Skip to content

Class 11 Biology Chapter 17 Notes Hindi NCERT

अध्याय 17: श्वसन और गैसों का विनिमय (Breathing and Exchange of Gases)

यह अध्याय मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। सामान्यतः हम 'सांस लेने' (Breathing) को ही श्वसन समझ लेते हैं, परंतु इस अध्याय में हम इसके पीछे के वास्तविक विज्ञान को समझेंगे—कैसे वायुमंडल की ऑक्सीजन () फेफड़ों से होते हुए रक्त के माध्यम से कोशिकाओं तक पहुँचाती है और वहाँ ग्लूकोज के दहन से बनी हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड () को शरीर से बाहर निकाला जाता है। NEET, CUET and all State Boards (BSEB, CBSE) के परीक्षाओं के लिए यह अध्याय अत्यधिक वैचारिक (Conceptual) है।


👃 1. मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)

मानव में वायु के संचरण के लिए एक सुव्यवस्थित श्वसन मार्ग पाया जाता है, जिसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

  • श्वसन मार्ग का क्रम: बाह्य नासाद्वार (External Nostrils) नासा कक्ष (Nasal Passage) ग्रसनी (Pharynx - भोजन और वायु का उभयनिष्ठ मार्ग) कंठ (Larynx) श्वासप्रणाल / श्वास नली (Trachea) प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक श्वसनिका (Bronchi) कूपिका वाहिनी वायु कूपिकाएँ (Alveoli)
  • कंठ (Larynx) — ध्वनि पेटी (Sound Box): यह एक उपास्थिमय (Cartilaginous) संरचना है जो ध्वनि उत्पन्न करने में मदद करती है, इसलिए इसे वॉइस बॉक्स या साउंड बॉक्स भी कहते हैं। निगलते समय इसे 'इपिग्लोटिस' ढक लेता है।
  • श्वास नली (Trachea) की सुरक्षा: श्वास नली और प्रारंभिक श्वसनिकाओं को आपस में पिचकने से बचाने के लिए उन पर C-आकार के अपूर्ण उपास्थिमय छल्ले (Incomplete Cartilaginous Rings) पाए जाते हैं।
  • वायु कूपिकाएँ (Alveoli) — श्वसन की इकाई: श्वास नली के अंतिम सिरे अत्यंत पतली, अनियमित भित्ति वाली और वाहिकामय थैली जैसी संरचनाओं में खुलते हैं, जिन्हें कूपिकाएँ कहते हैं। गैसों का वास्तविक विनिमय (Exchange) केवल इन्हीं कूपिकाओं की सतह पर होता है

🫁 फेफड़े (Lungs) की स्थिति और सुरक्षा:

मानव में एक जोड़ी फेफड़े पाए जाते हैं, जो उदर गुहा के ऊपर वक्ष गुहा (Thoracic Cavity) में स्थित होते हैं। यह एक वायु-रुद्ध कक्ष (Air-tight chamber) है।

  • फुफ्फुसावरण (Pleural Membrane): प्रत्येक फेफड़ा दोहरी झिल्ली वाले आवरण से ढका होता है जिसे प्लूरल झिल्ली कहते हैं। इसके बीच फुफ्फुसावरणी द्रव (Pleural Fluid) भरा होता है, जो फेफड़ों की सतह पर घर्षण (Friction) को कम करता है।
  • वक्ष गुहा की सीमाएँ: पीठ की तरफ कशेरुक दंड (Vertebral column), आगे की तरफ उरोस्थि (Sternum), पाशर्व (Sides) में पселियाँ (Ribs) और नीचे की तरफ गुंबद के आकार का डायफ्राम (Diaphragm) इस कक्ष को घेरते हैं। वक्ष गुहा के आयतन में होने वाला कोई भी परिवर्तन फेफड़ों के आयतन को सीधे बदल देता है।

😤 2. श्वासन की क्रियाविधि (Mechanism of Breathing)

सांस लेने की प्रक्रिया वायुमंडल और कूपिकाओं के बीच दाब प्रवणता (Pressure Gradient) के बनने पर निर्भर करती है। हवा हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है। इसमें दो मुख्य चरण शामिल हैं:

① अन्तःश्वसन (Inspiration / Inhalation) — सक्रिय प्रक्रिया

जब वायुमंडल की साफ हवा फेफड़ों के भीतर प्रवेश करती है। यह तब होता है जब फेफड़ों के भीतर का दाब (Intra-pulmonary pressure) वायुमंडलीय दाब से कम (ऋणात्मक) हो जाता है।

  • क्रियाविधि:
    1. गुंबद के आकार का डायफ्राम सुकड़कर (Contract होकर) चपटा (Flat) हो जाता है, जिससे वक्ष गुहा का आयतन अग्र-पश्च अक्ष (Antero-posterior axis) में बढ़ जाता है।
    2. बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ (External Intercostal Muscles) सुकड़ती हैं जिससे पसलियाँ और उरोस्थि (Sternum) ऊपर और बाहर की ओर उठ जाती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन पृष्ठ-अधर अक्ष (Dorso-ventral axis) में बढ़ जाता है।
    3. कुल आयतन बढ़ने से फेफड़ों के भीतर का दाब घट जाता है और बाहर की हवा तेजी से भीतर भागती है।

② उच्छ्वसन (Expiration / Exhalation) — निष्क्रिय प्रक्रिया

जब फेफड़ों की दूषित युक्त हवा बाहर निकाली जाती है। यह तब होता है जब फेफड़ों के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक (धनात्मक) हो जाता है।

  • क्रियाविधि: डायफ्राम और अंतरापर्शुक पेशियाँ शिथिल (Relax) होकर अपनी मूल स्थिति में लौट आती हैं। वक्ष गुहा का आयतन घट जाता, जिससे फेफड़ों के भीतर दाब बढ़ता है और हवा बाहर धकेल दी जाती है।
  • 🚨 नोट: एक स्वस्थ मानव प्रति मिनट 12 से 16 बार सांस लेता है। श्वासन गतियों में वायु के आयतन को मापने के लिए स्पाइरोमीटर (Spirometer) यंत्र का उपयोग किया जाता है।

📊 3. श्वसन संबंधी आयतन और क्षमताएँ (Respiratory Volumes & Capacities) — ⭐ 5-Star टॉपिक

NEET और बोर्ड परीक्षाओं में इन परिभाषाओं और उनके आंकिक मानों (Values) से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, इन्हें अच्छे से समझें:

A. श्वसन आयतन (Respiratory Volumes)

  1. ज्वारीय आयतन (Tidal Volume - TV): सामान्य श्वसन के समय प्रति श्वास वायु के अंतःश्वसित या उच्छ्वसित करने का आयतन। इसका मान लगभग होता है। (अर्थात् एक स्वस्थ मनुष्य प्रति मिनट लगभग से वायु अंतःश्वसित करता है)।
  2. अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन (Inspiratory Reserve Volume - IRV): वायु का वह अतिरिक्त आयतन जो एक व्यक्ति बलपूर्वक (Forced) अंतःश्वसित कर सकता है। इसका मान से होता है।
  3. उच्छ्वसन सुरक्षित आयतन (Expiratory Reserve Volume - ERV): वायु का वह अतिरिक्त आयतन जो एक व्यक्ति बलपूर्वक बाहर निकाल सकता है। इसका मान से होता है।
  4. अवशिष्ट आयतन (Residual Volume - RV) — 🚨 Very Important: बलपूर्वक उच्छ्वसन (तेजी से पूरी हवा बाहर निकालने) के बाद भी फेफड़ों के भीतर बची रहने वाली वायु का आयतन। इसका मान से होता है। इसे स्पाइरोमीटर द्वारा कभी नहीं मापा जा सकता क्योंकि यह हवा फेफड़ों से कभी बाहर नहीं आती।

B. श्वसन क्षमताएँ (Respiratory Capacities)

दो या दो से अधिक आयतनों को जोड़कर क्षमताएँ निकाली जाती हैं:

  • अंतःश्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity - IC): सामान्य उच्छ्वसन के बाद एक व्यक्ति कुल कितनी हवा सांस में ले सकता है। ().
  • उच्छ्वसन क्षमता (Expiratory Capacity - EC): सामान्य अंतःश्वसन के बाद कुल कितनी हवा बाहर निकाली जा सकती है। ().
  • क्रियात्मक अवशिष्ट क्षमता (Functional Residual Capacity - FRC): सामान्य उच्छ्वसन के बाद फेफड़ों में बची हवा। ().
  • जैव क्षमता (Vital Capacity - VC): बलपूर्वक उच्छ्वसन के बाद एक व्यक्ति अधिकतम कितनी हवा सांस में भर सकता है। ().
  • फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity - TLC): बलपूर्वक अंतःश्वसन के बाद फेफड़ों में भरी जा सकने वाली कुल हवा। इसमें अवशिष्ट आयतन (RV) भी शामिल होता है।

🔄 4. Gas Exchange (गैसों का विनिमय)

कूपिकाओं की सतह पर गैसों का विनिमय साधारण विसरण (Simple Diffusion) द्वारा होता है, जो मुख्य रूप से आंशिक दाब (Partial Pressure - ) की प्रवणता पर निर्भर करता है। किसी गैसों के मिश्रण में एक विशेष गैस द्वारा लगाए गए व्यक्तिगत दाब को उसका आंशिक दाब कहते हैं।

📊 आंशिक दाब की तालिका (NCERT Data - में) — Direction of Flow:

  • वायुमंडल: ,
  • वायु कूपिका (Alveoli): ,
  • विऑक्सीजनित रक्त (Deoxygenated Blood): ,
  • ऑक्सीजनित रक्त (Oxygenated Blood): ,
  • ऊतक (Tissues): ,

💡 प्रवाह की दिशा: चूंकि कूपिका में (104) अधिक है और विऑक्सीजनित रक्त में कम (40), इसलिए ऑक्सीजन कूपिका से रक्त में विसरित हो जाती है। इसके विपरीत, ऊतकों और विऑक्सीजनित रक्त में अधिक (45) होने के कारण वह रक्त से कूपिका (40) में चली जाती है।

  • 🚨 विसरण क्षमता: की घुलनशीलता ऑक्सीजन की तुलना में 20 से 25 गुना अधिक होती है। इसलिए प्रति इकाई आंशिक दाब के अंतर पर कूपिका झिल्ली से विसरित होने वाली की मात्रा ऑक्सीजन की तुलना में बहुत अधिक होती है।

🔬 विसरण झिल्ली की संरचना (Diffusion Membrane):

entertainmentEntity(lookup=EntityTvMovie(entity_name="Alveolar Gas Exchange Diffusion Membrane", release_year="2026", entity_type="movie")) { @Slot("header") titleTypescale(typescale=TYPESCALE_LG) { boldText { textFragment(content="Structure of Respiratory Diffusion Membrane") } } entityMediaCarousel(entityName="Structure of Respiratory Diffusion Membrane", entityType="TV/MOVIE") }

गैसों को पार करने के लिए बनी विसरण झिल्ली मुख्य रूप से तीन परतों की बनी होती है, परंतु इसकी कुल मोटाई से भी बहुत कम होती है ताकि विसरण सुगमता से हो सके:

  1. कूपिका की पतली शल्की उपकला (Squamous Epithelium)
  2. कूपिका के चारों ओर स्थित रक्त केशिकायों की अंतःस्तत्वचा (Endothelium)
  3. इन दोनों के बीच की पतली आधार झिल्ली (Basement substance)

🩸 5. गैसों का परिवहन (Transport of Gases)

रक्त माध्यम द्वारा गैसों को फेफड़ों से ऊतकों तक पहुँचाया जाता है।

🔴 A. ऑक्सीजन () का परिवहन:

  • परिवहन: लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में उपस्थित हीमोग्लोबिन () प्रोटीन द्वारा होता है। हीमोग्लोबिन का एक अणु अधिकतम चार ऑक्सीजन अणुओं को बांध सकता है। यह उत्क्रमणीय रूप से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन () बनाता है।
  • परिवहन: प्लाज्मा में घुली हुई (Dissolved) अवस्था में होता है।

📈 ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन वियोजन वक्र (Oxygen-Hemoglobin Dissociation Curve) — ⭐

जब हीमोग्लोबिन की प्रतिशत संतृप्ति को के सापेक्ष आरेखित किया जाता है, तो एक विशिष्ट S-आकार या सिग्मॉइड वक्र (Sigmoid Curve) प्राप्त होता है।

  • कूपिका (Alveoli) में ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनने के अनुकूल कारक: उच्च , निम्न , कम आयन सांद्रता (उच्च ), और कम तापमान। यहाँ हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से कसकर बंध जाता है।
  • ऊतकों (Tissues) में वक्र का दाईं ओर विस्थापन (वियोजन/टूटना) के कारक: निम्न , उच्च , अधिक आयन सांद्रता (अम्लीय माध्यम / कम ), और उच्च तापमान। इन परिस्थितियों के कारण ऑक्सीहीमोग्लोबिन टूट जाता है और ऑक्सीजन ऊतकों को मुक्त कर दी जाती है (बोहर प्रभाव / Bohr Effect)।
  • 🚨 जादुई डिलीवरी डेटा: सामान्य परिस्थितियों में प्रति ऑक्सीजनित रक्त ऊतकों को लगभग ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है।

💨 B. कार्बन डाइऑक्साइड () का परिवहन:

का परिवहन तीन रूपों में होता है:

  1. बायोकार्बोनेट आयन () के रूप में — अधिकतम परिवहन: RBC के भीतर एक अत्यंत तीव्र गति वाला एंजाइम कार्बोनिक एनहाइड्रेज (Carbonic Anhydrase) पाया जाता है (प्लाज्मा में यह बहुत कम होता है)। यह और जल को मिलाकर बाईकार्बोनेट आयन बनाता है जो प्लाज्मा में आ जाते हैं।
  1. कार्बअमीनो-हीमोग्लोबिन के रूप में — परिवहन: यह हीमोग्लोबिन के अमीन समूह से सीधे जुड़कर यात्रा करती है।
  2. प्लाज्मा में घुली अवस्था में — केवल परिवहन।
  • 🚨 जादुई डिलीवरी डेटा: कूपिका (फेफड़ों) तक पहुँचने पर यह अभिक्रिया उल्टी चलती है और मुक्त हो जाती है। प्रति विआक्सीजनित रक्त कूपिका में लगभग मुक्त करता है।

🧠 6. श्वसन का नियमन (Regulation of Respiration)

मानव शरीर में बदलती परिस्थितियों के अनुसार श्वसन की दर को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता होती है, जो मुख्य रूप से हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) द्वारा नियंत्रित होती है: [8]

  • श्वसन लय केंद्र (Respiratory Rhythm Centre) — मुख्य केंद्र: यह हमारे मस्तिष्क के मेडुला (Medulla) भाग में स्थित होता है, जो सामान्य श्वसन दर को बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। [9, 10]
  • श्वासप्रभावी केंद्र (न्यूमोटैक्सिक केंद्र / Pneumotaxic Centre): यह मस्तिष्क के पोन्स (Pons) भाग में स्थित होता है। यह श्वसन लय केंद्र के कार्यों को संशोधित (नियंत्रित) करता है। यह अंतःश्वसन की अवधि को घटा सकता है, जिससे श्वसन की दर तेज हो जाती है। [11, 12, 13, 14, 15]
  • रसायन संवेदी केंद्र (Chemosensitive Area): यह लय केंद्र के पास स्थित होता है, जो रक्त में और आयनों की सांद्रता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। जैसे ही रक्त में बढ़ती है, यह केंद्र सक्रिय होकर लय केंद्र को सिगनल भेजता है ताकि तेजी से सांस लेकर अतिरिक्त को बाहर निकाला जा सके। [16, 17, 18, 19]
  • 🚨 चौंकाने वाला तथ्य (NEET Base): श्वसन की दर के नियमन में ऑक्सीजन () की भूमिका सर्वथा महत्वहीन (नगण्य) होती है। हमारा दिमाग कभी ऑक्सीजन घटने से सांस तेज नहीं करता, बल्कि रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड () बढ़ने के कारण सिगनल भेजता है। [20]

🫁 7. श्वसन तंत्र के विकार (Disorders)

  • दमा / अस्थमा (Asthma): यह श्वसनिका (Bronchi व Bronchioles) में होने वाले शोथ (Inflammation) के कारण होने वाला एक एलर्जी विकार है। इसमें सांस लेते समय घरघराहट (Wheezing) की आवाज आती है और सांस लेने में गंभीर कठिनाई होती है। [21, 22, 23]
  • वातस्फीति (एम्फायसीमा / Emphysema) — ⭐ Very Important: यह एक दीर्घकालिक (Chronic) रोग है जिसमें वायु कूपिकाओं की दीवारें क्षतिग्रस्त (नष्ट) हो जाती हैं, जिसके कारण गैसों के विनिमय के लिए उपलब्ध सतह का क्षेत्रफल बहुत घट जाता है।
    • 🚨 मुख्य कारण: इसका सबसे मुख्य और बड़ा कारण धूम्रपान (सिगरेट पीना / Cigarette Smoking) है। [24, 25, 26]
  • व्यवसायिक श्वसन रोग (Occupational Respiratory Disorders): यह उन उद्योगों (जैसे पत्थर तोड़ने, पीसने या कोयले की खदानों) में काम करने वाले मजदूरों को होता है जहाँ भारी मात्रा में धूल उड़ती है। शरीर का रक्षा तंत्र इस धूल को पूरी तरह साफ नहीं कर पाता, जिससे फेफड़ों के ऊपरी ऊतकों में रेशा Content मयता (फाइब्रोसिस / Fibrosis) हो जाती है और फेफड़े हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो जाते हैं (जैसे—सिलिकोसिस, एस्बेस्टोसिस)। इससे बचने के लिए सुरक्षात्मक मुखौटे (Masks) पहनना अनिवार्य है। [27, 28, 29, 30]

💡 Exam Points & Tips-Tricks (NEET / CUET / State Boards)

  • 🚨 Residual Volume Spirometer Fact: अवशिष्ट आयतन (RV - 1200 mL) को स्पाइरोमीटर द्वारा कभी नहीं मापा जा सकता, इसलिए जिस भी क्षमता के सूत्र में RV आता है (जैसे FRC, TLC), उसे भी स्पाइरोमीटर सीधे नहीं नाप सकता। यह परीक्षाओं का एक बहुत प्रसिद्ध वैचारिक प्रश्न है। *** Solubility Code**: कार्बन डाइऑक्साइड की पानी (रक्त प्लाज्मा) में घुलनशीलता ऑक्सीजन से 20-25 गुना अधिक होती है।
  • Oxygen Delivery Volume: 100 mL ऑक्सीजनित रक्त ऊतकों को 5 mL देता है, और 100 mL विऑक्सीजनित रक्त कूपिका को 4 mL सौंपता है। इन दोनों संख्याओं (5 और 4) को सीधे रट लें।
  • Respiratory Control Center Location: लय केंद्र (Rhythm center) = मेडुला, न्यूमोटैक्सिक केंद्र = पोन्स (Pons)
  • Emphysema Master Cause: वातस्फीति का मुख्य कारण सिगरेट पीना है और इसमें कूपिका की सतह का क्षेत्रफल घट जाता है

📝 अध्याय का सारांश (Conclusion)

श्वसन और गैसों का विनिमय अध्याय हमें हमारे शरीर के भीतर चलने वाले अदृश्य और निरंतर गैस विनिमय के जादुई भौतिकी और रसायन विज्ञान से परिचित कराता है। C-आकार के उपास्थिमय छल्लों से सुरक्षित श्वास नली से होते हुए वायुमंडल की हवा जब से भी पतली विसनर झिल्ली वाली वायु कूपिकाओं (Alveoli) तक पहुँचती है, तो दाब प्रवणता के सुंदर गणित से गैसों का विनिमय शुरू होता है। स्पाइरोमीटर द्वारा मापे जाने वाले ज्वारीय आयतन (TV) और बलपूर्वक बाहर निकालने के बाद भी फेफड़ों में बची रहने वाली 'अवशिष्ट आयतन' (RV) फेफड़ों के सुरक्षित संतुलन को दर्शाती है। डायफ्राम का सुकड़कर चपटा होना और अंतरापर्शुक पेशियों का उठना वक्ष गुहा के आयतन को बढ़ाकर अंतःश्वसन की सक्रिय राह खोलता है।

रक्त परिसंचरण के भीतर हीमोग्लोबिन के लाल जहाजों पर सवार होकर 97% ऑक्सीजन 'ऑक्सीहीमोग्लोबिन' का सिग्मॉइड (S-आकार) वक्र बनाते हुए ऊतकों तक यात्रा करती है, जहाँ उच्च और अम्लीय पी-एच (बोहर प्रभाव) के कारण वह मुक्त कर दी जाती है। वहीं, का 70% हिस्सा 'कार्बोनिक एनहाइड्रेज' एंजाइम की तीव्र गति की बदौलत बाईकार्बोनेट आयनों के रूप में सुरक्षित तैरते हुए वापस फेफड़ों तक पहुँचता है। मेडुला का 'लय केंद्र' और पोन्स का 'न्यूमोटैक्सिक केंद्र' मिलकर इस पूरी सांसों की गति को नियंत्रित करते हैं, जहाँ ऑक्सीजन नहीं बल्कि रक्त की संवेदी अलार्म बजाती है। अंत में, कासी के धुएँ से होने वाली 'वातस्फीति' (Emphysema) की सतह-नाशक तबाही और खदानों की धूल से होने वाली फाइब्रोसिस हमें यह अमूल्य सीख देती है कि इन कोमल वायु कूपिकाओं की शुद्धता ही हमारे जीवन की ऊर्जा और स्वास्थ्य की अंतिम ढाल है। [33]

Join the Discussion

Show Comments

No comments

No comments yet.

Post a Comment

Popular Post

AvN Learn English

AvN Learn English

No blogs found in this list.

Share