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Class 11 Biology Chapter 14 Notes Hindi NCERT

अध्याय 14: पादप में श्वसन (Respiration in Plants)

यह अध्याय पादप कार्यिकी (Plant Physiology) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैचारिक (Conceptual) खंड है। पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन (कार्बोहाइड्रेट) कैसे बनाते हैं। इस अध्याय में हम सीखेंगे कि कोशिकाएं उस भोजन को तोड़कर ऊर्जा (ATP) कैसे प्राप्त करती हैं। यह NEET, CUET और सभी State Boards (BSEB, CBSE) के लिए सबसे स्कोरिंग अध्यायों में से एक है।


🧬 1. कोशिकीय श्वसन क्या है? (What is Cellular Respiration?)

  • परिभाषा: कोशिका के भीतर कार्बनिक पदार्थों (जैसे ग्लूकोज) के जटिल C-C बंधों का ऑक्सीकरण (Oxidation) करके चरणबद्ध तरीके से ऊर्जा मुक्त करने और उसे ATP के रूप में संचित करने की प्रक्रिया कोशिकीय श्वसन कहलाती है।
  • श्वसनी क्रियाधार (Respiratory Substrates): वे पदार्थ जिनका श्वसन के दौरान ऑक्सीकरण होता है। मुख्य क्रियाधार कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) है, परंतु विशेष परिस्थितियों में प्रोटीन, वसा और कार्बनिक अम्ल भी उपयोग किए जा सकते हैं।
  • 🚨 क्या पौधे सांस लेते हैं? पौधों के पास जंतुओं की तरह कोई विशिष्ट श्वसन अंग (जैसे फेफड़े) नहीं होते। वे अपने रंध्रों (Stomata) और वातरंध्रों (Lenticels) द्वारा गैसों का आदान-प्रदान ( लेना और छोड़ना) सीधे विसरण द्वारा करते हैं।

🧪 2. ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) — EMP पाथवे (Common Pathway)

यह श्वसन का प्रथम चरण है जो कोशिका के कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में संपन्न होता है। इसके लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए यह वायवीय और अवायवीय दोनों प्रकार के श्वसन में समान रूप से (उभयनिष्ठ) पाया जाता है।

  • खोजकर्ता: इसे EMP पाथवे भी कहते हैं क्योंकि इसकी खोज एम्बडेन (Embden), मेयरहाफ (Mechanism), और पारनास (Parnas) ने की थी।
  • प्रक्रिया: इसमें ग्लूकोज (6-कार्बन अणु) का 10 क्रमिक जैव-रासायनिक चरणों में आंशिक ऑक्सीकरण होता है, जिससे पायरुविक अम्ल (Pyruvic Acid - 3-कार्बन अणु) के दो अणु प्राप्त होते हैं।
[ ग्लूकोज - 6C ] -------------> (10 चरण - कोशिकाद्रव्य में) -------------> [ 2 × पायरुविक अम्ल - 3C ]

📊 ग्लाइकोलिसिस के मुख्य बिंदु (Energy Audit) — ⭐ Very Important:

  1. ऊर्जा का खर्च: ग्लूकोज से फ्रक्टोज-1,6-बाईफॉस्फेट बनने के दौरान 2 ATP खर्च होते हैं।
  2. ऊर्जा का निर्माण (Direct ATP): क्रियाधार स्तर फॉस्फोरिलीकरण (Substrate Level Phosphorylation) द्वारा कुल 4 ATP सीधे बनते हैं।
  3. नेट लाभ (Net Gain): का शुद्ध लाभ होता है।
  4. co-enzyme का अपचयन: इस प्रक्रिया में का निर्माण भी होता है (जो बाद में ETS में जाकर ऊर्जा देंगे)।

🔄 3. पायरुविक अम्ल का भविष्य और किण्वन (Fermentation)

ग्लाइकॉलिसिस के बाद बनने वाले पायरुविक अम्ल का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि कोशिका को ऑक्सीजन मिल रही है या नहीं:

① अवायवीय श्वसन / किण्वन (Fermentation) — ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में

यह मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों (जैसे यीस्ट, बैक्टीरिया) में और ऑक्सीजन की कमी होने पर हमारी कंकाल पेशियों (Skeletal muscles) में होता है। यह दो प्रकार का होता है:

  • एल्कोहॉली किण्वन (Alcoholic Fermentation): यीस्ट द्वारा पायरुविक अम्ल को एथेनॉल और में बदला जाता है। इसमें पायरुविक डीकार्बोक्सीलेज और एल्कोहॉल डीहाइड्रोजनेज एंजाइम काम करते हैं।
    • 🚨 यीस्ट के लिए चेतावनी: यदि माध्यम में अल्कोहल की सांद्रता से अधिक हो जाए, तो यीस्ट के लिए यह विषैला हो जाता है और यीस्ट की स्वयं मृत्यु हो जाती है।
  • लैक्टिक अम्ल किण्वन (Lactic Acid Fermentation): अत्यधिक कसरत करते समय जब हमारी पेशियों में ऑक्सीजन कम होती है, तो पायरुविक अम्ल लैक्टिक एसिड डीहाइड्रोजनेज एंजाइम द्वारा लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।
  • 🔥 ऊर्जा का नुकसान: किण्वन में ग्लूकोज की शुद्ध ऊर्जा का से भी कम भाग मुक्त होता है और इसमें बहुत कम ATP बनते हैं।

⚡ 4. वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) — क्रेब्स चक्र

जब ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो, तो पायरुविक अम्ल कोशिकाद्रव्य से निकलकर माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) के भीतर प्रवेश करता है। वायवीय श्वसन मुख्य रूप से दो चरणों में पूरा होता है:

पायरुविक अम्ल सीधे क्रेब्स चक्र में नहीं जा सकता। उसे पहले सक्रिय किया जाता है:

  • यह माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स (अधात्री) में होता है। चूँकि 2 पायरुविक अम्ल थे, इसलिए इस चरण में 2 एसिटाइल CoA, 2 और 2 NADH बनते हैं।

② टीसीए चक्र / क्रेब्स चक्र (TCA Cycle / Krebs Cycle) — ⭐ Very Important

इसकी खोज हंस क्रेब्स (1937) ने की थी। इसे साइट्रिक अम्ल चक्र या ट्राईकार्बोक्सीलिक अम्ल (TCA) चक्र भी कहते हैं क्योंकि इसका पहला स्थायी उत्पाद 6-कार्बन वाला साइट्रिक अम्ल होता है। यह भी माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में संपन्न होता है।

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📊 क्रेब्स चक्र का संक्षिप्त गणित (For 1 molecule of Glucose / 2 Turns):

ग्लूकोज के एक अणु से दो बार क्रेब्स चक्र चलता है। कुल प्राप्ति इस प्रकार है:

  • का निकास: अणु बाहर निकलते हैं।
  • NADH का निर्माण: बनते हैं।
  • का निर्माण: बनते हैं (सक्सीनेट से फ्यूमारेट बनते समय)।
  • GTP/ATP का सीधे निर्माण: (या ) सीधे क्रियाधार स्तर पर बनते हैं।

🌌 5. इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (ETS) तथा ऑक्सीकरणी फॉस्फोरिलीकरण

ग्लाइकॉलिसिस और क्रेब्स चक्र में बने और के पास छिपी हुई ऊर्जा को निकालने के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (ETS) से गुजारा जाता है।

  • स्थिति: ETS माइटोकॉन्ड्रिया की आन्तरिक झिल्ली (Inner Membrane / Cristae) पर स्थित होता है। इसमें कुल 5 सम्मिश्र (Complexes I से V) भाग लेते हैं।
  • एंजाइम और सम्मिश्र:
    • Complex I: डीहाइड्रोजनेज
    • Complex II: / सक्सीनेट डीहाइड्रोजनेज
    • Complex III: साइटोक्रोम सम्मिश्र
    • Complex IV: साइटोक्रोम ऑक्सीडेज (इसमें साइटोक्रोम और दो ताँबा/Copper केंद्र होते हैं)
    • Complex V: ATP सिंथेटेज (ATP Synthase)
  • 🚨 ऑक्सीजन की अंतिम भूमिका: इस पूरे तंत्र में ऑक्सीजन () इलेक्ट्रॉन के अंतिम ग्राही (Final Acceptor) के रूप में कार्य करती है और हाइड्रोजन के साथ मिलकर जल () का निर्माण करती है।
  • ऊर्जा की विनिमय दर (Exchange Rate):
    • अणु अणु प्रदान करता है।
    • अणु अणु प्रदान करता है।

🔋 ऑक्सीकरणी फॉस्फोरिलीकरण (मिशेल का केमियोस्मोटिक सिद्धांत)

जब इलेक्ट्रॉन ETS से गुजरते हैं, तो प्रोटॉन () मैट्रिक्स से निकलकर अंतर-झिल्ली अवकाश (Inter-membrane space) में जमा होने लगते हैं, जिससे एक प्रोटॉन प्रवणता (Gradient) बनती है। जब 2 प्रोटॉन () उच्च दाब के कारण Complex V (ATP सिंथेटेज) के कणों से होकर वापस मैट्रिक्स में आते हैं, तो भाग घूमता है और 1 ATP का निर्माण होता है।


📊 6. श्वसन का शुद्ध ऊर्जा बजट (Net ATP Gain)

एक ग्लूकोज अणु के पूर्ण वायवीय ऑक्सीकरण से प्राप्त होने वाले कुल नेट ATP का हिसाब (बजट) इस प्रकार है:

प्रक्रम / चरण (Process)सीधे प्राप्त ATP (SLP)प्राप्त ETS द्वारा प्राप्त कुल ATP
1. ग्लाइकोलिसिस (या शटल के आधार पर 6)
2. लिंक अभिक्रियाशून्य ()
3. क्रेब्स चक्र (GTP)
🔥 कुल नेट योग:

(🚨 सैद्धांतिक रूप से एक ग्लूकोज अणु के पूर्ण दहन से 36 या 38 ATP का शुद्ध लाभ होता है)


🔀 7. एम्फीबोलिक पाथवे और श्वसन गुणांक (RQ)

  • एम्फीबोलिक पाथवे (उभयभाजी प्रक्रम): श्वसन केवल एक अपचयी (Catabolic - टूटने वाली) प्रक्रिया नहीं है। जब शरीर को वसा या प्रोटीन बनाने की आवश्यकता होती है, तो इसी श्वसन चक्र के बीच के यौगिक (जैसे एसिटाइल CoA) बाहर निकाल लिए जाते हैं (Anabolism)। चूँकि इसमें अपचय और उपचय दोनों साथ-साथ चलते हैं, इसलिए श्वसन मार्ग को एम्फीबोलिक पाथवे कहना अधिक सही है।

📊 श्वसन गुणांक (RQ - Respiratory Quotient)

श्वसन के दौरान मुक्त हुई के आयतन और अवशोषित हुई के आयतन के अनुपात को श्वसन गुणांक कहते हैं। यह क्रियाधार की प्रकृति पर निर्भर करता है:

  • कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) के लिए:
  • वसा (Fat / ट्राइपामिटिन) के लिए: (1 से कम, क्योंकि वसा में ऑक्सीजन कम होती है)।
  • प्रोटीन के लिए:
  • कार्बनिक अम्लों के लिए: (1 से अधिक, जैसे मैलिक अम्ल का 1.33)।
  • अवायवीय श्वसन (किण्वन) के लिए: (अनंत), क्योंकि इसमें ऑक्सीजन खर्च नहीं होती () और बाहर निकलती है ().

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards)

  • 🚨 Location Checklist Code: परीक्षाओं में स्थानों का नाम सीधे पूछा जाता है:
    • ग्लाइकोलिसिस कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
    • लिंक अभिक्रिया व क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रिया का मैट्रिक्स
    • ETS और ATP निर्माण माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Cristae)
  • Final Electron Acceptor: ETS में इलेक्ट्रॉन का अंतिम ग्राही कौन है? ऑक्सीजन ()। यह नीट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।
  • Fermentation Safety Limit: यीस्ट के लिए अल्कोहल की जानलेवा सीमा है, इससे ऊपर होने पर यीस्ट खुद मर जाता है।
  • FADH2 Entry Point: क्रेब्स चक्र में का निर्माण केवल तब होता है जब सक्सीनिक अम्ल का रूपांतरण फ्यूमेरिक अम्ल में होता है।
  • RQ Value Cheat-sheet: कार्बोहाइड्रेट = 1, प्रोटीन = 0.9, वसा = 0.7, अवायवीय = अनंत (). इसे सीधे रट लें, यह मैचिंग में हर साल आता है।

📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)

पादप में श्वसन अध्याय हमें कोशिकाओं के भीतर छिपे उस कुशल बिजलीघर (माइटोकॉन्ड्रिया) के दर्शन कराता है जो भोजन के रसायनों को जीवन की ऊर्जा मुद्रा (ATP) में बदलता है। कोशिकाद्रव्य की गलियों में बिना ऑक्सीजन के चलने वाला 'ग्लाइकोलिसिस' (EMP पाथवे) ग्लूकोज को तोड़कर पायरुविक अम्ल के दो टुकड़े करता है और अवायवीय किण्वन के सीमित ऊर्जा संसार का आधार बनता है। परंतु जब ऑक्सीजन की उपस्थिति में पायरुविक अम्ल 'लिंक अभिक्रिया' का पास लेकर माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में कदम रखता है, तो एसिटाइल CoA के रूप में 'क्रेब्स चक्र' का पहिया घूम उठता है।

साइट्रिक अम्ल के इस चक्र से निकलने वाले और आंतरिक झिल्ली की 'ETS' तरंगों पर सवार होकर अपने इलेक्ट्रॉनों को ऑक्सीजन के अंतिम हाथों में सौंप देते हैं। अंतर-झिल्ली अवकाश में खड़े प्रोटॉनों का वह जादुई केमियोस्मोटिक दबाव जब Complex V (ATP सिंथेटेज) के चक्र को घुमाता है, तब जाकर दहन के अंतिम बजट में 36 या 38 शानदार ATP का जन्म होता है। श्वसन गुणांक (RQ) के सुंदर अनुपातों और एम्फीबोलिक (उभयभाजी) के संतुलन सिद्धांतों में बंधा यह पूरा अध्याय यह सिद्ध करता है कि श्वसन केवल टूटने का नाम नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा का शाश्वत पावर ग्रिड है।


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