अध्याय 16: पाचन एवं अवशोषण (Digestion and Absorption)
🚨 महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम अपडेट (NCERT Update): नवीनतम NCERT और NEET/CUET के संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार इस अध्याय को मुख्य पाठ्यपुस्तक से पूरी तरह हटा दिया गया है। परंतु बिहार बोर्ड (BSEB), कई अन्य राज्य बोर्डों तथा NEET/CUET परीक्षाओं के वैचारिक आधार (Conceptual Base) के लिए मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) के इस बुनियादी अध्याय को समझना आज भी अत्यंत आवश्यक है [1.1]。
यह अध्याय मानव शरीर क्रिया विज्ञान की शुरुआत है। यहाँ हम यह सीखेंगे कि हमारा शरीर जटिल भोजन के अवयवों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) को यांत्रिक और रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा कैसे अवशोषण योग्य सरल रूपों में बदलता है।
🦷 1. मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
मानव पाचन तंत्र मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बना होता है: आहारनाल (Alimentary Canal) और सहायक पाचन ग्रंथियाँ (Associated Glands)।
【भाग A】 आहारनाल (Alimentary Canal)
यह मुख (Mouth) से प्रारंभ होकर गुदा (Anus) तक फैली एक लंबी कुंडलित नली है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
① मुख गुहा (Buccal Cavity):
मुख गुहा में दो मुख्य संरचनाएं होती हैं—दांत (Teeth) और जीभ (Tongue)।
- मानव दंत विन्यास के 3 मुख्य लक्षण (Dentition) — ⭐ Very Important:
- गर्तदंती (Thecodont): प्रत्येक दांत जबड़े की हड्डी के खांचे (Socket) में धंसा होता है।
- द्विबारदंती (Diphyodont): मानव जीवन में दांतों के दो सेट आते हैं—अस्थायी दांत (दूध के दांत - 20) और स्थायी वयस्क दांत (32)।
- विषमदंती (Heterodont): वयस्क मानव में चार अलग-अलग प्रकार के दांत पाए जाते हैं: कृंतक (Incisors - I), रदनक (Canines - C), अग्रचवर्णक (Premolars - PM), और चवर्णक (Molars - M)।
- 🚨 वयस्क मानव का दंत सूत्र (Dental Formula):
- एनामेल (Enamel): दांतों की चबाने वाली कठोर सतह, जो शरीर का सबसे कड़ा पदार्थ है। यह भोजन को पीसने में मदद करता है।
- जीभ (Tongue): यह एक स्वतंत्र रूप से गतिशील पेशीय अंग है, जो फ्रेनुलम (Frenulum) द्वारा मुख गुहा के फर्श से जुड़ा होता है।
② ग्रसनी और ग्रासनली (Pharynx & Oesophagus):
- ग्रसनी भोजन और वायु दोनों का उभयनिष्ठ (Common) मार्ग है।
- घांटी ढक्कन (इपिग्लोटिस / Epiglottis): भोजन निगलते समय उपास्थि से बना यह ढक्कन श्वासद्वार (Glottis) को ढक लेता है, जिससे भोजन श्वास नली में प्रवेश नहीं कर पाता।
- ग्रासनली: यह एक लंबी पतली नली है जो भोजन को आमाशय तक ले जाती है। इसकी परतों में होने वाली तरंग जैसी गतियों को क्रमाकुंचन (Peristalsis) कहते हैं।
③ आमाशय (Stomach):
यह आहारनाल का सबसे चौड़ा, J-आकार का पेशीय थैला है जो उदर गुहा के बाईं ओर स्थित होता है। इसके चार मुख्य भाग होते हैं: कार्डियक (जठरागम), फंडस, काय (Body - मुख्य भाग), और पायलोरिक (जठरनिर्गमी)।
- जठरनिर्गमी अवरोधिनी (Pyloric Sphincter): यह आमाशय और छोटी आँत के बीच भोजन के निकास को नियंत्रित करती है।
④ छोटी आँत (Small Intestine) — पाचन व अवशोषण का मुख्य केंद्र:
इसके तीन भाग होते हैं:
- ग्रहणी (Duodenum): सबसे पहला, C-आकार का छोटा भाग।
- अग्रक्षुद्रांत्र (Jejunum): मध्य का अत्यधिक कुंडलित भाग।
- क्षुद्रांत्र (Ileum): सबसे अंतिम और अत्यधिक कुंडलित लंबा भाग, जो बड़ी आँत में खुलता है।
⑤ बड़ी आँत (Large Intestine):
इसके तीन भाग हैं: अंधनाल (Caecum), कोलोन (बृहदांत्र), और मलाशय (Rectum) जो गुदा द्वार द्वारा बाहर खुलता है।
- 🚨 कृमिरूप परिशेषिका (Vermiform Appendix): अंधनाल (Caecum) से एक अंगुली जैसा बंद प्रवर्ध निकलता है, जो मानव में एक अवशेषी अंग (Vestigial organ) है।
🔬 आहारनाल की दीवार के ऊतकीय स्तर (Histology of Alimentary Canal):
आहारनाल की दीवार में बाहर से अंदर की ओर चार परतें होती हैं:
- सबम्यूकोसा: इसमें तंत्रिकाएँ, रक्त और लसीका वाहिकाएँ होती हैं। (ग्रहणी/Duodenum की सबम्यूकोसा में ब्रूनर ग्रंथियाँ पाई जाती हैं)।
- म्यूकोसा: सबसे आंतरिक परत। आमाशय में यह अनियमित मोड़ बनाती है जिन्हें रुगी (Rugae) कहते हैं। छोटी आँत में यह अंगुली जैसे प्रवर्ध बनाती है जिन्हें अंकुर (विलाई / Villi) कहते हैं, जो अवशोषण के लिए सतह का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ा देते हैं। विलाई के भीतर एक बड़ी लसीका वाहिनी होती है, जिसे लैक्टीयल (Lacteal) कहते हैं।
🧪 2. सहायक पाचन ग्रंथियाँ (Associated Digestive Glands)
① लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands):
मानव में तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ होती हैं: पैरोटिड (गाल में), अधोजंभ/सबमैक्सिलरी (निचले जबड़े में), और अधोजिह्वा/सबलिंगुअल (जीभ के नीचे)। इनसे लार (Saliva) स्रावित होती है।
② यकृत (लिवर / Liver) — शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि
- द्रव्यमान: एक वयस्क मानव में इसका भार लगभग
से होता है। - 🚨 यकृत पालिकायें (Hepatic Lobules): ये यकृत की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाइयाँ हैं, जिनमें यकृत कोशिकाएँ (Hepatocytes) रस्सियों की तरह सजी होती हैं। प्रत्येक पालिका एक पतले संयोजी ऊतक के आवरण से ढकी होती है, जिसे ग्लिसन्स कैप्सूल (Glisson's Capsule) — NEET का हॉट-शॉट प्रश्न कहते हैं।
- पित्त रस (Bile): यकृत कोशिकाएँ पित्त रस का निर्माण करती हैं, जो यकृत वाहिनी से होते हुए एक पतली पेशीय थैली पिताशय (Gall Bladder) में संचित और सांद्रित होता है।
- 🚨 सामान्य पित्त-अग्न्याशयी वाहिनी: पिताशय की वाहिनी और यकृत वाहिनी मिलकर मूल पित्त वाहिनी बनाती हैं। यह वाहिनी अग्न्याशयी वाहिनी के साथ मिलकर ओडी की अवरोधिनी (Sphincter of Oddi) द्वारा ग्रहणी (Duodenum) में खुलती है।
③ अग्न्याशय (पैंक्रियाज / Pancreas):
यह एक मिश्रित (Compound / Heterocrine) ग्रंथि है जो ग्रहणी के U-आकार के मोड़ के बीच स्थित होती है।
- बहिःस्रावी भाग: यह क्षारीय अग्न्याशयी रस (Pancreatic Juice) स्रावित करता है, जिसमें पाचक एंजाइम होते हैं।
- अंतःस्रावी भाग: यह इंसुलिन और ग्लूकागन जैसे हार्मोन स्रावित करता है।
🔄 3. भोजन का पाचन (Digestion of Food)
पाचन यांत्रिक (पीसना, चबाना) और रासायनिक (एंजाइमों द्वारा तोड़ना) दोनों प्रक्रियाओं द्वारा संपन्न होता है।
① मुख गुहा में पाचन:
लार में विद्युत अपघट्य (
- लार एमाइलेज (
) भोजन के स्टार्च को माल्टोज में बदल देता है: - मुख से चबाया हुआ भोजन लार के साथ मिलकर लसदार लुगदी बनता है, जिसे बोलस (Bolus) कहते हैं।
② आमाशय में पाचन:
आमाशय की म्यूकोसा में जठर ग्रंथियाँ (Gastric Glands) होती हैं, जिनमें तीन मुख्य प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं:
- श्लेष्मा ग्रीवा कोशिकाएँ: जो म्यूकस का स्राव करती हैं।
- पेप्टिक या मुख्य (Chief) कोशिकाएँ: जो निष्क्रिय एंजाइम पेप्सिनोजेन (Pepsinogen) और प्रोरेनिन स्रावित करती हैं।
- भित्तीय या ऑक्सिनटिक (Parietal / Oxyntic) कोशिकाएँ — अति महत्वपूर्ण: ये हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (
) और विटामिन के अवशोषण के लिए आवश्यक कैसल का आंतरिक कारक (Intrinsic Factor) स्रावित करती हैं।
📊 आमाशय की रासायनिक क्रियाएँ:
- आमाशय में भोजन 4-5 घंटे तक रहता है और अम्लीय जठर रस के साथ मिलकर पतली लेई जैसा बन जाता है, जिसे कायम (Chyme) कहते हैं।
( ) निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदल देता है। पेप्सिन प्रोटीनों को पेप्टोन और प्रोटिओज में तोड़ता है। - रेनिन (Rennin): यह शिशु के जठर रस में पाया जाने वाला एक प्रोटीन-पाचक एंजाइम है, जो दूध के प्रोटीन (केसीन) को पचाने में मदद करता है।
③ छोटी आँत में पाचन — ⭐ पूर्ण पाचन का महामंच:
ग्रहणी (Duodenum) में तीन रस एक साथ आकर मिलते हैं: पित्त रस, अग्न्याशयी रस और आंत रस।
📊 A. अग्न्याशयी रस के कार्य (Pancreatic Juice):
इसमें निष्क्रिय एंजाइम होते हैं—ट्रिप्सिनोजेन, काइमोट्रिप्सिनोजेन, प्रोकार्बोक्सीपेप्टिडेज, एमाइलेज, लाइपेज और न्यूक्लिएज।
- आँत की म्यूकोसा से स्रावित एंजाइम एन्टेरोकाइनेज (Enterokinase) निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजेन को सक्रिय ट्रिप्सिन में बदल देता है। इसके बाद ट्रिप्सिन बाकी सभी एंजाइमों को सक्रिय कर देता है।
- ये एंजाइम प्रोटीनों को पूरी तरह डाइपेप्टाइड्स में तोड़ देते हैं। अग्न्याशयी लाइपेज वसा को मोनोग्लिसराइड्स में तोड़ता है।
📊 B. पित्त रस के कार्य (Bile Juice):
- 🚨 एंजाइम विहीन रस: पित्त रस में कोई भी पाचक एंजाइम नहीं पाया जाता है। इसमें पित्त लवण (Bile salts), पित्त वर्णक (बिलिरुबिन व बिलिवर्डिन), कोलेस्ट्रॉल और फॉस्फोलिपिड होते हैं।
- मुख्य कार्य: यह वसा का इमल्सीकरण (पायसीकरण / Emulsification) करता है, अर्थात् वसा के बड़े गोलकों को बहुत छोटे-छोटे मिसेल (Micelles) टुकड़ों में तोड़ देता है ताकि लाइपेज एंजाइम उस पर आसानी से कार्य कर सके। यह लाइपेज एंजाइम को सक्रिय भी करता है।
📊 C. आंत रस के कार्य (Succus Entericus):
आँत की ब्रूनर ग्रंथियों और गोब्लेट कोशिकाओं का स्राव मिलकर आंत रस (सक्कस एंटेरिकस) बनता है। इसमें अंतिम पाचक एंजाइम (डाइपेप्टिडेज, माल्टेज, लैक्टेज, न्यूक्लियोसाइडेज) होते हैं, जो भोजन के घटकों को उनके सबसे सरल रूप में बदल देते हैं:
📦 4. पचे हुए भोजन का अवशोषण (Absorption)
- परिभाषा: पाचन के अंतिम उत्पादों का आंत की म्यूकोसा झिल्ली से होकर रक्त या लसीका (Lymph) में प्रवेश करने की प्रक्रिया अवशोषण कहलाती है। अवशोषण का मुख्य कार्य छोटी आँत (विशेषकर Ileum) में होता है।
- क्रियाविधि:
- निष्क्रिय अवशोषण (विसरण): ग्लूकोज और अमीनो अम्ल की कुछ मात्रा साधारण विसरण या वाहक प्रोटीन की मदद से (सुसाध्य विसरण) अवशोषित होती है।
- सक्रिय अवशोषण: ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और सोडियम आयनों (
) का बड़ा भाग प्रवणता के विरुद्ध ATP (ऊर्जा) खर्च करके सक्रिय रूप से सोखा जाता है।
🚨 वसा (फैटी एसिड और ग्लिसरॉल) का विशिष्ट अवशोषण — NEET का पसंदीदा प्रश्न:
- फैटी एसिड और ग्लिसरॉल जल में अघुलनशील (Insoluble) होते हैं, इसलिए वे सीधे रक्त में अवशोषित नहीं हो सकते।
- सबसे पहले इन्हें पित्त लवणों की मदद से छोटी पानी में घुलनशील बूंदों में बदला जाता है, जिन्हें मिसेल (Micelles) कहते हैं। ये आंत की कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं। [1, 2]
- काइलोमाइक्रॉन (Chylomicrons): आंत की कोशिकाओं के भीतर इन वसा अणुओं के चारों ओर प्रोटीन की एक बहुत पतली परत चढ़ा दी जाती है, इस प्रोटीन-युक्त वसा संरचना को काइलोमाइक्रॉन कहते हैं।
- ये काइलोमाइक्रॉन रक्त वाहिकाओं में न जाकर विलाई के केंद्र में स्थित बड़ी लसीका वाहिनी यानी लैक्टीयल (Lacteal) में प्रवेश करते हैं। लैक्टीयल से ये अंततः रक्त परिसंचरण में छोड़ दिए जाते हैं।
- स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित पदार्थों का ऊतकों तक पहुँचना और कोशिकाओं द्वारा अपनी विभिन्न जैविक क्रियाओं व ऊर्जा के लिए उनका उपयोग करना स्वांगीकरण कहलाता है।
🤢 5. पाचन तंत्र के विकार (Disorders of Digestive System)
- पीलिया (जॉन्डिस / Jaundice): इसमें यकृत (Liver) प्रभावित होता है। रक्त में पित्त वर्णकों (बिलिरुबिन) के जमा होने के कारण त्वचा और आँखों का रंग पीला पड़ जाता है। [3]
- वमन (उल्टी / Vomiting): आमाशय के पदार्थों का मुख से बाहर निकलना। यह एक प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action) है जो मस्तिष्क के मेडुला (Medulla - वमन केंद्र) द्वारा नियंत्रित होती है। उलटी आने से ठीक पहले बेचैनी (Nausea) महसूस होती है। [4, 5]
- प्रवाहिका (डायरिया / Diarrhoea): मल त्याग की बार-बार आवृत्ति और मल का अत्यधिक तरल हो जाना। इससे भोजन का अवशोषण बहुत घट जाता है। [6]
- कब्ज (Constipation): मलाशय में मल का रुक जाना क्योंकि आंत की गतियां अनियमित हो जाती हैं। [7]
- अपच (Indigestion): भोजन का पूरी तरह न पचना, जिससे पेट भरा-भरा महसूस होता है। इसका कारण एंजाइमों की कमी, एंग्जायटी (चिंता), मसालेदार भोजन या फूड प्वाइजनिंग है। [8, 9]
💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards)
- 🚨 Dental Formula Code: बच्चों का दंत सूत्र
होता है (बच्चों में अग्रचवर्णक/Premolars पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं)। वयस्कों का दंत सूत्र होता है। - Glisson's Capsule Identity: ग्लिसन्स कैप्सूल केवल और केवल स्तनधारियों (Mammals) के यकृत (Liver) की विशेषता है।
- Bile Juice Naked Truth: पित्त रस (Bile) पूरे पाचन तंत्र का एकमात्र ऐसा पाचक रस है जिसमें कोई भी एंजाइम नहीं होता, परंतु इसके बिना वसा का पाचन (इमल्सीकरण) असंभव है।
- Oxyntic Cells Twin Function: आमाशय की ऑक्सिनटिक कोशिकाएं दो काम करती हैं—
का स्राव और विटामिन के लिए आवश्यक आंतरिक कारक (Intrinsic factor) का निर्माण। - Fat Transport Name: आंत से वसा का परिवहन प्रोटीन कोटेड कंकड़ के रूप में होता है जिसे काइलोमाइक्रॉन कहते हैं, और यह लैक्टीयल वाहिनी द्वारा सोखा जाता है। [10]
📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)
पाचन एवं अवशोषण अध्याय हमें मानव शरीर के उस कुशल ईंधन कारखाने से परिचित कराता है जो हमारे खाए गए भोजन को कोशिकीय ऊर्जा में बदलता है। जबड़ों के खांचों में धंसे विषमदंती (Heterodont) दांतों के यांत्रिक चबाने और लार एमाइलेज के रासायनिक जादू से पाचन की शुरुआत मुख गुहा में ही हो जाती है। आमाशय की ऑक्सिनटिक कोशिकाओं से निकलने वाला
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