइड की गुहा (Lumen) में जमा हुए प्रोटॉनों की प्रवणता जब एटीपेज एंजाइम के रास्ते टूटती है, तो अंधकार की रासायनिक लड़ाइयों के लिए आवश्यक चमकीले सिक्कों (ATP और ) का निर्माण होता है।

स्ट्रोमा के शांत गलियारों में चलने वाला मेल्विन कैल्विन का चक्र रूबिस्को (RuBisCO) एंजाइम की मदद से 18 ATP की कीमत चुकाकर कार्बन को मीठी शर्करा (ग्लूकोज) में बदल देता है। शुष्क मरुस्थलों और तपते मैदानों के अनुशासन में जन्मे मक्का और गन्ने जैसे पौधों ने 'क्रैन्ज शारीरिकी' और PEPcase के जादुई सुरक्षा चक्र को विकसित किया, जिसने प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) जैसी विनाशकारी और व्यर्थ ऊर्जा-बर्बादी को पूरी तरह शून्य कर दिया। अंत में, ब्लैकमैन का सीमाकारी नियम (Law of Limiting Factors) हमें यह परम सत्य सिखाता है कि प्रकृति की इस विशाल खाद्य उत्पादन फैक्ट्री की गति हमेशा उसी कारक की उंगली थामकर चलती है जो सबसे धीमा और न्यूनतम स्तर पर उपलब्ध हो।

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