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Class 11 Biology Chapter 15 Notes Hindi NCERT

अध्याय 15: पादप वृद्धि एवं परिवर्धन (Plant Growth and Development)

यह अध्याय पादप कार्यिकी (Plant Physiology) का अंतिम और आंतरिक नियंत्रण वाला अध्याय है। यहाँ हम यह समझते हैं कि एक छोटा सा बीज अंकुरित होकर कैसे एक विशाल वृक्ष बनता है, कोशिकाएँ कैसे विशिष्ट कार्य सीखती हैं (विभेदन), और पौधों की वृद्धि को अंदर से नियंत्रित करने वाले जादुई रसायन—पादप वृद्धि नियामक (Plant Growth Regulators - PGRs / प्लांट हार्मोन)—किस प्रकार कार्य करते हैं। NEET, CUET और सभी State Boards (BSEB, CBSE) के परीक्षाओं के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च वेटेज (High Weightage) वाला अध्याय है।


📈 1. पादप वृद्धि की मुख्य विशेषताएँ (Characteristics of Plant Growth)

  • परिभाषा: वृद्धि को किसी जीव या उसके अंग के आकार या आयतन में होने वाले एक स्थायी और अनुत्क्रमणीय (Irreversible) परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें उपापचयी क्रियाएँ शामिल होती हैं, जिनमें ऊर्जा (ATP) खर्च होती है।
  • असीमित वृद्धि (Open-ended Growth): पौधों की वृद्धि का स्वरूप अनोखा होता है क्योंकि वे जीवनभर लगातार बढ़ते रहते हैं। ऐसा उनके शरीर में कुछ विशिष्ट स्थानों पर विभज्योतक (मेरिस्टम / Meristems) की उपस्थिति के कारण होता है, जिनके पास लगातार विभाजित होने की क्षमता होती है।
  • वृद्धि की माप: वृद्धि को कई तरीकों से मापा जा सकता है—शुष्क भार में वृद्धि, ताजे भार में वृद्धि, कोशिका की संख्या में वृद्धि (जैसे मक्के की एक जड़ का मेरिस्टम प्रति घंटे 17,500 से अधिक नई कोशिकाएँ बना सकता है), या सतह के क्षेत्रफल में वृद्धि (जैसे पत्ती का फैलना)।

📊 वृद्धि के दो मुख्य मॉडल (Growth Rates):

  1. ज्यामितीय / अंकगणितीय वृद्धि (Arithmetic Growth): इसमें समसूत्री विभाजन के बाद केवल एक संतति कोशिका लगातार विभाजित होती रहती है, जबकि दूसरी कोशिका परिपक्व होकर स्थायी हो जाती है।
    • ग्राफ का आकार: यदि इसकी वृद्धि को समय के साथ आरेखित किया जाए, तो ग्राफ हमेशा एक सरल रेखा (Linear Curve) के रूप में प्राप्त होता है।
    • समीकरण: (जहाँ , , )।
  2. ज्यामितीय वृद्धि (Geometric Growth) — वास्तविक मॉडल: इसमें शुरुआत में दोनों संतति कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती हैं।
    • ग्राफ का आकार: शुरुआत में वृद्धि बहुत धीमी होती है (लैग प्रावस्था / Lag phase), फिर यह अत्यंत तीव्र गति से चरघातांकी रूप से बढ़ती है (लॉग या एक्स्पोनेंशियल प्रावस्था), और अंत में भोजन व स्थान सीमित होने के कारण वृद्धि धीमी होकर स्थिर हो जाती है (स्थिर प्रावस्था)। अतः इसका ग्राफ हमेशा S-आकार या सिग्मॉइड (Sigmoid Curve) का बनता है।
    • समीकरण: (जहाँ , , )।

🧬 2. विभेदन, निर्विभेदन और पुनर्विभेदन (Differentiation & Redifferentiation)

यह कोशिकाओं के परिपक्व होने और कार्य बदलने की अद्भुत आनुवंशिक यात्रा है:

  • विभेदन (Differentiation): जब शीर्षस्थ विभज्योतक से बनी कोशिकाएँ अपनी विभाजन की क्षमता खो देती हैं और किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए अपने संरचनात्मक रूप को पूरी तरह बदल लेती हैं (जैसे—जाइलम की वाहिका बनने के लिए कोशिका अपना जीवद्रव्य खो देती है और उसकी भित्ति पर लिग्निन जमा हो जाता है)।
  • निर्विभेदन (Dedifferentiation) — ⭐ Concept: यह प्रकृति का एक अनोखा मोड़ है। जब पहले से परिपक्व और विभाजित न होने वाली स्थायी कोशिकाएँ विशेष परिस्थितियों में दोबारा विभाजन करने की क्षमता प्राप्त कर लेती हैं, तो इस क्रिया को निर्विभेदन कहते हैं। उदाहरण: अंतरापुलिय कैम्बियम (Interfascicular Cambium) और कॉर्क कैम्बियम का बनना।
  • पुनर्विभेदन (Redifferentiation): निर्विभेदन द्वारा बनी नई कोशिकाएँ जब अपना कार्य पूरा करके एक बार फिर विभाजन की क्षमता खो देती हैं और दोबारा स्थायी ऊतक बनती हैं, तो उसे पुनर्विभेदन कहते हैं। उदाहरण: द्वितीयक जाइलम, द्वितीयक फ्लोएम और कॉर्क का निर्माण।

🍂 3. परिवर्धन और प्लास्टिसिटी (Development & Plasticity)

  • परिवर्धन: किसी जीव के जीवन चक्र में बीज के अंकुरण से लेकर उसकी वृद्धावस्था और जीर्णता (Death) तक होने वाले सभी क्रमिक परिवर्तनों के योग को परिवर्धन कहते हैं। ()।
  • प्लास्टिसिटी (लचीलापन / Plasticity) — 🚨 NEET का हॉट-शॉट टॉपिक: पौधे पर्यावरण या जीवन के विभिन्न चरणों के प्रभाव में आकर अपनी पत्तियों या अंगों के अलग-अलग आकारिक रूप विकसित करते हैं, इस क्षमता को प्लास्टिसिटी कहते हैं।
    • विकासीय प्लास्टिसिटी: कॉटन (कपास), धनिया, और लार्सपर (Delphinium) के पौधों में बचपन की (तरुण) पत्तियाँ वयस्कों की पत्तियों की तुलना में बिल्कुल अलग आकार की होती हैं।
    • पर्यावरणीय प्लास्टिसिटी (Heterophilly): बटरकप (Ranunculus) का पौधा जब हवा (जमीन) पर उगता है तो उसकी पत्तियाँ चौड़ी और अखंडित होती हैं, परंतु जब वह पानी के भीतर उगता है तो उसकी पत्तियाँ अत्यधिक कटी-फटी (Dissected) हो जाती हैं।

🧪 4. पादप वृद्धि नियामक (Plant Growth Regulators - PGRs)

इन्हें पादप हार्मोन या फाइटोहार्मोन (Phytohormones) भी कहते हैं। ये अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में बनने वाले कार्बनिक रसायन हैं जो पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। इन्हें कार्य के आधार पर दो समूहों में बाँटा गया है:

【समूह A】 पादप वृद्धि प्रवर्धक (Promoters)

ये वृद्धि, कोशिका विभाजन, पुष्पन और बीज निर्माण को बढ़ावा देते हैं। इसमें तीन हार्मोन आते हैं:

① ऑक्सिन (Auxin) — पहला खोजा गया हार्मोन

  • खोज: चार्ल्स डार्विन और उनके बेटे फ्रांसिस डार्विन ने देखा कि कैनरी घास के प्रांकुर चोल (Coleoptile) एकतरफा प्रकाश की ओर मुड़ जाते हैं। एफ. डब्ल्यू. वेंट (F.W. Went) ने पहली बार जई (Oat) के प्रांकुर चोल के शीर्ष से इस हार्मोन को अलग किया।
  • प्राकृतिक ऑक्सिन: IAA (Indole-3-acetic acid) और IBA। कृत्रिम/संश्लेषित ऑक्सिन: NAA और 2,4-D
  • मुख्य कार्य (Functions):
    1. 🚨 शीर्षस्थ प्रभाविता (Apical Dominance): तने के शीर्ष पर उपस्थित अग्रस्थ कलिका (Apical Bud) पार्श्व कलिकाओं (Lateral Buds) की वृद्धि को रोक कर रखती है, जिससे पौधा केवल सीधा लंबा बढ़ता है। गन्ने या चाय के बागानों में जब ऊपरी सिरों को काट दिया जाता है (Decapitation), तो पार्श्व शाखाएं तेजी से निकल आती हैं।
    2. यह तने और जड़ों में कोशिका दीर्घीकरण (Elongation) को प्रेरित करता है।
    3. 🚨 खरपतवार नाशी (Weedicide): 2,4-D का उपयोग खेतों में चौड़ी पत्ती वाले अवांछित खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाता है (यह पुरानी घास/एकबीजपत्री को नुकसान नहीं पहुँचाता)।
    4. टमाटर में अनिषेकफलन (बिना निषेचन के फल बनाना) को प्रेरित करता है।

② जिबरेलिन (Gibberellins - GA) — तने को लंबा करने वाला

  • खोज: धान के पौधों में एक अजीब बीमारी देखी गई जिसमें पौधे अत्यधिक लंबे और पतले होकर बांझ रह जाते थे, इसे 'बेकेन व्याधि' (मूर्ख पौध रोग / Foolish Seedling disease) कहा गया। ई. कुरोसावा (1928) ने खोजा कि यह रोग एक कवक जिबरेला फ्यूजीकुरोई (Gibberella fujikuroi) द्वारा छोड़े गए रसायन के कारण होता है। अब तक 100 से अधिक जिबरेलिन () खोजे जा चुके हैं, जिनमें सबसे पहला और मुख्य है।
  • मुख्य कार्य (Functions):
    1. 🚨 पोरियों का दीर्घीकरण (Bolting Effect): यह आनुवंशिक रूप से बौने पौधों (जैसे मटर, मक्का) के तने और पोरियों (Internodes) की लंबाई को अत्यधिक बढ़ा देता है। चुकंदर और गोभी जैसी रोजेट स्वभाव वाली फसलों में पुष्पन से ठीक पहले तने को अचानक लंबा करना बोल्टिंग (Bolting) कहलाता है।
    2. गन्ने के खेतों पर इसका छिड़काव करने से गन्ने के तने की लंबाई बढ़ जाती है, जिससे प्रति एकड़ पैदावार 20 टन तक बढ़ जाती है क्योंकि गन्ने का तना ही चीनी का मुख्य भंडार है।
    3. यह बीजों में एमाइलेज एंजाइम को सक्रिय कर बीज अंकुरण में मदद करता है और फलों (जैसे सेब, अंगूर) के आकार को लंबा और आकर्षक बनाता है।
    4. शराब उद्योग (Brewing industry) में यह माल्टिंग की गति को तेज करता है।

③ साइटोकाइनिन (Cytokinins) — कोशिका विभाजन का राजा

  • खोज: एफ. स्कूग (Skoog) और उनके सहयोगियों ने देखा कि तंबाकू के तने के ऊतकों (Callus) का विभाजन केवल तब होता है जब ऑक्सिन के साथ यीस्ट के अर्क या नारियल के दूध या ऑटोक्लेव्ड डीएनए को मिलाया जाए। बाद में मिलर (1955) ने हेरिंग मछली के शुक्राणु के डीएनए से इस सक्रिय पदार्थ को क्रिस्टल रूप में अलग किया और इसे काइनेटिन (Kinetin) नाम दिया। काइनेटिन प्राकृतिक रूप से पौधों में नहीं पाया जाता। पौधों में पाया जाने वाला प्राकृतिक साइटोकाइनिन जियाटिन (Zeatin) है, जो मक्के के दानों और नारियल के पानी में प्रचुरता से होता है।
  • मुख्य कार्य (Functions):
    1. 🚨 कोशिका विभाजन (Cytokinesis): यह पौधों में तीव्र कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
    2. यह पार्श्व शाखाओं के विकास को बढ़ावा देकर ऑक्सिन की शीर्षस्थ प्रभाविता का विरोध करता है (उसे निरस्त करता है)।
    3. 🚨 रिचमंड-लैंग प्रभाव (Delayed Senescence): यह पोषक तत्वों के स्थानांतरण को बनाए रखता है, जिससे पत्तियों का बुढ़ापा (जीर्णता) रुक जाता है और पत्तियाँ लंबे समय तक हरी बनी रहती हैं।

【समूह B】 पादप वृद्धि संदमक (Inhibitors)

ये पौधे की गतिविधियों को धीमा करते हैं, तनाव की स्थितियों से बचाते हैं और सुप्तावस्था को प्रेरित करते हैं।

④ एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid - ABA) — तनाव हार्मोन / Stress Hormone

  • खोज: 1960 के दशक में तीन अलग-अलग वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से तीन रसायनों—अवरोधक-B, एब्सिसिन-II और डॉर्मिन की खोज की, जो बाद में रासायनिक रूप से एक ही निकले और उन्हें एब्सिसिक अम्ल (ABA) नाम दिया गया।
  • मुख्य कार्य (Functions):
    1. 🚨 रंध्रों का बंद होना (Stomatal Closure): पानी की अत्यधिक कमी या सूखे (तनाव) के समय यह पत्तियों के रंध्रों को तुरंत बंद कर देता है ताकि वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी का नुकसान न हो। इसीलिए इसे तनाव हार्मोन (Stress Hormone) कहते हैं (🚨 परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है)
    2. यह कलिकाओं और बीजों में सुप्तावस्था (Dormancy) को प्रेरित करता है, जिससे बीज कठिन परिस्थितियों में बिना अंकुरित हुए सुरक्षित बचे रहते हैं।
    3. यह पत्तियों और फलों के झड़ने (विलगन / Abscission) और उनके बुढ़ापे (जीर्णता) को तीव्र करता है। यह जिबरेलिन () के कार्यों का ठीक उल्टा (Antagonistic) कार्य करता है।

⑤ एथिलीन / इथाइलीन (Ethylene - ) — एकमात्र गैसीय हार्मोन

  • खोज: कजिन्स (1910) ने प्रमाणित किया कि पके हुए संतरों से एक वाष्पशील गैस निकलती है, जो पास में रखे कच्चे केलों को तेजी से पका देती है। बाद में इसे एथिलीन गैस के रूप में पहचाना गया।
  • रूप: यह एकमात्र गैसीय (Gaseous) पादप हार्मोन है। कृषि में इसका उपयोग करने के लिए इसके जलीय घोल एथिफोन (Ethephon) का उपयोग किया जाता है, जो धीरे-धीरे एथिलीन गैस मुक्त करता है।
  • मुख्य कार्य (Functions):
    1. 🚨 फलों का पकना (Fruit Ripening): यह फलों को पकाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। फल पकते समय यह श्वसन की दर को अत्यधिक बढ़ा देता है, जिसे श्वसन क्लाइमेक्टिक (Respiratory Climactic) कहते हैं।
    2. यह पौधों में क्षैतिज वृद्धि और अक्ष के फूलने को प्रेरित करता है।
    3. यह पत्तियों और फूलों के विलगन (झड़ने) को बढ़ावा देता है।
    4. 🚨 खीरे में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाना: एथिफोन का छिड़काव खीरे के पौधों में मादा फूलों की संख्या बढ़ा देता है, जिससे फल अधिक बनते हैं और किसानों की पैदावार बढ़ जाती है।
    5. यह अनानास और आम में पुष्पन को प्रेरित करता है तथा धान के पौधों में पोरियों को लंबा कर पत्तियों को पानी से ऊपर रखता है।

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards)

  • 🚨 Hormone Antagonistic Code: परीक्षाओं में विपरीत कार्य करने वाले हार्मोनों के जोड़े पूछे जाते हैं:
    • शीर्षस्थ प्रभाविता: ऑक्सिन बढ़ावा देता है साइटोकाइनिन विरोध करता है।
    • बीज सुप्तावस्था: ABA सुप्तावस्था लाता है जिबरेलिन () सुप्तावस्था तोड़कर अंकुरण करता है। (अर्थात् ABA GA एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं).
  • 2,4-D Weedicide Trick: यह केवल चौड़ी पत्ती वाले द्विबीजपत्री खरपतवारों को मारता है, संकरी पत्ती वाली फसलों (जैसे धान, गेहूँ) को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता।
  • Gaseous Hormone Name: पूरे पादप जगत का एकमात्र गैसीय हार्मोन एथिलीन () या इसका व्यावसायिक घोल एथिफोन (Ethephon) है। इसका मुख्य कार्य फल पकाना है।
  • Stress Hormone Identify: जब भी परीक्षा में पानी की कमी, सूखा, या रंध्रों का बंद होना शब्द दिखे, तो उत्तर हमेशा ABA (एब्सिसिक अम्ल) टिक करें।
  • Zeatin Source: प्राकृतिक साइटोकाइनिन 'जियाटिन' का सबसे मुख्य स्रोत मक्के के दाने और नारियल का पानी है, इसे सीधे रट लें।

📝 अध्याय और संपूर्ण पादप कार्यिकी का सारांश (Final Conclusion)

पादप वृद्धि एवं परिवर्धन अध्याय हमें पौधों के भीतर छिपे उन अदृश्य रासायनिक नियंत्रकों (प्लांट हार्मोन) से परिचित कराता है जो बिना किसी तंत्रिका तंत्र के, पूरे पादप साम्राज्य का अनुशासन चलाते हैं। विभज्यातेकी कोशिकाओं की असीमित क्षमता जहाँ गणितीय और ज्यामितीय (सिग्मॉइड) वक्रों के रूप में आकार बढ़ाती है, वहीं कोशिकाओं का 'विभेदन', 'निर्विभेदन' (कैम्बियम का दोबारा जागना) और 'पुनर्विभेदन' पौधों के ऊतकीय लचीलेपन की अद्भुत कहानी बयां करते हैं। बटरकप की कटी-फटी पत्तियाँ (प्लास्टिसिटी) पर्यावरण के प्रति उनके सुंदर समर्पण का प्रमाण हैं।

PGRs के पांच जादुई नायकों में—डार्विन का खोजा 'ऑक्सिन' जहाँ अग्रस्थ कलिका की तानाशाही (शीर्षस्थ प्रभाविता) चलाता है और 2,4-D से खरपतवारों का सफाया करता है; वहीं कवक के जहर से निकला 'जिबरेलिन' () गन्ने के तनों को आसमान जैसी लंबाई और गोभी को 'बोल्टिंग' का विस्तार देता है। स्कूग और मिलर का खोजा 'साइटोकाइनिन' (जियाटिन) कोशिकाओं को विभाजित करने की तीव्र क्रांति लाता है और पत्तियों के बुढ़ापे (रिचमंड-लैंग प्रभाव) को थाम लेता है।

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